भारत-चीन के बीच ताज़ा विवाद की तीन बड़ी वजहें

नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारतीय सेना ने बताया है कि भारत-चीन सीमा पर गलवान घाटी में सोमवार रात को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई है जिसमें सेना के एक अधिकारी और दो जवानों की मौत हो गई है. सेना के अनुसार संघर्ष में दोनों देशों के सैनिक हताहत हुए हैं. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से सीमा को लेकर तनाव की स्थिति थी. आइए जानते हैं क्या थी इसकी वजह -

ईसा के जन्म से 500 साल पहले चीन के नामचीन फ़ौजी जनरल सुन ज़ू ने 'द आर्ट ऑफ़ वॉर' नाम की किताब में लिखा था, "जंग की सबसे बेहतरीन कला है कि बिना लड़े हुए ही दुश्मन को पस्त कर दो."

सैकड़ों सालों बाद भी चीन में इस किताब की बातों का लोहा माना जाता है, ठीक उसी तरह जैसे भारत में चाणक्य नीति को माना जाता है.

भारत-चीन के बीच फ़िलहाल जारी बॉर्डर तनाव को समझने के लिए शायद 'जंग की इस बेहतरीन कला' को ध्यान में रखने की भी ज़रूरत है.

मौजूदा हालात ये हैं कि 1999 में पाकिस्तान वाली सीमा पर करगिल बिल्ड-अप के बाद शायद भारत की किसी सीमा पर पड़ोसी देश के सैनिकों का ये सबसे बड़ा जमावड़ा हो सकता है.

भारत और चीन के बीच सीमा को वास्तविक नियंत्रण रेखा या एलएसी कहा जाता है यानी 1962 की लड़ाई के बाद की वास्तविक स्थिति.

रक्षा मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि यह शुरुआत अप्रैल के तीसरे हफ़्ते में हुई थी जब लद्दाख बॉर्डर यानी लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर "चीन की तरफ़ सैनिक टुकड़ियों और भारी ट्रकों की संख्या में इज़ाफ़ा दिखा था."

इसके बाद से मई महीने में सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियाँ रिपोर्ट की गई हैं, चीनी सैनिकों को लद्दाख में सीमा का निर्धारण करने वाली झील में भी गश्त करते देखे जाने की बातें सामने आई थीं.

मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पहले सेनाध्यक्ष जनरल नरावणे ने सीमा का दौरा किया.

मौजूदा तनाव इस बात से भी बढ़ा जब मंगलवार को किसी देश का नाम लिए बिना चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 'सेना को तैयार रहने के निर्देश दिए थे.'

इसी दौरान दिल्ली में तीनों सेनाओं के प्रमुखों की बैठकों के दौर जारी थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के अलावा उनकी मुलाक़ात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हुई.

मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तूल भी पकड़ा जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार भारत-चीन सीमा विवाद में मध्यस्थता की पेशकश कर डाली.

वजह सामरिक?

भारत चीन

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2017 में डोकलाम क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच मुक्केबाज़ी, हाथापाई और छीना-झपटी के वीडियो वायरल हुए थे और कई दिनों के बाद ये तनातनी ख़त्म हुई थी.

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का इतिहास वैसे तो दशकों पुराना है लेकिन ताज़ा तनाव की तीन प्रमुख वजहें दिखती हैं.

ज़ाहिर है, पहली वजह सामरिक है. ये दो ऐसे पड़ोसी हैं जिनकी फ़ौजों की तादाद दुनिया में पहले और दूसरे नंबर पर बताई जाती हैं और जिनके बीच परस्पर विरोध का एक लंबा इतिहास रहा है.

इस बार भी वही इलाक़े दोबारा चर्चा में हैं जहाँ 1962 में दोनों के बीच एक जंग भी हो चुकी है और चीन का दावा रहा है कि उसने इसमें बाज़ी भी मारी थी.

तनाव की बड़ी वजह पिछले कुछ सालों में भारतीय बॉर्डर इलाक़ों में तेज़ होता निर्माण कार्य भी हो सकती है. रक्षा मामलों के जानकार अजय शुक्ला बताते हैं कि 'सड़कें एक बड़ी वजह है.'

लद्दाख में भारतीय सेना

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उन्होंने कहा, "आमतौर से शांतिपूर्ण रही गलवान घाटी अब एक हॉटस्पॉट बन चुकी है क्योंकि यहीं पर वास्तविक नियंत्रण रेखा है जिसके पास भारत ने शियोक नदी से दौलत बेग ओलडी (डीबीओ) तक एक सड़क का निर्माण कर लिया है. पूरे लद्दाख के एलएसी इलाक़े में ये सबसे दुर्गम इलाक़ा है."

लगभग सभी जानकार इस बात से भी सहमत दिखते हैं कि चीन के बॉर्डर इलाक़ों में निर्माण और रखरखाव हमेशा से बेहतर रहा है. सीमावर्ती इलाक़ों की मूलभूत सुविधाओं में भी चीन भारत से कहीं आगे रहा है.

