कोरोना संकट में क्वारंटीन सेंटर बने तिरुपति, श्रीकालहस्ती और कनिपक्कम मंदिर

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- Author, बी. हृदय विहारी
- पदनाम, बीबीसी के लिए
कोरोना वायरस संक्रमण के दौर में मानव इतिहास एक नए दौर से गुजर रहा है. इस वायरस को समझने की कोशिशें दुनिया भर में चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर इसकी चपेट में आ कर अब तक 1.97 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
ऐसे संकट के दौर में आंध्र प्रदेश के स्कूल और मंदिर क्वारंटीन सेंटर में तब्दील हो गए हैं. आंध्र प्रदेश ही दुनिया भर में मशहूर कुछ मंदिरों ने अपनी इमारतों को क्वारंटीन सेंटर बनाने के लिए दे दिया है.
तिरूमला- तिरुपति, श्रीकालहस्ती, कनिपक्कम मंदिरों के बोर्ड ने अपने स्वामित्व वाली कुछ इमारतों को कोविड-19 मरीजों के क्वारंटीन के लिए मुहैया कराई हैं. यानी इन मंदिरों के घरों के दरवाज़े हर धर्म के लोगों के लिए इन दिनों खुले हुए हैं.
इन मंदिरों की इमारतों में हिंदुओं के साथ मुसलमान ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के नागरिकों को भी शरण मिली हुई है. जबकि कुछ लोगों को इन इमारतों में इलाज की सुविधा मिल रही है.
राजस्व और भक्तों के हिसाब से तिरुमला- तिरूपति देवस्थान को दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है. इस मंदिर के पास कई गेस्टहाउस और ठहरने की व्यवस्था वाले लॉज उपलब्ध हैं. इनमें श्रीनिवासम लॉज और माधवम लॉज सबसे प्रमुख हैं. तिरूपति बालाजी के दर्शन के लिए आने वाले हजारों भक्त इन्हीं लॉजों में ठहरते हैं. ये लॉज भक्तों से हमेशा भरे रहते हैं.
श्रीनिवासम और माधवन लॉज तिरुपति बस अड्डे के पास विशाल परिसर में बने हुए हैं. कोरोना संकट के समय में यहां बेघर और प्रवासी मजदूरों को ठहराया गया है. इनमें विभिन्न क्षेत्रों के, विभिन्न धर्मों और विभिन्न जातियों के लोग शामिल हैं.
इसके अलावा लॉकडाउन के चलते आस पास के इलाकों में फंसे लोगों को भी यहां ठहराया गया है. इन दो इमारतों के अलावा तिरूपति रेलवे स्टेशन के सामने बने विष्णु निवासम और रेलवे स्टेशन के पीछे बने लॉज को भी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने आंध्र प्रदेश सरकार को सौंप दिया है ताकि वहां गरीबों, प्रवासी मजूदरों और असहाय लोगों को ठहराया जा सके.

तिरुपति के पास रेनिगुंता हाइवे पर तिरुमला-तिरुपति देवस्थानम की संपत्ति और हाल ही तैयार पद्मावती निलयम का इस्तेमाल कोविड-19 मरीजों के लिए क्वारंटीन सेंटर के रूप में हो रहा है.
जिला के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पदाधिकारी पंचचल्लैया ने बीबीसी को बताया कि इमारत में 500 कमरे हैं जिनमें फिलहाल कोविड-19 संक्रमित 200 मरीजों का इलाज चल रहा है.
दिल्ली में तब्लीगी जमात के आयोजन में शामिल होने के बाद कोरोना से संक्रमित मरीज भी यहां लाए गए हैं. इलाज के अलावा तिरुमला-तिरुपति देवस्थानम इन लोगों को खाना भी मुहैया करा रहा है.
हाल ही में यहां एक 56 साल के ब्रिटिश नागरिक को भी क्वारंटीन किया गया था. तीन सप्ताह क्वारंटीन रहने और दो बार कोरोना वायरस के टेस्ट में निगेटिव पाए जाने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया है.

हजारों लोगों के खाने का इंतजाम
तिरुमला-तिरुपति देवस्थानम जरूरतमंद लोगों को खाना भी उपलब्ध करा रहा है. महामारी वाले संकट के दौर में मंदिर प्रतिष्ठान प्रतिदिन एक लाख चालीस हजार फूड पैकेट्स हर रोज मुहैया करा रहा है.
प्रतिष्ठान के जन संपर्क अधिकारी रवि ने बीबीसी को बताया कि इस अभियान में मंदिर प्रतिष्ठान के 500 कर्मचारी जुटे हुए हैं.
रवि ने बीबीसी को बताया, "तिरुमला-तिरुपति देवस्थानम खुद से प्रतिदिन एक लाख चालीस हजार फूड पैकेट्स वितरित कर रहा है. हम दोपहर में 70 हजार पैकेट तैयार करते हैं और इतने ही पैकेट रात के वक्त तैयार करते हैं. ये पैकेट्स हम तिरूपति अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी और राजस्व विभाग को मुहैया कराते हैं."
"पद्मावती निलयम के अलावा श्रीनिवासम और माधवम लॉज और मंदिर के अन्य जगहों पर ठहरे लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं. इस व्यवस्था को समुचित रूप से चलाने के लिए मंदिर प्रतिष्ठान के 500 कर्मचारी दो शिफ्टों में काम कर रहे हैं."

