कोरोना वैक्सीन लगने के बाद क्या मास्क से छुटकारा मिल जाएगा?

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भारत की संसद में मंगलवार से कामकाज पुराने समय यानी सुबह 11 बजे से शुरू हो गया है.
भारत में जनता इसे वैक्सीन आने के बाद परिस्थितियों के नॉर्मल होने से जोड़ कर देख रहे हैं.
दूसरी तरफ़ अमेरिका ने भी अपनी जनता के लिए कोरोना वैक्सीन के मद्देनज़र नई गाइडलाइन जारी की है. नए निर्देशों के मुताबिक़ जिन लोगों को कोरोना का टीका लग चुका है, वो घर पर बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के दूसरे लोगों के साथ मिल जुल सकेंगे. बशर्ते ऐसी जगह पर जमा सभी लोगों को कोरोना का टीका लग चुका हो.
हालाँकि अमेरिका में अब भी बड़ी भीड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ज़रूरी है.
इन दोनों बातों से अगर आप ये निष्कर्ष निकाल रहे हैं अब जल्द ही मास्क से छुट्टी मिलने वाली है, तो थोड़ा ठहर जाइए.

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मास्क से छु्ट्टी
भारत में मास्क से छुट्टी कब मिल सकती है, इसी की पड़ताल करती है ये रिपोर्ट.
एम्स में ह्यूमन ट्रायल के प्रमुख डॉ. संजय राय के मुताबिक़, मास्क पहनना है या नहीं इसके दो आधार हो सकते हैं. एक वैज्ञानिक आधार और दूसरा सामाजिक आधार.
वैज्ञानिक आधार के बारे में वो कहते हैं, "कोई भी टीका सौ फीसद रिस्क कवर नहीं करता है. लेकिन इतना ज़रूर है कि इस तरह के वायरस में धीरे-धीरे इंफेक्शन का रिस्क कम होता जाता है. वैक्सीन लगे या ना लगे. जो लोग बीमार हो कर ठीक हो जाते हैं, वो लोग बीमारी के ख़िलाफ़ 'प्रोटेक्टेड पूल' तैयार करते हैं, जिसमें टीका लगने वाले लोग धीरे-धीरे जुड़ते चले जाते हैं.
इसलिए ये कहना कि वैक्सीन लगे लोगों में ही सिर्फ़ कोरोना संक्रमण का रिस्क कम है, ये सही नहीं है. बीमारी से ठीक हुए लोगों पर भी ये बात लागू होती है. वैज्ञानिक आधार पर दोनों तरह के लोगों को मास्क पहनने से छूट दी जा सकती है."
लेकिन डॉ. संजय वैज्ञानिक आधार को सामाजिक आधार से जोड़ते हुए आगे कहते हैं, "अगर बाहर दो लोग मास्क नहीं पहनेंगे तो बाक़ी लोग भी मास्क पहनना छोड़ देंगे. भीड़ में ये पहचानना कि किसे बीमारी हुई थी, किसने टीका लगा है, ये मुश्किल होता है. इसलिए किसी भी जगह जहाँ लोगों का जमावड़ा है वहाँ मास्क पहनना जरूरी किया गया है. जब तक भारत में ये नियम लागू है, जनता को इसे फॉलो करते रहना चाहिए. वरना अचानक से कोरोना के मामलों में इजाफा देखने को मिल सकता है."

