कोरोना: राज्यों के पास कमी, तो प्राइवेट अस्पतालों में कैसे मिल रहीं वैक्सीन?

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    • Author, शुभम किशोर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में रहने वाले प्रशांत कुमार पिछले कई दिनों से अपने और अपने परिवार के लिए वैक्सीन का स्लॉट बुक करने की कोशिश कर रहे थे. सरकारी अस्पतालों और टीकाकरण केंद्रों में उन्हें स्लॉट नहीं मिला, तो उन्होंने प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लेने का फ़ैसला किया.

बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "ये हैरानी की बात है कि प्राइवेट अस्पतालों में उसी दिन के स्लॉट मिल जा रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अगले कई दिनों के स्लॉट भरे हुए हैं."

प्रशांत कहते हैं कि उन्हें पैसे देकर वैक्सीन लेने में भी कोई परेशानी नहीं है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल जायज़ पैसे नहीं ले रहे हैं.

वो कहते हैं, "हर अस्पताल का अपना रेट है. एक डोज़ के एक हज़ार रुपए तक लग रहे हैं. परिवार में दो लोग दो डोज़ लेंगे, तो चार हज़ार रुपए देने होंगे, जबकि वैक्सीन इतनी महंगी नहीं है."

बीबीसी ने कोविन ऐप पर नोएडा के अस्पतालों में स्लॉट खोजने की कोशिश की तो पाया कि प्रशांत का दावा सही है. हमने पाया कि सरकारी अस्पतालों में अगले कई दिनों के स्लॉट बुक हैं जबकि प्राइवेट अस्पतालों में आसानी से वैक्सीन मिल रही है, ख़ासतौर पर 18 से 44 साल के लोगों के लिए. वैक्सीन के रेट 250 रुपए से 1000 रुपए तक हैं.

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इमेज कैप्शन, दिल्ली सरकार केंद्र की वैक्सीन नीतियों पर सवाल उठाती रही है

दिल्ली सरकार ने उठाए सवाल

दिल्ली में भी प्राइवेट अस्पतालों में वैक्सीन आसानी से मिल रही है. कोविन ऐप में एक ओर जहाँ ज़्यादातर सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं है, प्राइवेट अस्पतालों में 600 रुपए से लेकर 1000 रुपए की क़ीमत चुका कर वैक्सीन ली जा सकती है.

दिल्ली सरकार ने इसके लिए केंद्र की नीतियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. आम आदमी पार्टी की विधायक आतिशी ने दिल्ली के कोविन ऐप की एक तस्वीर ट्वीट कर लिखा, "भारत शायद दुनिया का इकलौता देश है, जहाँ राज्य सरकार जो मुफ़्त में वैक्सीन दे रही है, उसके पास सप्लाई नहीं है और प्राइवेट अस्पतालों के पास बढ़े हुए रेट में देने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है."

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हालाँकि बीजेपी ने आरोप को ख़ारिज करते हुए कहा है कि दिल्ली ने समय रहते वैक्सीन नहीं ख़रीदी, और राज्य से ज़्यादा वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों ने ख़रीद ली.

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केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने 11 मुख्यमंत्रियों की चिट्ठी लिख कहा है कि केंद्र सरकार वैक्सीन देने की अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग रही है.

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महाराष्ट्र में भी प्राइवेट अस्पतालों में उपलब्ध वैक्सीन

लेकिन ये हाल सिर्फ़ दिल्ली और नोएडा का नहीं है. महाराष्ट्र में राज्य सरकार को 18 से 44 साल के लोगों के टीकाकरण को रोकना पड़ा था. सरकार के मुताबिक़ के जल्द ही फिर से टीकाकरण शुरू किया जाएगा.

लेकिन कोविन ऐप पर महाराष्ट्र के पुणे, नासिक, मुंबई समेत कई शहरों में 18-44 ग्रुप के लिए वैक्सीन के स्लॉट प्राइवेट अस्पतालों में बुक किए जा सकते हैं.

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अंग्रेज़ी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ मुंबई के प्राइवेट अस्पताल 40 से 50 फ़ीसदी वैक्सीन कॉरपोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को देने के लिए रिज़र्व कर रहे हैं. इसके लिए 16 से 66 फ़ीसदी अधिक क़ीमत चुकानी होगी.

कई दूसरे शहरों में भी प्राइवेट अस्पताल दफ़्तरों और कॉलनियों में कैंप लगा रहे हैं और बढ़े हुए दाम पर वैक्सीन दे रहे हैं. हालाँकि देश के कई शहरों में प्राइवेट और सरकारी दोनों जगह वैक्सीन के स्लॉट ख़ाली हैं. कुछ शहरों में वैक्सीन कहीं भी उपलब्ध नहीं है.

