कोरोना वायरस के नए मामले महाराष्ट्र में फिर क्यों बढ़ने लगे

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, मयंक भागवत
    • पदनाम, बीबीसी मराठी
अपनी पसंदीदा इंडियन स्पोर्ट्सवुमन को चुनने के लिए CLICK HERE

मुंबई, पुणे और विदर्भ के कुछ ज़िलों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले पिछले कुछ दिनों से तेज़ी से बढ़ रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते संक्रमण ने राज्य सरकार को चिंतित कर दिया है.

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा है कि सरकार अमरावती, अकोला और यवतमाल में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन लगाने पर विचार कर रही है.

वाशिम और वर्धा ज़िलों में कर्फ्यू की घोषणा की जा चुकी है. मुंबई में 12 फ़रवरी से अब तक 4,891 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं.

कोरोना संक्रमण बढ़ने के आख़िर क्या वजहें हैं? हमने कुछ विशेषज्ञों से इसे समझने की कोशिश की है.

1. कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को लेकर सरकारी मशीनरी धीमी है

कोविड-19 एक संक्रामक बीमारी है. यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेज़ी से फैलता है. इसलिए किसी कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले लोगों की ट्रेसिंग बहुत जरूरी है.

महामारी के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग ने अधिक जोखिम वाले लोगों की आक्रामक तरीक़े से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की थी.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और अमरावती के फिजिशियन डॉक्टर टीसी राठौड़ बीबीसी मराठी से बातचीत में कहते हैं, "कोरोना मरीज़ों के संपर्क में आए अधिक जोखिम वाले लोगों की ट्रेसिंग बहुत ज़रूरी है. लेकिन अमरावती में सरकारी मशीनरी इस मामले में धीमी है. यहाँ मरीज़ों की संख्या बढ़ने के पीछे यह एक वजह है."

12 फ़रवरी से अब तक अमरावती में 3000 नए कोरोना संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं. सिर्फ़ 18 फ़रवरी को ही 542 नए मामले अमरावती में सामने आए. अमरावती के कुछ ज़िले कोरोना संक्रमण के लिहाज से हॉटस्पॉट में तब्दील होते जा रहे हैं.

अमरावती ज़िला प्रशासन ने संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए कर्फ्यू के आदेश दिए हैं. लॉकडाउन शनिवार शाम से सोमवार सुबह तक के लिए घोषित की गई है.

डॉक्टर राठौड़ कहते हैं, "लोग पहले सजग थे और वो नियमों का पालन कर रहे थे लेकिन अब लोग नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं. ज़िले में इसकी वजह से भी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं."

2. शादी समारोह पूरे धूमधाम से हो रहे हैं

लॉकडाउन की पाबंदियों के हटाए जाने के बाद शादी समारोह बड़े पैमाने पर आयोजित किए जा रहे हैं. हालांकि अब भी शादी में सिर्फ़ 50 लोगों के शामिल होने की ही इजाज़त है लेकिन इस सीमा का हर जगह उल्लंघन किया जा रहा है.

कोरोना के बढ़ते मामलों की यह एक वजह हो सकती है.

कोविड-19 को लेकर गठित निगरानी इकाई के प्रमुख डॉक्टर प्रदीप अवाते कहते हैं,"मराठवाड़ा और विदर्भ में शादी समारोह धूमधाम से मनाए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में लोग इन शादियों में इकट्ठा हो रहे हैं जिस तरह से कोरोना के पहले होते थे. इससे बचा जाना चाहिए."

मुंबई और दूसरे ज़िलों में शादियों को लेकर पाबंदी लगा दी गई है.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

बृह्णमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एडिशनल कमिशनर सुरेश ककाणी ने बीबीसी मराठी से बातचीत में कहा, "सिर्फ़ 50 रिश्तेदारों को शादी में शामिल होने की इजाज़त है. अगर इससे ज्यादा लोग शादी समारोह में दिखे तो उन्हें कार्रवाई झेलनी होगी."

यवतमाल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर स्वप्निल मंकर कहते हैं, "500-1000 लोग शादी समारोह में शामिल होते हैं. वो बिना मास्क के इधर-उधर धूमते रहते हैं. नियमों का पालन नहीं किया जाता है. कोरोना के बढ़ते मामलों के पीछे यह एक वजह है."

एक डॉक्टर ने बीबीसी से नाम ना बताने की शर्त के साथ कहा कि, "मेरे पड़ोसी के घर में जनवरी के महीने में शादी थी. कुछ ही दिनों के बाद दुल्हन और उसके दो-तीन परिवार के सदस्य कोरोना पॉज़िटिव पाए गए."

बीएमसी ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वो मैरेज हॉल में छापा मारें और हॉल मैनेजर और घरवालों पर केस दर्ज करें.

3. ग्रामपंचायत चुनाव भी एक वजह हो सकती है?

