कांग्रेस के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखी चिट्ठी, क्या होने वाला है? - प्रेस रिव्यू

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कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले पार्टी में 'नये नेतृत्व और बड़े स्तर पर बदलाव' को लेकर पार्टी के भीतर से आवाज़ उठी है.
द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में बड़े बदलाव को लेकर पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर शीर्ष से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव की बात कही है.
साल 2014 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी का पतन लगातार जारी है और इसके बाद से पार्टी अपनी वापसी नहीं कर पाई है.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, जिन 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा है, उनमें पाँच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं.
पार्टी के शीर्ष नेताओं ने अपने पत्र में भाजपा के उदय की बात स्वीकार की है और इस बात को माना है कि देश के युवाओं ने निर्णायक रूप से नरेंद्र मोदी को अपना वोट दिया है.
पत्र में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि लोगों का भरोसा पार्टी में घटा है और युवाओं का भी पार्टी के प्रति भरोसा कम हुआ है जो गंभीर चिंता का विषय है.

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अख़बार को मिली जानकारी के मुताबिक़, यह पत्र सोनिया गांधी को कुछ दिन पहले लिखा गया था जिसमें पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर सुधार करने की वक़ालत की गई है.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के लिए पूर्ण-कालिक और प्रभावी नेतृत्व की माँग की है जो ना सिर्फ़ लोगों को दिखाई दे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर सक्रिय हो और पार्टी को नया रूप देने में प्रभावी साबित हो.
रिपोर्ट के अनुसार, इस पत्र पर राज्य सभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, पार्टी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, शशि थरूर और विवेक तनखा के हस्ताक्षर हैं.
इनके अलावा ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य, सीडब्ल्यूसी के सदस्य मुकुल वासनिक, जितिन प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा, राजेंद्र कौर भट्टल, एम वीरप्पा मोईली, पृथ्वीराज चव्हाण, पीजे कूरियन, अजय सिंह, रेणुका चौधरी, मिलिंद देवड़ा, पूर्व पीसीसी चीफ़ राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, बिहार में चुनाव प्रचार प्रमुख अखिलेश प्रसाद सिंह, हरियाणा के पूर्व स्पीकर कुलदीप शर्मा, दिल्ली के पूर्व स्पीकर योगानंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किये हैं.

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माना जा रहा है कि कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के कार्यकाल का एक साल पूरा होने के बाद से पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष की माँग तेज़ हो गई है.
पार्टी ने कुछ दिन पहले स्पष्ट किया था कि सोनिया गांधी तब तक कांग्रेस पार्टी की कमान संभालेंगी, जब तक पार्टी को नया अध्यक्ष नहीं मिल जाता.
द हिन्दू अख़बार ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के हवाले से ख़बर लिखी है कि सोमवार, 24 अगस्त को कांग्रेस कार्यसमिति की एक वीडियो कॉन्फ़्रेंस होने वाली है जिसके औपचारिक एजेंडे की पार्टी द्वारा घोषणा नहीं की गई है, लेकिन नेतृत्व के सवाल पर पार्टी की इस बैठक में चर्चा होने की बहुत संभावना है.
केसी वेणुगोपाल के अनुसार यह बैठक सोमवार को सुबह 11 बजे शुरू होगी.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है कि राहुल गांधी अब भी पार्टी अध्यक्ष के पद पर लौटने के इच्छुक नहीं हैं.
हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक इंटरव्यू में यह कहा भी था कि 'किसी ग़ैर-गांधी को अब पार्टी का नेतृत्व संभालना चाहिए.'

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'पूर्व चीफ़ जस्टिस गोगोई हो सकते हैं असम में बीजेपी के सीएम उम्मीदवार'
असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता तरुण गोगोई ने कहा है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई अगले साल होने वाले असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 'तरुण गोगोई ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि मुख्यमंत्री पद के लिए बीजेपी के उम्मीदवारों की सूची में रंजन गोगोई का नाम है.'
उन्होंने कहा, "यदि पूर्व सीजेआई राज्यसभा जा सकते हैं, तो वे बीजेपी के अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर भी सहमत हो सकते हैं."
तरुण गोगोई ने कहा कि "यह सब राजनीति है. अयोध्या राम मंदिर मामले के फ़ैसले को लेकर बीजेपी रंजन गोगोई से ख़ुश है. फिर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन स्वीकार करके धीरे-धीरे राजनीति में क़दम रखा. उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार करने से मना क्यों नहीं किया? वे आसानी से मानवाधिकार आयोग या अन्य अधिकार संगठनों के अध्यक्ष बन सकते थे. उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा है और इसीलिए उन्होंने नामांकन स्वीकार किया."

