कोरोना लॉकडाउनः जब हवाई जहाज़ से आए झारखंड के प्रवासी मज़दूर

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- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, राँची से, बीबीसी हिन्दी के लिए
लॉकडाउन में मजदूरों की रोती-बिलखती तस्वीरों के बीच झारखंड से एक अच्छी खबर है.
रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर गुरुवार को मुंबई से वापस लौटने वाले कुछ मुस्कुराते चेहरे लोगों ने देखे. ये तस्वीरें उन श्रमिकों की हैं, जो विशेष विमान से राँची पहुँचे हैं.
झारखंड के इन 174 प्रवासी श्रमिकों ने गुरुवार की सुबह मुंबई के छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी. सवा दो घंटे बाद ये सभी लोग राँची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर थे.
इन हवाई यात्रियों में कईयों ने पैरों में हवाई चप्पलें पहन रखी थीं. इनमें से अधिकतर लोगों ने पहली बार हवाई यात्रा की. ये लोग राज्य के गढ़वा, हज़ारीबाग़, राँची आदि जिलों के निवासी हैं. कुछ मजदूर अकेले अपने घर लौटे, तो कुछ के साथ उनका परिवार भी वापस आया है.
यह सुखद है कि इनमें से अधिकतर लोगों को वापसी के लिए ट्रेनों का टिकट भी नहीं मिल सका था. अब इनकी वापसी विमान से हुई है.
इस विशेष विमान का ख़र्च बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों ने उठाया है. वे लोग कुछ और विमानों का इंतज़ाम करा रहे हैं ताकि मजदूरों की सुखद वापसी हो सके.
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घर वापस लौटने की खुशी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, "नेशनल लॉ स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों के सहयोग एवं झारखंड एवं महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों समेत इस पुनीत कार्य में सम्मिलित सभी कोऑर्डिनेटरों के अथक परिश्रम से 174 मज़दूर सकुशल घर लौटे. इस नेक एवं अद्वितीय कार्य के लिए मैं एलुमनाई नेटवर्क ऑफ नेशनल लॉ स्कूल का आभार प्रकट करता हूं. आपसे प्रेरित होकर अन्य संस्थाएँ भी भविष्य में मदद को सामने आएँगी."
इस विमान से आने वाले यात्रियों में गढ़वा जिले के संजय कुमार चौधरी भी शामिल थे.
उन्होंने कहा, "मुझे बहुत ख़ुशी है कि मैं घर वापस लौट पाया. मुझे रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा गया था. इसके दो दिन बाद ही बताया गया कि एक प्लेन 28 मई की सुबह मुंबई से राँची जाएगा. मेरा भी नाम उसमें है. तब मुझे विश्वास ही नहीं हुआ लेकिन अब घर आ गए. मैं एक ऑपरेटर हूँ और मैंने पहले कोई हवाई यात्रा नहीं की थी. इसलिए यह पूरी ज़िंदगी याद रहने वाली बात बन गई है."
इसी विमान से वापस आयीं मेरी की भी यह पहली हवाई यात्रा थी.
उन्होंने कहा, "मैं उन सभी लोगों की आभारी हूँ, जिनकी पहल पर हमारी घर वापसी हुई. हमलोग हताश हो चुके थे क्योंकि मुंबई से झारखंड के लिए ट्रेनें नहीं चल रही थीं. जब फ़्लाइट का पता चला, तो लगा कोई मज़ाक़ कर रहा है. लेकिन, यह मज़ाक़ नहीं था. हम अपनी धरती पर आ गए. अब यह दुख नहीं होगा कि परदेस में अकेले हैं."

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झारखंड सरकार की कोशिश
राँची एयरपोर्ट पर इन सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग कर उन्हें विशेष बसों से उनके गृह जिलों के लिए रवाना किया गया. एयरपोर्ट पर इनके लिए पानी और स्नैक्स का भी इंतज़ाम किया गया था. बसें सैनिटाइज कर तैयार रखी गई थीं.
इससे पहले झारखंड सरकार ने भी गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर मजदूरों के लिए कुछ चार्टर्ड फ्लाइट्स चलाने की अनुमति माँगी थी. सरकार अंडमान, लद्दाख और कुछ उन जगहों से मजदूरों को विशेष विमान से झारखंड वापस लाना चाहती है, जिन्हें ट्रेन या बसों से लाना संभव नहीं है.
राज्य सरकार के एक बड़े अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि यह काम अंतिम चरण में है. संभव है कि इसी सप्ताह या कल भी हमें कुछ उड़ानों को अनुमति मिल भी जाए. हम देश के पहले वैसे राज्य होंगे, जहां की सरकार मजदूकों को विमान से वापस लाएगी.

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पहली ट्रेन भी झारखंड आई थी
मई दिवस के मौक़े पर तेलंगाना के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से झारखंड के हटिया तक आने वाली विशेष ट्रेन भी देश की पहली वैसी ट्रेन थी, जिसका लॉकडाउन के दौरान परिचालन हुआ.
उस ट्रेन के परिचालन के बाद रेलवे ने बैठक कर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का फ़ैसला किया था. उस विशेष ट्रेन से क़रीब 1200 मजदूर झारखंड वापस लौटे थे. इसको लेकर काफ़ी सियासत भी हुई थी.
संभव है कि यह इत्तिफ़ाक़ हो. फिर भी यह सच याद रखा जाएगा कि मजदूरों की पहली ट्रेन और पहली फ़्लाइट दोनों झारखंड के लिए चलीं.

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