मोदी की नई वैक्सीन नीति पर बोली कांग्रेस- देर आए, पर दुरुस्त नहीं आए

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस एलान के बाद कि वैक्सीन अब केंद्र सरकार ही ख़रीदेगी और राज्यों को देगी और 21 जून से पूरे देश में अब कहीं भी 18 से 44 साल के लोगों को मुफ़्त वैक्सीन मिल सकेगी, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे 'देर आए पर अब भी पूरा दुरुस्त नहीं आए' बता कर कई सवाल उठाए हैं.
कांग्रेस पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पीएम मोदी की नीतियों की आलोचना की और कहा कि ये मोदी सरकार का अधूरा एलान है. जब मुफ़्त वैक्सीन देने की बात की गई है तो निजी अस्पतालों में इसके लिए भुगतान क्यों करना पड़ेगा.
वहीं सवाल ये भी है कि सरकार ने ये कहा था कि केंद्र ही वैक्सीन ख़रीदेगी और राज्यों को देगी. फिर नीति में बदलाव किया गया और राज्यों को भी वैक्सीन ख़रीदने की इजाजत दी गई लेकिन एक बार फिर केंद्र ने इसे अपने ज़िम्मे ले लिया है.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "कांग्रेस लगातार मुफ़्त वैक्सीन की मांग करती रही है. फिर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया. हालांकि इस बात की ख़ुशी है कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ़्त वैक्सीन देने का आधा अधूरा एलान कर मोदी सरकार ने कांग्रेस की उस मांग को आंशिक तरीके से स्वीकार तो किया."
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि उन्होंने कई बार प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर सभी के लिए फ़्री वैक्सीन की मांग की थी.
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वहीं, आम आदमी के प्रवक्ता संजय सिंह ने ट्वीट किया कि जब कोर्ट ने 35 हज़ार करोड़ रुपये का हिसाब मांगा तो फ़्री वैक्सीन देने का वादा किया गया है.
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तो केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री के मुफ़्त वैक्सीन की घोषणा की तारीफ़ की है.
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वैक्सीन नीतियों में तीन बार बदलाव क्यों?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने जनवरी से लेकर अब तक वैक्सीन पर तीन बार बदली गई नीति पर भी सवाल उठाया.
उन्होंने कहा, "सबले पहले जनवरी में ये फ़ैसला लिया गया कि 45 साल की आयु से अधिक उम्र के लोगों को ही वैक्सीन दी जाएगी. फिर 1 मई 2021 से 18 से 45 साल के लोगों को वैक्सीन देने का ज़िम्मा राज्य सरकारों पर मढ़ दिया. सुप्रीम कोर्ट से लेकर अलग-अलग अदालतों ने मोदी सरकार की इस नीति की आलोचना की. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को शपथपत्र देना पड़ेगा. तो 21 जून 2021 से फिर नीति बदल दी गई. इसमें कहा गया है कि सरकारी अस्पतालों में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को मुफ़्त टीका देने का जिम्मा केंद्र सरकार निभाएगी. देर आए पर अब भी पूरा दुरुस्त नहीं आए."
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"निजी अस्पतालों में मुफ़्त क्यों नहीं"
उधर, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने ट्वीट कर पूछा कि निजी अस्पताल वैक्सीन के लिए पैसे क्यों लेंगे?
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अब तक वैक्सीन के उत्पादन का 50 फ़ीसद ही केंद्र सरकार ख़रीदती आई थी. ताज़ा घोषणा के बाद केंद्र सरकार 75 फ़ीसद उत्पादन को ख़रीदेगी. यानी 25 फ़ीसद अब भी निजी अस्पतालों के पास ही जाएगा.
इस दौरान सुरजेवाला ने कहा कि नौकरीपेशा व्यक्तियों, मध्यम वर्ग के लोगों को निजी अस्पतालों में ही जाना होगा.
इस दौरान उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या 31 दिसंबर 2021 तक सभी लोगों को वैक्सीन लगाने की घोषणा भी पूरी हो सकेगी?
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उधर, एक निजी समाचार चैनल पर एक अन्य कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक के चेहरे पर मुस्कान देख कर जब ऐंकर ने पूछा कि क्या यह पीएम मोदी की घोषणाओं की वजह से है तो उन्होंने कहा, "मोदी रीति सदा चली आई जो कह जाएं, वो कभी ना निभाएं. वादे या जुमले ये सबसे बड़ा सवाल है. अच्छे दिन से लेकर कोरोना के ऊपर जीत हासिल करने तक. दो करोड़ रोज़गार देने से 100 स्मार्ट सिटी बनाने तक. नमामि गंगे, गंगा की सफ़ाई से लेकर काशी को क्वेटो बनाने तक. अभी तक जितनी भी घोषणाएं हुई हैं किसी पर भी खरी नहीं उतर पाई मोदी सरकार."
उन्होंने सवाल उठाया कि, "जब केंद्र को सबसे कम कीमत पर वैक्सीन मिल रही है तो मोदी सरकार मुफ़्त सार्वजनिक टीकाकरण की घोषणा क्यों नहीं करती."
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