भारत के नए कोरोना हॉटस्पॉटः इन राज्यों में संक्रमण और मौत के आँकड़े ख़तरे की घंटी हैं

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- Author, शादाब नज़मी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में कोरोना संक्रमण के नए मामलों और इस महामारी के कारण होने वाली मौत के जो आंकड़े रोज़ दर्ज किए जाते हैं, उसमें ठहराव आता हुआ नहीं दिख रहा है.
यहां हर रोज़ लगभग चार लाख संक्रमण के नए मामले रिपोर्ट हो रहे हैं और मरने वालों की संख्या भी हर दिन 4000 के क़रीब रिकॉर्ड की जा रही है.
दुनिया के बाक़ी देशों की तुलना में भारत में सबसे ज़्यादा संख्या में ये आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं.
हालांकि ये महज़ सरकारी आंकड़े हैं. जानकारों का कहना है कि टेस्टिंग में जितने लोगों को छोड़ा जा रहा है और महामारी के कारण मरने वाले लोगों की संख्या जिस तरीके से पूरी तरह रिकॉर्ड नहीं हो पा रही है, उसे देखते हुए संक्रमितों और मरने वालों की संख्या सरकारी आंकड़ों की तुलना में पांच से छह गुना अधिक हो सकती है.
ऐसे में हम आगे ये देखेंगे कि महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार की क्या स्थिति है और क्या कोरोना वायरस ने अपना रुख़ उत्तर से सुदूर उत्तर और पूर्वोत्तर के राज्यों की तरफ़ कर लिया है.
उत्तराखंड
उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के जितने मामले अब तक रिपोर्ट हुए हैं, उनमें 58 फीसदी केस केवल अप्रैल और मई के महीने में सामने आए हैं. पिछले हफ़्ते की तुलना में इस समय उत्तराखंड में संक्रमण के मामलों में सबसे तेज़ी से वृद्धि हो रही है.
न केवल संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं बल्कि यहां मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है. आठ मई तक उत्तराखंड में उसके पिछले हफ़्ते की तुलना में मरने वालों की संख्या 30 फीसदी अधिक रिकॉर्ड की गई.
संक्रमण और मौत के मामलों में वृद्धि के इस ट्रेंड में मई में और ज़्यादा तेज़ी देखी जा रही है. चंपावत और देहरादून के बाद हरिद्वार उत्तराखंड का तीसरा ऐसा ज़िला बन गया है जहां अप्रैल और मई के बीच संक्रमण के मामलों में 120 फ़ीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है.
ये चार्ट हमें बताता है कि महाराष्ट्र को छोड़कर सभी राज्यों में अप्रैल की शुरुआत से ही संक्रमण के मामलों में एक जैसी वृद्धि दर्ज की गई है. महाराष्ट्र में मार्च के पहले पखवाड़े में संक्रमण की स्थिति अपने चरम पर लग रही थी लेकिन लॉकडाउन के कड़े प्रावधानों के कारण वहां संक्रमण के मामले कम हुए.
दूसरी तरफ़, उत्तराखंड में उसी दौरान कुंभ मेले का आयोजन चल रहा था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार में पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगा रहे थे.
आंकड़े बताते हैं कि केवल महाराष्ट्र और दिल्ली में ही कोरोना संक्रमण के मामले कम नहीं हुए हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार में भी पॉज़िटिविटी रेट में कमी देखी गई है.
उत्तराखंड में मरने वालों की बढ़ती संख्या चिंता का एक गंभीर विषय है. एक अप्रैल के बाद से राज्य में मौत के आंकड़ों में 117 फीसदी की दर से वृद्धि दर्ज की गई है.
ये हर हफ्ते 30 फीसदी से ज़्यादा की दर से बढ़ रहा है और आने वाले समय में भी इसकी यही रफ्तार बने रहने की आशंका है. इस समय झारखंड और गोवा केवल दो ऐसे राज्य हैं जहां मृत्यु दर उत्तराखंड से अधिक है.
