तालिबान: भारत ने कहा- कंधार में वाणिज्य दूतावास खुला है बस भारतीय स्टाफ़ को वापस बुलाया गया

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अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष के बीच, भारतीय प्रशासन अपने स्टाफ़ को वहाँ से वापस बुला रहा है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने रविवार को इस पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. अख़बार लिखता है कि जैसे-जैसे तालिबान के क़ब्ज़े को लेकर दावे बड़े हो रहे हैं, भारत की अफ़ग़ानिस्तान में अपने लोगों को लेकर चिंता भी बढ़ रही है. इसी के मद्देनज़र भारतीय प्रशासन ने कंधार में अपने वाणिज्य दूतावास को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है.

हालांकि विदेश मंत्रालय की ओर से दूतावास को बंद करने की बात का खंडन किया गया है.

कंधार में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, "भारत, अफ़ग़ानिस्तान में पैदा हुई सुरक्षा स्थिति पर क़रीब से नज़र बनाए हुए है. हमारे कर्मियों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है. कंधार में भारत के वाणिज्य दूतावास को बंद नहीं किया गया है. हालांकि, कंधार शहर के पास छिड़ी लड़ाई के कारण भारत के कर्मियों को कुछ समय के लिए वापस बुला लिया गया है."

प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ज़ोर देते हुए कहा "कंधार में स्थिति सामान्य होने तक यह पूरी तरह से एक अस्थायी व्यवस्था है."

वाणिज्य दूतावास हमारे स्थानीय स्टाफ़ की मदद से काम जारी रखेगा.

अख़बार ने भारत सरकार में अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अफ़ग़ानिस्तान से क़रीब 50 राजनयिकों और सुरक्षाकर्मियों को दिल्ली वापस लाने के लिए भारतीय वायु सेना एक विशेष विमान भेज रही है.

अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर ये क़दम उठाया गया है, क्योंकि सभी को यह चिंता है कि तालिबान लगातार दक्षिणी शहर कंधार की ओर बढ़ रहा है जो 1990 के दशक में उनका मुख्यालय भी था, ऐसे में अगर तालिबान इस प्रमुख शहर तक पहुँचता है तो अफ़ग़ान सेना के साथ उनकी लड़ाई और उग्र हो सकती है.

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अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा है कि "हमारा उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद भारतीय कर्मियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है और हमें लगता है कि शहरों में अगर लड़ाई हुई तो उससे उनकी जान को ख़तरा होगा."

मौजूदा समय में, भारत के काबुल स्थित दूतावास और बल्ख़ प्रांत में मज़ारे शरीफ़ स्थित वाणिज्य दूतावास ही चालू हैं.

अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को दिल्ली लौटे कुछ भारतीय कर्मियों को स्थिति में सुधार होने पर वापस अफ़ग़ानिस्तान भेजा जायेगा, जबकि ज़रूरत महसूस होने पर इनमें से कुछ लोग अपने काम को चालू रखने के लिए काबुल की यात्रा कर सकते हैं.

इससे पहले अप्रैल 2020 में, भारत सरकार ने भारत के दो अन्य वाणिज्य दूतावासों (जलालाबाद और हेरात) के संचालन को निलंबित करने का निर्णय लिया था और अपने कर्मचारियों को वापस बुला लिया था. तब विदेश मंत्रालय ने कहा था कि कोरोना महामारी की वजह से इन लोगों को वापस बुलाया गया है, लेकिन माना जाता है कि सुरक्षा कारणों से ही ये लोग वापस नहीं लौट पाये.

अधिकारियों का कहना है कि वे कंधार को लेकर विशेष रूप से चिंतित थे, क्योंकि वहाँ से बाहर निकलकर, हवाई अड्डे तक पहुँचने के मार्ग बहुत सीमित हैं और तालिबान इसके आसपास के ज़िलों पर क़ब्ज़ा कर चुका है. पिछले रविवार यह ख़बर आयी थी कि तालिबान लड़ाकों ने पंजवाई ज़िले पर कब्ज़ा कर लिया है, जो कंधार शहर से एक घंटे से भी कम दूरी पर स्थित है.

