यास तूफ़ान को लेकर ओडिशा और बंगाल में अलर्ट

यास

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भारतीय मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफ़ान यास को लेकर अलर्ट जारी किया है.

चक्रवाती तूफ़ान यास के अगले छह घंटे के दौरान उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और तीव्र होकर अत्‍यधिक भीषण चक्रवाती तूफ़ान में बदलने की आशंका जताई गई है.

यह तूफ़ान बुधवार सुबह तक धामरा बंदरगाह के पास उत्तर ओेडिशा तट के निकट पहुँच सकता है.

मौसम विभाग के अनुसार, बुघवार दोपहर तक तूफ़ान के धामरा के उत्तर और बालासोर के दक्षिण के निकट पारादीप और सागर द्वीप के बीच उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट को पार करने की आशंका है.

पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन

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पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन ने बताया कि तूफ़ान के मद्देनज़र पारादीप पोर्ट पर तैयारियां की जा चुकी हैं. जितने भी जहाज़ पोर्ट पर थे उन्हें पहले से ही सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है. चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए पोर्ट पर पाँच शेल्टर बनाए जा रहे हैं जिसमें सभी प्रकार की सुविधाएं होंगी.

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एआईआर न्यूज़ ने मौसम विभाग के हवाले से ख़बर दी है कि उत्तर पश्चिम और इसके आसपास पश्चिम-सेन्‍ट्रल बंगाल की खाड़ी पर बना चक्रवाती तूफ़ान यास पिछले छह घंटे के दौरान लगभग 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उत्तर-उत्तर पश्चिम की तरफ़ बढ़ा है.

मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफ़ान के मद्देनज़र मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है.

एस एन प्रधान

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एनडीआरएफ़ के महानिदेशक एस. एन. प्रधान ने कहा है कि चक्रवात यास के मद्देनज़र ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि ओडिशा में 52 और पश्चिम बंगाल में एनडीआरएफ़ की 45 टीमें मौजूद हैं.

ओडिशा से बीबीसी के सहयोगी संदीप साहू ने ओडिशा में यास तूफ़ान से जुड़ी जानकारी दी.

ओडिशा में तूफ़ान से पहले की तैयारी

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ओडिशा में तूफ़ान की स्थिति और तैयारियां

मौसम विभाग के हवाले से उन्होंने बताया कि 'यास' सुबह साढ़े पाँच बजे पारादीप से 320 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित था और पिछले छह घंटों से उत्तरी-उत्तर पश्चिम दिशा में 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अग्रसर हो रहा था. लैंडफ़ॉल के समय हवा की गति 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटा होने की आशंका है. साथ ही बालेश्वर और भद्रक तट पर चार मीटर ऊंची लहरें उठने की भी आशंका है.

तूफ़ान के कारण बालेश्वर, भद्रक, केन्द्रपड़ा और जगतसिंहपुर ज़िलों में भारी तबाही होने की आशंका है. इन सभी ज़िलों में सोमवार शाम से ही बारिश हो रही है और मंगलवार रात से इन इलाक़ों में बारिश बढ़ेगी और तेज़ हवाएं चलेंगी.

बुधवार सुबह तक इन इलाक़ों में हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है, जिससे कच्चे मकानों के ढहने, पेड़ और बिजली के खंबे उखड़ने की आशंका है. इन चार ज़िलों के अलावा पुरी, खुर्दा ज़िलों में भी 'यास' का प्रभाव पड़ेगा. इन ज़िलों में हवा की गति 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने का आकलन किया गया है.

एनडीआरएफ़

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तबाही की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सोमवार शाम से ही तटीय इलाक़ों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है.

राज्य के विशेष राहत आयुक्त प्रदीप जेना ने बताया कि सोमवार देर रात तक प्रभावित इलाक़ों से क़रीब 15, 000 लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुँचाया जा चुका है और आज शाम तक स्थानांतरण का काम पूरा कर लिया जाएगा.

आश्रय स्थलों में पानी, बिजली और दूसरी सहूलियतें उपलब्ध हैं. साथ ही सभी के लिए मास्क का प्रावधान भी किया गया है.

जेना ने लोगों से अपील की है कि वे तूफ़ान पूरी तरह से चले जाने तक घर से बाहर न निकलें. उन्होंने लोगों से यह भी अपील की है कि वे अपने होर्डिंग और बिलबोर्ड हटा दें और तूफ़ान के पूरी तरह से गुज़र जाने तक पानी, आम, नारियल या अन्य फल बटोरने के लिए घरों से न निकलें.

राहत आयुक्त ने बताया कि राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ़ की 52 टीमें, ओडीआरएफ़ की 60 टीमें और अग्निशमन विभाग की 206 टीमें तैनात कर दी गई हैं.

