बिहार चुनाव: क्या परसा में 'ऐश्वर्या फ़ैक्टर' बना रहा है नए समीकरण?

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, परसा से, बीबीसी हिंदी के लिए
"ऐश्वर्या राय को हम लोग कोई चुनावी मुद्दा नहीं बना रहे हैं. मुख्यमंत्री जी ने महिलाओं के लिए सम्मान में ये बात कही."- सारण की परसा विधानसभा से जदयू उम्मीदवार चंद्रिका राय ने बीबीसी से ये बात कही.
दरअसल हफ़्ते भर पहले चंद्रिका राय के समर्थन में हुई एक सभा में नीतीश कुमार ने कहा था, "इतनी पढ़ी लिखी महिला के साथ जो व्यवहार हुआ, वो हममें से किसी को अच्छा नहीं लगा."
इसी सभा में मंच पर ऐश्वर्या भी मौजूद थीं और उन्हें परसा का 'मान सम्मान' कहा गया था. ख़ुद ऐश्वर्या ने लोगों से कहा था कि वो जल्द ही आम लोगों के बीच जाएँगी.
चंद्रिका राय ने इसे किसी तरह का मुद्दा बनाने की बात से इनकार कर दिया, लेकिन लोगों में नाराज़गी है.
परसा विधानसभा 'हॉट सीट': जदयू-राजद की अलट-पलट
दरअसल लालू प्रसाद और चंद्रिका राय के बीच के पारिवारिक मसले ने परसा विधानसभा को हॉट सीट बना दिया है.
सारण ज़िले के 10 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है परसा विधानसभा सीट. दूसरे चरण यानी 3 नवंबर को यहाँ होने वाले चुनाव के लिए नए समीकरण बनते दिख रहे हैं.
चंद्रिका राय पहले राजद से जुड़े थे, वो अब जदयू में शामिल हो गए हैं. तो दूसरी तरफ़ उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी छोटे लाल राय, जो जदयू में थे, वो राजद में चले गए.
इस संबंध में पूछने पर छोटे लाल राय ने बीबीसी से कहा, "नेता सब तो बदलता रहता है. हम लोग तो लालू जी के ही साथ रहे. लेकिन लालू जी की अपनी मजबूरी थी, उनको अपना समधियाना करना था."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
बता दें कि लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप की शादी चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय से हुई थी. लेकिन बाद में दोनों परिवार के रिश्तों में खटास आ गई.
जिसके बाद चंद्रिका राय ने इस साल विधानसभा चुनाव से पहले जदयू का दामन थाम लिया.
चंद्रिका राय कहते हैं, "नीतीश कुमार ने बिजली, सड़क, क़ानून व्यवस्था, महिलाओं के लिए काम किया है. उनके साथ अति पिछड़ों का वोट है. इसलिए हमें अपनी जीत में कोई संशय नहीं. बाक़ी राजद के 95 फ़ीसदी कार्यकर्ता अब हमारे साथ हैं."
हालाँकि इस सीट पर लोजपा के उम्मीदवार राकेश कुमार सिंह ने मुक़ाबले को त्रिकोणीय बना दिया है.
राकेश कुमार सिंह पहले बीजेपी में थे. वे सांसद राजीव प्रताप रूड़ी के सांसद प्रतिनिधि भी हैं.
राकेश कुमार सिंह कहते हैं, "कोई भी आदमी किसी पार्टी के सांसद का प्रतिनिधि हो सकता है. उसके लिए कोई नियम क़ानून तो है नहीं. बाक़ी चंद्रिका राय से बीजेपी और जदयू के कार्यकर्ता इतने दिन तक लड़ते रहे, उन्हें नेता कैसे मान लेंगे. हमारी निष्ठा प्रधानमंत्री मोदी की तरफ़ है."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
बपौती सीट है, कहीं नहीं जाएगी
चंद्रिका राय के घर पर मौजूद उनके समर्थक उमेश गिरि कहते हैं, "बपौती (बाप की) सीट है, कहीं नहीं जाएगी."
साल 1951 से परसा सीट के लिए हुए 17 विधानसभा चुनावों में 14 बार चंद्रिका राय के ही परिवार का दबदबा रहा है.
चंद्रिका प्रसाद राय के पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतते रहे, तो बाद में चंद्रिका राय ने इस पर अपना कब्ज़ा जमाया.
चंद्रिका राय को सिर्फ़ दो बार, अक्तूबर 2005 और साल 2010 के चुनाव में जदयू के छोटे लाल राय से हार का सामना करना पड़ा.
