कोरोना संकट: बिहार में पूर्वोत्तर के रेल यात्रियों पर पथराव का पूरा सच
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Author, दिलीप कुमार शर्मा
पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
"वो हम लोगों पर चिल्ला रहे थे और मारने की धमकी दे रहे थे. अचानक हमारे कोच में चढ़ आए कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की भी की. हमारी ट्रेन पर पत्थर फेंके गए. पुलिस के कुछ लोग स्टेशन पर खड़े थे लेकिन किसी ने हमारी मदद नहीं की."
मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग के पास्टोरल क्वारंटीन सेंटर में ठहरी 22 साल की विदाफी लिंगदोह बिहार के दानापुर स्टेशन पर हुई उस घटना को यादकर अब भी सहम जाती हैं.
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कोरोना वायरस के चलते देशभर में जारी लॉकडाउन में फँसे अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए पूर्वोत्तर के कई राज्यों ने केंद्र सरकार की मदद से स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की है.
लेकिन इन स्पेशल ट्रेनों से लौट रहे प्रवासी लोगों का आरोप है कि लंबी दूरी तय करने वाली इन ट्रेनों के शौचालयों में न पानी रहता है और न ही रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए किसी तरह की व्ययवस्था की है.
ट्रेन में बदसलूकी
दरअसल, हरियाणा के गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से 22 मई की शाम क़रीब साढ़े छह बजे पूर्वोत्तर राज्यों के प्रवासी लोगों को लेकर नागालैंड के दीमापुर के लिए एक स्पेशल ट्रेन रवाना हुई थी.
इस ट्रेन में मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के अधिक यात्री थे. लेकिन यह ट्रेन जब 24 मई की सुबह दानापुर रेलवे स्टेशन पहुँची, तो यहाँ पहले से मौजूद कई यात्री जबरन इसमें चढ़ गए.
इस बीच पूर्वोत्तर राज्यों के यात्रियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और इस बात को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद हो गया.
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गुरुग्राम रेलवे स्टेशन से चली इस स्पेशल ट्रेन के स्लीपर कोच (एस-10) में यात्रा कर रही विदाफी लिंगदोह ने बीबीसी से कहा, "यह घटना सुबह क़रीब 5 बजे की है. उस समय हम लोग सो रहे थे. हमारी ट्रेन काफ़ी रुक-रुक कर चल रही थी. लेकिन हमें यह बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बुक की गई इस स्पेशल ट्रेन में रास्ते से दूसरे यात्री जबरन चढ़ जाएँगें. दानापुर रेलवे स्टेशन पर पहले से खड़े बड़ी संख्या में यात्री हमारी ट्रेन की बोगी में घुस आए थे. हमने उन लोगों को काफ़ी समझाया कि ये स्पेशल ट्रेन है और केवल पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के लिए है. लेकिन वे हमारी बात समझने को तैयार ही नहीं थे."
उन्होंने आगे बताया- "हमने स्टेशन पर खड़े पुलिसकर्मियों से भी मदद माँगी लेकिन कोई हमारी मदद के लिए नहीं आया. हमारे कुछ साथियों ने कोरोना वायरस और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के बारे में प्रवासियों को बताते हुए उन्हें ट्रेन से उतरने के लिए कहा तो वे गाली गलौच और धक्का-मुक्की पर उतर आए. ट्रेन में एक पल के लिए स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि हम सब लोग डर गए थे. क्योंकि वे काफ़ी संख्या में थे."
राजस्थान के जोधपुर स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही विदाफी इतना कुछ होने के बाद भी ट्रेन में जबरन चढ़ने वाले बिहार के प्रवासी लोगों को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार नहीं मानती.
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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां
आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST
वो कहती हैं, "देश के कई शहरों में लॉकडाउन के कारण फँसे हर व्यक्ति को अपने घर जाना है. लेकिन उसके लिए उनके गृह राज्य को व्यवस्था करनी होगी. रेलवे प्रशासन को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इतने लंबे सफ़र पर निकले यात्रियों को रास्ते में कोई परेशानी न हो. अगर हमारी ट्रेन को जगह-जगह रोका नहीं गया होता तो यह घटना नहीं होती. आप सोचिए कोई बड़ी घटना हो जाती तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी होती."
