कोरोना वैक्सीन सभी वयस्कों को दिसंबर तक लगाने का सरकारी वादा, आँकड़े पैदा कर रहे हैं शंका - रिएलिटी चेक

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    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

केंद्र सरकार का दावा है कि इस साल के अंत तक देश के सभी 100 करोड़ लोगों को कोविड-19 की वैक्सीन मिल जाएगी.

सभी 100 करोड़ लोगों का पूरी तरह टीकाकरण करने के लिए 200 करोड़ वैक्सीन डोज़ की ज़रूरत होगी.

4 जून तक देश में 22 करोड़ वैक्सीन डोज़ का इस्तेमाल किया जा चुका है और देश की कुल आबादी के लगभग 4.2 प्रतिशत लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है.

16 जनवरी से जब देश में वैक्सीन लगने की शुरुआत हुई तो टीकाकरण की रफ्तार अप्रैल महीने में सबसे ज़्यादा रही. औसतन 40 लाख टीके हर दिन लगाये गए.

इसके बाद मई में 18 साल से अधिक उम्र वालों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया, लेकिन बढ़ने की जगह ये दर घटती गई और गिरकर 23 लाख डोज़ प्रतिदिन तक पहुँच गई.

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आँकड़ों की कसौटी पर सरकार के दावे

इन सबके बीच सरकार ये दावा कर रही है कि अगस्त से दिसंबर तक 108 करोड़ लोगों के लिए 216 करोड़ डोज़ उपलब्ध होगी. यानी इस हिसाब से भारत को हर महीने कम से कम 40 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन करना होगा.

13 मई को देश में कोविड-19 टास्क फोर्स का नेतृत्व करने वाले नीति आयोग के सदस्य वी.के पॉल ने स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक प्रजेंटेशन दिखाई और कहा कि अगस्त-दिसंबर के बीच भारत के सभी वयस्क लोगों को टीका लगाने के लिए पर्याप्त वैक्सीन उपलब्ध होगी.

उन्होंने बताया कि अगस्त-दिसंबर के बीच देश में कौन सी वैक्सीन के कितने डोज़ उपलब्ध होंगे. कोविशील्ड (सीरम इंस्टीट्यूट) - 75 करोड़ डोज़, कोवैक्सीन (भारत बायोटेक) - 55 करोड़ डोज़, बायो ई-सबयूनिट वैक्सीन - 30 करोड़ डोज़, ज़ाइडस कैडिला - 5 करोड़, सीरम इंस्टीट्यूट कोवैक्स - 20 करोड़, भारत बायोटेक नेज़ल वैक्सीन - 10 करोड़ डोज़, जेनोवा वैक्सीन - 6 करोड़ और स्पुतनिक-वी - 15 करोड़.

बीबीसी ने आँकड़ों के ज़रिए यही समझने की कोशिश की है कि अब तक यानी जनवरी से मई तक के बीच भारत में 22 करोड़ वैक्सीन डोज़ लोगों को दी गई है तो पाँच महीनों में क्या भारत में हर महीने 40 करोड़ वैक्सीन लगाई जा सकेगी?

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जिन आठ वैक्सीन का ज़िक्र स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से किया गया है उनमें से सिर्फ़ दो वैक्सीन कोवीशील्ड और कोवैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है.

रूस की स्पुनिक-V आने वाले सप्ताह में भारत में उपलब्ध होगी. लेकिन इन तीन वैक्सीन को छोड़कर बाकी जिन पाँच वैक्सीन का ज़िक्र वीके पॉल ने किया है वो अब तक इस्तेमाल के लिए अप्रूव नहीं हुई हैं.

बायो-ई सबयूनिट वैक्सीन की 30 करोड़ खुराक़ के लिए सरकार ने ऑर्डर दे दिया है लेकिन ये वैक्सीन अपने ट्रायल के आखिरी दौर में है. ज़ायडस कैडिला और नोवैक्स तीसरे ट्रायल के दौर में हैं.

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लेकिन इनमें से दो वैक्सीन भारत बायोटेक नेज़ल वैक्सीन और जेनोवा की एमआरएनए वैक्सीन अभी ट्रायल के शुरुआती दौर में हैं, ये दोनों ही पहले-दूसरे फेज़ के ट्रायल में हैं. ऐसे में ये दोनों वैक्सीन ट्रायल पूरा कर 10 करोड़ और 6 करोड़ डोज़ भी तैयार कर लेंगी ये थोड़ा मुश्किल लक्ष्य लगता है.