भारत सरकार का अनुमान है कि कंधार में संकट को देखते हुए, आने वाले दिनों में कुछ अन्य देश भी अपने वाणिज्य दूतावास बंद कर सकते हैं.

एएफ़पी

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हिज़बुल चीफ़ के बेटों को सरकारी नौकरी से हटाया गया

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने चरमपंथी संगठनों के साथ कथित तौर पर काम करने को लेकर अपने 11 कर्मचारियों को बर्खास्त किया है.

द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें चरमपंथी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन के मुखिया सैय्यद सलाउद्दीन के दो बेटे भी शामिल हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, इन सभी लोगों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-311 के तहत बर्खास्त किया गया है. इस अनुच्छेद के तहत कोई जाँच नहीं होती है. बर्खास्त किये गए कर्मचारियों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, दो पुलिसकर्मियों के अलावा शिक्षा विभाग के चार, कृषि, कौशल विकास, बिजली, स्वास्थ्य विभाग और शेरे कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज़ में काम करने वाले एक-एक कर्मचारी को बर्खास्त किया गया है.

बर्खास्त किये गए कर्माचारियों में चार अनंतनाग, तीन बडगाम और एक-एक बारामूला, श्रीनगर, पुलवामा और कुपवाड़ा के हैं.

दैनिक भास्कर अख़बार ने इस मामले पर अपनी एक ख़बर में यह लिखा है कि हिज़बुल मुजाहिदीन के मुखिया सैय्यद सलाउद्दीन के दो बेटे, सैय्यद शकील यूसुफ़ और शाहिद यूसुफ़ पर टेरर फंडिंग का आरोप था. दोनों को पूर्व में एनआईए द्वारा गिरफ़्तार भी किया गया था. एनआईए के आरोपों के अनुसार, दोनों हवाला और दूसरे नेटवर्कों के ज़रिये हिज़बुल मुजाहिदीन के लिए फंड जुटाया करते थे.

अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, शकील यूसुफ़ स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के पद पर थे और शाहिद यूसुफ़ कृषि विभाग में काम करते थे.

DILIP KUMAR SHARMA

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'हिन्दू झूठ बोलकर शादी करे तो वो भी जिहाद'

हिन्दुस्तान अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा कि हिन्दू लड़के का, हिन्दू लड़की से झूठ बोलकर शादी करना भी जिहाद है और हम इसके ख़िलाफ़ भी क़ानून लायेंगे.

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसी भी महिला को किसी के द्वारा धोखा दिया जाना बर्दाश्त नहीं करेगी, चाहे फिर वो हिन्दू हो या मुसलमान.

इससे पहले उनसे पूछा गया था कि लव जिहाद के मुद्दे पर उनका क्या कहना है? इसके जवाब में उन्होंने पहले तो कहा कि उन्हें इस शब्द से आपत्ति है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे इसे धोखे से जोड़कर देखते हैं.

उन्होंने कहा कि हमारी बहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अपराधियों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई की जायेगी.

जीका

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केरल में ज़ीका वायरस के 15 केस, कर्नाटक-तमिलनाडु में बढ़ी सख्ती

हिन्दी अख़बार अमर उजाला की रिपोर्ट है कि केरल में ज़ीका वायरस के 15 से अधिक मामलों की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु और कर्नाटक ने अपने यहाँ सख़्ती बढ़ा दी है.

केरल से लगती हुई सीमाओं पर कड़ी जाँच के साथ ही ई-पास अनिवार्य कर दिया गया है.

तमिलनाडु के सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि वालयार और मीनाक्षीपुरम में 14 रणनीतिक बिंदुओं और जाँच चौकियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और वाहनों की जाँच तेज़ कर दी गई है.

केरल से तमिलनाडु जाने वाले लोगों के लिए ई-पास अनिवार्य कर दिया गया है. कर्नाटक भी केरल से आने वाले पर्यटकों की जाँच करवा रहा है.

केरल में अब तक ज़ीका वायरस के 15 मामलों की पुष्टि हुई है. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कहा है कि उनकी सरकार ज़िला और राज्य स्तर पर वायरस को नियंत्रित करने वाली इकाइयों को मज़बूत करेगी.

केरल सरकार ने ज़ीका वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए कार्य योजना तैयार की है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि स्थिति पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है.

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