पाकिस्तान वायु सेना को बलूचिस्तान में एक नए एयर बेस की ज़रूरत क्यों पड़ रही है?

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    • Author, मोहम्मद काज़िम, आज़म ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम

पाकिस्तानी वायु सेना ने पुष्टि की है कि वह बलूचिस्तान प्रांत में एक नया हवाई अड्डा (एयर बेस) बनाने पर विचार कर रही है.

नसीराबाद ज़िले के उपायुक्त ने बीबीसी को बताया कि वायु सेना ने इस संबंध में भूमि अधिग्रहण के लिए प्रशासन से संपर्क किया था, जिसके बाद उन्हें नसीराबाद के नौताल क्षेत्र में भूमि का निरीक्षण कराया गया है.

न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़, यह ख़बर एक ऐसे समय में सामने आई है, जब पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी डेविड एफ़ हॉलवे ने कहा है कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अपनी सेना का समर्थन करने के लिए, अपनी हवाई और ज़मीनी सीमाओं के उपयोग की अनुमति दे दी है.

एएफ़पी के मुताबिक़, अमेरिका के इंडो-पैसिफ़िक अफ़ेयर्स के सहायक सचिव डेविड एफ़ हॉलवे ने पिछले सप्ताह अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति को बताया था, कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा. क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है.

इन ख़बरों के सामने आने के बाद, स्थानीय मीडिया ने यह दावा किया है कि नसीराबाद ज़िले में बनाया जाने वाला एयर बेस वास्तव में अमेरिकी सेना के अनुरोध पर बनाया जा रहा है और एयर बेस का उपयोग अमेरिका ही करेगा.

हालांकि, पाकिस्तान वायु सेना के प्रवक्ता और विदेश मंत्रालय ने इससे इनकार करते हुए कहा है कि इस तरह के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं किया जा रहा है.

वायु सेना के प्रवक्ता ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि बलूचिस्तान में एक नया हवाई अड्डा बनाने का प्रस्ताव, एक सामान्य सा मामला है और इस बारे में फ़िलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. प्रवक्ता के अनुसार, अभी इस हवाई अड्डे के लिए चार साइटों पर विचार किया जा रहा है लेकिन अंतिम फ़ैसला होना अभी बाक़ी है.

दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन ख़बरों का खंडन करते हुए कहा कि पाकिस्तान में न तो अमेरिकी सेना है, न ही कोई एयर बेस और न किसी ऐसे प्रस्ताव पर कोई विचारा किया जा रहा है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हफ़ीज़ चौधरी ने ट्वीट किया, "इस संबंध में लगाई जाने वाली सभी अटकलें निराधार और ग़ैर-ज़िम्मेदाराना हैं जिनसे बचा जाना चाहिए. (अमेरिका के साथ पाकिस्तान का) हवाई और ज़मीनी सहयोग 2001 से जारी है."

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एएफ़पी के मुताबिक़, अमेरिकी पदाधिकारी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि "पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया योजना में सहायता की है, इसके अलावा पाकिस्तान ने अमेरिका को हवाई सेवा इस्तेमाल करके अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सेना को मदद पहुँचाने में भी सहायता की है."

वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने ट्वीट करके बताया है कि उन्होंनें पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से बात की है.

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ऑस्टिन ने ट्वीट में लिखा, "आज मुझे पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से बात करने का मौक़ा मिला. मैंने अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की प्रशंसा को दोहराया और क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए साथ मिलकर काम करने की इच्छा को भी दोहराया."

नया एयरबेस कहां बनाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है?

एयरफ़ोर्स अधिकारियों और ज़िला प्रशासन ने बीते दिनों नौताल में प्रस्तावित जगह का दौरा किया

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नौताल बलूचिस्तान में नसीराबाद ज़िले के मुख्यालय डेरा मुराद जमाली से 25 किलोमीटर दूर स्थित है. नौताल एक बंजर मैदानी क्षेत्र है और इसका ज़्यादतर भाग उपजाऊ नहीं है.

बलूचिस्तान में बिगड़ते हालात के बाद से नसीराबाद ज़िले के कुछ इलाक़े उग्रवाद से प्रभावित हुए हैं.

पाकिस्तानी वायु सेना के प्रवक्ता ने कहा कि मीडिया में आई ये ख़बरें निराधार और महज़ अफ़वाहें हैं कि एयर बेस अमेरिका के लिए बनाया जा रहा है या उन्हें सौंप दिया जाएगा.

प्रवक्ता के मुताबिक़ अगर एयर बेस पर काम शुरू हुआ तो यह रातों-रात नहीं बन जाएगा, बल्कि अंतिम निर्णय और मंज़ूरी के बाद इसे पूरा होने में आठ से दस साल का समय लग जायेगा.

