ताजमहल 188 दिन बाद खुला, चीनी पर्यटक ने किया पहला दीदार

    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए आगरा से

लगातार छह महीने से भी ज़्यादा समय तक बंद रहने का रिकॉर्ड बनाते हुए विश्वप्रसिद्ध ताजमहल सोमवार को जब पूरी सतर्कता के साथ खोला गया तो पर्यटकों की संख्या कम ज़रूर थी लेकिन उत्साह में कोई कमी नहीं थी.

यूं तो ताजमहल में प्रवेश की अनुमति सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रहती है लेकिन सोमवार को सुबह क़रीब नौ बजे से पर्यटकों का आना शुरू हुआ और पर्यटक सूची में पहला नाम दर्ज हुआ चीन के ल्यांग चेंग का.

हालांकि, दिन भर में कई अन्य विदेशी पर्यटक भी ताज का दीदार करने पहुंचे.

विदेशी पर्यटकों के अलावा भारत के कई इलाक़ों से भी लोग छह महीने बाद खुल रहे ताजमहल को देखने के लिए पहुंचे थे. मेरठ से आए कुछ युवाओं का कहना था का वो एक दिन पहले ही आगरा पहुंच गए थे ताकि अगले दिन सुबह ही ताजमहल का दीदार कर सकें.

ऐसे ही एक युवा अनिल कुमार का कहना था कि वो लोग चाहते तो थे सूर्योदय के समय ही ताज देखना, लेकिन ऑनलाइन टिकट की असुविधा के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया और नौ बजे के बाद देखने का मौक़ा मिला.

अनिल कुमार कहते हैं, "हमें पहले पता नहीं था कि ऑनलाइन टिकट ही चलेगा. हम पहले भी आ चुके थे ताजमहल. ऑनलाइन टिकट की वजह से हमारा काफ़ी टाइम ख़राब हो गया. लेकिन हम लोगों ने बहुत आराम से ताजमहल देखा क्योंकि भीड़-भाड़ ज़्यादा नहीं थी."

आमतौर पर ताजमहल को देखने के लिए हर रोज़ दस हज़ार से भी ज़्यादा लोग आते हैं लेकिन कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने हर दिन आने वाले पर्यटकों की संख्या को पांच हज़ार तक सीमित कर दिया है.

आगरा के अपर ज़िलाधिकारी नगर पीके अवस्थी बताते हैं, "कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर ही ताजमहल और दूसरे स्मारकों को खोला गया है. यहां आस-पास के दुकानदारों के साथ भी बैठक की गई जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने के बारे में जागरूकता बढ़ाने की अपील की गई है."

"टिकट सिर्फ़ ऑनलाइन ही दिए जा रहे हैं और खिड़कियों से टिकट नहीं मिल रहे हैं. एक दिन में सिर्फ़ पांच हज़ार पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है, वह भी अलग-अलग समय पर. ताकि एकदम पर्यटकों की भीड़ न बढ़ने पाए."

देश में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद 17 मार्च को केंद्र सरकार ने देश भर में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था. आगरा में भी सभी स्मारकों को उसके बाद ही बंद कर दिया गया.

हालांकि आगरा में एक सितंबर को कई अन्य स्मारकों को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया लेकिन ताजमहल और आगरा क़िले को 21 सितंबर को खोला गया.

स्थानीय पत्रकार यतीश लवानिया कहते हैं, "ताजमहल और आगरा फ़ोर्ट ही यहां के सबसे महत्वपूर्ण स्मारक हैं. प्रशासन को पता था कि जब ये दोनों बंद रहेंगे तो बाहर से टूरिस्ट बाक़ी स्मारकों को देखने नहीं आएंगे. ऐसा हुआ भी. बाहर के पर्यटकों का आना-जाना अभी तक नहीं हो रहा था लेकिन जैसे ही ताजमहल खोलने की बात हुई, होटलों में बुकिंग शुरू हो गई. हालांकि पहले दिन यानी सोमवार को काफ़ी कम लोग आए हैं. ये जो लोग आए भी हैं, ये वही हैं जो खुलने के बाद पहले दिन ही देखना चाहते थे. भीषण गर्मी को देखते हुए अभी पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद नहीं है."

