हाथरस: सीबीआई ने मानी दलित लड़की के गैंगरेप और हत्या की बात, चार्जशीट दायर

हाथरस मामला

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उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की के साथ हुए गैंगरेप और हत्या मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को आरोपपत्र दायर कर दिया है.

19 साल की लड़की के साथ हुए अपराध के लिए सीबीआई के अधिकारियों ने चारों अभियुक्तों संदीप, लवकुश, रवि और रामू पर गैंगरेप और हत्या की धाराएं भी लगाई हैं.

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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अभियुक्तों के वकील ने बताया कि हाथरस की स्थानीय अदालत ने मामले का संज्ञान लिया है.

सीबीआई इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगरानी में मामले की जाँच कर रही थी और अधिकारियों ने पूरे मामले में अभियुक्त संदीप, लवकुश, रवि और रामू की भूमिका की जाँच की.

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चारों अभियुक्त फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि चारों का गुजरात के गांधीनगर स्थित फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में अलग-अलग टेस्ट भी कराया गया था.

इसके अलावा सीबीआई की जाँच टीम ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से भी बात की थी. ये वही अस्पताल है जहाँ मृतका का इलाज हुआ था.

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विवादों में रहा हाथरस मामला

हाथरस गैंगरेप मामला न सिर्फ़ अपराधियों की बर्बरता की वजह से चर्चा में आया था बल्कि इसमें उत्तर प्रदेश की पुलिस पर मृतका के परिजनों की अनुमति के बिना और उनकी ग़ैरहाज़िरी में उसका अंतिम संस्कार करने पर भी विवाद हुआ था.

इस मामले में यूपी पुलिस के अलावा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की भी ख़ूब आलोचना हुई थी.

बाद में उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत से कहा था कि इलाके में 'न्याय-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने' के डर से आनन-फानन में लड़की का अंतिम संस्कार करा दिया गया.

19 साल की लड़की दलित परिवार से थी जबकि चारों अभियुक्त तथाकथित ऊंची जाति से सम्बन्ध रखते हैं.

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इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश में व्याप्त जाति-व्यवस्था की उलझनें भी सामने आई थीं जब कुछ गाँवों में अभियुक्तों के पक्ष में महापंचायत बुलाई गई.

इतना ही नहीं, लड़की के गैंगरेप होने को लेकर भी सवाल उठाए गए. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ वक़्त के लिए पीड़िता के गाँव में मीडिया के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी.

इस मामले में यूपी सरकार ने पीड़िता के परिजनों का नार्को टेस्ट कराने की बात कही थी जिसे लेकर भी काफ़ी विवाद हुआ था क्योंकि आम तौर पर नार्को टेस्ट अभियुक्त पक्ष का होता है.

राज्य सरकार और प्रशासन पर लचर रवैये के आरोपों के बाद आख़िकार एक विशेष जाँच समिति (एसआईटी) का गठन किया गया था. हालाँकि जाँच का ज़िम्मा बाद में सीबीआई को सौंप दिया गया.

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