कोरोना वायरस: ‘पंजाब मॉडल’ की तारीफ़ अमरीका में क्यों?

कोरोना वायरस, पंजाब, चेतावनी

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात और दिल्ली - ये देश के वो चार राज्य हैं, जहाँ कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले हैं. जब भी कोरोना के बढ़ते मामलों की बात होती है, इन राज्यों का ज़िक्र आता है.

वहीं जिन राज्यों ने कोरोना से निपटने के लिए अच्छा काम किया है, उनमें केरल का ज़िक्र काफ़ी होता है.

देश में कोरोना का पहला मामला केरल में सामने आया था. इसके बाद भी वहाँ कोरोना से होने वाली मौत का आँकड़ा अभी तक 7 है.

लेकिन इस बीच एक राज्य और है जिसने लोगों का ध्यान भारत में तो नहीं लेकिन अमरीका में अपनी ओर ज़रूर खींचा है.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने भारत के कोरोना प्रभावति 20 राज्यों पर एक स्टडी की है.

उनकी स्टडी के मुताबिक़ केरल के अलावा पंजाब वो दूसरा राज्य है, जिसने कोरोना पर तुलानत्मक रूप से बेहतर काम किया है. केरल और पंजाब को वो "डूइंग वेल" यानी अच्छा काम करने वाले राज्यों का उदाहरण मानती हैं.

प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने 'लॉकडाउन इफेक्ट ऑन कोविड 19 स्प्रेड इन इंडिया: नेशनल डेटा मास्किंग स्टेट लेवल ट्रेंड्स' पर एक रिसर्च पेपर लिखा है.

इसी पेपर में उन्होंने पंजाब का ज़िक्र केरल राज्य के साथ किया है. पंजाब और केरल के नाम उन राज्यों की सूची में हैं, जहाँ राज्य सरकारें बेहतर काम कर रही है, जिसके नतीजे भी कोरोना के कुल मरीज़ों की संख्या पर दिख रहे हैं.

भ्रमर मुखर्जी

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पंजाब दूसरे राज्यों से अलग कैसे?

प्रोफे़सर मुखर्जी वहीं हैं, जिन्होंने मॉडलिंग डेटा के आधार पर बताया है कि भारत में जुलाई की शुरुआत तक 630,000 से लेकर 21 लाख लोग इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं.

इसी संदर्भ में उनसे बीबीसी ने सवाल किया कि पीक की बात हर कोई करता है, लेकिन मामले आने बंद कब होंगे?

इसके जवाब में प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी ने कहा, "भारत में लॉकडाउन के असर के बारे में स्टडी के दौरान हमने पाया कि कुछ राज्यों में कोविड-19 के फैलने का सिलसिला अब धीमा पड़ता दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि R नंबर जो पहले भारत के लिए 3 के आसपास था वो अब 1.3 के आसपास पहुँच गया है."

R नंबर का मतलब होता है री-प्रोडक्शन नंबर. कोरोना संक्रमण तब तक फैलता रहता है जब तक संक्रमित व्यक्ति से औसतन एक से ज़्यादा लोग संक्रमित होते रहते हैं. इसे 1 से नीचे रखना बेहद ज़रूरी होता है. ज्यादा समय तक 1 से नीचे रहने पर ही महामारी का ख़तरा टाला जा सकता है.

इसी संदर्भ में पंजाब राज्य की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब में पिछले 7-10 दिन तक R नंबर 1 से नीचे रहा है. ये दर कभी 0.5 तो कभी 0.7 रही है. प्रोफे़सर मुखर्जी कोरोना संक्रमण में R नंबर को सबसे अधिक अहमियत देती हैं.

चीन के वुहान शहर में R नंबर 0.3 है. वो कहती हैं कि अगर पंजाब में नए मामले सामने ना आएँ और R नंबर अपनी जगह बना रहा, तो वहाँ से महामारी का ख़तरा टल सकता है.

प्रोफे़सर मुखर्जी पंजाब के कोरोना संक्रमण को एक ग्राफ़ के ज़रिए समझाती हैं. ये ग्राफ़ उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में शामिल भी किया है. इसमें ऑरेंज रंग नए मामलों के लिए है, हरे रंग ठीक हुए मामलों के लिए है, और लाल रंग कोरोना से हुई मौत को दिखाता है.

