कोरोना के दौर में गोल्ड लोन लोगों को क्यों भा रहा है

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- Author, निधि राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में क़र्ज़ हासिल करने के लिए गोल्ड लोन हमेशा से एक पसंदीदा विकल्प रहा है.
ज़्यादातर भारतीय सोने से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और उसे बेचना नहीं चाहते हैं. लेकिन मुश्किल समय में वे उसका इस्तेमाल करते हैं. क़र्ज़ देने वालों के लिए भी ये एक बेहतर संपत्ति होती है जिसको गिरवी के रूप में रखकर वे कुछ पैसा उधार दे सकते हैं.
चूंकि इस समय में जब बैंक संभलकर क़दम उठा रहे हैं, तब नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियाँ जैसे मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड आदि इस अवसर का फ़ायदा उठाकर ज़्यादा क़र्ज़ दे रही हैं और ब्याज़ कमा रही हैं.
पूरे भारत में कई छोटे व्यवसायी, किसान और व्यवसायी गोल्ड लोन की मदद से लॉकडाउन की वजह से पैदा हुईं आर्थिक मुश्किलें हल कर रहे हैं.

दक्षिणी मुंबई में अमिता प्रशांत तावडे वर्ली क्षेत्र में एक ब्यूटी पार्लर चलाती हैं. उन्होंने अपनी चार चूड़ियों और दो गले की चेन के बदले में तीन लाख रुपए का लोन हासिल किया है.
वे कहती हैं, "मार्च से अब तक मेरा पार्लर बंद हुए तीन महीने हो चुके हैं. मुझे तनख्वाहें देनी हैं और घर का ख़र्च चलाना है. मेरे पास यही सबसे अच्छा विकल्प था."
अमिता की दो बेटियाँ हैं, जो साल 2005 से इसी धंधे में हैं और दोनों ने दो अन्य महिलाओं को नौकरियाँ दी हुई है.
अमिता बताती हैं, "मैं दोनों को हर महीने 10 हज़ार रुपए तनख्वाह के रूप में देती हूँ. मैंने उनकी तनख्वाहें नहीं रोकी हैं. मैं उन्हें अपनी बचत में से दे रही हूँ."
अमिता सात सदस्यों वाले एक संयुक्त परिवार में रहती हैं और अपनी सास की दवा आदि का ख़र्च भी उठाती हैं. वे कहती हैं, "सामान्य दिनों में मैं हर महीने लगभग एक लाख रुपए कमाती थी. मेरा काम धंधा बिल्कुल ठीक चल रहा था. लेकिन इस वायरस ने सब कुछ ख़राब कर दिया है."
अमिता एक मकान और दुकान की मालकिन हैं और उनके शब्दों में ये "एक वरदान जैसा" है. अमिता के पति मुंबई एयरपोर्ट पर काम करते हैं और उन्हें कहा गया है कि वे आधी तनख्वाह पर ही काम करें. इसके साथ ही उनके भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि लॉकडाउन की वजह उड्डयन उद्योग प्रभावित हुआ है.
अमिता बताती हैं, "भगवान की दया से मेरे पति को आधी तनख्वाह मिल रही है जिससे हमें थोड़ी राहत है."

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छोटे कारोबारियों के लिए मौक़ा
वहीं, पुणे की एक व्यापारी दिशा दिनेश परब की हालत भी कुछ ऐसी ही है.
दिशा कहती हैं. "मैं टिफिन बनाने के काम में 10 सालों से हूँ. पहले मैं प्रति दिन 80 रुपए की दर से 40 से 50 टिफिन तैयार किया करती थी. लेकिन अब मेरे टिफिन की क़ीमत 60 रुपए हो गई है और हर रोज़ बस 10-15 टिफिन बना पाती हूँ. मेरी सामान्य कमाई की तुलना में ये ना के बराबर है."
"मैं पहले कंस्ट्रक्शन मज़दूरों के लिए भी टिफिन बनाती थी. लेकिन अब वे सब चले गए हैं. अब मेरे टिफिन की कोई मांग नहीं रह गई है."