झारखंड
संभव है कि संक्रमण के मामलों में झारखंड में सबसे तेज़ी से संक्रमण के मामलों में वृद्धि न हो रही हो लेकिन यहां जिस रफ्तार से लोगों की मौत हो रही है, उसे खतरे की घंटी के तौर पर देखा जा सकता है.
पिछले हफ्ते की तुलना में झारखंड में कोरोना संक्रमण के मामलों में 18 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. लेकिन जब हम मरने वालों की संख्या पर गौर करते हैं तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है.
अप्रैल की शुरुआत तक झारखंड में आधिकारिक रूप से केवल 1,114 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हुई थी. लेकिन महीने भर के भीतर ही झारखंड में 3800 लोगों की मौत हो गई. ये 246 फीसदी की वृद्धि है.
झारखंड में इस समय हर दिन तकरीबन 90 लोगों की मौत हो रही है. अप्रैल के आखिर तक झारखंड में मरने वालों की संख्या में 45 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
हालांकि मई में मौत के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है लेकिन इसके बावजूद इस राज्य में मरने वालों की संख्या का ग्राफ सबसे तेज़ी से ऊपर गया है.
गोवा
अप्रैल के महीने में जब देश के पश्चिमी राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे थे तब गोवा एकमात्र ऐसा राज्य था जहां हर हफ्ते संक्रमण के मामले पांच फीसदी से कम दर से बढ़ रहे थे.
राज्य खुला हुआ था और किसी के यहां आने पर कोई रोकटोक नहीं थी. देशभर से सैलानी यहां आनंद के लिए आ सकते थे. लेकिन दो हफ्तों के भीतर ही तटीय राज्य गोवा में कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक तेज़ी आ गई.
पिछले कुछ हफ्तों से गोवा में मरने वालों की संख्या में भी तेज़ी से वृद्धि दर्ज की गई है. राज्य में मृत्यु दर के आंकड़े जो 11 फीसदी की दर से हर हफ्ते बढ़ रहे थे, वो महज़ 15 दिनों के भीतर तीन गुना ज़्यादा यानी 33 फीसदी की दर से बढ़ने लगे.
सुदूर उत्तर और पूर्वोत्तर के राज्य
उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी कोरोना संक्रमण और मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं. आठ अप्रैल को हर हफ्ते जम्मू और कश्मीर में संक्रमण के मामले तीन फीसदी की दर बढ़ रहे थे जबकि अब यहां स्थिति पीक पर कही जा सकती है.
जम्मू और कश्मीर में संक्रमण के मामले अब 18 फीसदी से अधिक दर से बढ़ रहे हैं और इनमें कमी होते हुए नहीं दिखाई दे रही है. दूसरी तरफ़, हिमाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले इस समय 24 फीसदी की दर से हर हफ्ते बढ़ रहे हैं.
आठ अप्रैल को ये वृद्धि दर केवल पांच फीसदी ही थी. इन दोनों राज्यों में समस्या केवल संक्रमण के मामलों के बढ़ने की दर ही नहीं है बल्कि यहां हालात में कोई सुधार होता हुआ नहीं दिख रहा है.
आंकड़ों से जो तस्वीर उभर रही है, उससे ऐसा लग रहा है कि आने वाले दिनों में इन राज्यों के लिए हालात और खराब हो सकते हैं.
कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान पूर्वोत्तर भारत के राज्य लगभग अछूते रह गए थे लेकिन अब यहां संक्रमण के मामलों और मरने वाले लोगों की संख्या दोनों ही में वृद्धि देखी जा रही है.
मिज़ोरम में संक्रमण के मामलों में 18 फीसदी की दर से वृद्धि देखी गई है. अप्रैल की शुरुआत में यहां संक्रमण के मामले महज़ एक फीसदी की दर से ही बढ़ रहे थे. न केवल मिज़ोरम बल्कि मेघालय, असम, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा में कोरोना संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़े हैं.
संक्रमण के मामले यहां जिस तेज़ी से बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि यहां आने वाले समय में तस्वीर बेहतर होने वाली है.
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