हिंदू जहां कमज़ोर वहां भारत की अखंडता ख़तरे में: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत - प्रेस रिव्यू

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि अंग्रेज़ों ने भारत का इतिहास फिर से लिखा, लिहाज़ा हमें देश का असल इतिहास फिर से वापस लौटाने की ज़रूरत है. उन्होंने ये भी कहा कि मज़बूत समाज के लिए हमें हिंदुत्च को मज़बूत बनाने की ज़रूरत है.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इन बयानों को पहले पन्ने पर प्रकाशित किया है. वे शनिवार को ग्वालियर में एक कार्यक्रम में बोल रहे थे.

उस कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "हमें 'हिंदू ही भारत है और भारत हिंदू है', इस तथ्य को मज़बूत बनाने की ज़रूरत है, क्योंकि अंग्रेजों ने हमारे इतिहास को फिर से लिखकर हमारी मूल पहचान ही बदल दी. जिन घुमक्कड़ों को अंग्रेज़ों ने अपराधी कहा और आज़ादी के बाद हमने जिन्हें नोटिफ़ाई किया, वे संत और सिद्धपुरुषों के आदमी थे."

मोहन भागवत ने आगे कहा, ''वे लोग समाज को गौरव देने के अभियान का हिस्सा थे. हिंदुत्व को भारत से और भारत को हिंदुत्व से अलग नहीं किया जा सकता. इस सोच ने हमें ख़ास बनाया लेकिन अंग्रेज़ों ने यहां आकर भारत के इतिहास को फिर से लिखा. अंग्रेजों ने लिखा कि हमारे पूर्वज 15 पीढ़ी पहले नहीं थे. क्योंकि इतिहास में कोई हिंदू नहीं यानी भारत नहीं है. इससे अखंड भारत टूट गया."

आरएसएस प्रमुख के अनुसार, 1947 में हुए देश के विभाजन ने हिंदुओं को कमज़ोर कर दिया. उन्होंने कहा, "जब पाकिस्तान बना तो हमें नहीं बताया गया कि हम भारत और हिंदुस्तान बन जाते हैं. आपने उस देश का दूसरा नाम रखा क्योंकि उन्हें मालूम था कि भारत हिंदू है और हिंदू ही भारत है.''

मोहन भागवत के मुताबिक़, ''अखंड भारत वहां बंटा, जहां हिंदू कमज़ोर हैं. फिर भी यदि हम भारत में उन जगहों को देखें जहां के लोग परेशान हैं और जहां देश की अखंडता ख़तरे में है, तो पाएंगे उस जगह के हिंदू और हिंदुत्व के विचार कमज़ोर हैं. हमें अपनी आत्मा को ज़िंदा रखना है. इसलिए मोहम्मद इक़बाल ने कहा कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.''

नरेंद्र सिंह तोमर

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कृषि कानून वापसी विधेयक-2021 सोमवार को पेश करेंगे कृषि मंत्री

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सोमवार (कल) को लोकसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन एक नया विधेयक पेश करेगी. कृषि कानून वापसी विधेयक-2021 के नाम से पेश होने वाले इस विधेयक को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सदन के पटल पर रखेंगे.

हिंदी दैनिक दैनिक भास्कर ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर लिया है. अख़बार ने बताया है कि लोकसभा की वेबसाइट पर अपलोड की गई शीतकालीन सत्र की कार्यसूची में इस विधेयक का ज़िक्र है. पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे किसानों को घर वापस भेजने की कोशिशों में जुटी केंद्र सरकार का यह कदम काफी अहम है.

हालांकि अख़बार यह भी लिखता है कि प्रस्तावित विधेयक के लिए सांसदों को भेजे गए 'आपत्ति और कारण' नोट की भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है. इस नोट में कहा गया है कि इन तीन कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ 'किसानों का केवल एक छोटा सा समूह ही विरोध कर रहा है' और समावेशी विकास के लिए सभी को साथ लेकर चलना समय की मांग है.

सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध

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सऊदी अरब ने हटाया भारत सहित छह देशों पर लगे यात्रा प्रतिबंध

सऊदी अरब ने भारत सहित छह देशों के यात्रियों पर कोरोना के चलते लगे प्रतिबंध को एक दिसंबर से हटा लेने का फ़ैसला किया है.

बिज़नेस अख़बार मिंट में छपी ख़बर के अनुसार, भारत के अलावा पाकिस्तान, ब्राजील, वियतनाम, मिस्र और इंडोनेशिया के यात्री अब 1 दिसंबर से वहां सीधा प्रवेश पा सकते हैं.

इसका मतलब यह है कि अब उन्हें वहां घुसने के पहले 14 दिनों तक अपने-अपने देश के बाहर बिताने की ज़रूरत नहीं होगी. हालांकि अब भी उन्हें पांच दिनों के लिए क्वारंटीन रहना ही होगा. रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने इन देशों के वैक्सीन की सभी ख़ुराक पाए लोगों को देश में सीधे प्रवेश की अनुमति देने के निर्देश जारी किए हैं.

वीडियो कैप्शन, कृषि क़ानून पर केंद्र सरकार को ही मानना पड़ेगा, किसान नहीं मानेंगे: सत्यपाल मलिक

15 साल या उससे बड़ी 9 फ़ीसदी महिलाएं तंबाकू सेवन करती हैं

अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार, हाल में सार्वजनिक किए गए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफ़एचएस 2019-21) में पाया गया कि देश में 15 या 15 साल से बड़ी 9 फ़ीसदी लड़कियां या महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करती हैं.

ग्रामीण भारत में महिलाओं का ये आंकड़ा शहरों का लगभग दोगुना यानी 10.5 प्रतिशत है. शहर में 5.4 फ़ीसदी महिलाएं तंबाकू का इस्तेमाल करती हैं. हालांकि देश में शराब पीने वाली महिलाओं का आंकड़ा इस उम्र वर्ग में केवल 1.3 प्रतिशत रहा.

वहीं देश में तंबाकू इस्तेमाल करने वाले पुरुषों की संख्या 38 फ़ीसदी पाई गई. गांवों में ऐसे पुरुषों की तादाद 42.7 फ़ीसदी रही तो शहरों में 28.8 फ़ीसदी.

शराब पीने के मामले में इसी उम्र वर्ग के लगभग 19 प्रतिशत पुरुष हैं. देश के गांवों में शराब पीने वाले 19.9 प्रतिशत रहते हैं तो शहरों में 16.5 प्रतिशत.

वीडियो कैप्शन, किसान मोर्चा क्या राजनीति की राह पकड़ेगा?

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