नोवैक्स अमेरिकी वैक्सीन है जिसका भारत में सीरम इंस्टीट्यूट उत्पादन करेगा. कंपनी ने सफल क्लीनिकल ट्रायल के बावजूद इसे अब तक अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की मंज़ूरी नहीं मिली है.

भारत में लगभग 94.5 करोड़ वयस्क हैं, इसके आधार पर भारत को 189 करोड़ डोज़ की ज़रूरत है. अगर वर्तमान गति से टीकाकरण जारी रहता है तो इतनी संख्या में सबको टीका लगने में ढाई से तीन साल तक का वक्त लग जाएगा.

लेकिन वीके पॉल का अगस्त से दिसंबर के आख़िर तक 216 करोड़ टीका उपलब्ध होने का टारगेट अति-महत्वाकांक्षी लगता है. कुल 216 करोड़ की डोज़ का जो टारगेट सरकार लेकर चल रही है उनमें से 146 करोड़ डोज़ कोविशील्ड, कोवैक्सीन और स्पुतनिक-वी, इन तीन वैक्सीनों की होगी.

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कोविशील्ड और कोवैक्सीन का कितना उत्पादन कर सकेंगी कंपनियाँ?

मई के आख़िर में सीरम इस्टीट्यूट ने केंद्र सरकार को एक चिट्टी लिखकर बताया है कि जून में कंपनी कोविशील्ड का प्रतिमाह उत्पादन एक करोड़ डोज़ तक करेगी. अभी कंपनी का उत्पादन 6.5 करोड़ प्रतिमाह है.

सीरम इंस्टीट्यूट-एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन का प्रोडक्शन भारत में कर रहा है और दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है. सरकार के आंकड़े कह रहे हैं कि दिसंबर तक कंपनी 75 करोड़ डोज़ देगी लेकिन वर्तमान समय में सीरम इंटीट्यूट वैक्सीन उत्पादन को लेकर तंगी झेल रहा है.

वीके पॉल के दावे के मुताबिक़ अगर सीरम इंटीट्यूट हर महीने 10 करोड़ वैक्सीन का उत्पादन अगस्त-दिसंबर के बीच करेगा तो भी ये संख्या 50 करोड़ होगी. अगर जून से ही 10 करोड़ वैक्सीन की डिलीवरी का आंकड़ा लेकर चलें तो भी ये संख्या 70 करोड़ ही होगी अनुमान से 5 करोड़ वैक्सीन डोज़ कम.

दो मई को कंपनी ने बताया था कि सरकार की ओर से सीरम इंस्टीट्यूट को 26 करोड़ वैक्सीन का ऑर्डर मिला था जिसमें से 15 करोड़ डिलीवर किया जा चुका है और बची हुई 11 करोड़ वैक्सीन आने वाले 'कुछ महीने' जाएगी.

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अब बात करते हैं भारत की पहली पूरी तरह से घरेलू वैक्सीन कोवैक्सीन की. मई के आखिर में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि कोवैक्सीन का उत्पादन जुलाई-अगस्त में बढ़ा कर 6-7 करोड़ कर दिया जाएगा. अब तक एक करोड़ कोवैक्सीन का उत्पादन हर दिन कर रही है.

इसके बाद कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने एक बयान जारी करके कहा कि ''वैक्सीन बनाने से लेकर टेस्टिंग तक की पूरी प्रक्रिया में चार महीने तक का वक्त लग जाता है. जो प्रोडक्शन बैच मार्च में शुरू हुआ था वो हम जून में डिलीवर कर पाएंगे. वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ाना एक चरणबद्ध प्रक्रिया है जिसमें कई एसओपी और गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस का इस्तेमाल होता है.''

कंपनी ने चार महीने के वक्त की बात करके ये संदेश साफ़ कर दिया कि उत्पादन बढ़ा देना उतना आसान नहीं है.

भारत बायोटेक कोवैक्सीन की उत्पादन क्षमता इस वक्त 70 करोड़ सालाना और 5.8 करोड़ प्रति माह है. ऐसे में इसे 6-7 गुना बढ़ाना एक बड़ी चुनौती कंपनी के लिए हो सकती है.

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स्पुतनिक-V: जिसका इंतज़ार है

भारत में जिस विदेशी वैक्सीन से बड़ी उम्मीद है वह है रूस की स्पुतनिक-V.