उनके मुताबिक़ पंजाब ने 'रिकवर्ड केस' यानी संक्रमण से ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या भी बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले बेहतर है. पंजाब में नए मामले कम आ रहे हैं और ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.

भ्रमर मुखर्जी

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प्रोफे़सर भ्रमर मुखर्जी के मुताबिक़ भारत के 20 राज्यों से ही देश के 99 फ़ीसदी कोरोना मामले सामने आए हैं. इसलिए सभी राज्यों में टेस्टिंग हो, या डबलिंग रेट, या फिर मॉर्टेलिटी रेट - राज्यों में बहुत ज़्यादा विविधताएँ देखने को मिलती हैं.

और इन सभी पैमानों पर देंखे तो पंजाब की परफार्मेंस केरल की ही तरह कई जगह अच्छी रही है. वो पंजाब सरकार द्वारा उठाए क़दमों को इसका श्रेय देती हैं.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पंजाब के आँकड़े

पंजाब की कुल जनसंख्या तकरीबन 2 करोड़ 77 लाख है. ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक़ राज्य में 2139 पॉज़िटिव मरीज़ है. वहीं कोरोना से ठीक होने वाले मरीज़ों की संख्या 1918 है.

राज्य में अब तक कोरोना से 40 लोगों की मौत हो चुकी है. मौत का ये आँकड़ा पिछले चार दिन से ऐसा ही बना हुआ है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता राजेश भास्करके मुताबिक़ फ़िलहाल पंजाब में डबलिंग रेट 91 दिनों का है, केस फेटेलिटी रेट 1.8 है, रिकवरी रेट 89 फ़ीसदी है और राज्या का R नंबर 0.5 से 0.7 के बीच है.

प्रोफे़सर मुखर्जी के मुताबिक़ जब भारत के नेशनल लेवल डेटा की बात होती है, तो राज्यों की विविधताएँ सामने नहीं आ पाती हैं. इसलिए पंजाब पर अब तक किसी की नज़र नहीं पड़ी है.

पंजाब ने अपने स्तर पर कोरोना का पीक देखा और झेला है. वो इस बात से इनकार नहीं करतीं कि आने वाले वक़्त में और पीक भी आ सकते हैं. लेकिन उनका ये आकलन केंद्र सरकार की तरफ़ से जारी किए गए 15 मई तक के लॉकडाउन डेटा के आधार पर है.

पंजाब में रिकवरी रेट अच्छा होने का एक कारण ये भी है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज करने की गाइडलाइन बदली है.

केंद्र सरकार के नियमों पर अमल करते हुए अब कोरोना मरीज़ों को अस्पताल से छुट्टी देने के पहले उन्हें दोबारा टेस्ट नहीं करवाना पड़ता, सिर्फ़ क्वारंटीन का टाइम अस्पताल में पूरा करना होता है. इस बात को राज्य सरकार भी स्वीकार करती है.

राजेश भास्कर के मुताबिक़ 15 मई से पंजाब ने नए नियमों का पालन शुरू किया है. इसके पहले पंजाब में रिकवरी रेट 30-40 फ़ीसदी थी. आज भी राज्य में औसतन 20-25 मामले हर रोज़ सामने आ रहे हैं.

कोरोना वायरस

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पंजाब का कोरोना का ग्राफ़

प्रोफे़सर मुखर्जी के मुताबिक़ पंजाब ने शुरुआत में कोरोना मामलों में तेज़ी देखी थी. लेकिन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन के ज़रिए उन्होंने उस पर जल्द ही क़ाबू पा लिया.

बीबीसी ने पंजाब के कोरोना ग्राफ़ की भी पड़ताल की. बीबीसी ने पाया कि पंजाब में 'सुपरस्प्रेडर' के दो मामले सामने आए थे, लेकिन पंजाब में उसके बाद भी ग्राफ़ बहुत तेज़ी से नहीं भागा.

'सुपरस्प्रेडर' का मतलब वो मामले या घटनाएँ, जहाँ एक जमावड़े में कई लोग एक साथ संक्रमित पाए जाएँ. जैसे दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरक़ज का मामला था.

