नताशा नरवालः पिता के आख़िरी वीडियो कॉल का इंतज़ार पूरा न हो सका

नताशा नरवाल पिता के साथ

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    • Author, कीर्ति दुबे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

''कभी-कभी नेगेटिव फ़ोर्स से भर जाता हूँ तो दिमाग़ में आता है कि अगर मेरी बेटी को लंबे वक़्त तक जेल में रहना पड़ा और मैं उसे देख ही ना पाऊं...ग्रोइंग एज (बढ़ती उम्र) में ऐसी बात कई बार दिमाग़ में आती है, उसे नहीं आती. उसे आनी भी नहीं चाहिए. हम तो अपना ग़म छुपा लेते हैं कुछ-कुछ बोल कर.''

बीते साल नवंबर में नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल ने जब ये बात कही थी, तो उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि आने वाले कुछ महीनों में ही उनका ये डर सच हो जाएगा.

दिल्ली दंगों से जुड़े 'साज़िश' के एक मामले में जेल में बंद जेएनयू की छात्रा और पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य नताशा नरवाल के पिता महावीर नरवाल का रविवार की रात निधन हो गया. वो कोरोना संक्रमित थे और बीते चार दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी.

पिता की मौत के बाद सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने नताशा को 50,000 के मुचलके पर तीन हफ़्ते की अंतरिम ज़मानत दी है.

आख़िर तक नताशा के वीडियो कॉल का इंतज़ार

अस्पताल जाने से पहले महावीर नरवाल ने अपने बेटे आकाश से एक ज़िद की थी कि वीडियो कॉल पर उनकी नताशा से बात करवाई जाए, आकाश ने वादा भी किया, लेकिन कई कोशिशों के बाद भी आकाश अपने पिता से किया आख़िरी वादा पूरा नहीं कर पाए. आकाश कहते हैं कि मुझे तो ये भी नहीं पता था कि ये उनकी आख़िरी ज़िद थी.

27 साल के आकाश नरवाल अपने पिता के साथ आख़िरी वक़्त साथ नहीं रह सके, वह इस वक़्त ख़ुद कोविड पॉज़िटिव हैं और होम आइसोलेशन में रह रहे हैं.

बीबीसी से आकाश ने बताया, "नताशा के साथ पापा बहुत क्लोज़ (क़रीब) थे, जेल से हर 10 दिन पर अर्जी देकर वीडिया कॉल की परमिशन ली जाती है, तो पापा को हमेशा 10वें दिन का इंतज़ार रहता और वो भी पापा के फ़ोन का इंतज़ार करती थी. बीते अप्रैल से पता नहीं क्यों वीडियो कॉल की इजाज़त मिलनी बंद हो गई. 3 मई को जैसे ही वीडियो कॉल की सुविधा फिर शुरू की गई तो सबसे पहला काम यही किया कि हमने कॉल की अर्जी डाली, तीन मई को ही पापा की तबीयत ख़राब हुई तो अस्पताल ले जाना पड़ा. वह बार-बार यही पूछते रहे कि वीडियो कॉल का क्या हुआ?''

महावीर नरवाल

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''दो दिन लग गए जेल से वीडियो कॉल की परमिशन मिलने में. 5 मई तक पापा का ऑक्सीज़न लेवल बहुत नीचे आ चुका था, वो ऑक्सीज़न मास्क लगा कर सोते ही रहते थे. अस्पताल में नेटवर्क भी नहीं था, इतनी कोशिश की, लेकिन आखिरी बार बात....'' आकाश अपना वाक्य पूरा किए बिना चुप हो जाते हैं,

बीते साल जुलाई के आख़िर में दिल्ली दंगों से जुड़ी एक कहानी के सिलसिले में मैंने महावीर नरवाल से फ़ोन पर बात की थी. 70 साल के महावीर नरवाल ने काँपती लेकिन बेहद मज़बूत आवाज़ में एक बात कही, जो मेरे ज़ेहन में रह रह कर आ रही है- ''आई फर्मली बिलीव (मुझे गहरा यक़ीन है) कि बदलाव बेटियाँ ही लाएँगी...आपके जैसी, नताशा जैसी.''