लॉकडाउन के बाद खुलने पर पहले ही दिन ताजमहल देखने आने वाले पर्यटकों में भीषण गर्मी के बावजूद ज़बरदस्त उत्साह था. दिन के क़रीब तीन बजे, कड़ी धूप में अपने मित्र के साथ दिल्ली से आईं शिवानी इस बात से बेहद उत्साहित थीं कि उन्हें डायना सीट पर तुरंत बैठकर फ़ोटो खिंचाने का मौक़ा मिल गया.

शिवानी कहती हैं, "हम लोग पहले भी कई बार आए हैं लेकिन इस सीट पर बैठने के लिए एक-एक घंटे तक इंतज़ार करना पड़ता है. आज यह बिल्कुल खाली है. मेरा आना तो बस इसी वजह से सार्थक हो गया."

ताजमहल के आस-पास कई दुकानें हैं और लॉकडाउन के कारण ये दुकानें भी छह महीने से बंद पड़ी थीं. संगमरमर के सजावटी सामान बेचने वाले सुनील श्रीवास्तव आर्थिक नुक़सान होने के कारण परेशान ज़रूर थे लेकिन उनके पास ख़ुश होने की भी कई वजहें थीं.

वे कहने लगे, "लॉकडाउन में पूरे समय घर में बच्चों के साथ रहने का मौक़ा मिला इसलिए हमने उसे एंज्वॉय किया लेकिन इससे एक सीख भी मिली है. अब हम लोगों को किसी पैरेलल बिज़नेस या फिर कुछ अन्य रोज़गार के बारे में भी सोचना होगा कि कहीं यह बंद हो गया तो क्या होगा?"

आगरा के पूर्वी गेट के पास सजावटी सामानों और खाने-पीने के सामानों की सैकड़ों दुकानें हैं. यही नहीं, पर्यटन केंद्र होने के कारण कई बड़े और छोटे होटल भी हैं.

पर्यटकों की आवाजाही बंद हो जाने के कारण ये सारे व्यवसाय पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं. लेकिन एक रेस्टोरेंट में काम करने वाले नीरज को इस बात की ख़ुशी थी कि उनके मालिक ने उन्हें हर महीने ख़र्च चलाने के लिए पैसा दिया और मदद की.

सुरेश बहादुर की खिलौनों की दुकान है. उनका कहना था कि उन्होंने अपने चालीस साल के व्यवसायिक जीवन में कभी भी ताजमहल को इतना लंबा बंद होते नहीं देखा. सुरेश बहादुर कहते हैं, "हम दुकानदारों की आमदनी का ज़रिया यही दुकान थी. हमारी वजह से हमारे कर्मचारियों की भी रोज़ी-रोटी इसी से चलती थी. छह महीने से ज़्यादा बंद होने के कारण सभी की स्थिति बहुत ख़राब हो गई. लेकिन अब उम्मीद है कि कुछ सुधार आएगा."

पत्रकार यतीश लवानियां कहते हैं कि 17 मार्च से तो देश भर में लॉकडाउन लागू हुआ लेकिन आगरा में फ़रवरी से ही लॉकडाउन चल रहा था.

वो कहते हैं, "आगरा में ट्रंप की यात्रा के पहले से ही इस इलाक़े को बंद कर दिया गया था. यह मान सकते हैं कि इनके लिए फ़रवरी से ही लॉकडाउन लागू है."

ताजमहल को अब तक सिर्फ़ दो बार लंबे समय के लिए बंद किया गया था. पहली बार, साल 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान और दूसरी बार साल साल 1978 में यमुना में आई भीषण बाढ़ के बाद.

भारत-पाक युद्ध के दौरान क़रीब दो हफ़्ते तक ताजमहल को बंद किया गया था.

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