कोरोना वायरस: फ्रंटलाइन वर्करों के साथ बढ़ती बदसलूकी के मायने

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    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

भारत में कोरोनावायरस के मामले

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559

मौतें

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

उन्होंने 'मरीज़ों की वजह से' तालाबंदी के दौरान भी अस्पताल खुला रखा लेकिन डॉक्टर साइमन हर्क्यूलिस की जब कोरोना से मौत हो गई तो उनके शव को दफ़नाने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी.

'आधी रात को उनके दफ़न के वक़्त हम तीन लोग - मैं और अस्पताल के दो वार्ड ब्वाय वहां मौजूद थे', मृत डाक्टर के सहकर्मी आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर प्रदीप कुमार कहते हैं 'हमें अपने हाथों और एक बेलचे की मदद से क़ब्र में मिट्टी डालनी पड़ी'.

डाक्टर प्रदीप कुमार ने बीबीसी से चेन्नई से फ़ोन पर बात करते हुए कहा कि रविवार के वाकये को सोचने भर से उन्हें 'दहशत महसूस' होती है.

चेन्नई में डाक्टर हर्क्यूलिस के घर के पास मौजूद किलपॉक कब्रिस्तान प्रबंधन ने 'कोरोना से मरे व्यक्ति को दफ़न करने से मना कर दिया था,' जिसके बाद शव को दूसरे क़ब्रिस्तान ले जाया गया लेकिन वहां स्थानीय लोग विरोध के लिए जमा हो गए और फिर अंतिम क्रिया के लिए पहुँचे लोगों पर हमला बोल दिया, पत्थरबाज़ी हई, जिसके कारण शव को लेकर वहां से भागना पड़ा.

डाक्टर प्रदीप कुमार कहते हैं लोगों में ये ग़लत धारणा बैठ गई है कि कोरोना से मरे व्यक्ति की लाश से दूसरे लोगों में भी बीमारी फैल जाएगी.

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अंतिम संस्कार का विरोध

चेन्नई में इतवार को जो हुआ, उससे चार दिनों पहले सैकड़ों किलोमीटर दूर शिलांग में पंचायत ने कोरोना से मारे गए डाक्टर जॉन सैलो रिनताथियांग को दफ़न करने से मना कर दिया था, उनके अंतिम संस्कार का विरोध हुआ.

इससे चंद दिनों पहले ख़बरों के मुताबिक़ आंध्र प्रेदश के एक चिकित्सक के शव को दफ़न करने को लेकर चेन्नई में ऐसी ही एक घटना हो चुकी थी.

इन घटनाओं के बाद, तमिलनाडु सरकार ने सूबे में कोविद-19 से मृत लोगों के अंतिम संस्कार की देख-रेख के लिए एक टीम का गठन किया है.

डाक्टर साइमन हर्क्यूलिस से संबंधित घटना के लिए 20 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है.

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मेघालय हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दो जजों की खंडपीठ ने कोविड-19 से मरे किसी भी व्यक्ति के अंतिम संस्कार को रोकने की कोशिश करने वालों के साथ सख़्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोविड-19 के काम में लगे किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को परेशान करने या उस पर हमले को लेकर एक अध्यादेश जारी करने का फ़ैसला किया है जिसमें सात साल तक की क़ैद और अधिकतम पांच लाख जुर्माने का प्रावधान है.

मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि 1897 के महामारी रोग क़ानून में बदलाव के ज़रिए लाए गए अध्यादेश में स्वास्थ्यकर्मी की संपत्ति की हानि या एंबुलेंस को नुक़सान होने पर क़ीमत से दोगुना जुर्माना लगाए जाने का भी प्रावधान है.

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बुधवार को अध्यादेश लाने का फ़ैसला गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वीडियो कांफ्रेसिंग के ज़रिए हुई बैठक में लिया गया जिसमें स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के साथ स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सेक्रेटरी जनरल डाक्टर एमवी असोकन के अलावा दूसरे लोग भी शामिल थे.