कुछ देर शांत रहने के बाद आकाश कहते हैं कि बीते एक साल से यहीं हूँ पापा के साथ, जब से दीदी को गिरफ्तार किया है और लॉकडाउन है तब से यहीं हूँ, कुछ ठीक नहीं हो रहा हमारे साथ एक साल से, सब कुछ लगता है बिखरता जा रहा है.

आकाश कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविज़न इस्टीट्यूट से एनिमेशन प्रोडक्शन का कोर्स कर रहे है.

अपनी बहन की ज़मानत की ख़बर ने उन्हें गहरे काले दुख को सहने का थोड़ा सा बल दिया है. नताशा को ज़मानत मिलने पर मेरे सवाल के पूरा होने से पहले ही आकाश कहते हैं, '' आपको नहीं बता सकता कि बस इस एक ख़बर ने मेरे अंदर के ख़ालीपन को कितना भर दिया है, वो आ जाएगी तो कुछ देर के लिए ही कुछ ठीक होगा, दीदी को देख लूँगा तो बहुत कुछ आसान हो जाएगा हम दोनों के लिए.''

आकाश के मुताबिक़ जब उनके पिता की हालत बिगड़ी तो 4-5 मई को ही नताशा की अंतरिम ज़मानत के लिए अर्ज़ी दी गई थी, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई की तारीख़ सोमवार को तय की गई. लेकिन ये सुनवाई हो पाती इससे पहले ही महावीर नरवाल दुनिया को अलविदा कह चुके थे.

बीबीसी ने नताशा नरवाल के वकील अदित पुजारा से फ़ोन के ज़रिए संपर्क किया, लेकिन चूँकि ये मामला कोर्ट में है, इसलिए उन्होंने हमसे बात करने से इनकार कर दिया.

ज़मानत देते समय कोर्ट ने नताशा नरवाल को भी मीडिया से बात करने और सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट शेयर करने पर रोक लगाई है.

जहाँ भी पीड़ा है, वहाँ मेरी बेटी ज़रूर होती है- महावीर नरवाल

नताशा महज 13 साल की थी, जब उनकी माँ का निधन हो गया. उनके पिता ने ही दोनो भाई-बहन को पाला. महावीर नरवाल हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में बतौर कृषि वैज्ञानिक काम किया करते थे.

नताशा नरवाल

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बीते साल बीबीसी से बात करते हुए महावीर नरवाल ने कहा था, ''नताशा मुझसे बहुत क़रीब है या ये कहूँ कि मेरा उससे बहुत लगाव है. जब उसको एकांत चाहिए होता है या कुछ पढ़ना होता है तो वह रोहतक आ जाती है मेरे पास.''

''मुझे उस पर गर्व है, कौन कहता है जेल बुरी जगह है बदलाव ऐसे ही नहीं आते लड़ना होता है, वो लड़ रही है.''

बीते साल एक अन्य वीडियो इंटरव्यू में महावीर नरवाल ने अपनी बेटी नताशा के बारे में कहा था, ''सफ़दर हाशमी का एक शेर है- महिलाएँ ना उठीं तो ज़ुल्म बढ़ेगा. मैं मानता हूँ कि महिलाओं को उठना ही होगा. मैं ये तो नहीं कहूँगा कि मेरी बेटी चैम्पियन है लेकिन ये ज़रूर कहूँगा कि जहाँ सफ़र्रिंग (पीड़ा) है, वहाँ वो ज़रूर साथ खड़ी मिलेगी. ''

नताशा को वक्त रहते ज़मानत ना मिलने पर लोगों का ग़ुस्सा

महावीर नरवाल की मौंत और बेटी को देखने की उनकी आख़िरी ख्वाहिश का पूरा ना हो सकने ने लोगों के बीच ग़ुस्सा और मायूसी भर दी है.