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इसी ट्रेन से यात्रा करने वाले 26 साल के आइबनजोपलान्ग कहते हैं, "हमारा दिन अच्छा था जो यह घटना बड़ी नहीं हुई और हम बच गए. दरअसल जिन लोगों को ट्रेन से उतार दिया गया था और जो लोग चढ़ नहीं पाए बाद में उन लोगों ने ग़ुस्से में ट्रेन पर काफ़ी पत्थर फेंके. कई कोच की खिड़कियों के शीशे टूट गए थे. वो हमें गालियां दे रहे थे और मारने की धमकी दे रहे थे. मैंने और हमारे कई साथियों ने मेघालय पुलिस के अधिकारियों और बाहर फँसे लोगों को लाने वाली मेघालय टीम को फ़ोन कर दिया था. हमारे साथ यात्रा कर रहीं लड़कियां काफ़ी डर गई थीं और कई रोने लगी थीं."
उन्होंने बताया, "सारे कोच में कई साथियों को मामूली चोटें भी आई थीं. ट्रेन में एक अजीब सा माहौल हो गया था. आप वीडियो को ध्यान से देखिए किस तरह लोग ट्रेन में जबरन घुस गए और सीटों पर क़ब्ज़ा कर बैठ गए. किसी भी कोण से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा था. हम सबकी जान जोखिम में आ गई थी. अगर रेलवे प्रशासन को रास्ते में इस तरह यात्रियों को चढ़ाना ही था तो स्पेशल ट्रेन का फिर मतलब क्या रहा."
मेघालय के रीभोई ज़िले के उमस्निंग के रहने वाले आइबनजोपलान्ग नई दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और फ़िलहाल अपने ही गाँव के एक स्कूल में 14 दिनों के लिए क्वारंटीन पर हैं.
हालाँकि, दानापुर रेल मंडल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार इन तमाम आरोपों में रेल प्रशासन को बिल्कुल दोषी नहीं मानते.
वीडियो कैप्शन, प्रवासी मज़दूर आखिर शहरों में क्यों नहीं रुक रहे?
समन्वय की कमी
रेलवे प्रशासन का पक्ष रखते हुए राजेश कुमार ने बीबीसी से कहा, "दरअसल दीमापुर तक जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन के दानापुर पहुँचने से पहले एक और श्रमिक स्पेशल ट्रेन आई थी जिसमें 100 से 150 यात्री दानापुर उतरे थे. उन लोगों को कटिहार और खगड़िया जाना था और उन्हें रिसीव करने के लिए स्टेशन पर बिहार सरकार के अधिकारी मौजूद थे. राज्य सरकार के लोगों ने हमसे अनुरोध किया था कि जो दीमापुर जाने वाली अगली श्रमिक स्पेशल ट्रेन आ रही है उससे बिहार पहुंचे प्रवासी लोगों को आगे भेजा जाए और कटिहार और खगड़िया में ट्रेन का स्टॉपेज करवा दें."
रेलवे जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार यहाँ तक कहते हैं कि बिहार सरकार ने दानापुर पहुँचे अपने यात्रियों को कटिहार और खगड़िया पहुँचाने के लिए बसों का इंतज़ाम किया था. लेकिन किसी कारण से बाद में बिहार प्रशासन ने अवगत कराया कि वे इन यात्रियों को बस से नहीं भेज पाएंगे.
वो कहते हैं, "जब दीमापुर जाने वाली ट्रेन दानापुर पहुँची तो प्लेटफॉर्म पर इंतज़ार कर रहे लोग उसमें चढ़ गए. स्टेशन पर बिहार प्रशासन के लोग मौजूद थे. यहाँ तक कि प्लेटफॉर्म पर खड़े यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने के लिए माइक से घोषणा कर कहा गया. लेकिन ट्रेन के अंदर मौजूद यात्रियों ने इसका विरोध किया. उसके बाद दोनों गुटों के बीच यह घटना हुई. जबकि वहाँ पुलिस के लोग थे."