चिकित्सकों, स्वास्थकर्मियों पर लगातार हो रहे हमलों और चेन्नई-शिलांग जैसी घटनाओं के बाद आईएमए ने बुधवार को कैंडल-लिट प्रदर्शन और फिर ब्लैक-बैच बांधकर काम करने का फ़ैसला किया था और मांग की थी कि सरकार इस संबंध में एक केंद्रीय क़ानून लाए.

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गृह मंत्री से बातचीत के बाद आईएमए ने विरोध कार्यक्रम को स्थगित कर दिया था.

डाक्टर एमवी असोकन ने कहा, 'लोगों के अंदर भय और आतंक का माहौल है, कोविड-19 से पीड़ित होना एक तरह का कंलक बनकर रह गया है.'

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कोविड एक कलंक

टाटा इंस्टीच्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज़ के स्वास्थ्य विभाग के पूर्व प्रोफेसर और नेशनल हेल्थ रिसोर्स सिस्टम के पूर्व कार्यकारी निदेशक डाक्टर टी सुंदररमन कहते हैं, तालाबंदी, लक्ष्मण रेखा जैसे शब्दों का एक निहतार्थ भी है - "एक ऐसी राक्षसी बीमारी की धारणा पैदा की गई है जो सबको निगल लेगा' और इसने इस बीमारी या उस बीमारी से पीड़ित होने वालों को लेकर लोगों में एक तरह के कलंक की भावना पैदा कर दी है".

डाक्टर सुंदररमन कहते हैं, लोग बीमार होने वाले को ही क़सूरवार ठहरा रहे हैं और उनसे उसी तरह का सलूक किया जा रहा है जिस तरह से मध्य-युग में कोढ़-पीड़ितों को या तो शहर के बाहर फेंक दिया जाता था या किसी द्वीप पर छोड़ दिया जाता था.

वो आगे कहते हैं, "राजनीतिक शब्दावलियों ने छूत-अछूत के दानव को फिर से जगा दिया है".

भोपाल में एक पुलिसकर्मी का सैम्पल कोरोना टेस्ट के लिए भेजे जाने के बाद पड़ोसी से लेकर रिश्तेदार तक उसके घर खाना जाकर देने को तैयार नहीं हुए, आख़िर ये काम पास के थाने को करना पड़ा.

सैकड़ों किलोमीटर से पैदल चलकर आ रहे मज़दूरों-लोगों को रात गुज़ारने के लिए लोग गांवों में घुसने देने को तैयार नहीं हैं.

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मकान मालिकों के ज़रिये कोरोना पेशेंट्स के साथ काम कर रहे चिकित्सकों, नर्सों से घर ख़ाली करवाये जाने और उनके गैस कनेक्शन काटे जाने की धमकी की ख़बरों कई जगहों पर आम हुई हैं.

मध्य प्रदेश के इंदौर और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में स्वास्थ्यकर्मियों-पुलिस पर हुए हमलों के लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर अधिक चर्चा रही - कहा जा रहा है कि इसलिए कि दोनों जगहों में मुस्लिम समुदाय के लोग इन वाकयों में शामिल थे.

लेकिन अप्रैल के पहले 15 दिनों में ही बिहार के पूर्वी चंपारण से लेकर औरंगाबाद तक ऐसे कम से कम चार हमले हुए जिनका धर्म विशेष से किसी तरह का संबंध नहीं था जिसको लेकर भारत में 'कोरोना-जिहाद' जैसे शब्द सोशल मीडिया पर ट्रेंड करते रहे.

इसी तरह की ख़बरें तमिलनाडु से लेकर, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक से आती रही हैं.

पंजाब के पाटियाला में कुछ निहंग सिखों ने एक असिसटेंट पुलिस इंस्पेक्टर हरजीत सिंह का हाथ तलवार से काट दिया था. हमले में छह अन्य पुलिसवाले भी घायल हो गए थे.