जानी-मानी वकील वृंदा ग्रोवर ने नताशा के पिता की मौत पर सोशल मीडिया पर लिखा, ''इस देश को क़ब्रगाह बना दिया गया है और हमें विलाप करने के लिए छोड़ दिया गया है. मैं कभी महावीर नरवाल से नहीं मिली लेकिन उन्हें कई वेबिनार में सुना है. हमें पॉलिटिकल पैरेंटिंग सिखाने और क़दम से क़दम मिला कर कैसे खड़ा रहना है ये सिखाने के लिए शुक्रिया कॉमरेड. हम इस इस गहरे दुख में तुम्हारे साथ खड़े हैं नताशा. ''

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''दिल्ली, मुंबई, कश्मीर, असम किसी भी जगह, राजनीतिक बंदियों को इस तरह जेल में रखना सरासर ग़लत है.''

स्वराज इंडिया के प्रमुख योंगेंद्र यादव ने भी उनकी मौत पर लिखा है, ''खेती और समाज पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण के धनी और एक बहादूर बेटी के पिता डॉ. महावीर नरवाल नहीं रहे. कुछ महीने पहले जब मुलाक़ात हुई थी तो उन्हें नताशा से ज़्यादा देश की चिंता थी. ''

जानी-मानी वकील इंदिरा जयसिंह ने भी ट्विटर लिखा है, ''हमारी न्यायिक व्यवस्था कितनी सड़ चुकी है. नताशा के पिता अपनी बेटी को ज़मानत मिलने के इंतज़ार में मर गए.''

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फ़हद अहमद नाम के एक यूज़र ट्विटर पर लिखते हैं, ''नताशा नरवाल के पिता का इंटरव्यू सुना औप पता चला कि नताशा के अंदर नफ़रत और फासिज़्म से लड़ने की इतनी हिम्मत आख़िर कहां से आई. आज उनके पिता जिंदा नहीं हैं, उन्हें अपनी बेटी से आखिरी बार मिलने का मौका नहीं दिया."

रेडियो मिर्ची की रेडियो जॉकी सायमा लिखती हैं, ''वह मेरे हीरो हैं, महावीर अंकल, हम कभी नहीं मिले लेकिन आप मुझे हमेशा प्रेरणा देंगे. हमें आपकी बेटी नताशा नरवाल पर गर्व है. आप अपनी बेटी के ज़रिए ज़िंदा रहेंगे. ''

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नताशा पर कितने केस हैं और कितनों में मिल चुकी है ज़मानत

बीते साल जब देश में लॉकडाउन लगाया गया था उसी दौरान 23 मई, 2020 को नताशा नरवाल को पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए बुलाया गया और फिर एफ़आईआर संख्या 48 में गिरफ्तार किया गया. उन पर आरोप लगा कि उन्होंने जाफ़राबाद मेट्रो स्टेशन पर हिंसा से एक दिन पहले एंटी सीएए प्रदर्शन का आयोजन किया.

24 मई को ही मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने इस मामले में उन्हें ज़मानत देते हुए कहा, ''अभियुक्त केवल एनआरसी और सीएए के खिलाफ़ प्रदर्शन कर रही थीं और ऐसा करना इस आरोप को साबित नहीं करता कि वे किसी हिंसा में शामिल थीं.''

नताशा नरवाल

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ठीक इसी दिन वह जेल से बाहर निकलती, इससे पहले ही उन्हें दूसरी एफ़आईआर 50 में गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि दोनों ही लड़कियाँ दिल्ली दंगों की साज़िश रचने में शामिल हैं. इस मामले में एक वॉट्सऐप मैसेज को आधार बनाया गया है. जिसका शीर्षक है- 'दंगे के हालात में घर की औरतें क्या करें.'

29 मई को नताशा नरवाल को एफ़आईआर 59 में गिरफ़्तार कर लिया गया. और इसके साथ ही उन पर एंटी- टेरर क़ानून यूएपीए की धाराएँ लगा दी गईं.

17 सितंबर, 2020 को जब एफ़आईआर संख्या 59 में पहली चार्जशीट दाख़िल की गई तो ठीक उसी दिन नताशा को एफ़आईआर 50 में कड़कड़डूमा कोर्ट की ओर से ज़मानत मिल गई थी.

नताशा तीन दंगों से जुड़े केस में अभियुक्त हैं, जिनमें से दो केस में उन्हें ज़मानत मिल चुकी है. और एफ़आईआर संख्या 59 में उन्हें पिता की मौत के बाद अंतरिम ज़मानत पर रिहा किया गया है.

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