नसीराबाद के डिप्टी कमिश्नर ने बीबीसी को बताया, कि "यह प्रस्ताव एक नए एयरबेस के लिए नहीं, बल्कि एक ऑपरेशनल साइट के लिए सामने आया है."

उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, "अभी इस ज़मीन पर पाकिस्तानी वायु सेना को कोई कॉलोनी बनानी है, कोई ऑपरेशनल साइट बनानी है या कोई कंस्ट्रक्शन करना हो, लेकिन यह कोई बड़ा एयर बेस नहीं होगा."

उन्होंने कहा कि "हम पाकिस्तान वायु सेना के आने का स्वागत करते हैं, वो आएं, क्योंकि इससे क्षेत्र में विकास और समृद्धि आएगी."

ध्यान रहे कि इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान वायु सेना के अधिकारियों ने इस साइट का दौरा किया था.

'पाकिस्तानी सेना अब कोई एयर बेस अमेरिका के हवाले नहीं करेगी'

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बीबीसी से बात करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल अमजद शोएब (सेवानिवृत्त) का कहना है कि सेना की ओर से अब अमेरिका को कोई हवाई अड्डा नहीं दिया जाएगा.

उनके मुताबिक़, फ़िलहाल नसीराबाद में ऐसी कोई सुविधा नहीं है और यह एयर बेस सी-पैक की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार अगर सी-पैक के ख़िलाफ़ कोई साज़िश होती है तो फिर इस एयर बेस से किसी भी तरह की नकारात्मक गतिविधि को ख़त्म करना संभव हो सकेगा.

अमजद शोएब के अनुसार, एयर बेस ज़्यादा बड़ा नहीं होगा, क्योंकि इसका मक़सद दक्षिणी हिस्से में शांति बनाए रखना होगा.

उनके अनुसार, अगर ज़रूरत पड़ी, तो अमेरिका को चमन तक की सड़क तक पहुँच की अनुमति दी जा सकती है और वह पहले से ही इस सड़क का उपयोग कर रहा है.

अमजद शोएब के अनुसार, अगर अमेरिकी सैनिकों को सप्लाई की ज़रूरत होगी, तो वे कराची एयरपोर्ट से ले जा सकेंगे. हालांकि, उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद यह ज़रूरत बहुत कम हो गई है.

नसीराबाद एयर बेस के बारे में बात करते हुए जनरल अमजद शोएब ने कहा कि इस समय किसी भी आतंकवाद को ख़त्म करने के लिए हमारा रिस्पॉन्स टाइम बहुत ज़्यादा है. "हमें अभी क्वेटा से प्रतिक्रिया देनी पड़ती है. जैकोबाबाद वाला एयर बेस भी इतना क़रीब नहीं पड़ता है."

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उनके अनुसार, जैकोबाबाद एयरबेस, हालांकि थोड़ी दूरी पर है, लेकिन भारतीय सीमा के संदर्भ में इसका अपना एक विशेष महत्व है.

अंग्रेज़ी अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से जुड़े रक्षा मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार कामरान यूसुफ़ ने बीबीसी को बताया कि अमेरिका अभी किसी न किसी रूप में इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगा, और यही इच्छा पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की भी है.

कामरान युसूफ़ के मुताबिक़ सैन्य नेतृत्व का मानना है कि जब इस क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी होगी तो पाकिस्तान को भी एक बढ़त हासिल रहेगी, क्योंकि अमेरिका को पाकिस्तान की ज़रूरत महसूस होती रहेगी.

उनके अनुसार, ऐतिहासिक रूप से भी पाकिस्तान अमेरिका की सहायता करता रहा है. हालांकि, उनके अनुसार जनता के विरोध से बचने के लिए ऐसे समझौतों के बारे में फ़ौरन कुछ नहीं बताया जाता है.

उनके मुताबिक ख़ुफ़िया रूप से इस बात की संभावना है कि दोनों देश ऐसे समझौते करें जिसमें इस तरह की मदद जारी रखी जा सके.

उनके मुताबिक़, 9/11 के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने कोर कमांडरों की बैठक में तटस्थ रहने को कहा था, लेकिन बाद में पता चला कि शम्सी एयर बेस पहले से ही अमेरिका के हवाले कर दिया गया था.

याद रहे, कि परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ कोर कमांडर रहे शाहिद अज़ीज़ ने अपनी किताब 'यह ख़ामोशी कहां तक' में ख़ुलासा किया था कि परवेज़ मुशर्रफ ने सेना प्रमुख के रूप में कोर कमांडरों की बैठक में कहा था कि पाकिस्तान अमेरिका के मामले में तटस्थ रहेगा. लेकिन यह बात कमांडरों को भी बाद में पता चली कि शम्सी एयर बेस पहले ही अमेरिका के हवाले कर दिया गया था.

