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छत्तीसगढ़: कबीरधाम में हिंसा के बाद कर्फ़्यू, किस बात पर हुआ विवाद
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले में दो समूहों के बीच विवाद के बाद शुरू हुई हिंसक घटनाओं को देखते हुए कर्फ़्यू लगा दिया गया है. इसके अलावा ज़िले में इंटरनेट की सेवा भी बंद कर दी गई है. ज़िले की सीमाओं को सील कर दिया गया है.
ज़िले के पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने बीबीसी से कहा, "अभी तो कर्फ़्यू लगा हुआ है. पुलिस लगातार गश्त कर रही है. शहर के भीतर एक हज़ार से अधिक जवानों को तैनात किया गया है. हालांकि अभी स्थिति नियंत्रण में है लेकिन हम इस पर नज़र बनाए हुए हैं."
मोहित गर्ग ने बताया कि हिंसक गतिविधियों में लिप्त 66 लोगों को अभी तक गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी ने भी कबीरधाम पहुँच कर स्थिति का जायज़ा लिया और पुलिस को आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं.
कवर्धा के नाम से चर्चित कबीरधाम ज़िला, सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए जाना जाता रहा है. इसी इलाक़े से कबीरपंथ के चार आचार्य भी हुए हैं. कबीरधाम, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का गृह ज़िला है. इसके अलावा राज्य के वन मंत्री और प्रवक्ता मोहम्मद अकबर इसी इलाक़े से विधायक हैं.
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है, "ढाई-ढाई साल के खेल में सरकार इतनी मशग़ूल है कि न उनसे क़ानून व्यवस्था संभल रही है और न ही विकास संभल रहा है. कवर्धा जैसी शांत जगह में अब ये इतनी बड़ी घटना हो जाती है कि लाठी चार्ज करना पड़ जाता है. सरकार को ध्यान देना चाहिए."
भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिश के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को कबीरधाम भेजने की घोषणा की है.
दूसरी ओर राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि व्यवस्था को बनाए रखने के दृष्टिकोण से पुलिस बेहतर काम कर रही है. उन्होंने कबीरधाम की घटना पर कहा कि आज़ादी के बाद से आज तक छत्तीसगढ़ में सांप्रदायिक उन्माद की कोई घटना नहीं हुई है. गृहमंत्री ने कहा कि कबीरधाम की घटना को किसी सांप्रदायिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है.
ताम्रध्वज साहु ने कहा, "हम ऐसा कोई काम नहीं करते, जिससे धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिकता बढ़े. हम लोग कोशिश करते हैं कि उसे किस तरीक़े से रोका जाए."
ताज़ा विवाद
पुलिस का कहना है कि रविवार को लोहारा नाका चौक पर बिजली के खंबे पर एक झंडा लगाने और फिर उसे उतारने को लेकर दो पक्षों में जम कर मारपीट हुई. झंडा लगाने वाले युवक के साथ भी मारपीट की गई.
इसके बाद से विवाद बढ़ता चला गया.
मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी और विश्व हिंदू परिषद ने कबीरधाम को बंद रखने की घोषणा की थी. हालांकि प्रशासन ने धारा 144 लागू किया था लेकिन भारी संख्या में पहुँची भीड़ ने एक बड़ी रैली निकाली.
भीड़ की माँग थी कि इस विवाद में जिन लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ़्तार किया जाए.
पुलिस का दावा है कि कबीरधाम ज़िले में सुनियोजित तरीक़े से भीड़ को भड़काने की कोशिश की गई. बंद की रैली के लिए कई पड़ोसी ज़िलों से लोग मंगलवार को शहर पहुँचे थे और उन्होंने जगह-जगह तोड़फोड़ की और आगज़नी की.
पुलिस का दावा है कि हिंसक और बेक़ाबू भीड़ ने पुलिस पर भी हमला किया, इसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा.
इधर मंगलवार की देर शाम, ज़िला प्रशासन ने उसी जगह पर फिर से झंडा लगा दिया, जिस जगह से विवाद शुरू हुआ था.
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