ग़ाज़ीपुर बॉर्डर: बीते 24 घंटों में कैसे बदली किसान आंदोलन की सूरत

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- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
दिल्ली-ग़ाज़ीपुर बॉर्डर वो जगह है जहाँ पर गुरुवार शाम से सबकी निगाहें जमी हुई हैं.
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर दो महीनों से तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों का विरोध-प्रदर्शन चल रहा है.
हज़ारों लोगों का जमावड़ा, नारे, भाषण, वाद-विवाद, चर्चाएँ और मीडिया का जमावड़ा वहाँ रोज़ का नज़ारा है.
लेकिन, गुरुवार को ग़ाज़ीपुर बॉर्डर की सूरत बिल्कुल अलग थी. एक समय ऐसा लगा कि जैसे दो महीने से आंदोलन का एक केंद्र रहा यह धरना-स्थल देर रात खाली करा लिया जाएगा. सोशल मीडिया पर भी इस तरह का ट्रेंड तेज़ी से चलने लगा.
लेकिन, सुबह तक नज़ारा कुछ और ही था. धरना-स्थल पर प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ गई थी और माहौल में तनाव कम हो गया था.
गिरफ़्तारी और धरना-स्थल को खाली करने के अनुमानों के बीच आधी रात के बाद पुलिस बल वापस लौट गया.
इस पूरे घटनाक्रम में आए एक मोड़ ने पूरे हालात को बदल दिया और किसान आंदोलन में 29 फ़रवरी का दिन भी एक अहम तारीख़ के तौर पर जुड़ गया.

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एक दिन पहले ही बदले हालात
बुधवार रात (27 जनवरी) - ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर हालात में बुधवार रात से ही बदलाव होने शुरू हो गये थे, जब ग़ाज़ीपुर में धरना-स्थल पर बिजली काट दी गई. इस तरह का अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रशासन कोई बड़ी कार्रवाई करने वाला है.
यहाँ प्रदर्शनकारियों की संख्या भी कम हो गई थी. राष्ट्रीय किसान मज़दूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह के किसान आंदोलन से पीछे हटने के बाद उनके समर्थक वापस लौट चुके थे.
कोई बड़ी कार्रवाई होने के कयासों के बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के साथ सख़्ती ना करने को लेकर चेतावनी दी.
रात भर अनुमान लगते रहे, पर ना तो धरना-स्थल पर बिजली आई और ना ही प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई हुई.
गुरुवार (28 जनवरी) की गहमा-गहमी
गुरुवार सुबह - लेकिन, गुरुवार को गाज़ीपुर बॉर्डर पर पुलिस की तैनाती बढ़ती गई. वहाँ रोडवेज़ की बसें भी खड़ी कर दी गईं, जिन्हें लेकर कहा गया कि ये प्रदर्शनकारियों को ले जाने के लिए लाई गई हैं.
दोपहर, करीब 12 बजे- राकेश टिकैत के टेंट पर नोटिस चस्पा किए जाने की ख़बर आई. नोटिस में उनसे पूछा गया कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के संबंध में पुलिस के साथ समझौते को तोड़ने के लिए उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई क्यों ना की जाए.
इसके बाद शाम तक ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर यूपी और दिल्ली पुलिस की मौजूदगी बढ़ने लगी. रैपिड एक्शन फ़ोर्स के जवान मौक़े पर तैनात कर दिए गए और मीडिया का जमावड़ा लगना शुरू हो गया.
धरना-स्थल पर पानी की सप्लाई काट दी गई और शौचालय हटा दिए गए. अब प्रदर्शनकारियों के पास वहाँ मूलभूत सुविधाएँ ख़त्म हो गईं.