आशा मिश्रा

राजनीतिक विश्लेषक से लेकर, मनोवैज्ञानिक और समाजशास्त्री जनता और सरकार के बीच भरोसे की कमी, रोज़ी-रोज़गार के जाने से लोगों में ग़ुस्सा, अफ़वाहों के गर्म बाज़ार और सरकारी अधिकारियों के प्रति गु्स्से को इन हमलों की बहुत बड़ी वजह मानते हैं.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाली स्वंयसेवी संस्था ज्ञान-विज्ञान समिति की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशा मिश्रा कहती हैं, मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की प्रिंसपल सेक्रेटरी पल्लवी जैन का क़िस्सा सबको मालूम है लेकिन आप समुदाय विशेष को लगातार वायरस के फैलाव के लिए ज़िम्मेदार बता रहे हैं तो क्या लोग इस बात को समझते नहीं, कहां से भरोसा पैदा होगा लोगों में?

पल्लवी जैन कोरोना से पीड़त होने के बाद भी बैठकों में शामिल होती रहीं और पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी आइसोलेशन के लिए अस्पताल जाने को तैयार नहीं थीं और बहुत दबाव के बाद आइसोलेशन में गईं.

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दो दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सर्कुलेट हो रही थी जिसमें दिल्ली के एक क्वारेंटीन सेंटर में डाले गए पुलिस कांस्टेबल ने वहां सुविधाओं की कमी की शिकायत की है.

इस बीच अफ़वाहों का बाज़ार गर्म है.

इंदौर के जिस हमले की मीडिया में ख़ूब चर्चा रही, अंग्रेज़ी दैनिक इंडिन एक्सप्रेस के मुताबिक़ वहां एक व्हाट्सएप मैसेज पर अफ़वाह जारी थी कि "मुसलमानों में सुई लगाकर कोरोना वायरस फैलाया जा रहा है' और पूरे-पूरे परिवार को इस बहाने ले जाकर अनजान जगहों में क़ैद कर रखा जाएगा".

इंदौर के टाटपट्टी भखाल गए स्वास्थ्यकर्मी दल पर हुए हमले के बाद ऐसे व्हाट्सएप मैसेज फैलाने के लिए पुलिस ने तीन लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है.

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भ्रम का मायाजाल

लेखक और पत्रकार रशीद क़िदवई कहते हैं कि "मुस्लिमों के कम पढ़े-लिखे तबक़े में इस तरह की भ्रांतियां फैलाना मुश्किल नहीं है, और उनके मुताबिक़ इस तरह के माहौल में सरकार-प्रशासन को चाहिए कि वो समुदाय से जुड़े लोगों को भरोसे में लेकर उनकी मदद से चीज़ों को लागू करने की कोशिश करे जिस तरह की पहल पोलियो टीका अभियान के समय की गई थी".

कुछ सालों पहले पोलियो के टीके और उससे नामर्दी हो जाने की अफ़वाह के बीच सरकार ने मुसलमानों के धार्मिक नेताओं की मदद ली थी.

माखनलाल पत्रकारिता विश्विद्यालय की पूर्व प्रोफेसर दविंदर कौर उप्पल कहती हैं, "इंदौर जैसी घटना को उस रोशनी में भी देखा जाना चाहिए जिसमें तबलीग़ी जमात के नाम पर टीवी चैनलों, मध्यम वर्ग और हिंदुत्व से जुड़े लोगों ने एक पूरे समुदाय को ज़लील करने की कोशिश की".

समाजशास्त्री राजीव गुप्ता कहते हैं, "हालांकि स्वास्थकर्मियों-पुलिस पर हमलों की ख़बर तो झट से मीडिया में आ जाती है लेकिन उसका दूसरा पहलू सामने नहीं आ पाता कि किसी जगह गए इन लोगों ने स्थानीय लोगों के साथ किस तरह का व्यवहार किया, और वो पूरे मामले में कितने संवेदनशील थे".

एक ख़बर के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के राजगढ़ में लॉकडाउन के दौरान अवैध शराब की बिक्री को रोकने गए पुलिस दल पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस वालों ने एक महिला को पीटा था.