यादव बहुल परसा विधानसभा से इस बार चंद्रिका राय, अपनी पुरानी पार्टी और 'कम्फर्ट ज़ोन' छोड़ नए समीकरण बना रहे हैं. जिसने इस सीट पर मुक़ाबले को दिलचस्प बना दिया है.
छोटे लाल राय बीबीसी से कहते हैं, "चंद्रिका राय ने कुछ नहीं किया है. वो 1985 से एक ही तरह का झूठ फ़रेब बतिया रहे हैं. जिस भी काम का वो क्रेडिट लेते हैं, वो सब लालू जी ने करवाया है. चाहे वो पुल-पुलिया, आईटीआई, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय खुलवाना हो, सब लालू जी ने किया."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
बाढ़ से डूबा है पूरा क्षेत्र
नेताओं की इस आपसी तल्ख़ी से इतर परसा में ज़मीनी परेशानियों का अंबार लगा है. एक परेशानी जिसे कोई बाहरी व्यक्ति भी साफ़-साफ़ देख और महसूस कर सकता है, वो है पूरे परसा विधानसभा क्षेत्र में खेत पानी से डूबे हुए हैं.
बाढ़ का मंज़र कहीं आंशिक तौर पर तो कहीं पूरा दिख रहा है.
65 साल के लाल बाबू राय खेती करते हैं. उनके यहाँ इस साल दो बार बाढ़ आई. पहले तो धान बर्बाद हो गया और अब गेहूँ.
वे कहते हैं, "खेत में पानी ऐसा ही ठिठका है. जब सूरज चमकता है तो लगता है, कुछ पानी सूख जाएगा. वरना इसके निकलने का कोई साधन नहीं."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
82 साल के खिलावन राय का 15 दिन पहले ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ है. जानवरों की देखभाल के लिए वो रोज़ उनकी सुरक्षा के लिए बनी झोपड़ी में जाते हैं.
खिलावन बताते हैं, "हम रोज़ अपने घर से निकलते हैं, तो खेतों में बाढ़ के पानी को पार करके आते हैं. हमारे जीवन में कभी भी हमें मुश्किलों से छुटकारा नहीं मिला."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
चंद्रिका राय से इस बाबत पूछने पर वो कहते हैं कि अबकी बार जीते, तो वो इस मुद्दे पर काम करेंगे. वहीं छोटे लाल राय इसके लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं.
वे कहते हैं, "सारण तटबंध मज़बूत नहीं होने से पूरी खेती चौपट है. सारण, सिवान और गोपालगंज तीनों का पानी हरदिया चौर में आता है, जहाँ से निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है. जिसके चलते खेतों में पानी जमा होता है और हमारे किसान भुखमरी की कग़ार पर आ गए हैं."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
रोड नहीं तो वोट नहीं
परसा विधानसभा के दरिहारा गाँव की सड़कें उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी के इस बयान को खारिज करती हैं कि बिहार में सड़क अब मुद्दा ही नहीं रहा. दरिहारा गाँव के अंदर सड़क कभी बनी ही नहीं.
पार्वती देवी कहती हैं, "एक बार सड़क पर ईंटें डाली गई थीं, लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ. हम लोगों को रोड नहीं मिलेगा, तो वोट नहीं देंगे."
गाँव की ही भागमती देवी बताती हैं, "कोई बीमार पड़ता है, तो छह किलोमीटर दूर सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ता है. रोड नहीं होने पर कई बार डिलीवरी केस बिगड़ जाता है. आप ही बताइए किसको वोट दे दें कि रोड बन जाए."

इमेज स्रोत, Seetu Tewari/BBC
दरिहारा गाँव के ही एक छोर पर पीसीसी की बनी सड़क इस बार बाढ़ में बह गई. तकरीबन डेढ़ सौ घर वाले इस गाँव में प्रति परिवार 100 रुपये इकट्ठा करके चचरी पुल बनाया गया है.
महेशिया देवी बताती हैं, "आना-जाना, अस्पताल, बाल-बच्चा की पढ़ाई सब मुश्किल है. खेत में पानी भर गया है तो शौच के लिए जाने में भी परेशानी है. मुखिया, विधायक से कहते-कहते थक गए लेकिन कुछ नहीं हुआ. अबकी बार नेता वोट मांगने आए, तो उनका अच्छे से स्वागत होगा."
अब देखना ये है कि परसा के मतदाता किसे अपना प्रतिनिधि चुनते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)


