भारतीय थल सेना के पूर्व प्रमुख जनरल वीपी मालिक को लगता है, "चीन की बढ़ी हुई बेचैनी की एक और वजह है. चीनी फ़ौज का एक तरीक़ा रहा है क्रीपिंग (रेंगते हुए आगे बढ़ना). गतिविधियों के ज़रिए विवादित इलाक़ों को धीरे-धीरे अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लेना. लेकिन इसके विकल्प कम होते जा रहे हैं क्योंकि अब भारतीय सीमा पर विकास हो रहा है और पहुँच बढ़ रही है."

नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

हिंदुस्तान टाइम्स में रक्षा सम्बंधी मामले कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार राहुल सिंह भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं और कहते हैं कि, "पिछले पाँच सालों से भारतीय सीमाओं को बेहतर बनाने पर ज़्यादा ध्यान बढ़ाया गया है."

उनके मुताबिक़, "पहले भी सीमा पर दोनों सेनाओं के सैनिकों में छोटी-मोटी झड़पें होती रहती रही हैं. डोकलाम के पहले भी 2013 और 2014 में चुमार में ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं. लेकिन इस बार की गतिविधियों का दायरा ख़ासा बड़ा है."

पूर्व मेजर जनरल अशोक मेहता ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बढ़ती कथित चीनी गतिविधियों का बड़ा कारण "पुल और हवाई पट्टियों का निर्माण बताया जिसकी वजह से भारतीय गश्तें बढ़ चुकी हैं."

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उन्होंने ये भी कहा कि, "ये सामान्य नहीं हैं. हालांकि भारतीय सेना प्रमुख ने शुरुआत में कहा था कि इस तरह के मामले होते रहते हैं और सिक्किम की घटना का ताल्लुक़ गलवान घाटी में हुए वाक़ये से नहीं है. लेकिन मेरे हिसाब से सभी मामले एक दूसरे से जुड़े हैं. ये नहीं भूलना चाहिए कि जब भारत ने जम्मू कश्मीर के ख़ास दर्जे को ख़त्म कर दो नए केंद्र शासित प्रदेशों के नक़्शे ज़ारी किए तो चीन इस बात से ख़ुश नहीं था कि लद्दाख के भारतीय क्षेत्र में अक्साई चिन भी था."

आर्थिक वजह?

मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग

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दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाएँ पिछले पाँच महीनों से कोरोना वायरस के बाद के मंज़र से जूझ रहीं हैं.

चीन, अमरीका, यूरोप, मध्य पूर्व समेत भारत और दक्षिण एशिया के देशों की न केवल विकास दरें अप्रत्याशित रूप से गिरी हैं बल्कि बढ़ती बेरोज़गारी और ठप होते व्यवसायों को पटरी पर लाने के लिए सरकारों को लाखों करोड़ों रुपए ख़र्च करने पड़ रहे हैं.

ज़्यादातर लोग इसकी तुलना 1930 के 'द ग्रेट डिप्रेशन' से भी कर रहे हैं. इस सब के बीच 17 अप्रैल को भारत सरकार ने एक चौंकाने वाला फ़ैसला लिया.

केंद्र सरकार ने देश में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफ़डीआई के नियमों को उन पड़ोसियों के लिए और सख़्त कर दिया जिनकी सीमाएँ आपस में मिलती हैं.

नए नियम के तहत किसी भी भारतीय कंपनी में हिस्सा लेने से पहले सरकारी अनुमति लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है चूंकि पड़ोसियों में सबसे ज़्यादा व्यापार चीन के साथ है तो इसका सबसे ज़्यादा असर भी उसी पर होगा.

वीडियो कैप्शन, भारत और चीन की सेना आख़िर लद्दाख बॉर्डर पर गलवान वैली में क्यों भिड़ीं?

इस फ़ैसले की प्रमुख वजहों में से एक थी चीन के सेंट्रल बैंक 'पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना' का भारत के सबसे बड़े निजी बैंक 'एचडीएफ़सी' के 1.75 करोड़ शेयरों की ख़रीद. इससे पहले तक चीन भारतीय कंपनियों में 'बेधड़क' निवेश करता रहा है.

अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के जानकार और जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व प्रोफ़ेसर एमएम ख़ान का मानना है, "फ़ौजी और आर्थिक ही वो क्षेत्र हैं जहाँ चीन अपना वैश्विक वर्चस्व क़ायम करने के लिए विदेश नीति को समय-समय पर बदलता रहता है."

उन्होंने कहा, "कोरोना के बाद दुनिया के शेयर बाज़ारों में अफ़रातफ़री मची हुई है और चीन बड़े देशों की कम्पनियों में निवेश कर रहा है. आप दक्षिण एशिया को देख लीजिए. श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इन्फ़्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी की बड़ी कंपनियों में चीनी क़र्ज़ या निवेश मिल ही जाएगा".