लेकिन सरकार के पास वैक्सीन नहीं, तो प्राइवेट हाथों में वैक्सीन कैसे पहुँच रही है.

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सरकार की नीतियों पर सवाल

1 मई को लागू की गई सरकार की नीति के मुताबिक़:

  • वैक्सीन निर्माता 50 प्रतिशत तक वैक्सीन राज्य सरकारों को या खुले बाज़ार में पहले से तय दाम पर बेच सकते हैं.
  • 18 साल से अधिक के लोगों को वैक्सीन देने के लिए राज्य सरकारें सीधे निर्माता से वैक्सीन ख़रीद सकती हैं.
  • भारत सरकार पहले की तरह फ़्रंटलाइन वर्कर, 45 से अधिक उम्र के लोगों या दूसरे ज़रूरतमंद लोगों को वैक्सीन मुफ़्त में देती रहेगी.

जानकारों का कहना है कि इसी नीति के कारण ये समस्या आ गई है कि वैक्सीन प्राइवेट अस्पतालों के पास है, लेकिन राज्य सरकारों के पास नहीं.

बीबीसी से बात करते हुए पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर के श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, "अगर वैक्सीन की सप्लाई पूरी होती, तो ये बात समझ आती थी, लेकिन जब 45 से ऊपर से लोगों को और कोमॉर्बिडिटी वाले लोगों को ही वैक्सीन नहीं मिली है, तो प्राइवेट सेक्टर को अभी वरीयता देना सही नहीं है."

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ये भी मुमकिन है कि प्राइवेट अस्पताल राज्य सरकारों के मुक़ाबले अधिक पैसे देकर वैक्सीन ख़रीद सकते हैं.

रेड्डी कहते हैं, "जब प्राइवेट प्लेयर निर्माता से सीधे ख़रीद रहे हैं, तो मुमकिन है कि निर्माता प्राइवेट अस्पताल को महंगे दाम में वैक्सीन बेचें, क्योंकि वो राज्य सरकार से अधिक पैसे देने को तैयार हो सकते हैं."

ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट

टेबल स्क्रॉल करें
विश्व
61
12,12,05,24,547
चीन
87
3,40,36,43,000
भारत
66
1,97,89,18,170
अमरीका
67
59,62,33,489
ब्राजील
79
45,69,03,089
इंडोनेशिया
61
41,75,22,347
जापान
81
28,57,56,540
बांग्लादेश
72
27,87,85,812
पाकिस्तान
57
27,33,65,003
वियतनाम
83
23,35,34,502
मैक्सिको
61
20,91,79,257
जर्मनी
76
18,29,26,984
रसियन फेडरेशन
51
16,89,92,435
फिलीपिंस
64
15,38,52,751
ईरान
68
14,99,57,751
ब्रिटेन
73
14,93,97,250
तुर्की
62
14,78,39,557
फ्रांस
78
14,61,97,822
थाईलैंड
76
13,90,99,244
इटली
79
13,83,19,018
दक्षिण कोरिया
87
12,60,15,059
अर्जेंटीना
82
10,60,75,760
स्पेन
87
9,51,53,556
मिस्र
36
9,14,47,330
कनाडा
83
8,62,56,122
कोलंबिया
71
8,57,67,160
पेरू
83
7,78,92,776
मलेशिया
83
7,12,72,417
सऊदी अरब
71
6,67,00,629
बर्मा
49
6,22,59,560
चिली
92
5,96,05,701
चाइनीज ताइपे
82
5,82,15,158
ऑस्ट्रेलिया
84
5,79,27,802
उजबेकिस्तान
46
5,57,82,994
मोरक्को
63
5,48,46,507
पोलैंड
60
5,46,05,119
नाइजीरिया
10
5,06,19,238
इथियोपिया
32
4,96,87,694
नेपाल
69
4,68,88,075
कंबोडिया
85
4,09,56,960
श्रीलंका
68
3,95,86,599
क्यूबा
88
3,87,25,766
वेनेजुएला
50
3,78,60,994
दक्षिण अफ्रीका
32
3,68,61,626
इक्वेडोर
78
3,58,27,364
नीदरलैंड्स
70
3,33,26,378
यूक्रेन
35
3,16,68,577
मोजाम्बिक
44
3,16,16,078
बेल्जियम
79
2,56,72,563
संयुक्त अरब अमीरात
98
2,49,22,054
पुर्तगाल
87
2,46,16,852
रवांडा
65
2,27,15,578
स्वीडन
75
2,26,74,504
यूगांडा
24
2,17,56,456
ग्रीस
74
2,11,11,318
कजाखस्तान
49
2,09,18,681
अंगोला
21
2,03,97,115
घाना
23
1,86,43,437
इराक
18
1,86,36,865
कीनिया
17
1,85,35,975
ऑस्ट्रिया
73
1,84,18,001
इसराइल
66
1,81,90,799
ग्वाटेमाला
35
1,79,57,760
हांगकांग
86
1,77,31,631
चेक गणराज्य
64
1,76,76,269
रोमानिया
42
1,68,27,486
हंगरी
64
1,65,30,488
डोमिनिकन रिपब्लिक
55
1,57,84,815
स्विट्जरलैंड
69
1,57,59,752
अल्जीरिया
15
1,52,05,854
होंडूरास
53
1,44,44,316
सिंगापुर
92
1,42,25,122
बोलिविया
51
1,38,92,966
ताजकिस्तान
52
1,37,82,905
अजरबैजान
47
1,37,72,531
डेनमार्क
82
1,32,27,724
बेलारूस
67
1,32,06,203
ट्यूनीशिया
53
1,31,92,714
आइवरी कोस्ट
20
1,27,53,769
फिनलैंड
78
1,21,68,388
जिम्बाब्वे
31
1,20,06,503
निकारागुआ
82
1,14,41,278
नॉर्वे
74
1,14,13,904
न्यूजीलैंड
80
1,11,65,408
कोस्टा रिका
81
1,10,17,624
आयरलैंड
81
1,09,84,032
अल सल्वाडोर
66
1,09,58,940
लाओ पीपुल्स डेम रिपब्लिक
69
1,08,94,482
जॉर्डन
44
1,00,07,983
पराग्वे
48
89,52,310
तंजानिया
7
88,37,371
उरुग्वे
83
86,82,129
सर्बिया
48
85,34,688
पनामा
71
83,66,229
सूडान
10
81,79,010
कुवैत
77
81,20,613
जाम्बिया
24
71,99,179
तुर्केमेनिस्तान
48
71,40,000
स्लोवाकिया
51
70,76,057
ओमान
58
70,68,002
कतर
90
69,81,756
अफ़ग़ानिस्तान
13
64,45,359
गिनी
20
63,29,141
लेबनान
35
56,73,326
मंगोलिया
65
54,92,919
क्रोएशिया
55
52,58,768
लिथुआनिया
70
44,89,177
बुल्गारिया
30
44,13,874
सीरिया
10
42,32,490
फलस्तीन
34
37,34,270
बेनिन
22
36,81,560
लीबिया
17
35,79,762
नीजेर
10
35,30,154
डीआर कांगो
2
35,14,480
सियरा लियोन
23
34,93,386
बहरीन
70
34,55,214
टोगो
18
32,90,821
किर्गिजस्तान
20
31,54,348
सोमालिया
10
31,43,630
स्लोवेनिया
59
29,96,484
बुर्किना फासो
7
29,47,625
अल्बानिया
43
29,06,126
जॉर्जिया
32
29,02,085
लातविया
70
28,93,861
मौरिटानिया
28
28,72,677
बोत्सवाना
63
27,30,607
लाइबेरिया
41
27,16,330
मॉरीशस
74
25,59,789
सेनेगल
6
25,23,856
माली
6
24,06,986
मेडागास्कर
4
23,69,775
चैड
12
23,56,138
मलावी
8
21,66,402
मोल्डोवा
26
21,65,600
अर्मीनिया
33
21,50,112
एस्टोनिया
64
19,93,944
बोस्निया और हर्जेगोविना
26
19,24,950
भूटान
86
19,10,077
एफवाईआर मेसिडोनिया
40
18,50,145
कमारू
4
18,38,907
कोसोवो
46
18,30,809
साइप्रस
72
17,88,761
टिमूर-लेस्टे
52
16,38,158
फिजी
70
16,09,748
त्रिनिडाड एंड टोबैगो
51
15,74,574
जमैका
24
14,59,394
मकाऊ
89
14,41,062
माल्टा
91
13,17,628
लक्जेमबर्ग
73
13,04,777
दक्षिण सूडान
10
12,26,772
सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक
22
12,17,399
ब्रुनई दारुसलाम
97
11,73,118
गुयाना
58
10,11,150
मालदीव
71
9,45,036
लेसोथो
34
9,33,825
यमन
1
8,64,544
कांगो
12
8,31,318
नामीबिया
16
8,25,518
गाम्बिया
14
8,12,811
आइसलैंड
79
8,05,469
केप वर्डे
55
7,73,810
मॉन्टेनिग्रो
45
6,75,285
कोमोरोस
34
6,42,320
पापुआ न्यू गिनी
3
6,15,156
गिनी-बिसाऊ
17
5,72,954
गैबन
11
5,67,575
स्वाजीलैंड
29
5,35,393
सूरीनाम
40
5,05,699
समोआ
99
4,94,684
बेलिज
53
4,89,508
इक्वेटोरियल गिनी
14
4,84,554
सोलोमन आइलैंड
25
4,63,637
हेटी
1
3,42,724
बहामा
40
3,40,866
बारबाडोस
53
3,16,212
वनुआतू
40
3,09,433
टोंगा
91
2,42,634
जर्सी
80
2,36,026
जिबूटी
16
2,22,387
सेलेल्स
82
2,21,597
साओ टोम एंड प्रिंसिप
44
2,18,850
आइल ऑफ़ मैन
79
1,89,994
गर्नज़ी
81
1,57,161
अंडौरा
69
1,53,383
किरिबाटी
50
1,47,497
केमैन आइलैंड्स
90
1,45,906
बरमूडा
77
1,31,612
एंटिगा एंड बरबूडा
63
1,26,122
सेंट लूसिया
29
1,21,513
जिब्राल्टर
123
1,19,855
फरोर आइलैंड्स
83
1,03,894
ग्रेनाडा
34
89,147
ग्रीनलैंड
68
79,745
सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनाडिन्स
28
71,501
लिचटेन्सटाइन
69
70,780
टर्क एंड कैकस आइलैंड्स
76
69,803
सैन मरीनो
69
69,338
डोमोनिका
42
66,992
मोनैको
65
65,140
सेंट किट्स एंड नेविस
49
60,467
ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स
59
41,198
कुक आइलैंड्स
84
39,780
एंग्विला
67
23,926
नौरू
79
22,976
बुरुंडी
0.12
17,139
तुवालू
52
12,528
सेंट हेलेना
58
7,892
मॉन्टसेराट
38
4,422
फॉकलैंड
50
4,407
नियू
88
4,161
टोकेलाउ
71
1,936
पिटकेयर्न
100
94
इरिट्रिया
0
0
उत्तर कोरिया
0
0
दक्षिण जॉर्जिया एंड सैंडविच आइलैंड
0
0
ब्रितानी हिंद महासागर क्षेत्र
0
0
वैटिकन
0
0

