आगराः श्री पारस अस्पताल 'मॉक ड्रिल' के आरोप के बाद सील, पिछले साल भी हुआ था सील

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- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के आगरा में मौजूद श्री पारस अस्पताल को सील कर दिया गया है और अस्पताल के संचालक डॉक्टर अरिंजय जैन के ख़िलाफ़ महामारी एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है.
हाल में इसी हॉस्पिटल का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें अस्पताल के संचालक ऑक्सीजन की कमी के दौरान मरीज़ों को डिस्चार्ज करने के लिए मॉक ड्रिल की बात कर रहे हैं. इस वीडियो में मॉक ड्रिल के बाद 22 मरीज़ों को हटाने की भी बात की जा रही है.
आरोप लगाए जा रहे हैं कि पाँच मिनट तक ऑक्सीजन सप्लाई रुकने के बाद इन्हीं 22 मरीज़ों की मौत हो गई थी.
हालांकि अस्पताल संचालक के अलावा ज़िला प्रशासन भी 22 मरीज़ों की मौत को सिरे से नकार रहा है.
बताया जा रहा है कि ये वीडियो अप्रैल महीने के आख़िरी सप्ताह का है और हाल में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है.

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आगरा के ज़िलाधिकारी प्रभुनाथ सिंह के मुताबिक़, "वीडियो में ये कह रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी थी जबकि ऐसा नहीं था. इससे एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई. इसलिए महामारी अधिनियम के तहत मुक़दमा दर्ज करने की तहरीर दी गई है."
"अस्पताल को सील कर दिया गया है और पूरे मामले की जाँच की जा रही है. मरीज़ों के परिजनों की या अन्य किसी को भी यदि कोई शिकायत हो तो वो शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इस मामले में एडीएम सिटी और दो एसीएमओ की कमिटी बनी है. यदि किसी को कुछ कहना है तो वो एडीएम सिटी को लिखित में शिकायत दे सकते हैं."
आगरा के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर आरके अग्निहोत्री की ओर से दर्ज कराए गए मुक़दमे में धारा 144 के उल्लंघन, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं.
डीएम ने कहा कि अस्पताल में हुई सभी मौतों का अलग से सीएमओ की टीम से ऑडिट कराया जा रहा है और मौत के कारणों की भी जाँच की जाएगी.
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अस्पताल के संचालक ने दी सफ़ाई
थाना न्यू आगरा में दर्ज कराए गए इस मामले में कहा गया है, "सात जून को सोशल मीडिया के माध्यम से तथाकथित वीडियो वायरल हुआ जिसमें डॉक्टर अरिंजय जैन, संचालक, श्री पारस अस्पताल ऑक्सीजन की ओर से मोदीनगर, ग़ाज़ियाबाद स्थित प्लांट पर भी ऑक्सीजन न होने और तथाकथित मॉक ड्रिल की बात कही गई है. जबकि ज़िला प्रशासन, औषधि निरीक्षक की टीम, स्थानीय और शासन स्तर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई गई थी."
एफ़आईआर के मुताबिक़, डॉक्टर अरिंजय जैन के तथाकथित बयान से लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है, जबकि आगरा में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता थी. डॉक्टर अरिंजय जैन का यह काम लोगों में शांति बनाए रखने के प्रावधानों के विपरीत है.
श्री पारस हॉस्पिटल में भर्ती सभी 55 मरीज़ों को मुख्य चिकित्साधिकारी की मौजूदगी में मरीज़ों के परिजनों की सहमति से शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती करा दिया गया है.
इस बीच, प्रशासन ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करते हुए पूरे मामले की जाँच शुरू कर दी है.
वहीं, अस्पताल के संचालक डॉक्टर अरिंजय जैन ने मीडिया से बातचीत में सफ़ाई देते हुए कहा है कि 22 लोगों के मरने की बात पूरी तरह ग़लत है.
उनका कहना था, "कोरोना काल में जब महामारी पीक पर थी, तब हमारे यहां तैयारियों को लेकर मॉक ड्रिल हुई थी. हमने यह जाँचने के लिए क्लीनिकल असेसमेंट किया था कि हम किसी मरीज़ को ऑक्सीजन के न्यूनतम स्तर पर कैसे रख सकते हैं. उस समय आगरा ही नहीं, पूरे यूपी में ऑक्सीजन की क़िल्लत थी, दवाइयां भी नहीं मिल रही थीं. हम लोगों ने बहुत मेहनत कर चीज़ों को नियंत्रण में रखा और मरीज़ों की जान बचाई."
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अस्पताल के ख़िलाफ़ कार्रवाई से पहले मंगलवार को मरीज़ों के परिजनों और अस्पताल के कर्मचारियों के बीच मार-पीट के बाद विवाद तेज़ हो गया. अस्पताल के बाहर तमाम मरीज़ों के परिजन पहुँच गए थे और नारेबाज़ी कर रहे थे. मरीज़ों के परिजनों ने ज़िला प्रशासन पर भी अस्पताल को बचाने का आरोप लगाया.
स्थानीय पत्रकार यशपाल सिंह के मुताबिक़, "जब एडीएम सिटी और एसीएमओ की टीमें श्री पारस हॉस्पिटल पहुँची तो तमाम लोग भी वहां पहुँच गए जिनमें वे लोग भी शामिल थे, जिनके परिजनों की मौत अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई थी."
"अस्पताल के स्टाफ़ वाले कह रहे थे कि 26-27 अप्रैल को अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं थी और न ही हमें ऑक्सीजन बंद करने का ऑर्डर मिला. इस पर बाहर प्रदर्शन कर रहे लोग भड़क गए. अस्पताल के कर्मचारियों और मरीज़ों के परिजनों के साथ हाथापाई भी हुई लेकिन बाद में पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया."
मरीज़ों के परिजनों की माँग है कि अस्पताल के संचालक और डॉक्टरों के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज किया जाए. कुछ परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्होंने अस्पताल के ख़िलाफ़ पहले भी शिकायत दी थी लेकिन एफ़आईआर तक दर्ज नहीं की गई.
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पहले भी सील हुआ था अस्पताल
श्री पारस अस्पताल कोविड संक्रमण की पहली लहर के दौरान भी सील हुआ था. लेकिन बाद में उसे न सिर्फ़ खोल दिया गया बल्कि दूसरी लहर के दौरान भी कोविड अस्पताल के रूप में स्वीकृति दे दी गई.
पिछले साल अप्रैल में अस्पताल के आईसीयू में कोरोना संक्रमित महिला भर्ती थी जिसकी वजह से विभिन्न ज़िलों से आए कई अन्य मरीज़, उनके तीमारदार और कर्मचारी भी संक्रमित हो गए.
इसी मामले में अस्पताल के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई थी और मुक़दमा दर्ज हुआ था.
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