यह लगातार तीसरा साल है जब ओडिशा मई के महीने में तूफ़ान का सामना कर रहा है. 3 मई, 2019 को 'फ़णी' ने पुरी और खुर्दा ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी जबकि 20 मई, 2020 को 'अंफन' से बालेश्वर, भद्रक और केन्द्रपड़ा ज़िलों में भारी क्षति हुई थी.

नवीन पटनायक

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लगातार दूसरे वर्ष के लिए ओडिशा में तूफ़ान ऐसे समय आ रहा है जब राज्य कोविड से जूझ रहा है, इसलिए सरकार कड़ी चुनौती का सामना कर रही है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बताया कि राज्य यास से निबटने के लिए तैयार है.

तूफ़ान के ख़तरे को देखते हुए राज्य सरकार ने घर-घर जाकर कोरोना जाँच और टीकाकरण कार्यक्रम पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है.

पश्चिम बंगाल

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पश्चिम बंगाल में क्या है स्थिति

बीबीसी के सहयोगी प्रभाकर मणि तिवारी ने पश्चिम बंगाल में तूफ़ान की स्थिति और तैयारियों की जानकारी दी.

चक्रवाती तूफ़ान यास के असर से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत तटवर्ती इलाक़ों में मंगलवार दोपहर से ही बारिश शुरू हो गई है. राज्य सरकार ने इससे निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारियां की हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यहां राज्य सचिवालय में पत्रकारों को बताया, "हमने तूफ़ान के संभावित असर वाले इलाक़ों से क़रीब 11 लोगों लोगों को हटा कर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है. राज्य में चार हज़ार शेल्टर होम खोले गए हैं." मुख्यमंत्री ने कहा है कि राहत और बचाव कार्यो के लिए ज़रूरत पड़ने पर सेना की मदद ली जाएगी.

ममता बनर्जी ने बताया कि यास के असर के कारण राज्य के कुछ इलाक़ों में टोर्नेडो या बवंडर जैसी स्थिति पैदा हो रही है. हुगली ज़िले के चुंचूड़ा में ऐसे ही बवंडर में 40 मकान नष्ट हो गए है जबकि पांडुआ में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई है. उन्होंने लोगों से घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की है.

यास

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उन्होंने बताया कि तूफ़ान का सबसे ज़्यादा असर पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में होने का अंदेशा है. तूफ़ान और इसके असर की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री मंगलवार की रात राज्य सचिवालय में बने कंट्रोल रूम में गुज़ारेंगी.

मौसम विभाग की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि तूफ़ान की वजह से कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर और दक्षिण 24-परगना ज़िलों में भारी बारिश की संभावना है. हालांकि बीते कुछ घंटों के दौरान इस चक्रवाती तूफ़ान के रास्ते में कुछ बदलाव हुआ है.

ममता ने कहा, "कोलकाता पर इसका असर बीते साल आए अंफान तूफ़ान की तरह गंभीर नहीं होगा. राजधानी में 65 से 75 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चलने और भारी बारिश का अनुमान है."

मौसम विभाग ने कहा है कि राज्य के समुद्र तटीय शहर दीघा में समुद्र की लहरें चार मीटर की ऊंचाई तक उठ सकती हैं. वहां तटवर्ती इलाक़ों के गांवों को ख़ाली करा लिया गया है. पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है.

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ममता मंगलवार दोपहर से ही सचिवालय के कंट्रोल रूम में जमी हैं. शाम को राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी सचिवालय का दौरा कर ममता से मुलाक़ात की और तूफ़ान से निपटने की तैयारियों का जायज़ा लिया.

तूफान के संभावित असर वाले इलाक़ों में एनडीआऱएफ के अलावा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और पुलिस के जवानों के तैनात किया है. उन इलाक़ों में पर्याप्त मात्रा में राहत और खाद्य सामग्री का स्टॉक भी जमा कर लिया गया है.

ममता बनर्जी ने बताया, "कई मंत्रियों को अलग-अलग ज़िलों की निगरानी की ज़िम्मेदारी दी गई है. वह लोग तूफ़ान गुज़रने के बाद राहत और बचाव कार्यों की भी निगरानी करेंगे."

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पश्चिम बंगाल और ओडिशा के साथ ही तूफ़ान का असर बिहार और झारखंड में भी देखने को मिल सकता है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी यास तूफ़ान से जुड़ी तैयारियों को लेकर आज एक उच्चस्तरीय बैठक की.

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मौसम विभाग के वैज्ञानिक आशीष कुमार ने बताया कि "यास चक्रवात का असर बिहार के दक्षिण ज़िलों में देखने को मिलेगा. राज्य के कुछ ज़िलों में भारी बारिश की आशंका है. दक्षिण बिहार के कुछ ज़िलों में भारी बारिश हो सकती है और अगले 5-6 दिन पूरे राज्य में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है."

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