पूरा इंटरैक्टिव देखने के लिए अपने ब्राउज़र को अपग्रेड करें

"वैक्सीन हमेशा से ही केंद्र सरकार ख़रीदती रही है और वो ही इसका वितरण करती है. इस तरह की विकेंद्रित सप्लाई शायद ही ऐसे किसी दूसरे बड़े देश में होती है."

वीडियो कैप्शन, कोरोना में सेक्स वर्कर्स के लिए उम्मीद की किरण

रेड्डी कहते हैं कि अभी हालात ऐसे नहीं है कि वैक्सीन को मार्केट के भरोसे छोड़ा जाए, ये सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है कि जिन लोगों को वैक्सीन की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, ये पहले उन तक पहुँचे.

"गाँव या छोटे शहरों की बात करें, तो वहाँ प्राइवेट अस्पताल नहीं है, वहाँ वैक्सीन सरकारों को पहुँचानी होगी. तो राज्य सरकार और प्राइवेट सेक्टर को एक तरह का महत्व नहीं दे सकते. ऐसा कर आप ग़रीबों के साथ और छोटे शहरों और गाँव में रहने वाले लोगों के साथ भेदभाव कर रहे हैं."

रेड्डी का कहना है कि प्राइवेट अस्पतालों का इस्तेमाल वैक्सीनेशन के लिए करना चाहिए, लेकिन ये किसे मिले इसका फ़ैसला सरकार को करना चाहिए.

"प्राइवेट अस्पतालों को इस तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए कि आर्थिक भार ग़रीब व्यक्ति पर न पड़े."

सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने भी उठाए सवाल

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से वैक्सीन के अलग-अलग रेट को लेकर सवाल पूछे.

जस्टिस डीवाई चंद्रृचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि वैक्सीन के एक दाम होने चाहिए.