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पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वह असम में कांग्रेस के अगले 'संभावित' मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं होंगे.
तरुण गोगोई बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ़), वामपंथी और क्षेत्रीय दलों सहित 'महागठबंधन' बनाने की वक़ालत कर रहे हैं, ताकि भाजपा को सत्ता से हटाया जा सके.
उन्होंने कहा, "मैं राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बनने वाला. मैं मार्गदर्शक बनना चाहता हूँ या सलाहकार के रूप में कार्य करना चाहता हूँ. कांग्रेस में कई योग्य उम्मीदवार हैं जो कार्यभार संभाल सकते हैं."
73 दिन में बाज़ार में होगी भारत की पहली कोविड वैक्सीन
दैनिक अख़बार अमर उजाला ने लिखा है कि भारत की पहली कोविड वैक्सीन को सीरम इंस्टीट्यूट तैयार कर रहा है और यह 73 दिनों में बाजार में आ जाएगी.
इस वैक्सीन को 'कोवीशील्ड' नाम दिया गया है. वहीं, भारतीयों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (एनआईपी) के तहत यह वैक्सीन मुफ़्त लगायी जाएगी.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया (एसआईआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि सरकार ने हमें 'विशेष विनिर्माण प्राथमिकता लाइसेंस' और 58 दिनों में परीक्षण पूरा करने के लिए परीक्षण प्रोटोकॉल प्रक्रियाओं में सहायता की.
उन्होंने कहा कि इस तरह, पहली खुराक आज से अंतिम चरण में (फेज़ 3) टेस्ट हो रही है और दूसरी खुराक 29 दिनों के बाद होगी. अंतिम परीक्षण डेटा दूसरी खुराक से 15 दिनों बाद सामने आ जायेगा. उस समय तक, हम 'कोवीशील्ड' का व्यवसायीकरण करने की योजना बना रहे हैं.
इससे पहले, तीसरे चरण के परीक्षण में कम से कम 7 से 8 महीनों का वक़्त लगने की उम्मीद थी.
22 अगस्त से, 17 केंद्रों पर 1600 स्वयंसेवकों पर इसका परीक्षण हो रहा है, यानी हर केंद्र पर क़रीब 100 स्वयंसेवकों पर परीक्षण जारी है.

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ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन
केंद्र सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए राष्ट्रीय परिषद के गठन की ख़बर को कई अख़बारों ने प्रकाशित किया है.
दैनिक जागरण अख़बार ने लिखा है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों से जुड़ी हुई नीतियां, कार्यक्रम, क़ानून और परियोजना बनाने के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है ताकि वे समानता हासिल कर सकें और इसमें पूरी तरह भागीदारी निभा सकें.
केंद्र सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा) क़ानून, 2019 के तहत परिषद् का गठन किया है.
इस क़ानून के मुताबिक़, परिषद् का कार्य किन्नरों के संबंध में नीतियां, कार्यक्रम, कानून और परियोजनाएं बनाने में केंद्र को सलाह देना होगा.
साथ ही वह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों कर समानता हासिल करने और पूरी तरह भागीदारी करने के लिए बनाई गई नीतियों और कार्यक्रमों की निगरानी करेगा और नीतियों के प्रभाव का आकलन करेगा.
परिषद् में समुदाय के सदस्यों, पाँच राज्यों और दस केंद्रीय विभागों का प्रतिनिधित्व होगा.
गजट अधिसूचना के मुताबिक़ इसके अध्यक्ष सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री होंगे जबकि उपाध्यक्ष मंत्रालय के एक कनिष्ठ मंत्री होंगे.
अन्य सदस्य स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, गृह मंत्रालय, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय, अल्पसंख्यक मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय से होंगे.
राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक-एक प्रतिनिधि होंगे.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार केंद्रीय अर्द्धसैन्य बलों में अधिकारियों के तौर पर भर्ती के लिए ट्रांसजेंडर लोगों को यूपीएससी की वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति देने पर विचार कर रही है.
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