पहला मामला 4 अप्रैल को सामने आया, जब मोहाली में एक शख़्स के 33 कॉन्टैक्ट कोरोना पॉज़िटिव मिले. दूसरा मामला 29 अप्रैल का जालंधर से सामने आया, जब एक शख़्स के 45 कॉन्टैक्ट पॉज़िटिव मिले.

महाराष्ट्र के नादेड़ से भी 4200 तीर्थयात्रियों के एक जत्थे में 1200 लोगों के कोरोना पॉज़िटिव होने का मामला सामने आया था. लेकिन राज्य सरकार ने सबके लिए सरकारी क्वारंटीन को ज़रूरी बना दिया था और इनमें से कोई सुपरस्प्रेडर नहीं बना.

आख़िर इस मामले को प्रशासन ने कैसे मैनेज किया? प्रोफे़सर मुखर्जी पंजाब को सुपरस्प्रेडर मामलों से सावधान रहने की हिदायत भी देती हैं. उनके मुताबिक़ अब अगर एक भी सुपरस्प्रेडर मामला वहाँ सामने आया, तो पंजाब के किए कराए पर पानी फिर सकता है.

हाल ही में अमृतसर में एक दिन में 25 नए मामले सामने आए, जिनमें से 16 एक ही पॉज़िटिव कॉन्टैक्ट के हैं.

घरेलू विमान सेवा शुरू होने के बाद लुधियाना में भी एक शख़्स कोरोना पॉज़िटिव पाया गया है. लेकिन राज्य सरकार ने सख़्त नियम बनाते हुए हर यात्री के लिए 14 दिन का क्वारंटीन अनिवार्य बनाया है.

प्रोफे़सर मुखर्जी कहती हैं कि 1 जून से ट्रेनों की आवाजाही के बाद पंजाब सरकार को और ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है.

अमृतसर

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पंजाब के लिए चुनौतियां क्या हैं?

पंजाब कुछ पहले राज्यों में से एक है, जिसने देशव्यापी पूर्ण लॉकडाउन के पहले ही पूरे राज्य में कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया था. ये 1 मई तक राज्य में लागू भी रहा.

9 मार्च को ही राज्य सरकार ने जीओटैगिंग और जीओफेंसिंग के साथ अपना मोबाइल ऐप भी जारी कर दिया था. प्रोफ़ेसर मुखर्जी के मुताबिक़ इन दोनों फै़सलों ने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन में काफ़ी मदद की.

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि पंजाब सरकार के इंतजाम काफ़ी नहीं हैं.

अकाली दल के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा के मुताबिक़ पंजाब में जो कुछ अच्छा हो रहा है, वो वहाँ के लोगों की इम्यूनिटी की बदौलत है. वरना ना तो राज्य में टेस्ट इतने हो रहे हैं कि कोरोना के मरीज़ों का पता लगाया जा सके और ना ही क्वारंटीन सेंटर और अस्पतालों की हालात अच्छी है. उनका आरोप है कि डॉक्टरों को पर्याप्त पीपीई किट भी नहीं मिल रही.

हालाँकि पंजाब में अब तक एक भी डॉक्टर की कोरोना से मौत नहीं हुई है. पंजाब में आज की तारीख़ में तकरीबन 2000 से 2200 टेस्ट रोज़ाना हो रहे हैं.

टेस्टिंग की संख्या बढ़ाना पंजाब के सामने पहली बड़ी चुनौती है.

पंजाब के सामने दूसरी चुनौती है, लॉकडाउन में ढील के बाद की स्थिति से कैसे निपटें?

पिछले दो महीनों में देश के मुक़ाबले पंजाब के लोगों ने लॉकडाउन के नियमों का ज़्यादा सख़्ती से पालन किया. 1 जून के बाद भी पंजाब अपने सारे पैरामीटर को उसी तरह संभाल के रख सका, जैसे आज हैं.

तीसरी चुनौती है, राज्य में आने वाले एसिम्प्टोमेटिक मामले. राज्य के अधिकारियों के मुताबिक़ पंजाब में 85 फ़ीसदी मामले बिना लक्षण वाले कोरोना के हैं. जैसे-जैसे ज़िंदगी वापस पटरी पर लौटेगी, ऐसे मामलों पर नज़र रखने में राज्य सरकार को मुश्किल ज़्यादा आएगी.

सवाल और जवाब

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आपके सवाल

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    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

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    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

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    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

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    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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