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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ फ़ैसला देने वाले जस्टिस खन्ना ने क्या कहा?
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य को हरी झंडी दे दी.
इस प्रोजेक्ट का मक़सद लुटियंस दिल्ली के 86 एकड़ क्षेत्र का पुनर्निमाण और विकास है जिसमें भारत की ऐतिहासिक इमारतें संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक भी शामिल हैं.
जस्टिस एएम खनविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने 2-1 के बहुमत से फ़ैसला सुनाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से ये फ़ैसला तो दिया लेकिन चर्चा में रही बेंच के सदस्य जस्टिस संजीव खन्ना की असहमति.
जस्टिस खन्ना ने अपने विरोधी फ़ैसले में कहा कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में जनता की हिस्सेदारी कोई मशीनी प्रक्रिया या औपचारिकता भर नहीं हो सकती.
अपने फ़ैसले में उन्होंने कहा, "असहमति और सुझाव के अधिकार में पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी का अधिकार भी आता है."
जस्टिस खन्ना ने ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव पर दिए फ़ैसले से असहमति जताते हुए कहा कि इस केस में हेरिटेज कमेटी का पहले अप्रूवल होना चाहिए था.
उन्होंने कहा, "क्योंकि जस्टिस एएम खनविलकर के साथ जनता की हिस्सेदारी, क़ानूनी प्रावधानों की व्याख्या, हेरिटेज कमेटी की अप्रूवल ना होने और एक्सपर्ट अप्रेज़ल कमेटी के आदेश को लेकर मेरा दुराव है तो मैंने अलग से असहमति का फ़ैसला लिखा है."
जस्टिस खन्ना ने लिखा, "विकास योजना को लेकर इस केस में पर्याप्त नोटिस नहीं दिया गया."
उनके मुताबिक़ मौजूदा और प्रस्तावित लैंड यूज़ और प्लॉट नंबरों का गज़ट नोटिफ़िकेशन काफ़ी नहीं है.
उनका कहना है कि प्रस्तावित पुनर्विकास योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए थी ताकि लोग जानकारी के साथ कोई राय बना सकें जिससे जनता की हिस्सेदारी का फ़ायदा होता, ना कि सिर्फ़ एक मशीनी प्रक्रिया या औपचारिकता.
सेंट्रल दिल्ली को एक नई शक्ल देने वाले इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दी गई थीं जिनमें लुटियंस ज़ोन में निर्माण का विरोध करते हुए कई तरह के नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए थे. इन आरोपों में चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ और पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी शामिल थीं.
कौन हैं जस्टिस संजीव खन्ना?
जस्टिस खन्ना 13 साल दिल्ली हाई कोर्ट में जज के तौर पर कार्यरत रहने के बाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट पहुँचे.
वे दिल्ली हाई कोर्ट की उस बेंच का हिस्सा थे जो दिल्ली में सीसीटीवी कैमरा योजना की निगरानी कर रही थी.
बाद में इस बेंच ने दिल्ली पुलिस को टाइमलाइन का पालन करते हुए पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी लगाने का आदेश भी दिया.
वरिष्ठता और मेरिट ऑर्डर के आधार पर जस्टिस खन्ना 2024 में भारत के मुख्य न्यायाधीश हो सकते हैं.
क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट?
सेंट्रल विस्टा को नई शक्ल देने की शुरुआत संसद से होगी और नई इमारत में तक़रीबन 971 करोड़ रुपये ख़र्च होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर को नए संसद भवन के निर्माण का शिलान्यास किया था.
केंद्र सरकार का दावा है कि परियोजना 'राष्ट्र हित' में है क्योंकि सेंट्रल विस्टा के आधुनिक होने की ज़रूरत है जिससे सैकड़ों करोड़ रुपये भी बचेंगे और नई इमारतें ज़्यादा मज़बूत और भूकंपरोधी बनेंगी.
रहा सवाल इस हरे-भरे और खुले इलाक़े में ज़्यादा इमारतें बनाने का तो सरकार का कहना है कि वो इसमें ज़्यादा हरियाली लाने वाली है. लेकिन विरोध के ज़्यादा स्वर पर्यावरण को लेकर ही उठे हैं.
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