कृषि क़ानून संसद में वापस, विपक्ष क्यों उठा रहा सवाल

नरेंद्र सिंह तोमर

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कृषि क़ानूनों की वापसी के बिल पर संसद की मुहर लग गई है. लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में ये बिल ध्वनिमत से पारित हुआ.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बिल को लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया था.

बिल पारित होने के बाद भी विपक्ष में नाराज़गी बनी हुई है. विपक्ष बिल वापसी पर चर्चा की मांग कर रहा था लेकिन संसद में कोई चर्चा नहीं हुई.

सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के मिनट भर में ही कृषि क़ानूनों की वापसी का बिल पास कर दिया गया. इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.

विपक्ष क्या बोला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जहां कृषि क़ानूनों की वापसी को किसानों की जीत बताया वहीं, क़ानून वापसी पर चर्चा ना कराने को लेकर आपत्ति भी जताई.

उन्होंने कहा, ''दुख की बात है कि बिना चर्चा के कृषि बिल वापस हो गया. सरकार ने क़ानून वापसी पर चर्चा नहीं होने दी. सरकार संसद में चर्चा कराने से डरती है. हम सदन में एमएसपी पर चर्चा चाहते थे.''

राहुल गांधी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में माफ़ी मांगी है तो इसका मतलब है कि उन्होंने माना है कि आंदोलन में हुई मौतों के लिए वो ज़िम्मेदार हैं. गलती मानी है तो उन्हें मुआवज़ा देना चाहिए.

चर्चा ना होने को लेकर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सदन में हमें बोलने नहीं दिया गया. हमने मांग की थी कि हमें बिल पर चर्चा करनी है. आज अजीब सी एक चीज़ देखी. सदन की गरिमा की धज़्जियां उड़ाते हुए बिल लाया गया और बिना चर्चा के पारित करा दिया.

मल्लिकार्जुन खड़गे

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इमेज कैप्शन, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे

इससे पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा था कि मोदी सरकार संसद में बिना बहस के कृषि बिल वापस लेना चाहती है. 16 महीने पहले कृषि बिलों को बेहद अलोकतांत्रिक तरीक़े से पास किया गया था और इसे वापस भी उसी तरीक़े से लेने की कोशिश हो रही है.

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने संसद में कृषि क़ानूनों की वापसी का बिल वापस लेने के तरीक़े पर सवाल उठाया है.

सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा है, ''तीनों कृषि विरोधी काले क़ानूनों को ना पारित करते चर्चा हुई, न ख़त्म करते हुए चर्चा हुई. क्योंकि चर्चा होती तो हिसाब देना पड़ता, जबाब देना पड़ता. खेती को मुट्ठी भर धन्नासेठों की ड्योढ़ी पर बेचने के षड्यंत्र का. 700 से अधिक किसानों की शहादत का. फसल का MSP न देने का.''

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राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि सरकार झूठ बोल रही है और बिल वापस लेने के ऊपर कभी कोई चर्चा ही नहीं हुई.

उन्होंने कहा कि वो कृषि क़ानूनों को वापस लिए जाने का स्वागत करते हैं और उन्होंने लखीमपुर खीरी और बिजली बिल समेत कई मुद्दों पर चर्चा के लिए मांग की थी क्योंकि किसान अभी भी प्रदर्शन स्थलों पर डटे हुए हैं.

वहीं, चर्चा ना होने को लेकर संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ''कृषि विधेयक पास होने के दौरान चर्चा हुई थी आज पूरा विपक्ष क़ानून वापस लेने की मांग कर रहा था लेकिन जब हम क़ानून वापस लेने के लिए गए तो विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया, मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि उनका मक़सद क्या है?''

"सरकार का इरादा साफ़ है हम कृषि क़ानून 2021 वापस लेने का विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास कराना चाहते हैं."

क्या बोले राकेश टिकैत

राकेश टिकैत

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वहीं किसानों ने लोकसभा से बिल पारित होने को 'शहीद किसानों' के लिए श्रद्धांजलि बताया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि जब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर क़ानून नहीं बनता है वो अपना प्रदर्शन समाप्त नहीं करेंगे.

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "यह प्रदर्शन के दौरान शहीद हुए सभी 750 किसानों को श्रद्धांजलि है. MSP समेत अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन जारी रहेगा."

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