कोरोना वायरसः इंदौर के वायरल वीडियो का सच क्या है?-फ़ैक्ट चेक

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- Author, कीर्ति दुबे
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी फ़ैक्ट चेक टीम
देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या लगभग 2000 तक पहुंच चुकी है. ये संक्रमण अब तक 50 लोगों की जान ले चुका है.
कोरोना वायरस से जुड़े अलग-अलग मैसेज और वीडियो कई दावों के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं.
ऐसा ही एक वीडियो मध्य प्रदेश के इंदौर ज़िले से सामने आया है.
1 मिनट 12 सेकेंड का का ये वीडियो इंदौर के सिलावटपुरा का बताया जा रहा है.
वीडियो में दो हैज़मेट सूट (कोरना के इलाज़ करने के लिए पहना जाने वाला मेडिकल कोट) पहने स्वास्थ्य कर्मी एक गली से दौड़ते हुए बाहर निकलते हैं.
उनके पीछे कुछ लड़के पत्थर ले दौड़ रहे हैं, उन पर पत्थर फ़ेक भी रहे हैं. वीडियो ऊंचाई से बनाया गया है और बेहद शोर सुनाई पड़ रहा है.
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वीडियो की पड़ताल
दावा किया जा रहा है कि इंदौर के इस इलाक़े में स्वास्थ्यकर्मी एक शख्स की कोविड-19 की स्क्रीनिंग करने आए थे. लेकिन भीड़ ने उन पर हमला कर दिया.
हक़ीकत जानने के लिए बीबीसी ने इस वीडियो की पड़ताल शुरू की.
हमने इंदौर के डीआईजी हरिनारायण चारी मिश्रा से संपर्क किया. उन्होंने बताया, "ये मामला टाटपट्टी बाखल इलाक़े का है. इस मामले में एक एफ़आईआर दर्ज हो चुकी है. 8 लोगों का नाम दर्ज है जिसमें से 7 की गिरफ़्तारी हो चुकी है."
इसके बाद हमने महेश चंद, एसपी इंदौर वेस्ट से इस पूरे मामले की तफ़्सील से बात की. उनके मुताबिक़ बुधवार को दोपहर 1.30 बजे के लगभग टाटपट्टी बाखल में कोविड-19 की रैपिड एक्शन टीम पहुंची.
यहां एक शख़्स के कोविड-19 संक्रमण के लक्षण मिलने की ख़बर मिली थी. जब टीम शख़्स के घर पहुंची तो वहां बस उसकी बुज़ुर्ग मां थी. स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बुज़ुर्ग महिला से बात कर रही थी कि लोगों को लगा डॉक्टर्स उन्हें ज़बरदस्ती अपने साथ ले जा रहे हैं.

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उपद्रवियों की एक भीड़ ने हमला किया...
देखते ही देखते भीड़ जुट गई और डॉक्टरों सहित स्वास्थ्यकर्मियों पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी. मेडिकल स्टाफ़ ने भागकर ख़ुद को बचाया.’
"चूंकि ये मोडिकल स्टाफ़ किसी भी उपद्रवी को पहचानता नहीं था इसलिए हमने आईपीसी की धारा 353 के तहत अज्ञात लोगों के नाम एफ़आईआर दर्ज की. सीसीटीवी फ़ुटेज के ज़रिए 8-10 लोगों की पहचान की गई है. जिसमें गुरुवार दोपहर तक 7 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है."
इंदौर के प्रमुख मेडिकल एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर प्रवीन जाडिया ने बताया, "कोविड-19 रैपिड मेडिकल टीम के कुल 6 लोग टाट पट्टी बाखल पहुंचे थे. जिनमे दो डॉक्टर, दो मेडिकल पैरा स्टाफ़ और आंगनवाड़ी आशा थीं. इस हमले में डॉक्टरों के पैर में चोट आई है हालांकि सभी ठीक हैं. इस इलाक़े में अब तक दो कोरोना पॉज़िटिव मामले मिले हैं और 54 परिवारों को क्वारंटीन में रखा गया है."
यानी ये तो साफ़ है कि इंदौर के टाटपट्टी बाखल में स्वास्थ्यकर्मियों पर उपद्रवियों की एक भीड़ ने हमला किया.

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व्हॉट्सएप पर वायरल
इस घटना से ठीक पहले मंगलावार से इंदौर में एक मैसेज व्हॉट्सएप पर वायरल हो रहा था.
बीबीसी को इस मैसेज का स्क्रीन शॉट मिला है. इस मैसेज में कहा जा रहा है कि मुसलमानों को फँसाया जा रहा है और मुसलमानों को कोरोना पॉज़िटिव इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं.
इंदौर के स्वास्थ्य अधिकारी प्रवीन जादिया और एसपी, इंदौर-वेस्ट महेश चंद दोनों मानते है कि ऐसे मैसेज वायरल हुए थे और इस तरह के फ़ेक मैसेज लोगों को प्रशासन के खिलाफ़ भड़काने का काम करते हैं.
इंदौर के स्थानीय पत्रकार आदिल सईद ने बीबीसी को इस इलाक़े की डोमोग्राफ़ी समझाई. उनके मुताबिक़, ‘’टाटपट्टी बाखल इलाका शहर से पांच किलोमीटर की दूसरी पर है लेकिन यहां की आबादी काफ़ी पिछड़ी हुई है. ज़्यादातर मज़दूर और कारीगर का काम करने वाले यहां रहते हैं. यहां लोगों के बीच फ़ेक न्यूज़ खूब फैलती है क्योंकि कोई पढ़ा लिखा नहीं है. ‘’
बीबीसी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि इंदौर में स्वास्थ्यकर्मियों पर भीड़ के हमले का ये वीडियो सही है.

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