दिशा के दो बच्चे हैं, जो अभी पढ़ रहे हैं और दिशा के पति कंस्ट्रक्शन बिज़नेस में हैं. लॉकडाउन की वजह से उनके पति की नौकरी चली गई है.
दिशा के परिवार के पास सड़क किनारे एक दुकान भी है, जिसे वे प्रतिमाह 15 हज़ार रुपए पर चढ़ाया करती थीं. लेकिन लॉकडाउन की वजह से अब ये कमाई भी बंद हो गई है क्योंकि कोई उनकी दुकान लेने के लिए तैयार नहीं है.
लेकिन जब कमाई के सभी रास्ते बंद हो गए तो दिशा ने एक स्थानीय सहकारी बैंक से गोल्ड लोन लेने का फ़ैसला किया. उन्होंने अपनी चार चूड़ियां, एक नाक की बाली और मांग टीके को गिरवी रखकर ढाई लाख रुपए हासिल किए हैं.
दिशा कहती हैं, "मध्य वर्ग पर इसकी बहुत ज़्यादा चोट पड़ी है. सरकार ग़रीबों की मदद करती है. अमीर लोगों के पास पहले से ही पैसे होते हैं. हम मदद भी माँग नहीं सकते हैं और हमारे पास कोई विकल्प भी नहीं होता है. ऐसे में गोल्ड लोन ही एक ऐसी चीज़ थी जिससे सबसे ज़ल्दी और सस्ते में क़र्ज़ हासिल किया जा सकता था."
मॉनसून की शुरुआत के साथ ही कई किसानों ने भी बीज बोने के लिए लोन लेना शुरू कर दिया है.
महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले में हौसीलाल मालवीय एक ऐसे ही किसान हैं, जिन्होंने फसल लगाने के लिए चार लाख रुपए का गोल्ड लोन लिया है. वह अपने खेतों में मौसम के अनुसार सोयाबीन, चना और कॉटन उगाते हैं जिससे अपने चार लोगों के परिवार का भरण पोषण करते हैं.
हौसीलाल कहते हैं कि जबसे वायरस आया है तभी से मंडी बंद है, कुछ भी बेचना काफ़ी मुश्किल है और फसल के भंडारण की भी समस्या है.
हौसीलाल बताते हैं, "हमें सामान्य काम करने के लिए भी पैसे की ज़रूरत थी और ऐसे में गोल्ड लोन लेना ठीक लगा. हमने बैंक से लोन लेने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने कई सवाल पूछे है और लोन देने में आनाकानी करते दिख रहे थे. वहीं, सहकारी बैंक मदद करने के लिए तैयार थे."