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शाम, क़रीब 5 बजे: ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर पुलिस पूरी तैयारी के साथ मौजूद थी. सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम थे. पुलिस की गाड़ियाँ, बसें और वज्र वाहन खड़े थे. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर को दोनों तरफ से बंद कर दिया गया था और ग़ाज़ीपुर बॉर्डर किसी छावनी में तब्दील हो चुका था.
पुलिस और आरएएफ़ के जवान पंक्ति बनाकर इस तरह तैयार खड़े थे, जैसे एक आदेश का इंतज़ार है और कार्रवाई हो जाएगी.
हालात कुछ इस तरह थे जैसे कि मशीन को चलाने के लिए बस एक बटन दबाने की ज़रूरत होती है और मशीन चल पड़ती है.
ये बटन कब दब जाए, ये किसी को पता नहीं था. बस अनुमान और आशंकाओं का दौर जारी था.
ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर पहले के मुक़ाबले प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत कम हो गई थी और सभी नज़रें गड़ाए राकेश टिकैत के फ़ैसले का इंतज़ार कर रहे थे.
राकेश टिकैत का आत्मसमर्पण से इनकार
शाम 6-7 बजे: इस बीच ख़बर आई कि ग़ाज़ियाबाद ज़िला प्रशासन ने बिना अनुमति गाज़ीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को इलाक़ा खाली करने के आदेश दिए हैं.
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इसी बीच ये भी ख़बरें आईं कि राकेश टिकैत आत्म-समर्पण करने वाले हैं. वो बस इसकी घोषणा करेंगे और धरना स्थल खाली हो जाएगा.
राकेश टिकैत अपने टैंट से निकले और मीडिया से घिरते हुए मंच पर जाने लगे.
पत्रकारों ने कई बार उनसे पूछा कि क्या वे आत्म-समर्पण करने जा रहे हैं? लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि 'मँच पर जाकर बोलने दें. मैं क़ानून मानने वाला आदमी हूँ.'
इस बीच उनके बड़े भाई और किसान नेता नरेश टिकैत की तरफ से धरना ख़त्म करने का बयान आया.
उन्होंने कहा कि जब सब सुविधाएं खत्म कर दी हैं, बिजली-पानी काट दिया है, पुलिस किसानों की पिटाई करे, इससे अच्छा है कि धरना खत्म कर दें, किसान नेता अपने साथ मौजूद लोगों को समझाएं और वहां से हट जाएं.
उस समय हालात ऐसे थे कि लगा जैसे राकेश टिकैत मंच पर जाकर सीधे धरना ख़त्म करने की घोषणा करने वाले हैं.
लेकिन, मंच पर पहुँच कर राकेश टिकैत ने अनुमानों से अलग ही बात कह दी.

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उन्होंने ऐलान किया कि वो धरना प्रदर्शन ख़त्म नहीं करेंगे और आंदोलन चलता रहेगा. अगर पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करना चाहती है, तो ले जाए.
इसके बाद वो मंच पर ही बैठ गए. उन्होंने कहा कि वो सरकार से बात करेंगे, प्रशासन से नहीं.
राकेश टिकैत ने बीजेपी विधायकों पर धरना-स्थल पर आकर माहौल ख़राब करने का आरोप लगाया.
अब माहौल में और तनाव बढ़ गया. ऐसी चर्चाएँ होने लगीं कि पुलिस कोई सख़्त कदम उठा सकती है.
राकेश टिकैत को ज़बरदस्ती गिरफ़्तार किया जा सकता है. ग़ाज़ियाबाद के डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुँच गए.
टिकैत के वायरल वीडियो से बदला माहौल
रात, क़रीब 7 बजे: ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर धारा-144 लगा दी गई, यानी एक जगह लोग इकट्ठा होकर नहीं रह सकते हैं.
पुलिस की एक बस भी धरना-स्थल की तरफ बढ़ने लगी. कयास लगा कि राकेश टिकैत को ज़बरन गिरफ़्तार किया जाएगा.
लेकिन, ऐसा नहीं हुआ. राकेश टिकैत मीडिया से भी बात करते रहे. मंच से भाषणबाजी भी जारी रही.
इस बीच राकेश टिकैत का एक ऐसा वीडियो सामने आया जिससे सारे हालात बदलते चले गए.
एक निजी न्यूज़ चैनल से बात करते-करते अचानक राकेश टिकैत भावुक हो गए. उन्होंने कहा, “डीएम का आदेश था, हम उसका सम्मान कर रहे थे और जो मुख्यमंत्री ने कहा हम उसका सम्मान कर रहे थे. बातचीत हो रही थी कि गिरफ़्तारी दे दो, हम गिरफ़्तार कर लेंगे. लेकिन, हमारे लोगों की क्या गारंटी है उन्हें घर तक सुरक्षित कौन ले जाएगा.”

