अयोध्या में भाजपा के कई सांसद और फ़िल्म अभिनेता करेंगे 'अयोध्या की रामलीला'- प्रेस रिव्यू

रामलीला

अयोध्या में इस बार दशहरा के मौके पर 'अयोध्या की रामलीला' का मंचन किया जाएगा. इसमें भाजपा के कई सांसद और फिल्मी दुनिया के सितारे रामायण के विभिन्न किरदारों को निभाएंगे.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार, अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर से मुश्किल से दो किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्मण क़िला में इसका मंचन होगा. अयोध्या की रामलीला का मंचन 6 से 15 अक्टूबर के बीच किया जाएगा. इसका सीधा प्रसारण कई चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होगा. अयोध्या में पिछले साल पहली बार इसका मंचन हुआ था.

ख़बर में बताया गया है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी इस रामलीला में कई भूमिकाओं को निभाएंगे.

वहीं पार्टी के गोरखपुर के सांसद और हिंदी और भोजपुरी फ़िल्मों के अभिनेता रवि किशन परशुराम की भूमिका में होंगे. मशहूर अभिनेता असरानी इसमें नारद बनेंगे, जबकि शक्ति कपूर अहिरावण की भूमिका में दिखेंगे.

दारा सिंह के बेटे विंदु दारा सिंह पहले निभाए गए हनुमान के चरित्र को निभाएंगे, जबकि रज़ा मुराद कुंभकर्ण की भूमिका में होंगे.

हालांकि अभी तक राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता की पहचान गुप्त रखी गई है. स्वयंवर दृश्य को छोड़कर सीता की भूमिका में श्वेता गुप्ता होंगी. स्वयंवर में सीता की भूमिका 'मैंने प्यार किया' से मशहूर हुईं अभिनेत्री भाग्यश्री निभाएंगी.

अख़बार ने ​रामलीला के क्रिएटिव डायरेक्टर और मेरी मां फाउंडेशन के संस्थापक सुभाष मलिक के हवाले से बताया है कि कोरोना के ख़तरों को देखते हुए इस बार भी कार्यक्रम में कोई दर्शक मौजूद नहीं होगा. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले साल इस रामलीला को 16 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा था.

तालिबान, महिला

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तालिबान ने हेरात में को-एजुकेशन पर लगाया प्रतिबंध

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने वहां के हेरात प्रांत में शिक्षण संस्थानों में छात्र और छात्राओं के एक साथ पढ़ाई करने यानी 'को-एजुकेशन' पर प्रतिबंध लगा दिया है.

हेरात प्रांत के तालिबानी अधिकारियों ने को-एजुकेशन को 'समाज में सभी बुराइयों की जड़' बताया है, लिहाज़ा सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में इस पर रोक लगा दी गई है.

खामा प्रेस न्यूज एजेंसी के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, निजी संस्थानों के मालिकों और तालिबान अधिकारियों के बीच तीन घंटों तक चली बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है.

इस बारे में तालिबान के प्रतिनिधि और अफ़ग़ानिस्तान में उच्च शिक्षा के प्रमुख मुल्ला फरीद ने कहा कि कोई विकल्प नहीं है, लिहाज़ा को-एजुकेशन समाप्त होनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ​बढ़िया चरित्र वाली महिला प्रोफेसर केवल छात्राओं को पढ़ा सकती हैं, छात्रों को नहीं.

पिछले हफ़्ते अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े के बाद इसे तालिबान का पहला फ़तवा बताया जा रहा है. यह मंगलवार को तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए उस आश्वासन का विरोधी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तालिबान महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करेगा.

मनोज सिन्हा

पाकिस्तान के बंदूक के जवाब में डंडे का सहारा लेना ग़लत नहीं: मनोज सिन्हा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि यदि पाकिस्तान राज्य को बंद करने के लिए आतंक का सहारा लेता है तो इसके मुक़ाबले के लिए डंडे का सहारा लेने में कोई बुराई नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मनोज सिन्हा ने यह भी दावा किया है कि विशेष दर्जा ख़त्म करने की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर कोई बल प्रयोग नहीं करना पड़ा. उन्होंने कहा है कि वे जब तक राज्य के उपराज्यपाल रहेंगे, तब तक इस बात पर कोई समझौता नहीं होगा.

मनोज सिन्हा ने बताया, "लोगों ने मुझसे कहा कि राज्य में 5 अगस्त को बंदी होगी. लेकिन भगवान की कृपा से, ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद, एक पत्रकार ने मुझसे कहा कि बंदी न हो यह तय करने के लिए हमने लाठी का सहारा लिया. इस पर मैंने कहा कि उस दिन ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य थी और लोग बड़ी संख्या में शॉपिंग कर रहे थे. ये सब डंडे के सहारे नहीं हो सकता है. लेकिन यदि आप मानते हैं, तो इसे स्वीकार करता हूं. बंद भी तो पाकिस्तान और आतंकवाद की बंदूक से होता था. यदि मैंने डंडे का प्रयोग किया तो कुछ बुरा नहीं.''

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने दो साल पहले 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 270 में संशोधन करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म कर दिया था.

दलित उत्पीड़न

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इमेज कैप्शन, दलित उत्पीड़न की घटनाओं का विरोध करते कार्यकर्ता (फ़ाइल फ़ोटो)

कर्नाटक में दलित उत्पीड़न के दो परेशान करने वाले मामले

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के पास देवनहल्ली में एक दलित किशोर और उसके माता-पिता को मंदिर से प्रसाद मांगने पर पीटे जाने की ख़बर सामने आई है.

वहीं कर्नाटक के ही उडुप्पी से मिली एक अन्य ख़बर के अनुसार, चार औरतों सहित पांच लोगों ने एक दलित मज़दूर को न केवल पीटा बल्कि उस पर घातक रसायन भी उड़ेल दिया.

टेलीग्राफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर में बताया गया है कि ये घटनाएं क्रमश: 14 और 17 अगस्त को घटी हैं. हालांकि यह 20 अगस्त को ही प्रकाश में आ पाईं.

रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक दोनों मामलों में से आरोपित कुल आठ लोगों में से केवल एक को ही गिरफ़्तार किया गया है.

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