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बीबीसी ने दूसरे विशेषज्ञ आईसीएमआर के साथ में पूर्व में जुड़े महामारी विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉक्टर रमन गंगाखेडकर से भी इस बारे में बात की. उन्हें अमेरिका के इस फैसले पर थोड़ी हैरानी है.
बीबीसी से बातचीत में वो कहते हैं, "जिनको टीका लगा हो और आपको उनके बारे में पता हो, तो ऐसे दो-तीन लोगों के जुटने की बात समझ आती है. लेकिन उसके अलावा लोग बिना मास्क के लोग एक दूसरे से मिलने लगे तो दिक़्क़त की बात है. लोगों ने टीका लगवाया है ये कैसे पता चलेगा और कोई ऐसी झूठी जानकारी नहीं दे रहा, इसके बारे में दूसरे लोग आश्वस्त कैसे हो सकते हैं?"
वो इस फैसले से जुड़ी दूसरी परेशानी भी बताते हैं. दुनिया भर में कोरोना वायरस के नए म्यूटेंट वैरायटी भी अब सामने आ रहे हैं. इसके बाद वैक्सीन म्यूटेंट वैरायटी के वायरस पर कितनी सेफ़ होगी ऐसे सवाल भी उठने लगे हैं. ऐसे में लोगों को मास्क ना पहनने के लिए बोलना थोड़ा हैरान ज़रूर करता है.
दुनिया में कोरोना वायरस के चार नए वैरिएंट की चर्चा हो रही है.
इसलिए डॉ. गंगाखेडकर को लगता है कि जब मुकाबला अंजान दुश्मन से हो, तो तैयारी सबसे बुरे दौर के हिसाब से करनी चाहिए. कोविड-सेफ़ प्रोटोकॉल के मुताबिक़ मास्क लगाना अच्छा माना गया है.
मास्क पहनने से कोरोना का ख़तरा कितना कम होता है?
दरअसल कोरोना महामारी के पता चलने के बाद बीमारी से बचने के लिए दो बातों का ख्याल रखने के लिए कहा गया.
पहला था समय-समय पर 20 सेंकेड के लिए हाथ धोना और दो गज़ की दूरी का पालन करना. उसके बाद काफी विचार विमर्श के बाद उसमें मास्क लगाने को ज़रूरी बताया गया. अलग-अलग स्टडी के आधार पर कहा जा रहा है कि कोविड-सेफ़ प्रोटोकॉल ( जिसमें तीनों बातें शामिल हैं) का पालन कर संक्रमण को 60 से 80 फीसदी तक रोका जा सकता है.
भारत उन चंद देशों में था जिसने मास्क पहनने के लिए ज़रूरी निर्देश सबसे पहले जारी किया था. ख़ुद प्रधानमंत्री की पहल पर इसे अनिवार्य बनाया गया था. लेकिन टीकाकरण के शुरू होने के बाद जनता को लगने लगा है कि अब जल्द ही मास्क से निजात मिल जाएगी.

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भारत में लोगों को मास्क कब तक पहनना होगा?
यहाँ ग़ौर करने वाली बात ये है कि अमेरिका में मास्क ना पहनने का नियम, कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ ले चुके लोगों पर लागू होता है.
भारत में 16 जनवरी से कोरोना का टीका लगना शुरू हुआ है.
पहले चरण में फ्रंटलाइन वर्कर को लगा और दूसरे चरण में 60 साल से ऊपर और 45 साल वालों को जिनको दूसरी बीमारी है. लेकिन अभी भी 135 करोड़ की आबादी में से केवल 2 करोड़ 30 लाख लोगों को टीका लगा है. इसमें बीमारी से ठीक हुए लोग भी शामिल हैं.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घर के अंदर की पार्टियों या छोटे जमावड़े में भारत में मास्क ना पहनने वाली स्थिति कब आएगी?

