प्रियंका गांधी ने कहा, किसी ग़ैर-गांधी को संभालना चाहिए कांग्रेस का नेतृत्व - प्रेस रिव्यू

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि किसी ग़ैर-गांधी को पार्टी का नेतृत्व संभालना चाहिए.
प्रियंका गांधी ने ये बातें एक किताब में छपे इंटरव्यू में कही हैं और इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है.
प्रियंका ने कहा, "जैसा कि राहुल ने कहा था कि हममें से किसी को पार्टी का अध्यक्ष नहीं होना चाहिए, मैं उनसे पूरी तरह सहमत हूं. मुझे ये भी लगता है कि अब पार्टी को अपना रास्ता तलाशने की ज़रूरत भी है."
क्या कांग्रेस, बीजेपी के ख़िलाफ़ धारणा की लड़ाई हार चुकी है? इस सवाल के जवाब में प्रियंका ने कहा, "मुझे लगता है कि कांग्रेस ने न्यू मीडिया (सोशल मीडिया) को समझने में देरी कर दी और जब तक पार्टी ने इसके ज़रिए अपने विचार रखना शुरू किया, तब तक काफ़ी नुक़सान हो चुका था."
प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर कोई 'ग़ैर गांधी' पार्टी का अध्यक्ष बना तो वो उसने निर्देशों का पालन करेंगी.
प्रियंका ने ये भी कहा कि उनने पति रॉबर्ट वाड्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से उनके बेटे और बेटी को किस तरह की मुश्किलें झेलनी पड़ीं.
उन्होंने बताया, "जब मेरे पति पर ये सभी आरोप लगे तो मैंने सबसे पहले अपने 13 साल के बेटे के पास जाकर उसे सारी चीज़ें समझाईं. मैंने उसे हरेक ट्रांज़ैक्शन दिखाया. यही बातें मैंने अपनी बेटी को भी समझाईं. मैं अपने बच्चों से कोई बात नहीं छिपाती, यहां तक की अपनी ग़लतियां और कमज़ोरियां भी नहीं."
प्रियंका ने बताया, "मेरा बेटा लड़कों के बोर्डिंग स्कूल में था और वाड्रा पर लगे आरोपों की वजह से उसे वहां बहुत दिक्कतें हुईं."

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पीएम केयर के ऑडिट की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीएम केयर फ़ंड के ऑडिट की कोई ज़रूरत नहीं है. शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय बेंच ने यह बात मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कही.
अंग्रेज़ी अख़बार 'द हिंदू' ने इसे पहले पन्ने पर लीड ख़बर के तौर पर प्रकाशित किया है.
अदालत ने पीएम केयर्स फ़ंड में जमा राशि को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष में ट्रांसफ़र करने से यह कहकर इनकार कर दिया कि दोनों बिल्कुल अलग तरह के दान हैं.
जस्टिस अशोक भूषण की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि पीएम केयर्स फ़ंड कोविड-19 के ख़िलाफ़ जंग के लिए स्वैच्छिक दान पर आधारित है और यह बजटीय सहायता पब्लिक ट्रस्ट के अंतर्गत है.
अदालत ने कहा कि पीएम केयर्स फ़ंड कोरोना जैसी जनस्वास्थ्य से जुड़ी आपात स्थिति के दौर में मदद के लिए बनाया गया था और ऐसे वक़्त में इसके गठन को लेकर किसी तरह की आपत्ति नहीं की जा सकती.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 75 पन्नों के फ़ैसले में कहा कि वित्तीय नियोजन सरकार के अधिकार क्षेत्र के दायरे में है.
अदालत ने कहा, "आपदा राहत कोष क़ानूनी प्रक्रिया के तहत बनाया गया है जिसका पीएम केयर्स फ़ंड से कोई लेना-देना नहीं है. लोग अपनी मर्ज़ी से जहां भी चाहें, दान दे सकते हैं. हां, अगर सरकार उचित समझे तो वो पीएम केयर्स की धनराशि आपदा राहत कोष में ट्रांसफ़र कर सकती है लेकिन इसके लिए उसे बाध्य नहीं किया जा सकता.
पीएम केयर्स के गठन के बाद से ही इसकी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पदेन अध्यक्ष हैं और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके पदेन ट्रस्टी हैं.
इस मसले पर एक ग़ैर सरकारी संगठन सेंटर फ़ॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन ने एक याचिका दायर की थी और कहा था कि राष्ट्रीय आपदा राहत कोष के रहते हुए पीएम केयर्स फ़ंड बनाने की ज़रूरत नहीं थी.
संगठन ने ये भी कहा था इसका ऑडिट कैग (नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) से कराया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसका ऑडिट निजी ऑडिटर्स से कराया जाएगा.
देश में अगले पांच साल में 12% बढ़ेंगे कैंसर: आईसीएमआर
भारत में अगले पांच वर्षों में कैंसर के मामलों में 12 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा देखने को मिल सकता है. ये बात मंगलवार को जारी हुई इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की कैंसर रिपोर्ट में कही गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 तक देश के 15 लाख लोग कैंसर की चपेट में आ सकते हैं. आईसीएमआर ने यह रिपोर्ट मौजूदा ट्रेंड और उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर जारी की है.
रिपोर्ट में ये भी पता चला कि साल 2020 में तंबाकू से होने वाले कैंसर, देश में होने वाले कुल कैंसर का 27.1 फ़ीसदी हिस्सा था और इसके सबसे ज़्यादा मरीज़ पूर्वोत्तर राज्यों से थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में पेट, आंत और स्तन कैंसर के मामलों की संख्या सबसे ज़्यादा बढ़ने की आशंका है.
रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में फेफड़ों, मुंह और पेट से जुड़े कैंसर सबसे ज़्यादा हैं और महिलाओं में स्तन और गर्भाशय से जुड़े कैंसर सबसे ज़्यादा. यह ख़बर हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रकाशित की है.

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आईएस के ताल्लुक़ के आरोप में डॉक्टर गिरफ़्तार
इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बेंगलुरु के एक डॉक्टर को तथाकथित इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के लिए काम करने और प्रतिबंधित आईएसकेपी (इस्लामिक स्टेट ख़ुरासान प्रोविंस) मॉड्यूल से सम्बन्ध रखने आरोप में गिरफ़्तार किया है.
इस 28 वर्षीय डॉक्टर का नाम अब्दुर्रहमान है और ये नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं. एनआईए ने इन्हें सोमवार को कर्नाटक पुलिस की मदद से गिरफ़्तार किया. इस मामले में पहले पांच लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
एनआईए का कहना है कि अब्दुर्रहमान साल 2014 की शुरुआत में आईएस के आतंकियों के इलाज के लिए सीरिया के मेडिकल कैंप में रहे थे. मिली जानकारी के मुताबिक सीरिया में 10 दिनों तक रहने के बाद वो भारत वापस आए थे.
एनआईए के मुताबिक़, "अब्दुर्रहमान युद्धग्रस्त इलाकों में घायल होने वाले आईएस लड़ाकों की मदद के लिए एक मेडिकल ऐप बना रहे थे."
अब्दुर्रहमान पर कश्मीर के जहानज़ैब वानी के साथ मिलकर षड्यंत्र रचने का आरोप भी है.
वानी और उनकी पत्नी हिना बशीर बेग़ को भी एनआईए ने कथित तौर पर भारत में आईएसआईएस से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में नई दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया है.
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