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बैंक लोन लेना मुश्किल
अर्थव्यवस्था में मंदी और महामारी की वजह से बैंक काफ़ी संभलकर क़र्ज़ दे रहे हैं.
डोमेस्टिक रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि बैंक जिस गति से लोन देते हैं, वह साल 2020-21 में सिर्फ़ 1 फ़ीसदी रह जाएगी जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यही दर 6.14 फ़ीसदी थी.
मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ वीपी नंद कुमार कहते हैं, "हम मानते हैं कि गोल्ड लोन इस साल भी हालिया ट्रेंड को बरकरार रखते हुए 10 से 15 फ़ीसदी की दर से बढ़ेंगे. हमें ये लगता है कि जब लोगों को ये पता चलेगा कि सोने की ऊंची क़ीमतें बरकरार रहने वाली हैं तो वे सोने को पूरी तरह बेचकर अच्छी रकम हासिल करने का विचार त्यागकर गोल्ड लोन लेने के बारे में सोचेंगे."
एक अन्य निजी कर्जदाता आईआईएफएल फाइनेंस ने साल 2020 के मई महीने में 700 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन दिया है जिसमें से 15 फ़ीसदी बस गोल्ड लोन का टॉपअप था.
फेडरल बैंक और इंडियन बैंक भी गोल्ड लोन की डिमांड दर्ज कर रहे हैं, विशेषत: छोटे कस्बों और शहरों से.
सोने की बढ़ती क़ीमतों से क़र्ज़दाताओं और क़र्ज़दारों को फ़ायदा है.
सोने की ऊंची क़ीमतें क़र्ज़दारों को ज़्यादा क़र्ज़ हासिल करने में मदद करती हैं.
एसोशिएसन ऑफ़ गोल्ड लोन कंपनीज़न (एलटीवी) के आँकड़ों के मुताबिक़, मार्च से अब तक सोने की क़ीमत के बदले में क़र्ज़ की मात्रा 11.3 फ़ीसदी बढ़ गई है.
ये बीती 24 मार्च से प्रति ग्राम 2875 रुपए से बढ़कर 10 जून को 3197 रुपए हो चुकी है.
सरल शब्दों में कहें तो आप इस समय अपने सोने के वर्तमान दाम की 75 फ़ीसदी क़ीमत को लोन के रूप में ले सकते है.
दस ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम इस समय पचास हज़ार रुपए है.
सोने के दामों में बढ़त की वजह से कर्जदार अपने गिरवी रखे हुए सोने के बदले टॉपअप लोन ले सकते हैं.
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल, इंडिया के प्रबंध निदेशक सोमासुंदरम पीआर बीबीसी को बताते हैं, "सोने की ऊंची क़ीमतें क़र्ज़दार और क़र्ज़दाता दोनों ही पक्षों को ख़ुश करती हैं. क़र्ज़दार के गिरवी रखे हुए सोने की क़ीमत में 20 फ़ीसदी उछाल आता है. क़र्ज़दाता भी गोल्ड लोन देने में यक़ीन रखते हैं क्योंकि गोल्ड लोन में सामान्य रूप से काफ़ी कम नुक़सान होता है."

गोल्ड लोन- एक उम्मीद की किरण
जब दुनिया भर की कई अर्थव्यवस्थाएँ महामारी की वजह से अनिश्चितताएँ झेल रही हैं. भारत की जीडीपी के संकुचन की आशंका जताई जा रही है. ऐसे समय में गोल्ड सिर्फ़ एक ऐसी धातु है जिसका बाज़ार भाव बढ़ रहा है और ये अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई नहीं है.
बैंक पर्सनल, बिज़नेस और होम लोन देने में सावधानी बरत रहे हैं क्योंकि वे पहले से लौटाए नहीं गए क़र्ज़ों के तले दबे हुए हैं.
एनबीएफसी कंपनियों की स्थिति बेहतर है क्योंकि उनकी गोल्ड लोन में विशेषज्ञता है और उनके सामने एक बैंक जैसी चुनौतियाँ नहीं हैं.
सोने की क़ीमतें क़र्ज़दाताओं को भी राहत दे रही हैं क्योंकि ये गिरवी रखे हुए सोने के लिए बहुत अच्छी बात है. क्योंकि अगर कोई अपना लोन वापस नहीं करता है तो उनके पास गिरवी रखे हुए सोने की क़ीमत इतनी है कि वे अपना क़र्ज़ वसूल सकते हैं.
ऐतिहासिक रूप से भी ये देखा गया है कि गोल्ड लोन के मामले में काफ़ी कम बार ऐसा होता है कि लोग क़र्ज़ वापस न करें क्योंकि सोने के साथ लोगों की भावनाएँ जुड़ी होती हैं. और वे सच में अपने सोने को वापस पाना चाहते हैं. क़र्ज़दाता भी गोल्ड लोन देना चाहते हैं क्योंकि गिरवी रखे हुए सोने की क़ीमत क़र्ज़ दी गई रक़म से हमेशा ज़्यादा होती है.
ऐसे में महामारी के इस दौर में गोल्ड लोन क़र्ज़दाताओं और क़र्ज़ लेने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए एक राहत देने वाला विकल्प है.

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