कोर्ट ने कहा, "केंद्र का कहना है कि उन्हें कम क़ीमत में वैक्सीन मिल रही है, क्योंकि वो ज़्यादा मात्रा में ख़रीदते रहते हैं तो फिर राज्यों को अधिक क़ीमत में क्यों मिल रही है. पूरे देश वैक्सीन की एक क़ीमत होनी चाहिए."

"अगर वैक्सीन ख़रीदना मक़सद है, तो केंद्र सरकार सिर्फ़ 45 से ऊपर वालों तक के लिए ख़ुद को क्यों सीमित रख रही है. और 45 से कम वालों को राज्यों के भरोसे क्यों छोड़ रही है. इसके अलावा हम ग़रीब और पिछड़े वर्गों को कैसे देख रहे हैं?"

मोदी, भारत सरकार

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सरकार का पक्ष

वैक्सीन को लेकर सरकार अपनी नीतियों का बचाव करती रही है.

नीति आयोग की तरफ से 27 मई को एक प्रेस रिलीज़ जारी की गई, जिसमें कहा गया, "स्वास्थ्य राज्य का विषय है और लिब्रलाइज़्ड वैक्सीन पॉलिसी राज्यों द्वारा अधिक शक्ति देने के लिए किए जा रहे लगातार अनुरोध के बाद लाई गई है."

इस प्रेस रिलीज़ से मुताबिक, "केंद्र सरकार को दी जाने वाली वैक्सीन के अलावा 25 प्रतिशत वैक्सीन राज्यों को और 25 प्रतिशत प्राइवेट अस्पतालों को मिल रही है. लेकिन इन्हें लगाए जाने की प्रक्रिया में आने वाली मुश्किलों के कारण कई लोगों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है."

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प्राइवेट अस्पताल कैसे ख़रीद रहे वैक्सीन?

सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या प्राइवेट अस्पताल वैक्सीन को लेकर पारदर्शिता बरत रहे हैं?

दिल्ली के एक अस्पताल के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि उनके पास अगले 20 दिनों के लिए पर्याप्त वैक्सीन है. हालाँकि ये संख्या कितनी है इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी.

ये पूछने पर क्या उन्हें वैक्सीन उसी रेट पर मिल रही है जिसपर राज्य सरकारें ख़रीद रही हैं, उन्होंने कहा, "राज्य सरकारों को किस रेट पर वैक्सीन मिल रही है हमें नहीं पता, हर कंपनी के साथ दवाइयों को लेकर मोलभाव होता है, और जो रेट तय होता है उस पर ही वैक्सीन ली जाती है."

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उन्होंने कहा कि वैक्सीन लोगों को सरकार के तय रेट के मुताबिक़ ही दी जा रही है.

कोविन ऐप पर देश के कई हिस्सों मे अपोलो के अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध दिखी. हमने अपोलो से रविवार को ईमेल और फ़ोन के ज़रिए पूछा कि वैक्सीन कितनी मात्रा में और किस रेट पर ख़रीदी गईं. अपोलो की तरफ़ से आश्वासन दिया गया कि हमारे सवालों का जवाब दिया जाएगा, लेकिन ख़बर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया.

अगर अस्पताल का जवाब आता है, तो इस ख़बर में अपडेट कर दिया जाएगा.

होटल में वैक्सीनेशन को लेकर विवाद

इस बीच कुछ होटलों के इश्तेहार सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें वैक्सीन पैकेज देने की बात कही गई.

रविवार को सरकार ने इसे तुरंत रोकने ने आदेश दिए.

केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वो उन संस्थाओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएँ, जो कोविड-19 के मद्देनज़र जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन करके कोरोना टीकाकरण का पैकेज दे रही हैं.

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इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोहर अगानी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक पत्र लिखा है.

पत्र में कहा गया है, "स्वास्थ्य मंत्रालय के संज्ञान में आया है कि होटलों के साथ मिल कर कुछ निजी अस्पताल कोविड वैक्सीनेशन पैकेज दे रहे हैं. ये राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के लिए जारी किए गए दिशानिर्देशों का उल्लंघन है."

अपने पत्र में मनोहर अगानी ने लिखा कि सरकारी और निजी अस्पताल के कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर्स के अलावा काम की जगहों और बड़े-बूढ़ों और अक्षम लोगों के लिए घरों में कोरोना टीकाकरण किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा होटलों जैसी किसी और जगह पर टीकाकरण करना दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, इसे तुंरत बंद किया जाना चाहिए.

ग्लोबल वैक्सीन रोलआउट

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