रेमडेसिविर: गुजरात में बीजेपी के इंजेक्शन बांटने पर क्या कहता है क़ानून

सीआर पाटिल

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    • Author, जिगर भट्ट
    • पदनाम, बीबीसी गुजराती के लिए

गुजरात के सूरत शहर में बीजेपी कोरोना संक्रमण के इलाज में उपयोगी रेमडेसिविर इंजेक्शन का वितरण कर रही है. पिछले हफ़्ते शुक्रवार को गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष सीआर पाटिल ने कहा था कि बीजेपी सूरत में रेमडेसिविर के पाँच हज़ार इंजेक्शंस बांटेगी.

गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष ने ये घोषणा ऐसे समय में की जब एक तरफ़ गुजरात में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी को लेकर बवाल मचा हुआ है तो दूसरी ओर गुजरात हाईकोर्ट ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है.

ऐसे में बीजेपी की तरफ़ से लोगों को मुफ़्त में कोरोना संक्रमण की दवा का वितरण करने पर कई सवाल खड़े हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल है कि बीजेपी के पास ये इंजेक्शन कहां से आए? एक साथ पाँच हज़ार इंजेक्शन का इंतज़ाम करने पर बीजेपी पर दवा की जमाख़ोरी के भी आरोप लग रहे हैं.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि लोगों की सेवा के लिए ये इंजेक्शन बांटे जा रहे हैं और इसका इंतज़ाम पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने संसाधनों से किया है. पार्टी का ये भी कहना है कि अगर ज़रूरत होगी तो बीजेपी आने वाले दिनों में फिर से इस इंजेक्शन का वितरण करेगी.

इसके अलावा ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि बीजेपी के पास दवा वितरण का परमिट न होने के बावजूद वो दवा वितरण का काम कैसे कर सकती.

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विपक्ष की प्रतिक्रिया

गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता जयराज सिंह परमार ने कहा, "क्या कमलम (बीजेपी मुख्यालय) फार्मास्युटिकल कंपनी है?"

गुजरात कांग्रेस प्रमुख अमित चावड़ा ने ट्विटर पर लिखा है कि "बीजेपी रेमडेसिविर इंजेक्शन की जमाख़ोरी करवा रही है और एक राजनीतिक पार्टी की तरफ़ से ये ड्रग और कॉस्मेटिक क़ानून, 1940 के सेक्शन 18 का उल्लंघन है."

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उन्होंने कहा कि हमने इस मामले को एफ़डीसीए के सामने उठाया है और कहा है कि "फ़ूड और ड्रग क़ानून के सेक्शन 27 के मुताबिक़ सप्लायर और विक्रेता के सामने कार्रवाई की जाए."

अमित चावडा ने ये सवाल भी उठाया कि ये क़ानून क्या सिर्फ़ छोटे व्यापारियों पर ही लागू होता है? क्या एफ़डीसीए के इंस्पेक्टर इस जगह पर छापामारी करेंगे और जीवन बचाने वाली दवा की ग़ैरक़ानूनी ख़रीद, स्टोरेज और वितरण पर कार्रवाई करेंगे?

अमित चावड़ा ने सवाल उठाया कि अगर इस दवा से किसी मरीज़ पर कोई ग़लत असर हुआ तो कौन ज़िम्मेदारी लेगा? कौन तय करेगा कि ये सही ब्रैंड की दवा है और इसके साथ छेड़छाड़ नहीं हुई है?

गुजरात बीजेपी के प्रवक्ता यमल व्यास का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आने वाले दिनों में बीजेपी रेमेडीवीर इंजेक्शन का वितरण करेगी

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लोगों की सेवा के लिए बांटे इंजेक्शन: भाजपा

गुजरात बीजेपी के प्रवक्ता यमल व्यास ने बीबीसी गुजराती से बात करते हुए कहा कि बीजेपी हमेशा लोगों की सेवा के लिए काम करती है और हमारे कार्यकर्ता काम करते हैं. सूरत में जो रेमडेसिविर बांट रहे हैं वो पार्टी के कार्यकर्ताओं के हैं, जो ख़ुद पैसे ख़र्च करके इंजेक्शन मंगवा रहे हैं और लोगों को बांट रहे हैं.

उन्होंने कहा, "ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार ने जो इंजेक्शन मंगवाए हैं उसमें से 5000 इंजेक्शन लेकर बीजेपी लोगों को बांट रही है. सारे इंजेक्शन भारत के बाहर से मंगवाए गए हैं. ये आपात स्थिति है और लोगों की मदद करने के लिए बीजेपी ने क़दम उठाया है."

"डॉक्टरों के सर्टिफ़िकेट, आरटी-पीसीआर टेस्ट और अन्य काग़ज़ात देखने के बाद लोगों को इंजेक्शन दिया जा रहा है और उसमें प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया जा रहा. इस इंजेक्शन स्टॉक के लिए नहीं पर लोगों को मुफ़्त बांटने के लिए मंगाए गए थे. इमरजेंसी होती है तब सिर्फ़ क़ानून को ध्यान में रखकर नहीं किया जा सकता है."

उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत होगी तो बीजेपी आने वाले दिनों में फिर से इस इंजेक्शन का वितरण करेगी.

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क़ानून क्या कहता है?

गुजरात में दवा की बिक्री की दुकान का लाइसेंस स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम कर रहे फ़ूड और ड्रग्स विभाग द्वारा दिया जाता है. फ़ूड और ड्रग्स विभाग पर दी गई जानकारी के मुताबिक़ किसी भी व्यक्ति को दवा बेचने के लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट, 1940 के तहत लाइसेंस लेना पड़ता है.

फ़ूड ऍन्ड ड्रग्स विभाग की वेबसाइट पर ड्रग्स का लाइसन्स लेने के लिए कई शर्तें भी बताई गई है. ड्रग्स बेचने के लिए दिए जाने वाले लाइसेंस के लिए कुछ योग्यताएं तय की गई हैं.

इसमें कहा गया है कि लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को रजिस्टर्ड फ़ार्मासिस्ट होना चाहिए या लाइसेंस लेने के इच्छुक व्यक्ति को मैट्रिक पास किया होना चाहिए और ड्रग्स क्षेत्र में चार साल का अनुभव होना चाहिए या फिर इस व्यक्ति ने मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी की डिग्री हासिल की हो और ड्रग के कामकाज में साल भर का अनुभव होना चाहिए.

योग्यता शर्तों के बारे में बात करते हुए मेडिसिल एक्सपर्ट चीनु श्रीनिवास ने बीबीसी गुजराती को बताया कि "अगर कोई दवा की रिटेल बिक्री करना चाहता है तो उसके पास फ़ार्मासिस्ट का लाइसेंस होना चाहिए. जबकि थोक बिक्री के लिए दूसरी और तीसरी एलिजिबिलिटी के तहत लाइसेंस मिल सकता है."

इसके अलावा और भी प्रावधान हैं जिसमें बिक्री के लिए योग्य जगह होने की भी बात की गई है. थोक और फुटकर बिक्री के लिए दुकान में दस वर्ग मीटर की जगह होनी चाहिए. इसके अलावा थोक और खुदरा दुकान के लिए 15 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता है.

रेमडेसिविर दवा के 5000 इंजेक्शन बीजेपी लोगों को बांट रही है

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क़ानूनी विशेषज्ञों की राय

गुजरात हाईकोर्ट के वकील आनंद याज्ञिक कहते हैं, "बीजेपी जिस तरह से दवा बांट रही है वो सीधे तरीक़े से फ़ूड एंड ड्रग्स के क़ानून का उल्लंघन है. इसके अलावा सरकार ने इससे पहले जो लोग ऐसा करते थे उनके ख़िलाफ़ महामारी अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं. इसलिए सरकार को इनके ख़िलाफ़ भी केस दर्ज करना चाहिए."

उन्होंने कहा, "अभी कोरोना महामारी के कारण वैक्सीन या कुछ अन्य दवा कंपनियां सीधे बाज़ार में नहीं बेच सकती हैं, ज़्यादातर स्टॉक सरकार को दिया जाता है."

"ऐसे में जीवन बचाने के लिए ज़रूरी दवाओं का इतना बड़ा स्टॉक किसी एक व्यक्ति के पास कहां से आया? सरकार ने इससे पहले भी ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से रेमडेसिविर बेचने वाले लोगों पर कार्रवाई की है. अब भी सरकार को बीजेपी के ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए."

वकील आनंद याज्ञिक इसे संवैधानिक नैतिकता का अंत बताते हैं और कहते हैं, "सीआर पाटील ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे कि वो ख़ुद ही सरकार हों, मुख्यमंत्री और एक पार्टी के प्रदेश प्रमुख में क्या फ़र्क़ है, वो भूल गए हैं."

"बुलेट ट्रेन का मुद्दा हो तो कहते हैं कि मेरे इलाक़े के लोगों को ज़्यादा मुआवज़ा दिलवाऊंगा, मुआवज़ा तय करने की ज़िम्मेदारी क़ानूनी तौर पर कलेक्टर की है. यहां भी जिस इंजेक्शन का इंतज़ाम सरकार को करना चाहिए, उसका इंतज़ाम वो कर रहे हैं. पाटिल क़ानून के दायरे से बाहर जाकर काम कर रहे हैं."

गुजरात हाईकोर्ट के वकील शमशाद ख़ान पठान कहते हैं, "ड्रग्स और कॉस्मेटिक्स क़ानून के तहत लाइसेंस के बिना ड्रग्स बेचने से तीन साल की सज़ा हो या पाँच हज़ार का जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा का प्रावधान है."

वो कहते हैं, "प्रिस्क्रिप्शन के बिना दवाएं नहीं बांटी जा सकती तो सामान्य लोग कैसे इस दवा का वितरण कर सकते हैं. सरकार ने इससे पहले रेमडेसिविर बांट रहे कई लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. एक-दो इंजेक्शन के साथ भी लोगों को पकड़ा गया है. अगर सीआर पाटील सामान्य व्यक्ति होते और कोई पार्टी के नेता नहीं होते तो क्या उनकी गिरफ़्तारी नहीं होती?"

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