कोविड19 इलाज: होम केयर पैकेज के बारे में कितना जानते हैं आप?

कोरोना संक्रमण

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कोरोना का कोई ठोस इलाज फिलहाल मौजूद नहीं है. बावजूद इसके, प्राइवेट अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आए तो आपको कई लाख इसके लिए ख़र्च करने पड़ सकते हैं. सोशल मीडिया पर कई अस्पतालों के रेट लिस्ट इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं.

लेकिन कोविड19 के इलाज के लिए दो बातें जाननी बेहद ज़रूरी हैं. पहला ये कि हर किसी को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती. केवल मॉडरेट और सिवियर( गंभीर) मामलों में ही मरीज़ को अस्पताल की भर्ती होने की सलाह डॉक्टर देते हैं या फिर उनको जिनकी उम्र ज्यादा है और कोविड19 के साथ-साथ दूसरी बीमारी भी है. दूसरी बात ये कि केन्द्र और राज्य सरकारें दोनों माइल्ड सिम्प्टम होने पर होम आइसोलेशन की सलाह देते हैं.

अब अस्पताल के भारी भरकम बिल से निजात पाने और होम आइसोलेशन में आप सबकुछ ठीक से कर रहे हैं या नहीं इस पर निगरानी रखने के लिए दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों ने होम केयर पैकेज की शुरूआत की है, जिसे अस्पताल वाले होम केयर एसिस्टेंस प्रोग्राम कहते हैं.

क्या है होम केयर पैकेज?

ये पूरा पैकेज 15-17 दिनों का है. इस होम केयर पैकेज में आप घर बैठे डॉक्टर और नर्स से वर्चुअल इलाज करवा सकेंगे. दिन में दो बार नर्स आपके साथ फोन कॉल पर आपका बीपी, ऑक्सीजन और बुख़ार चेक करवाएगी. हर तीसरे दिन आपको एक ट्रेंड डॉक्टर टेली रिव्यू में बताएंगे कि आपका इलाज ठीक है, या किसी फिर दवाइयां बदलने की ज़रूरत है. कुछ अस्पताल इस पैकेज में आपको एक मेडिकल किट भी देने का वादा कर रहे हैं. कुछ दवाइयां भी होम डिलीवरी के साथ घर भिजवाने का प्रबंध करवा देते हैं.

मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर संदीप बुद्धिराजा के मुताबिक, "कोविड-19 से 70-80 फीसदी मरीज़ घर पर ही ठीक हो सकते हैं. इसलिए इस होम केयर पैकेज को ख़ास तौर पर माइल्ड पेशेंट के लिए बनाया गया है ताकि उन्हें ज्यादा ख़र्च भी ना करना पड़े और आसानी से घर बैठ डॉक्टर और नर्स की निगरानी में ये अपना इलाज भी करा सकें. इससे अस्पताल में बेड कम होने की शिकायतें भी दूर होंगी और हेल्थ सिस्टम पर बोझ भी थोड़ा कम होगा."

फोर्टिस अस्पताल अपने होम केयर पैकेज में डायटिशियन और साइकोलॉजिस्ट से कंसलटेशन भी कराते हैं. फोर्टिस की ज़ोनल डायरेक्टर डॉक्टर ऋतु गर्ग के मुताबिक इस होम केयर सुविधआ को कोई तभी ले सकता है जब मरीज़ का टेस्ट पॉज़िटिव आया हो. उसके तुरंत बाद डॉक्टर जांच कर ये पता लगाते हैं कि क्या मरीज़ का होम आइसोलेशन में रहना, उसकी सेहत के हिसाब से सही है या नहीं.

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इसके लिए मरीज़ से पहले डॉक्टर बात कर पूछते हैं कि उनको पहले से कोई और बीमारी तो नहीं, उनकी उम्र कितनी है? डॉक्टर एक बार आश्वस्त हो जाएं तभी इस होम पैकेज को लाभ लोग उठा सकते हैं. इसके लिए बाक़यदा अस्पताल वाले मरीज़ों को एक ऐप डाउनलोड करने की सलाह देते हैं, ताकि अपने रोज़ के पैरामीटर जैसे बीपी, बुख़ार लोग माप सकें.

अगर किसी भी सूरत में मरीज़ की हालात बिगड़ती है तो जिस अस्पताल से आपने पैकेज लिया है वहां इमरजेंसी में आप अपनी जाँच कराने जा सकते हैं.

मेदांता अस्पताल के इसे होम केयर पैकेज नहीं बल्कि होम केयर एसिस्टेंस प्रोग्राम कहते हैं. अस्पताल की डॉक्टर सुशीला कटारिया के मुताबिक मेदांत अस्पताल के इस प्रोग्राम में अगर आपको दवाइयां लेनी है तो उसकी होम डिलिवरी की सुविधा भी है.