स्पुतनिक को भारत में इस्तेमाल की मंज़ूरी मिल चुकी है. भारत में अब तक स्पुतनिक के 2 लाख 10 हज़ार डोज़ रूस से तैयार भेजे भी जा चुके हैं. भारत में इस वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल और डिस्ट्रीब्यूशन की ज़िम्मेदारी डॉक्टर रेड्डीज़ लैब के पास है.

रूस डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड ने पाँच भारतीय कंपनियों के साथ इसके उत्पादन के लिए साझेदारी भी की है. जो हैं- स्टेलिस बायोफ़ार्मा, ग्लैंड फ़ार्मा, हेट्रो बायोफ़ार्मा, पैनेसिया बायोटेक और वीरचाओ बायोटेक. जिनका लक्ष्य है कि वह प्रतिमाह 5 करोड़ स्पुनिक-V का उत्पादन करें.

हालांकि भारत में स्पुतनिक का उत्पादन शुरू हुआ है या नहीं और अब तक कितनी डोज़ का उत्पादन हो पाएगा? दिसंबर तक 15 करोड़ वैक्सीन डोज़ बन पाएंगी? इसे लेकर कोई सटीक जानकारी नहीं है.

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इमेज कैप्शन, टीका लगवाने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करते लोग, तस्वीर दिल्ली के एक सेंटर की है

सरकार ने अब तक कितनी वैक्सीन का ऑर्डर दिया है?

देश में टीकाकरण योजना के दो चरणों में वैक्सीन खरीदने और लोगों के लिए उपबब्ध कराने की पूरी ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार के पास थी.

सरकार ही सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक के साथ कोविशील्ड और कोवैक्सीन की खरीद और लेन-देन की बात कर रही थी.

पहली मई से देश में 18 से 44 साल के लोगों के लिए टीकाकरण का तीसरा चरण शुरू हुआ और सरकार ने टीके के लिए नई नीतियाँ जारी कीं जिसमें कहा गया कि वैक्सीन कंपनियां कुल उत्पादन का 50 फ़ीसदी केंद्र सरकार को देंगी, जो स्वास्थकर्मियों और 45 साल या उससे अधिक आयु वालों को मिलती रहेंगी.

इसके बाद बचे हुए 50 फ़ीसदी को वैक्सीन कंपनियां राज्य सरकार और निजी अस्पताल को पहले से तय कीमत पर देंगी.

अप्रैल में बिजनेस स्टैंडर्ट की एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई जिसमें दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने मार्च 2021 के बाद वैक्सीन को कोई नए ऑर्डर दिए ही नहीं हैं. इसके बाद तीन मई को स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैक्सीन ऑर्डर से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की.

जिसके मुताबिक़ 28 अप्रैल, 2021 को केंद्र सरकार ने कोविशील्ड के 11 करोड़ डोज़ ऑर्डर किए और इसके लिए सीरम इंस्टीट्यूट को 1732.50 करोड़ का भुगतान किया गया. ये डोज़ मई, जून, जुलाई में उपलब्ध होंगे. इससे पहले सीरम को 10 करोड़ डोज़ क ऑर्डर दिया गय था.

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इमेज कैप्शन, एक ड्राइव-थ्रू वैक्सीनेशन कैंप के बाहर लाइन लगाए खड़े लोग

इसके साथ ही कोवैक्सीन की 5 करोड़ डोज़ के लिए 28 अप्रैल को ही ऑर्डर दिया गया है और वो भी मई, जून और जुलाई में उपलब्ध होगी. कंपनी को सरकार की ओर से 787 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.

लेकिन अगर जुलाई तक सरकार को इन वैक्सीन की डिलीवरी मिल जाती है तो इसके बाद अगस्त से क्या होगा इसकी कोई जानकारी नहीं है. क्या केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक को कोई नया ऑर्डर दिया है? अगस्त से ये कंपनियां कितनी वैक्सीन सरकार को देंगी इसे लेकर कोई जानकारी नहीं है.

एक अहम बात ये भी है कि अतीत में सीरम इंस्टीट्यूट को लायबिलिटी के तहत कुछ वैक्सीन ब्रिटेन भेजना अनिवार्य थी. ज़ाहिर है लायबिलिटी की शर्त आगे भी जारी होगी, ख़ासकर जब सीरम इंस्टीट्यूट अमेरिकी वैक्सीन नोवैक्स को भारत में बनाएगा तो उसे कुछ तय डोज़ अमेरिका भेजनी पड़ सकती हैं.

ऐसे में जितनी भी डोज़ का उत्पादन सीरम करेगा क्या वह सभी भारत में ही इस्तेमाल होंगी? ये भी एक बड़ा सवाल है.

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