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छत्तीसगढ़: कबीरधाम हिंसा के दौरान बीजेपी की रैली विवादों में, रमन सिंह के बेटे सहित 16 लोगों पर मामला दर्ज
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद फ़ैली हिंसा के दौरान, शहर में पूर्व भाजपा सांसद अभिषेक सिंह और भाजपा सांसद संतोष पांडेय के नेतृत्व में एक बड़ी रैली निकाली गई थी, जिसमें विवादित नारे लगाये गये थे.
शुक्रवार को इस रैली का वीडियो वायरल होने के बाद इस विवाद में भाजपा के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
इस बीच ज़िला प्रशासन ने अभिषेक सिंह के अलावा भाजपा सांसद संतोष पांडेय और पूर्व विधायक मोतीराम चंद्रवंशी समेत भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के 16 नेताओं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.
अभिषेक सिंह ने इस पर बीबीसी से कहा कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है.
स्थानीय पुलिस के मुताबिक़ तीन अक्टूबर से लेकर अब तक 5 अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 93 लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है. इन सबके ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 153(क), 188, 295, 332, 353, 109 और लोक संपत्ति की क्षति की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
हिंसा के बाद ज़िला मुख्यालय में कर्फ़्यू
अभिषेक सिंह, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे हैं और कबीरधाम उनका गृह ज़िला है. लेकिन पिछले चुनाव में गृह ज़िले में भारतीय जनता पार्टी को बुरी हार का सामना करना पड़ा था.
राज्य में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीत का रिकॉर्ड बना कर कांग्रेस पार्टी के मोहम्मद अक़बर इस इलाक़े से विधायक चुने गये थे. मोहम्मद अक़बर अभी राज्य के वन मंत्री हैं.
पुलिस के अनुसार मंगलवार को हिंसक भीड़ ने कई घरों पर हमला किया था और धर्मस्थलों को घेर कर नारेबाजी की थी. शहर में हुई हिंसा के बाद ज़िला मुख्यालय में कर्फ़्यू लागू कर दिया गया था और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं.
हिंसा के कई वीडियो सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पुलिस को शहर में हुई हिंसा के वीडियो को सार्वजनिक करने और उनमें नज़र आने वाले लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
उन्होंने कहा, "मैंने निर्देश दिया है कि सच्चाई को सामने लाया जाए और एडीजी विवेकानंद जी से मैंने कहा है कि उसके बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के पूरे प्रदेश की जनता को उससे अवगत कराएं."
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हालांकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण कबीरधाम की स्थिति ख़राब हुई है.
शुक्रवार को राज्यपाल से भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और कबीरधाम के मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया.
राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, "कबीरधाम शांति का टापू है. लेकिन रायपुर से संचालित होने वाले एफआईआर की बदौलत वह विस्फोटक स्थिति में पहुंच गया है."
इस बीच कबीरधाम में शनिवार को भी कर्फ़्यू में पांच घंटे की छूट दी गई है. प्रशासन का कहना है कि इस दौरान आम लोग अपने ज़रुरी कामकाज निपटा सकेंगे.
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किस बात पर हुआ था विवाद
रविवार को कबीरधाम के ज़िला मुख्यालय के लोहारा नाका चौक पर बिजली के खंबे पर एक झंडा लगाने और फिर उसे उतारने को लेकर दो पक्षों में जम कर मारपीट हुई. झंडा लगाने वाले युवक के साथ भी मारपीट की गई. इसके बाद से विवाद बढ़ता चला गया.
मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने कबीरधाम को बंद रखने की घोषणा की थी. हालांकि प्रशासन ने धारा 144 लागू किया था लेकिन भारी संख्या में पहुँची भीड़ ने एक बड़ी रैली निकाली.
भीड़ की माँग थी कि इस विवाद में जिन लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ़्तार किया जाए.
पुलिस का दावा है कि कबीरधाम ज़िले में सुनियोजित तरीक़े से भीड़ को भड़काने की कोशिश की गई थी. बंद की रैली के लिए कई पड़ोसी ज़िलों से लोग मंगलवार को शहर पहुँचे थे और उन्होंने जगह-जगह तोड़फोड़ और आगज़नी की.
पुलिस का दावा है कि हिंसक और बेक़ाबू भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया, इसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. इसके बाद शहर में कर्फ़्यू लागू करना पड़ा था.