इसके अलावा अगर कोई और किट की आवश्यकता होती है, जैसे पल्स ओक्सीमीटर या बीपी मापने की मशीन तो वो भी मरीज़ के घर तक डिलीवरी से पहुँचाई जा सकती है. डॉक्टर सुशीला के मुताबिक किस पेशेंट को इस प्रोग्राम में लेना है किसको नहीं ये मरीज़ डॉक्टर से पहले बात करते हैं और तभी तय किया जा सकता है. डॉक्टर से पहली बार बातचीत के चार्ज़ इस होम केयर एसिस्टेंस प्रोग्राम का हिस्सा नहीं है.

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कौन से अस्पताल दे रहे हैं ये सुविधा?

फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के तीन बड़े अस्पताल मैक्स, मेदांता और फोर्टिस अस्पताल में इसकी सुविधा उपलब्ध है. इसलिए ये सुविधा दिल्ली, मुंबई, नोएडा, गुरुग्राम जैसे शहरों में शुरू की गई है.

दरअसल होम आइसोलेशन के हर राज्य के अपने नियम है. इसलिए हर जगह अभी ये सुविधा लॉन्च नहीं की गई है. फोर्टिस की ज़ोनल डायरेक्टर डॉक्टर ऋतु गर्ग का कहना है कि कई राज्यों ने इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन की सुविधा के लिए कहा इसलिए देश के सभी शहरों में हम इसे शुरू नहीं कर पाए हैं. बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में अगले कुछ दिनों में ये शुरू किया जा सकेगा.

इस पर कितना ख़र्च आएगा?

हर अस्पताल ने इसके लिए अलग-अलग रेट तय किए हैं. मैक्स अस्पताल के पैकेज को 399 रुपए प्रति दिन का ख़र्च बताती है.

15 दिन के पैकेज के लिए आपको 5000 रुपये ख़र्च करने पड़ सकते हैं. उसी तरह से मेदांता अस्पताल का पैकेज 15 दिनों का है, जिसके लिए आपको 4900 रुपये ख़र्च करना पड़ सकता है. फोर्टिस गुरुग्राम में ये पैकेज आपको 17 दिनों के लिए 6000 रुपये में मिल जाएगा.

लेकिन इसके अलग अलग वैराइटी भी है. अगर आप ज्यादा ख़र्च कर सकते हैं, तो इसके साथ आपको बीपी मापने की मशीन, एन-95 मास्क, ग्लव्स, सैनिटाइज़र, डिजिटल थर्मामीटर, पीपीई किट भी मिल सकता है, जिसके लिए अलग से पैसे ख़र्च करने पड़ेंगे.

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कब काम नहीं करेगा ये पैकेज?

अगर मरीज़ को सांस लेने में ज्यादा तक़लीफ हो रही हो, ऑक्सीज़न लेवल कम हो रहा हो, बुख़ार तेज़ हो और उतर ना रहा हो, उस सूरत में होम केयर पैकेज काम नहीं आ सकता. कुल मिला कर कहें तो मॉडरेट और सिवियर कैटेगरी के मरीज़ों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है और इस तरह से मरीज़ों का घर पर इलाज नहीं हो सकता है.

कितने लोग इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं?

फिलहाल इस होम केयर प्रोग्राम को शुरू हुए दो हफ़्ते ही हुए हैं. लेकिन जैसे जैसे लोगों में इस प्रोग्राम के प्रति जागरुकता बढ़ रही है, वो इसका लाभ लेना शुरू कर रहे हैं.

फोर्टिस गुरुग्राम की बात करें तो उनका दावा है कि तकरीबन 50 मरीज़ इस प्रोग्राम का लाभ उठा रहे हैं.

उसी तरह से मेदांता अस्पताल का दावा है कि उनके तकरीबन 100-120 मरीज़ ऐसे हैं. इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए जरूरी है कि आपके घर में एक अलग कमरा हो, जहाँ आप ख़ुद को होम आइसोलेट कर सकें.

सरकारें रेट तय क्यों नहीं कर रही?

बीते दिनों कोविड19 के टेस्ट और इलाज में ख़र्च को लेकर काफ़ी चर्चा चल रही है. महाराष्ट्र तमिलनाडु और तेलंगाना ने कोविड19 के टेस्ट के रेट कुछ कम कर दिए हैं और अस्पतालों में बेड की कीमतें भी तय कर दी है.

दिल्ली ने अपने अस्पतालों के बाहर रेट लिस्ट लगाने का आदेश भी पारित किया है. लेकिन कभी पीपीई किट के नाम पर तो कभी डॉक्टर की विज़िट के नाम पर मरीज़ों के लाखों का बिल वसूलने की गई ख़बरें सोशल मीडिया पर चल रही है. ऐसे में केन्द्र सरकार ने भी राज्य को कोविड19 के इलाज के लिए रेट तय करने की बात भी की है.

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