केरल चुनाव: मतदान कब और कितने चरण में होगा

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अन्य राज्यों के साथ-साथ केरल में भी इस बार विधानसभा चुनाव होना है. वामपंथी सरकार जहां अपनी सत्ता बचाने में लगी होगी, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन सत्ता की चाबी हासिल करने की कोशिश करेगा.
वहीं बीजेपी की कोशिश होगी कि वो केरल में अपनी ज़मीन को मज़बूत कर सके. सभी दल पूरे ज़ोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं.
केरल में चुनाव कब हैं?
केरल में एक चरण में 6 अप्रैल 2021 को चुनाव होगा.
केरल चुनाव के नतीजे कब आएंगे?
मतों की गिनती 2 मई 2021 को होगी और पता चल जाएगा कि इस बार सरकार किसकी बनेगी.
केरल में कितनी सीटों पर चुनाव हो रहे हैं?
केरल विधानसभा की 140 सीटें हैं. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 1 जून 2021 को ख़त्म हो जाएगा.
केरल विधान सभा चुनाव में कौन-सी पार्टियां मैदान में हैं?
इस वक़्त केरल की सत्ता पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाला लेफ़्ट मोर्चा काबिज़ है. दिसंबर के स्थानीय निकाय चुनाव जीतने के बाद लेफ्ट मोर्चे की उम्मीदें बढ़ गई हैं कि वो केरल में अपनी सत्ता बनाए रखकर चुनावी इतिहास रचने वाली पहली सरकार बन सकते हैं.
इस बीच पूर्व रक्षा मंत्री और तीन बार केरल के मुख्यमंत्री रह चुके एके एंटनी ने इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़) की सरकार बनने का विश्वास जताया है.
इस वक़्त बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की केरल विधानसभा में महज़ एक सीट है. हालांकि पार्टी के वरिष्ठ नेता एमटी रमेश ने कहा है कि बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी हासिल करेगी.

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केरल में कितने वोटर हैं?
चुनाव आयोग के मुताबिक़, केरल में 2.67 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं. इनमें 1.37 करोड़ महिला मतदाता और 1.29 करोड़ पुरुष मतदाता और 221 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं.
केरल में कितने चरण में चुनाव होगा?
केरल विधानसभा के लिए 6 अप्रैल को एक चरण में चुनाव होगा. कोविड महामारी को देखते हुए केरल में पोलिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई गई है.
चुनाव में जीत कैसे तय होगी?
केरल विधानसभा चुनाव में जीत तय करने वाला जादुई आंकड़ा है 71.

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मुख्य उम्मीदवार और मुख्य निर्वाचन क्षेत्र कौन से हैं?
लेफ़्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ़)
पिनराई विजयन (सीपीएम) - धर्मदम, कन्नूर ज़िला
केके शैलजा (सीपीएम) - मत्तानूर, कन्नूर ज़िला
के. सुरेंद्रन (सीपीएम) - कज़हाकूट्टम, तिरुवनंतपुरम
मर्सीकुट्टी अम्मा (निर्दलीय) - कुंदारा, कोल्लम ज़िला
एमबी राजेश (सीपीएम) - थ्रिथला, पलक्कड़ जिला
केटी जलील (निर्दलीय) - थावनूर, मलप्पुरम ज़िला
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ़)
ओमान चांडी (कांग्रेस) - पुट्टुपल्ली, कोट्टायम ज़िला
रमेश चेन्निथला (कांग्रेस) - हरिपद, अलापुझा ज़िला
मुल्लापल्ली रामचंद्रन - वटाकारा
के मुरलीधरन (कांग्रेस) - नेमोम, तिरुवनंतपुरम
पीके कुन्हालीकुट्टी (आईयूएमएल) - वेंगारा, कोझीकोड
नूरबीना राशिद (आईयूएमएल) - कोझीकोड साउथ, कोझीकोड ज़िला
नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीए)
के सुरेंद्रन (बीजेपी) - मंजेश्वर, कासरगोड ज़िला, और कोन्नी, पठानमथिट्टा ज़िला
कुम्मनम राजशेखरन (बीजेपी) - नेमोम, तिरुवनंतपुरम ज़िला
शोभा सुरेंद्रन (बीजेपी) - कज़हाकूट्टम, तिरुवनंतपुरम ज़िला

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चुनाव के प्रमुख मुद्दे क्या हैं?
भ्रष्टाचार: ये तो सभी जानते हैं कि एलडीएफ़ हर तरह के संकट से निपटी है - जिसमें तूफान, बाढ़, निपा वायरस, कोविड शामिल हैं. लेकिन चुनाव में सोने की तस्करी जैसे मामलों से जुड़े भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए जा रहे हैं.
इसके अलावा सबरीमाला इस बार के चुनाव में एक बड़ा मुद्दा है. ख़ासकर सेंट्रल और दक्षिण केरल में.
साथ ही चर्चा इस बात की भी हो रही है कि बीजेपी किसका वोट लेगी - एलडीएफ़ का या यूडीएफ़ का.
केरल के पिछले चुनाव में क्या हुआ था?
2016 के केरल विधानसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 58 सीटें जीती थीं, कांग्रेस ने 22, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 19, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 18, केरल कांग्रेस (एम) ने 6, जनता दल (सेकुलर) ने 3, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 2 और बीजेपी ने 1 और अन्य ने 11 सीट जीती थीं.
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