कनिपकम मंदिर
कनिपक्कम मंदिर भारत में गणपति का सबसे बड़ा मंदिर है. यह तिरुपति मंदिर के पास चित्तूर जिले में स्थित है. कनिपक्कम मंदिर के पदाधिकारों ने 100 कमरों वाला गणेश सदन क्वारंटीन सुविधा के लिए प्रशासन को मुहैया कराया है.
मंदिर के एक अधिकारी देवुलू के मुताबिक 4 अप्रैल तक गणेश सदन में उन 40 लोगों को रखा गया था जिनके बारे में संदेह था कि वे कोविड-19 से संक्रमित हैं, इसमें हिंदू भी थे और मुसलमान भी.
देवुलू ने बीबीसी को बताया, "हमलोगों ने गणेश सदन प्रशासन को सौंपा था. उन लोगों ने एक अप्रैल से लेकर चार अप्रैल तक इसका इस्तेमाल क्वारंटीन सेंटर के तौर पर किया. चार अप्रैल को पता चला कि संदिग्धों में कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं है. तब सबको अपने अपने घर भेज दिया गया. इसके बाद से अब तक यहां किसी को नहीं लाया गया है."
हालांकि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने लगा था जिसमें दावा किया जा रहा था कि कनिपक्कम मंदिर ही क्वारंटीन सेंटर बन गया है और इसमें जूते चप्पल पहने मुस्लिम प्रवेश कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने के आरोप में चित्तूर पुलिस स्टेशन के क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज किया गया.
चित्तूर पुलिस ने इस मामले में तेलंगाना के सिड्डीपेट जिले के एम. विष्णुवर्धन रेड्डी को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया है. सरकार ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और सरकारी कर्मचारियों के साथ सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार करने जैसी शिकायतों के साथ मामला दर्ज कराया है.
देवुलू ने बीबीसी को बताया, "क्वारंटीन के समय गणेश सदन में मुस्लिम लोग भी रखे गए थे. लेकिन गणेश सदन मंदिर नहीं है. यह मंदिर के स्वामित्व वाला लॉज है. यह मंदिर से 300 मीटर की दूरी पर स्थित है. पहले हम क्वारंटीन सेंटर के लिए विनायक सदन को देना चाहते थे लेकिन कनिपकम गांव के लोगों के डर को देखते हुए हमने गणेश सदन प्रशासन को दिया, क्योंकि लॉकडाउन के दौरान मंदिर के आस पास कोई भी नहीं आता है."
"गणेश सदन में कमरे और बाथरूम अलग अलग बने हुए हैं. कोरोना वायरस संदिग्धों के लिए फिजिकल डिस्टेंसिंग के हिसाब से यह उपयुक्त भी था और सुविधाजनक भी."
गणेश सदन में जिन लोगों को क्वारंटीन किया गया, उनमें कोई भी कोरोना संक्रमित नहीं पाया गया बावजूद इसके चित्तूर में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.

श्रीकलाअष्टी
चित्तूर जिले में ही शिव का श्रीकालहस्ती मंदिर है. इस मंदिर के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिष्ठान ने अपना गंगा सदन गेस्टहाउस प्रशासन को मुहैया कराया था, जिसका प्रशासन ने कुछ दिनों तक इस्तेमाल किया है. इसके बाद प्रशासन की ओर से क्वारंटीन सेंटर को दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया गया.
स्थानीय मंडल राजस्व अधिकारी जरीना बेगम ने बीबीसी को बताया, "हम लोगों ने कोविड-19 संक्रमित मरीजों के क्वारंटीन के लिए मंदर के गंगा सदन गेस्टहाउस का इस्तेमाल किया था. यहां विभिन्न समुदाय के 70 लोगों को ठहराया गया था. लेकिन बाद कई वजहों के चलते क्वारंटीन सेंटर को वेरपेडू ले जाया गया. जब तक यहां क्वारंटीन सेंटर था तब मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था भी मंदिर प्रशासन की ओर से की जा रही थी."
"उन 70 लोगों में विभिन्न धर्मों के लोग थे. अभी जो चुनौती है उसमें धर्म से ऊपर उठकर सोचने का वक्त है. श्रीकालहस्ती में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है और यहां तक कि ड्यूटी पर तैनात लोग भी संक्रमित हो रहे हैं."
संक्रमण की आशंका के चलते खुद जरीना बेगम इन दिनों सेल्फ आइसोलेशन में रह रही हैं.
वहीं मंदिर के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "गंगा सदन गेस्टहाउस श्रीकालहस्ती मंदिर से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यहां भक्त ठहरा करते थे. एक सप्ताह तक प्रशासन ने इसका इस्तेमाल क्वारंटीन सेंटर के तौर पर किया था. इसके बाद प्रशासन ने क्वारंटीन सेंटर को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया. अभी हमारे किसी इमारत का इस्तेमाल क्वारंटीन सेंटर के तौर पर नहीं हो रहा है."
वैसे श्रीकालहस्ती अब रेड जोन इलाके में शामिल हैं. चित्तूर में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, अभी जिले में कोरोना संक्रमण के 55 मामले हैं.
राज्य प्रशासन ने पूरे राज्य के कई मंदिरों का उपयोग क्वारंटीन सेंटर के तौर पर किया है. यहां सभी धर्मों और जाति के लोगों को ठहराया गया है. इन तीन मंदिरों के अलावा आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दूसरे बड़े मंदिर भी कोरोना संकट के समय में शेल्टर होम और क्वारंटीन सेंटर बने हुए हैं.

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