छत्तीसगढ़: भूपेश बघेल सरकार और निलंबित एडीजी जीपी सिंह में बढ़ा टकराव

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में सोमवार को निलंबित किए गए छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गुरजिंदर पाल सिंह ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए, पूरे मामले की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जाँच की माँग की है.
यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है, जब एक दिन पहले ही गुरजिंदर पाल सिंह के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया है.
गुरजिंदर पाल सिंह के वकील किशोर भादुड़ी ने बीबीसी से कहा, "राज्य सरकार एक साज़िश के तहत काम कर रही है और गुरजिंदर पाल सिंह को फँसाया गया है. ऐसे में राज्य सरकार की किसी भी जाँच पर भरोसा नहीं किया जा सकता."
इस मामले में राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट में एक कैविएट दायर करते हुए अदालत से अनुरोध किया है कि गुरजिंदर पाल सिंह के मामले में कोई भी फ़ैसला सुनाने से पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाए.
हाई कोर्ट में दायर इस याचिका में किसी स्वतंत्र एजेंसी से जाँच शुरू होने तक, इस मामले में राज्य पुलिस की किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाने की माँग भी की गई है.
इधर, राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर कहा है कि गुरजिंदर पाल सिंह के ख़िलाफ़ जो सबूत मिले हैं, उसके आधार पर ही कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा, "एसीबी ने जो कार्रवाई की है, वो उनकी जानकारी के अनुसार ही उन्होंने किया है और उसके बाद उनके पास जो दस्तावेज़ पाए गए और जिन कार्यों में संलिप्त रहे, उसके अनुसार ही उन पर धाराएं लगी हैं."

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गंभीर आरोप
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह निलंबित होने से पहले राज्य पुलिस अकादमी के निदेशक के पद पर कार्यरत थे. इस पद पर आने से पहले वे राज्य में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध ब्यूरो के प्रमुख भी थे.
पिछले गुरुवार को इसी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध ब्यूरो ने उनके रायपुर स्थित घर समेत, पंद्रह से भी अधिक अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की थी.
तीन दिन तक चली छापेमारी के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दावा किया कि इस छापेमारी में दर्जनों प्लॉट, गाड़ियां, बीमा के काग़ज़ात, उद्योगों में निवेश, नक़दी और सोना बरामद किया गया है.
इसके बाद गुरुवार को पुलिस ने, गुरजिंदर पाल सिंह के घर के पीछे से बरामद डायरी और फटे हुए कुछ पन्नों को आधार बना कर उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज़ किया.
राजद्रोह की धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि गुरजिंदर पाल सिंह द्वारा नेताओं के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखी गई हैं और कथित रूप से साज़िश की योजनाओं के बारे में लिखा गया है.
आरोप है कि डायरी और दूसरे काग़ज़ों में राज्य के विभिन्न विधायकों और विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवारों के संबंध में गोपनीय विश्लेषण, शासकीय योजनाओं, नीतियों और सामाजिक, धार्मिक मुद्दों पर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं.

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विवादों से नाता
छत्तीसगढ़ में नवंबर 2018 कांग्रेस पार्टी की सरकार आने के कुछ ही महीनों के भीतर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें फ़रवरी 2019 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध ब्यूरो का मुखिया बनाया था.
लेकिन पिछले साल जून में उन्हें इस पद से हटा दिया गया था.
बस्तर में एसपी रहते हुए गुरजिंदर पाल सिंह ने अपने ही आईजी एम डबल्यू अंसारी के घर पर छापा मार कर उनके पीएसओ के पास से एक लूट के ढाई लाख रुपये कथित रुप से बरामद किये थे. इसके बाद आईजी का तबादला कर दिया गया था.
बस्तर के ही 79 कथित माओवादियों को गुरजिंदर पाल सिंह ने रायपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के सामने आत्मसमर्पण करवाया था.

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लेकिन आत्मसमर्पण के कुछ ही घंटों के भीतर यह बात सार्वजनिक हो गई थी कि जिन्हें आत्मसमर्पण कराया गया, उनका माओवादियों से कोई लेना-देना नहीं था. इस मामले में सरकार की काफ़ी बदनामी हुई थी.
साल 2012 में जब गुरजिंदर पाल सिंह बिलासपुर के आईजी के पद पर थे, उसी दौरान वहां के एसपी राहुल शर्मा की संदिग्ध स्थितियों में पुलिस ऑफ़िसर्स मेस में गोली लगने से मौत हो गई थी.
अपने नोट्स में राहुल शर्मा ने गुरजिंदर पाल सिंह के ख़राब व्यवहार का उल्लेख किया था.
लेकिन इन विवादों के बाद भी गुरजिंदर पाल सिंह सरकार के क़रीबी बने रहे और उन्हें दुर्ग और रायपुर का आईजी बनाया गया.
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