क्या पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के लिए अलग से बुक की गई स्पेशल ट्रेन में रास्ते से यात्रियों को चढ़ाया जा सकता है? इस सवाल का जवाब देते हुए राजेश कुमार ने कहा, "मैं इस सवाल का कोई आधिकारिक जवाब तो नहीं दे सकता. क्योंकि इन सारे मुद्दों को केंद्रीय गृह मंत्रालय देख रहा है. रास्ते में यात्री चढ़ाए जाएंगे या नहीं ये सारे फैसले संबंधित राज्य और गृह मंत्रालय के बीच की बात है."
दानापुर रेल मंडल के एक और अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बिहार सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय की कमी के कारण यह घटना हुई है. जब बिहार पहुँच रहे प्रवासियों को उनके घर तक पहुँचाने के लिए बसों का इंतजाम किया गया था तो आनन-फानन में उन लोगों को दूसरी ट्रेन पर क्यों चढ़ाया गया."
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'बयानबाज़ी करना ठीक नहीं'
इस पूरी घटना पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, "मैंने रेल मंत्री और बिहार सरकार के समक्ष ट्रेन से यात्रा करने वाले पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया है. इसके साथ ही पूर्वोत्तर जाने वाली ट्रेनों के रूट की ओर अतिरिक्त आरपीएफ़ जवानों की टीम भेजी गई है. बिहार के डीजीपी ने मुझे आश्वासन दिया है कि वह व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करेंगे और सभी आवश्यक कार्रवाई करेंगे."
ऐसा मेडिकल टेस्ट जिससे साबित हो सके कि किसी शख्स को कोरोना वायरस था और अब उसमें कुछ इम्युनिटी आ गई है. यह टेस्ट खून में एंटीबॉडीज का पता लगाता है, जिन्हें बीमारी से लड़ने के लिए शरीर पैदा करता है.
बिना लक्षण वाले
ऐसा शख्स जिसे बीमारी हुई मगर उसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए. कुछ स्टडीज से पता चला है कि कोरोना वायरस का शिकार हुए कुछ लोगों में तेज़ बुखार या कफ़ जैसे आम लक्षण नहीं नज़र आए.
कोरोना वायरस
वायरस समूह में से एक वायरस जिससे मनुष्यों या जानवरों में गंभीर या हल्की बीमारी हो सकती है. पूरी दुनिया में फैले कोरोना वायरस से कोविड-19 बीमारी हो रही है. सामान्य सर्दी या इंफ्लूएंजा (फ़्लू) फैलाने वाले दूसरे तरह के कोरोना वायरस हैं.
कोविड-19
कोरोना वायरस की वजह से फैल रही बीमारी का सबसे पहले पता 2019 के अंत में चीन के वुहान में लगा. यह मूलरूप में फ़ेफ़ड़ों पर असर डालता है.
संक्रमण की तेज़ी को रोकना
ट्रांसमिशन की दर को कम करना ताकि चार्ट पर प्रदर्शित किए जाने पर मामलों की संख्या के आधार पर पीक को फ्लैट कर कर्व को नीचे लाया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते बोझ को कम किया जा सके.
फ़्लू
इंफ्लूएंजा का संक्षिप्त नाम. एक वायरस जो कि सीजनल बीमारियों में मनुष्यों और जानवरों में फैलता है.
सामुदायिक प्रतिरोधक क्षमता
एक बड़ी आबादी तक पहुंचने के बाद किस तरह से एक बीमारी का फैलाव सुस्त पड़ता है.
लड़ने में सक्षम
ऐसा शख्स जिसका शरीर किसी बीमारी के सामने टिक सके या उसे रोक दे वह इससे इम्यून कहा जाता है. एक बार जब कोई शख्स कोरोना वायरस से उबर जाता है तो ऐसा माना जाता है कि वह एक निश्चित अवधि तक इस बीमारी का फिर से शिकार नहीं हो सकता.
वायरस के असर करने की अवधि
किसी बीमारी का शिकार होने और उसका लक्षण दिखाई देना शुरू होने के बीच की अवधि
लॉकडाउन
आवाजाही या रोज़ाना की ज़िंदगी पर पाबंदियां, जिनमें सार्वजनिक इमारतें बंद हैं और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई देशों में लॉकडाउन को कड़े उपायों के तौर पर लागू किया गया है."
शुरुआत
किसी क्लस्टर या अलग-अलग इलाकों में तेज रफ्तार से बीमारी के कई मामले सामने आना.