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उन्होंने कहा, “वो लोगों को मारने की साज़िश कर रहे हैं. ये नहीं होगा. बीजेपी के विधायक यहाँ पर आ गए. लोगों को मार रहे हैं ये. प्रशासन है ये? कहीं नहीं जाएंगे. यहीं रहेंगे. आंदोलन को ख़त्म करने की साजिश बीजेपी की है.”
इसके बाद देखते ही देखते राकेश टिकैत का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
ट्विटर पर उनके पक्ष में ट्रेंड्स चलने लगे. सुस्त हो चुके आंदोलन में जैसे फिर से जान आ गई. लोगों से ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पहुँचने की अपील होने लगी.
पंचायत और टिकैत के समर्थक
रात 8-9 बजे: इसके बाद राकेश टिकैत के गांव सिसौली में लोग उनके घर के बाहर इकट्ठा हो गए और उनके समर्थन में नारे लगाने लगे.
सिसौली में एक बड़ी पंचायत हुई और किसान आंदोलन को समर्थन देने का फ़ैसला लिया गया.
नज़दीकी इलाक़ों के लोगों से गाज़ीपुर बॉर्डर पहुँचने की अपील की जाने लगी.
ख़बरें आईं कि भिवानी, हिसार, कैथल, जींद, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ, बागपत और बिजनौर से रात में ही किसानों का जत्था ग़ाज़ीपुर बॉर्डर के लिए निकल पड़ा है.
राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख अजित सिंह ने भी राकेश टिकैत से फ़ोन पर बात की और कहा कि "चिंता मत करो, किसान के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है. सबको एक होना है, साथ रहना है."
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इसी बीच राकेश टिकैत ने मँच से ही एक शख़्स को थप्पड़ मारा. उन्होंने इस शख़्स के संदिग्ध होने का आरोप लगाया. बाद में उसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया.
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आंदोलन ख़त्म ना करने पर अड़े राकेश टिकैत ने घोषणा कर दी कि वे अभी से अनशन पर हैं और उनके लोगों के द्वारा ट्रैक्टर पर लाया गया पानी ही पिएंगे.
राकेश टिकैत मंच पर ही बैठ गए. पुलिस के बड़े अधिकारी उनसे आकर भी मिले, हालचाल पूछा और मनाने की कोशिशें हुईं.
लेकिन, राकेश टिकैत ने आंदोलन ख़त्म करने से इनकार कर दिया.
रात 11 बजे के बाद: ग़ाज़ीपुर के साथ-साथ अचानक पश्चिमी यूपी के कुछ इलाक़ों में भी तनावपूर्ण माहौल होने की ख़बरें आने लगीं.
कुछ जगहों पर लोग राकेश टिकैत के समर्थन में सड़कों पर आ गए.
कंडेला के पास जिंद-चंडीगढ़ सड़क को जाम कर दिया गया. भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता छाज्जूराम कंडेला ने बताया कि राकेश टिकैत का वीडियो वायरल होने के बाद गांव के युवाओं ने जाम लगा दिया.
राकेश टिकैत के समर्थन में आवाजें तेज़ हो गईं और प्रशासन स्थितियाँ संभलने का इंतज़ार करने लगा.
मंच पर राकेश टिकैत लोगों से घिरे रहे. मंच के आगे ही लोग बिस्तर लगाकर बैठ गए थे. कई लोगों ने रात टैंट में नहीं, बल्कि बाहर ही बैठकर गुज़ारी.
उधर सिसौली में हुई पंचायत में अगले दिन एक महापंचायत करने का फ़ैसला लिया गया.
हालात बिल्कुल बदलते नज़र आए. प्रशासन ने पीछे हटते हुए धरना-स्थल खाली कराने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की. आधी रात के बाद पुलिस और आरएएफ़ के जवान वापस बुला लिए गए.

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शुक्रवार सुबह: दिल्ली-ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर मुज़फ़्फ़रनगर, बागपत और बिजनौर जैसे इलाक़ों से बड़ी संख्या में किसान धरना-स्थल पर पहुँच गए. राकेश टिकैत के लिए पानी और मट्ठा लाया गया. साथ ही किसान आंदोलन शुक्रवार को भी जारी रहा.
किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा, "किसान आंदोलन के इतिहास में ग़ाज़ीपुर बॉर्डर को किसान आंदोलन का रूप बदलने के लिए याद किया जाएगा. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर का किसान आंदोलन मोदी-योगी सरकार के लिए वॉटरलू का युद्ध साबित होगा."
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