कामरान युसूफ़ के अनुसार, जब पूर्व में अय्यूब ख़ान ने सोवियत संघ के ख़िलाफ़ अमेरिका को पेशावर हवाई अड्डे की पेशकश की थी, तो उस समय स्थिति कुछ अलग थी. लेकिन अब पाकिस्तान इस तरह के सहयोग से पहले चीन की अनदेखी नहीं कर सकता और निश्चित रूप से पाकिस्तानी अधिकारियों ने इस संबंध में चीन को भी विश्वास में ज़रूर लिया होगा.

जैकोबाबाद के पास पाकिस्तानी वायु सेना की दूसरी परियोजना

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जैकोबाबाद सिंध का बलूचिस्तान से लगा हुआ सीमावर्ती ज़िला है और नसीराबाद से लगे बलूचिस्तान के ज़िले जाफ़राबाद की सीमा दक्षिण-पूर्व में जैकोबाबाद से लगती है. शाहबाज़ एयरबेस जैकोबाबाद में पाकिस्तान एयर फ़ोर्स का एक प्रमुख एयर बेस है. नौताल सिंध जैकोबाबाद से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर है.

अफ़ग़ानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद जैकोबाबाद का एयर बेस अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा और तालिबान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिकी वायु सेना के इस्तेमाल में रहा है.

जैकोबाबाद की तरह, अफ़ग़ानिस्तान नौताल के भी उत्तर में स्थित है. जैकोबाबाद और नौताल के दक्षिण या दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में, पाकिस्तान की सीमा से लगे अफ़ग़ानिस्तान के क्षेत्र या उनसे जुड़े अन्य क्षेत्र भी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित हैं.

नौताल के पास और कौन से हवाई अड्डे मौजूद हैं?

जहां जैकोबाबाद का एयरबेस नौताल के बहुत क़रीब है, वहीं नौताल के पास सिबी ज़िले में भी एक हवाई अड्डा है. हालांकि अंग्रेज़ों के दौर में बना यह हवाई अड्डा बहुत बड़ा और आधुनिक नहीं है, लेकिन फिर भी सी-वन थर्टी विमानों के अलावा यह छोटे विमानों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

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बलूचिस्तान में कौन-से एयरबेस अमेरिका के उपयोग में रहे हैं?

बलूचिस्तान में अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे हुए छह ज़िले हैं, जिनमें झोब, किला सैफुल्लाह, पशीन, किला अब्दुल्लाह, नोशकी और चाग़ी शामिल हैं. ये ज़िले अंग्रेज़ों के दौर में ब्रिटिश बलूचिस्तान का हिस्सा थे, जहां अंग्रेज़ों ने नाज़ी जर्मनी और पूर्व सोवियत संघ की किसी भी संभावित कार्रवाई को रोकने के लिए बहुत सारी छोटी-छोटी हवाई पट्टियां बनाई हुई थीं.

हालांकि पाकिस्तान बनने के बाद झोब और चाग़ी ज़िले के दलबंदीन इलाक़ों में हवाई अड्डे बनाए गए.

हालांकि ऐसी कोई ख़बर सामने नहीं आई कि अमेरिका ने इन क्षेत्रों में से किसी एयरपोर्ट का खुले तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में हमलों के लिए उपयोग किया हो, लेकिन चाग़ी ज़िले से सटे खारन ज़िले में शम्सी एयर बेस के बारे में खुले तौर पर कहा गया था कि ये अमेरिका के उपयोग में रहा है. हालांकि सलाला चेक पोस्ट पर अमेरिकी हमले के बाद इस एयर बेस को अमेरिका ने ख़ाली कर दिया था.

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नौताल में वायु सेना की इस नई परियोजना का बलूचिस्तान के स्थानीय समाचार पत्रों में प्रचार कम होने के कारण, राजनीतिक पार्टियों की तरफ़ से इस बारे में अभी तक बहुत अधिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई हैं.

हालांकि, राष्ट्रवादी पार्टी बलूचिस्तान नेशनल मूवमेंट ने इस परियोजना का विरोध किया है.

पार्टी प्रमुख ख़लील बलोच की तरफ़ से जारी एक बयान में, इसे बलूचिस्तान में एक प्रमुख सैन्य योजना बताते हुए कहा गया है कि राज्य और उसके सैन्य प्रतिष्ठान बलूचिस्तान में अपने क़ब्ज़े को बढ़ाने और बलूच धरती को एक पूर्ण सैन्य छावनी में बदलने की नीति को तेज़ी से लागू कर रहे हैं.

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