महामारी
किसी गंभीर बीमारी का कई देशों में एकसाथ तेजी से फैलना महामारी कहलाता है.
एकांतवास
किसी संक्रामक बीमारी को फैलने से रोकने के लिए इसकी जद में आए लोगों को अलग रखना.
सार्स
सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम एक कोरोना वायरस का ही प्रकार है जो कि एशिया में 2003 में शुरू हुआ था.
सेल्फ-आइसोलेशन
घर पर ही रहना और अन्य लोगों से सभी तरह के संपर्क से बचना ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके.
सामाजिक दूरी
अन्य लोगों से दूर रहना ताकि बीमारी के ट्रांसमिशन की रफ्तार कम की जा सके. सरकार की सलाह है कि अपने साथ रह रहे लोगों के अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से न मिलें. साथ ही सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से भी बचें.
आपातकालीन स्थिति
किसी संकट के वक्त सरकार द्वारा रोज़ाना की जिंदगी पर पाबंदी लगाने के मकसद से उठाए गए कदम. इसमें स्कूलों और दफ्तरों को बंद करना, लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाना और यहां तक कि सैन्य बलों को तैनात करना ताकि रेगुलर इमर्जेंसी सेवाओं को सपोर्ट किया जा सके."
लक्षण
संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर की कोशिश के तौर पर इम्यून सिस्टम से किसी बीमारी के संकेत. कोरोना वायरस का मुख्य लक्षण बुखार, सूखी खांसी और सांस लेने में दिक्कत होना है."
टीका
ऐसा इलाज जिससे शरीर एंटीबॉडीज पैदा करता है, जो कि बीमारी से लड़ता है और आगे के संक्रमण से लड़ने की इम्युनिटी देता है."
वेंटीलेटर
ऐसी मशीन जो कि ऐसे वक्त पर शरीर के लिए सांस लेने का काम करती है जब फ़ेफ़ड़े काम करना बंद करने लगते हैं.
विषाणु
एक छोटा सा एजेंट जो कि किसी जीवित सेल के भीतर अपनी कॉपी बना लेता है. वायरस की वजह से ये सेल मरने लगती हैं और शरीर की सामान्य केमिकल प्रक्रियाओं को अवरुद्ध कर देती हैं जिससे बीमारी हो जाती है.
मुख्य कहानी नीचे जारी है
ट्रांसलेटर
इन सभी शब्दों का क्या मतलब है?
बिहार के दानापुर स्टेशन पर पूर्वोत्तर के लोगों के साथ हुई इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों समेत वरिष्ठ अधिकरियों ने तुरंत भारत सरकार और बिहार सरकार के अधिकारियों से संपर्क कर अपने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा उठाया.
वहीं सोशल मीडिया पर बिहार के लोगों को लेकर हो रही बयानबाजी को पीड़ित यात्री पूरी तरह ग़लत मानते हैं.
विदाफी कहती हैं, "जो लोग ट्रेन में जबरन चढ़ गए थे या फिर जिन्होंने ग़ुस्से में पत्थर फेंके दरअसल वे लंबी दूरी से यात्रा कर आए थे और उन सभी थके-हारे लोगों को अपने घर पहुँचना था. इसमें किसी एक विशेष समुदाय के नाम पर बयानबाज़ी करना पूरी तरह ग़लत है. अगर इस पूरी घटना में किसी की ज़िम्मेदारी बनती है तो वह रेलवे प्रशासन की है."
कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले
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कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है
सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं
कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.
ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.
लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.
एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल
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जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.
यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.
ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.
कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स
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वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.
इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.
क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.
ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.
फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.
बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.
इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.
अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन
मिशेल रॉबर्ट्सबीबीसी हेल्थ ऑनलाइन एडिटर
अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.
अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.
क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड
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ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.
ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.
जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे
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कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.
लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ
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शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.
फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.
क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.
मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.
फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.
अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.
सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.
मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.
यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.
गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.
मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक
जेम्स गैलेगरस्वास्थ्य संवाददाता
अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.
अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.
ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.
बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस
बीबीसी न्यूज़हेल्थ टीम
चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.
ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.
हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.