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अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की मांग
बीते रविवार को हुए विवाद के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेता सक्रिय हो गये थे और झंडा विवाद को लेकर एफ़आईआर करने की मांग को लेकर उन्होंने पुलिस प्रशासन पर दबाव भी बनाया.
एफ़आईआर दर्ज हो जाने के बाद भाजपा के स्थानीय सांसद संतोष पांडेय और अभिषेक सिंह ने मंगलवार को अभियुक्तों की गिरफ़्तारी की मांग को लेकर एक बड़ी रैली निकाली, जिसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों से आए भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे.
मंगलवार को बेहद तनाव भरे वातावरण में यह रैली हुई और पुलिस की उपस्थिति में रैली में शामिल एक बड़े समूह ने जम कर तोड़-फोड़ मचाई. इस रैली के दौरान विवादित नारे लगाए गए थे और इसका वीडियो गुरुवार को सामने आने के बाद वायरल हुआ है.
हालांकि इस पूरे मामले पर अभिषेक सिंह ने कहा है कि पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है और कांग्रेस पार्टी की सरकार आने के बाद से ही पुलिस प्रशासन को पंगु बना कर रखा गया है.
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रमन सिंह की प्रतिक्रिया
अभिषेक सिंह ने कहा, "एफ़आईआर में हम सबका नाम जोड़ा गया है. लेकिन जब मीडिया ने वहां के पुलिस अधिकारी से सवाल किया कि आप क्या कहना चाहते हैं कि इन सभी प्रमुख व्यक्तियों पर क्या एफ़आईआर हुई है तो वहां के पुलिस के अधिकारी को शायद यह जानकारी ही नहीं थी कि सी धाराएं लगी हैं. क्या यह हास्यास्पद स्थिति नहीं है?"
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह भी भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं.
रमन सिंह ने कहा, "राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़, सांसद, पूर्व सांसद, विधायकों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज़ किए जा रहे हैं. मुझे लगता है कि इस प्रकार की परिस्थिति पैदा की जा रही है और जानबूझ कर एक समूह को प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है. गांव-गांव में यदि स्थिति विस्फोटक होगी, आज तो हम शांति से इसका हल ढूंढना चाहते है मगर जिस प्रकार से प्रशासन का उपयोग राजनीतिक दृष्टि से किया जा रहा है, ये स्थिति को और ख़राब करना चाहते हैं."
कबीरधाम में हुए ताज़ा विवाद में सक्रिय भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय शर्मा ने चेतावनी दी है कि इस हिंसा में शामिल होने वालों की रिहाई नहीं हुई तो वे इलाके के विधायक और मंत्री मोहम्मद अक़बर को कबीरधाम में घुसने नहीं देंगे.
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पनामा पेपर्स में चर्चित हुए थे अभिषेक
40 साल के अभिषेक सिंह इससे पहले पनामा पेपर्स सार्वजनिक होने के दौरान भी चर्चा में रहे हैं. साल 2014 में अभिषेक सिंह ने भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर राजनंदगांव लोकसभा से चुनाव लड़ा था और सांसद बने थे.
इस दौरान 9 मई 2016 को आईसीआईजे द्वारा जारी पनामा के दस्तावेज़ों में अभिषेक सिंह का नाम सामने आया था. इस दस्तावेज़ में अभिषेक सिंह का पता रमन मेडिकल स्टोर, कवर्धा का निवासी बताया गया था, जो अभिषेक सिंह का असली पता है.
इसे लेकर राहुल गांधी और भूपेश बघेल अभिषेक सिंह को घेरते रहे हैं. हालांकि अभिषेक सिंह विदेशी अकाउंट से संबंधित आरोपों को झूठा और राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं.
सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि जब पनामा पेपर्स में नाम होने की वजह से पाकिस्तान में नवाज शरीफ़ की कुर्सी जा सकती है तो फिर अभिषेक सिंह की जांच क्यों नहीं होगी?
इसके बाद भूपेश बघेल ने कभी पनामा पेपर्स में अभिषेक सिंह की भूमिका को लेकर जांच की कोई कार्रवाई शुरू नहीं की. हालांकि चिटफंड कंपनियों के घोटाले के कुछ मामलों में अभिषेक सिंह के ख़िलाफ़ ज़रूर मामले दर्ज किए गए हैं.
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