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इस सवाल के जवाब में डॉ. संजय कहते हैं, "वो स्थिति आएगी लेकिन कब, ये कहना मुश्किल है. दिल्ली का सीरो सर्वे बताता है कि पचास फीसदी से ज़्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. इसका मतलब पचास फीसद कोरोना से बचे हुए हैं और पचास फीसद को कोरोना अभी भी, कभी भी हो सकता है. उस पचास फीसद को बचाने के लिए फिलहाल मास्क पहनना जरूरी है."
डॉ. रमन गंगाखेडकर कहते हैं, "भारत में मास्क ना पहनने वाली स्थिति कब आएगी ये टीकाकरण अभियान की तेज़ी पर निर्भर करता है. कोरोना संक्रमण से ठीक हुए लोगों पर अमेरिका की फाइज़र वैक्सीन सी जुड़ी रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है कि वैक्सीन की एक डोज़ से उनका काम चल जाएगा. अगर भारत में इस्तेमाल होने वाली पर ऐसी रिपोर्ट आ जाए, तो भारत भी जल्दी ही अपने टीकाकरण के टारगेट को पूरा कर पाएगा. इसके लिए हमें ऐसे सभी लोगों को ढूंढना होगा जिनको बीमारी हुई हो. भारत में ऐसे कई लोग हैं जिनको पता भी नहीं चला और वो कोरोना से ठीक हो गए."
इसलिए मास्क नहीं पहनने की स्थिति का टाइमलाइन देना थोड़ा मुश्किल है.
डॉ. गंगाखेडकर इसी बात को एक दूसरे तर्क से समझाते हैं.
"टीकाकरण अभियान के शुरू होने के दो महीने बाद भी भारत में केवल दो करोड़ जनता को टीका लग पाया है. जबकि अमेरिका में लगभग 27 फीसद आबादी को कोरोना टीका लग चुका है.
अमेरिका का टीकाकरण अभियान और भारत के टीकाकरण अभियान में एक और बुनियादी अंतर है. भारत में टीकाकरण बुजुर्गों में कोरोना से होने वाली मौत को कम करने के लिए है. वैसे भी इस उम्र के बुजुर्ग, जवान जनसंख्या के मुकाबले कम ही बाहर आना जाना करते हैं.
जबकि अमेरिका में टीकाकरण अभियान कोरोना वायरस के ट्रांसमिशन चेन को तोड़ने के लिए लिहाज से किया जा रहा है. वहाँ हर शख्स को टीका लगाया जा रहा है इसलिए भारत, अमेरिका की स्थिति में कब पहुँचेगा, यह बताना मुश्किल है."

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वैक्सीन लगने के बाद कितने महीने तक रहेंगे सेफ़?
दरअसल वैक्सीन की पहली डोज़ लगने के बाद भी संक्रमण का ख़तरा पूरी तरह नहीं टलता.
वैक्सीन से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक़ टीके के दूसरे डोज़ के दो हफ्ते बाद ही संक्रमण का ख़तरा पूरी तरह कम होता है. इसलिए पहले डोज़ के बाद मास्क ना लगाना, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान ना देने से संक्रमण का ख़तरा बना रहता है.
अब सवाल उठ रहे हैं कि वैक्सीन लगने के बाद या फिर कोरोना बीमारी से ठीक होने के बाद, कितने वक़्त तक कोरोना से बचे रह सकते हैं?
इस पर डॉ. संजय कहते हैं, "अलग - अलग स्टडी में पाए गए सबूतों के आधार पर कहा जा रहा है कि एक बार कोरोना होने के बाद 7 महीने तक दोबारा कोरोना नहीं हो सकता. वैक्सीन लगने के बाद 6 महीने तक आप सेफ़ हैं. बीमारी होने के बाद वाले एंटी-बॉडी, वैक्सीन के मुकाबले ज़्यादा दिन तक असर करते हैं."
ऐसी सूरत में वैक्सीन या बीमारी होने के बाद मास्क हटा लेना कितना कारगर होगा?
इस पर डॉ. संजय कहते हैं, जो एंटी-बॉडी 7 महीने तक बचाएगी, वो अचानक 8वें महीने में गायब नहीं हो जाएगी. इस पर समय बीतने के साथ और शोध होंगे, उस पर भी कई बातें निर्भर करेंगी.
इसलिए एक तर्क ये भी दिया जा रहा है कि जो लोग बीमारी से ठीक हो गए हैं उनको टीका नहीं लगाना चाहिए. इससे भारत में टीकाकरण अभियान में और तेज़ी आ सकती है.
लेकिन डॉ. रमन गंगाखेडकर कहते हैं कि ऐसी रिपोर्ट कुछ दिन पहले ही आई है. उससे पहले भारत सरकार ने जितने सबूत पहले से मौजूद से उनके आधार पर फैसला लिया था कि बीमारी से लड़ चुके लोगों को वैक्सीन के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता. हो सकता है आने वाले दिनों में सरकार इसके लिए नए नियम बनाए.
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