भारत में कोरोनावायरस के मामले

यह जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाती है, हालांकि मुमकिन है इनमें किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के नवीनतम आंकड़े तुरंत न दिखें.

राज्य या केंद्र शासित प्रदेश कुल मामले जो स्वस्थ हुए मौतें
महाराष्ट्र 1351153 1049947 35751
आंध्र प्रदेश 681161 612300 5745
तमिलनाडु 586397 530708 9383
कर्नाटक 582458 469750 8641
उत्तराखंड 390875 331270 5652
गोवा 273098 240703 5272
पश्चिम बंगाल 250580 219844 4837
ओडिशा 212609 177585 866
तेलंगाना 189283 158690 1116
बिहार 180032 166188 892
केरल 179923 121264 698
असम 173629 142297 667
हरियाणा 134623 114576 3431
राजस्थान 130971 109472 1456
हिमाचल प्रदेश 125412 108411 1331
मध्य प्रदेश 124166 100012 2242
पंजाब 111375 90345 3284
छत्तीसगढ़ 108458 74537 877
झारखंड 81417 68603 688
उत्तर प्रदेश 47502 36646 580
गुजरात 32396 27072 407
पुडुचेरी 26685 21156 515
जम्मू और कश्मीर 14457 10607 175
चंडीगढ़ 11678 9325 153
मणिपुर 10477 7982 64
लद्दाख 4152 3064 58
अंडमान निकोबार द्वीप समूह 3803 3582 53
दिल्ली 3015 2836 2
मिज़ोरम 1958 1459 0

स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

पुलिस पर हमला

पूर्वी चंपारण के जकापकड गांव में राशन न बांटे जाने को लेकर नाराज़ ग्रामीणों ने लॉकडाउन तथा सोशल डिस्टेंसिंग लागू कराने की कोशिश कर रहे प्रशासनिक अमले और पुलिस पर हमला कर दिया.

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुराधा शंकर कहती हैं, "पुलिस को हुकूमत के सबसे ज़ाहिरा चेहरे के तौर पर देखा जाता है तो किसी भी तरह की प्रशासनिक कमी का पहला खामियाज़ा पुलिस वालो को ही भुगतना होता है".

वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी अनुराधा शंकर मानती हैं कि पहले से ही ड्यूटी के घंटों को लेकर पिसे हुए पुलिसकर्मियों की जा-बज़ा ज़्यादतियों से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन ड्यूटी पर बहुत सारे जान भी गंवा बैठते हैं.

लॉकडाउन के दौरान कोरोना-संबंधित ड्यूटी पर लगे इंदौर के इंस्पेक्टर देवेंद्र चंद्रवंशी और उज्जैन के यशवंत पाल की चंद दिनों पहले ही पाज़ेटिव होने के बाद मौत हो गई लेकिन हुकूमत से उन्हें सिर्फ़ बीमा का पैसा मिलने की बात कही गई है किसी तरह के मुआवज़े की नहीं.

सरकार में काम कर रहे एक मनोवैज्ञानिक ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि "इस वक़्त ज़रूरत है लोगों में जागरूकता पैदा करने की लेकिन इस तरफ़ सरकार का ध्यान जाता फिलहाल तो नहीं दिखता".

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने जिन प्रचार सामग्रियों का हवाला दिया वो डाक्टरों-नर्सों को लेकर अधिक फोकस करती दिखीं, न कि आम लोगों पर.

डाक्टर राजीव कुमार कहते हैं कि ये बताने की ज़रूरत है कि कोरोना से प्रभावित सभी मरीज़ों की मौत नहीं हो जाती बल्कि इसमें मरने वालों का अनुपात दूसरी बीमारियों से कहीं कम है.

लोगों का समझना होगा कि जो वायरस 20 सेकेंड साबुन से हाथ धोने से मर जाता है वो बहुत मज़बूत नहीं और मरने वाले के शरीर पर दो घंटे से ज़्यदा जीवित नहीं रहेगा.

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