अब अगर भारत ने एकाएक अपनी एफ़डीआई नीति में एक बड़ा बदलाव किया तो काफ़ी सम्भव है कि चीन की विदेश नीति इससे थोड़ा असहज महसूस कर रही हो.

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कोरोना वायरस और चीन बैकफ़ुट पर?

हाल ही में 194 सदस्य देशों वाली वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में एक प्रस्ताव पेश किया गया कि इस मामले की जाँच होनी चाहिए कि दुनिया भर में नुक़सान पहुँचाने वाला कोरोना वायरस कहाँ से शुरू हुआ. ये असेंबली विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की प्रमुख नीति निर्धारक इकाई है,

दूसरे देशों के अलावा भारत ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.

चीन का बचाव करते हुए सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी के साथ काम किया है.

शी जिनपिंग ने कहा, "हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन और संबंधित देशों को समय पर सारी जानकारी दी थी. कोरोना पर क़ाबू पा लेने के बाद चीन किसी भी जाँच का समर्थन करता है."

चीन इस समय कोरोना वायरस के स्रोत और शुरुआती स्तर पर ग़लत क़दम उठाने की वजह से आलोचनाओं का सामना कर रहा है लेकिन इसके बावजूद चीन ने पुरज़ोर तरीक़े से इसका विरोध किया है.

सबसे ज़्यादा निंदा अमरीका से आ रही है जहाँ कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख पार कर चुकी है. अमरीका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के मंत्री कीथ क्रैच ने कहा था कि, "ट्रंप प्रशासन चीन को कोविड-19 पर चुप रहने के कारण दंडित करने के बारे में विचार कर रहा है".

हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में रक्षा सम्बंधी मामले कवर करने वाले पत्रकार राहुल सिंह मानते हैं कि, "वुहान में कोरोना के फैलने और उसके बाद वैश्विक निंदा के बीच भारत-चीन सीमा पर विवाद की ख़बरें सामने आने से फ़ोकस तो बदल ही सकता है."

वॉशिंगटन में बीबीसी संवाददाता विनीत खरे पिछले कई महीनों से अमरीका में चीन के ख़िलाफ़ तेज़ होते स्वर पर रिपोर्ट करते रहे हैं.

उन्होंने बताया कि अब अमरीकी मीडिया में भारत-चीन के बीच वस्ताविक नियंत्रण रेखा वाली ख़बरों को एक दूसरे एंगल से भी देखा जा रहा है.

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मिसाल के तौर पर सीएनएन की वेबसाइट पर चीन पर छपे एक लेख में लिखा है, "ये पहली बार नहीं है जब बीजिंग ने साउथ चाइना सी में अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया है या फिर भारत के साथ सीमा पर विवाद किया. लेकिन ऐसे वक़्त में जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली में राजनीतिक नेताओं का कोरोना वायरस से जुड़े आंतरिक मामलों के कारण ध्यान बंटा हुआ है, चीन के लिए ये एक मौक़ा है कि वो कैसे इन दोनों इलाक़ों में फ़ायदा उठाए जिसे कोरोना वायरस पैंडेमिक ख़त्म होने के बाद बदला न जा सके."

विनीत खरे बताते हैं कि इसके अलावा कुछ वक़्त पहले तक दक्षिण एशिया के लिए अमरीका की मुख्य डिप्लोमैट ऐलिस वेल्स नेहाल ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा, "अगर किसी को चीन के अतिक्रमण को लेकर शक है तो मुझे लगता है कि उसे भारत से बात करनी चाहिए जहां भारत को हर हफ़्ते, महीने, नियमित तौर पर चीन की मिलिट्री की ओर से परेशान किया जाता है."

भारत चीन सीमा पर बढ़ी गतिविधियों की वजह इन तीनों के अलावा भी हो सकती हैं और इस पर बहस आगे भी जारी रहेगी.

फ़िलहाल चीन के विदेश मंत्रालय और राजदूत दोनों ने अपने रुख़ में थोड़ी नरमी ज़ाहिर की है. राजदूत सन विडोंग का कहना था कि, "भारत और चीन एक दूसरे के लिए अवसर हैं, ख़तरा नहीं."

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल वीपी मालिक मानते हैं कि, "इस तरह के विवादों का हल कूटनीतिक या राजनीतिक ही हो सकता है"

लेकिन उन्होंने साफ़ शब्दों में ये भी कहा कि, "मौजूदा विवाद में फ़ौजी हल फ़ेल हो चुका है और जहाँ-जहाँ आपसी तक़रार जारी है वो लंबी खिंच सकती है."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है?लीड्स के कैटलिन सेसबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता?बाइसेस्टर से डेनिस मिशेलसबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है?जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है?सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं?मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है?फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है?स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं?कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है?हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए?मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए?लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा?बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए?मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है?लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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