क़रीब 14 हज़ार से ज्यादा ग्रामपंचायतों में जनवरी के महीने में चुनाव हुए थे. ग्रामीण क्षेत्रों में जमकर चुनाव प्रचार हुए थे. लोग चुनाव प्रचार और फिर वोट देने के लिए बड़ी संख्या में अपने घरों से निकले थे.

डॉक्टर प्रदीप अवाते ग्रामपंचायत चुनावों को कोरोना के बढ़ते मामलों की एक प्रमुख वजह बताते हैं.

वो कहते हैं, "शहरों में रहने वाले अपने-अपने गाँवों में मतदान करने गए थे. जमकर चुनाव प्रचार भी हुए. लोग एक-दूसरे से मिले जुले. कोरोना के मामले अमरावती और सतारा ज़िलों के कुछ सुदूर इलाक़ों में बढ़े हैं."

डॉक्टर प्रदीप अवाते कहते हैं कि यह ग़ौर करने वाली बात है कि इन इलाक़ों में ग्रामपंचायत के चुनाव हुए हैं. आईएमए के डिप्टी प्रेसिडेंट डॉक्टर अनिल पाचनेकर कहते हैं, "हम सिर्फ़ लोकल ट्रेन को कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए ज़िम्मेवार नहीं ठहरा सकते हैं. नेता बड़ी-बड़ी रैलियाँ और कार्यक्रम कर रहे हैं. लोग अब कोरोना से नहीं डर रहे हैं. नगरपालिका भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम हो रही है. ऐसी कई बाते हैं जो कोरोना के बढ़ते मामलों के लिए ज़िम्मेदार हैं."

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

4. मास्क पहनने को लेकर कोताही

सार्वजनिक जगहों पर कई लोग अपने मास्क या तो ठुड्डी पर रख कर घूम रहे हैं या फिर गले में लटका कर. कुछ तो हाथों में लेकर भी चल रहे हैं. कुछ बिना मास्क के दिखाई पड़ रहे हैं.

डॉक्टर पदमाकर सोमवंशी अमरावती के डॉक्टर पंजाब राव देशमुख मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन हैं. वो कहते हैं, "मास्क लोग और समाज की सुरक्षा के लिए जरूरी है. लेकिन ऐसा लगता है कि लोग इसे भूल चुके हैं. वो मास्क सिर्फ़ पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए पहन रहे हैं. वो यह नहीं समझ रहे हैं कि ये उनकी अपनी सुरक्षा के लिए है."

विशेषज्ञों को ऐसा लगता है कि मास्क को लेकर लोगों का यह बदलता रवैया भी कोरोना संक्रमण बढ़ने का एक कारण है.

अमरावती में 15 फरवरी से कॉलेज खुलने वाले थे लेकिन अब कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी गई है.

बीएमसी ने लोकल ट्रेन में बिना मास्क सफर करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए 300 मार्शल तैनात किए हैं.

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

5. मौसम में बदलाव

राज्य में पिछले कुछ दिनों से फिर से ठंड महसूस की जा रही है. उत्तर भारत में ठंडी हवा चलने की वजह से महाराष्ट्र के कई ज़िलों में तापमान गिर गया है.

डॉक्टर प्रदीप अवाते कहते हैं, "हमें ठंड के मौसम से भी अधिक अभी ठंडी का सामना करना पड़ रहा है. इससे संक्रमण में इजाफा हो रहा है."

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद हुई शिक्षकों की कोरोना जांच में उनमें से कुछ कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.

6. लोग महामारी को लेकर गंभीर नहीं रहे

पिछले कुछ दिनों में यवतमाल जिले में 692 कोरोना के सक्रिय मामले रजिस्ट्र किए गए हैं. 465 मरीजों की जान गई है. पिछले 24 घंटों में यवतमाल में 131 नए मरीज़ सामने आए हैं.

यवतमाल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर स्वप्निल मंकर का मानना है, "लोगों में अब डर नहीं रह गया है. वो सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं."

डॉक्टर राठौड़ कहते है, "पहले लोग सजग थे. वो नियमों का पालन कर रहे थे. लेकिन अब नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं."

कोरोना

इमेज स्रोत, Getty Images

7. कोरोना के ख़त्म होने को लेकर ग़लतफ़हमी

लोगों में अब भी कोरोना को लेकर बहुत ग़लतफ़हमियाँ हैं. सबसे बड़ी गल़तफ़हमी यह है कि वास्तव में कोरोना जैसी कोई चीज़ है ही नहीं.

डॉक्टर पदमाकर सोमवंशी कहते हैं, "लोग इस प्रौपेगेंडा में फंस जाते हैं कि कोरोना जैसा कुछ भी नहीं है. इसकी वजह से कई तरह की गलतफहमियाँ पैदा हो रही हैं. अशिक्षित लोग इसके शिकार हो रहे हैं."

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे तो लॉकडाउन के अलावा इस पर नियंत्रण करने को लेकर कोई दूसरा चारा नहीं रह जाएगा.

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दो दिनों पहले नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सख्त कदम उठाने की घोषणा की है.

BBC ISWOTY

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)