कोरोना वायरस: क्या इंपीरियल होटल ने कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजा?

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    • Author, ब्रजेश मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कोरोना वायरस का प्रकोप चीन से शुरू होकर दुनिया के करीब 150 देशों तक पहुंच चुका है. भारत में भी अब इसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

कोरोना वायरस की गंभीरता को देखते हुए तमाम कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी है. केंद्र सरकार ने भी कई स्तर के कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा है.

इस बीच दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित इंपीरियल होटल में कर्मचारियों को कथित तौर पर ज़बरन छुट्टी पर भेजने की बात सामने आ रही है.

होटल कर्मचारियों के मुताबिक, उनसे एक पत्र पर हस्ताक्षर कराया जा रहा है जिसमें एक महीने की छुट्टी देने की बात लिखी है लेकिन इस दौरान उन्हें कोई पैसा नहीं मिलेगा.

हालांकि होटल प्रबंधन ने इस बात से साफ़ इनकार किया और कहा कि यह ग़लत सूचना फैलाई जा रही है.

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इमेज कैप्शन, बीबीसी को वो पत्र मिला जिसमें होटल कर्मचारियों से कथित तौर पर हस्ताक्षर करने को कहा जा रहा है

कर्मचारियों को नौकरी खोने का डर

होटल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को लेटर पर हस्ताक्षर करने को कहा है.

कोरोना वायरस के प्रभाव की वजह से होटल में आने वालों की संख्या काफ़ी गिरी है. हालांकि होटल अब भी खुला हुआ है और प्रबंधन का कहना है कि वो ज़रूरी सावधानियां बरत रहा है.

होटल प्रबंधन के इस कथित फ़ैसले का असर क़रीब 400 कर्मचारियों पर पड़ेगा. होटल प्रबंधन के नाम लिखा एक पत्र बीबीसी को मिला है.

इसमें लिखा है, "कोरोना वायरस की मेडिकल इमरजेंसी की वजह से मैं 30 दिनों की छुट्टी चाहता हूं. यह 18 मार्च से शुरू होगी. मेरी आपसे गुज़ारिश है कि मुझे छुट्टी दी जाए और इस दौरान मुझे कोई पैसा न दिया जाए, मैं अपनी पेड-लीव भी इस्तेमाल नहीं करना चाहता. जैसे ही हालात बदलेंगे मैं काम पर वापस आने या छुट्टियां बढ़ाने के बारे में आपसे बात करूंगा."

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वीडियो कैप्शन, .... जिन्हें है हाथ धोने की 'सनक'

मैंनेजमेंट का फ़ैसला

17 मार्च को दिया गया यह एप्लिकेशन सीनियर एक्जीक्यूटिव वीपी एंड जीएम के नाम है.

इसमें कर्मचारी का मोबाइल नंबर और एंप्लाई आईडी भी दर्ज है.

बीबीसी ने इंपीरियल होटल के कई कर्मचारियों से इस बारे में बात करने की कोशिश की लेकिन कुछ ने इस बारे में बात करने से इनकार कर दिया.

एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "मुझे नहीं पता यह आपसे शेयर करना चाहिए या नहीं, क्योंकि यह मैंनेजमेंट का फ़ैसला है. हमें एक लेटर पर साइन करने को कहा गया है."

होटल के अधिकतर कर्मचारी इस बारे में कुछ भी बोलने से डर रहे हैं और उन्हें अपनी नौकरी जाने का भी डर सता रहा है.

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होटल प्रबंधन ने किया इनकार

होटल कर्मचारी ने यह भी कहा कि जैसे हालात हैं अगर इतनी बड़ी संख्या में लोगों को ज़बरन छुट्टी पर भेजा जाएगा और उन्हें पैसे भी नहीं मिलेंगे तो उनकी सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, ऐसे में उन्हें और भी समस्याएं झेलनी पड़ेंगी.

एक अन्य कर्मचारी ने कहा कि यह ऐसा विषय है जिस पर वो कुछ भी नहीं कहना चाहते. उन्होंने यह कहते हुए फ़ोन रख दिया कि उनकी नौकरी का सवाल है और वो होटल प्रबंधन के फ़ैसले के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहेंगे.

इस मामले में इंपीरियल होटल के सीनियर एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और जनरल मैनेजर विजय वांचू ने ईमेल के ज़रिए जवाब दिया और कहा कि यह सरासर ग़लत संदेश फैलाया जा रहा है. होटल प्रबंधन की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया.

उन्होंने कहा, "आपको ग़लत जानकारी दी गई है और तथ्यों को ग़लत ढंग से पेश करके ये दावे किए जा रहे हैं. हम सभी कर्मचारियों को 30 दिनों तक सेल्फ क्वारंटाइन करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं और इस दौरान वो अपनी बची हुई छुट्टियों का इस्तेमाल कर सकते हैं."

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'कम्युनिटी ट्रांसमिशन से बचने के लिए फ़ैसला'

बीबीसी को भेजे ईमेल में वांचू ने कहा, "मौजूदा स्वास्थ्य संकट जिसे अब सरकार और दूसरे प्रशासनिक विभागों ने महामारी घोषित कर दिया है, को देखते हुए रेस्तरां, स्पा, बैंक्वेट और दूसरे तमाम क्षेत्रों को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. इस अप्रत्याशित घटना की वजह से ट्रैवेल इंडस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ा है, क्योंकि पर्यटकों और दूसरे यात्रियों की वजह से इस बीमारी के फैलने का ख़तरा ज़्यादा है."

"अपने सभी कर्मचारियों से बातचीत के बाद हमने तय किया है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन से बचने को लेकर उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए हम उनकी छुट्टियां मंज़ूर कर रहे हैं. सभी कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों का इस्तेमाल इसके लिए कर सकते हैं. अभी यह प्रक्रिया अलग-अलग चरणों की जा रही है लेकिन हालत बिगड़ने पर और भी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे. हमें उम्मीद है कि आने वाले एक या दो महीनों में हालात बेहतर होंगे तब हम लोगों से काम पर वापस लौटने की अपील करेंगे."

विजय वांचू ने बताया, "हमारे कई कर्मचारी 20 साल से भी अधिक समय से संस्थान में हैं. इंडस्ट्री जिन मुश्किल हालात से गुज़र रही है उसमें सैलरी न देना हमारे पास आख़िरी विकल्प होगा. हम सफ़ाई पर और अधिक ध्यान दे रहे हैं. होटल के कर्मचारियों और मेहमानों के लिए 24 घंटे डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध है."

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संक्रमण के दूसरे स्तर पर भारत

इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक़ कोरोना वायरस का संक्रमण भारत में दूसरे स्तर पर है. मतलब ये कि फ़िलहाल संक्रमण उन्हीं लोगों तक फैला है जो संक्रमण वाले देशों से भारत आए या फिर उन लोगों में फैला जो संक्रमित लोगों के संपर्क में आए.

पहले चरण में वे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए जो दूसरे देश से संक्रमित होकर भारत में आए.

दूसरे चरण में स्थानीय स्तर पर संक्रमण फैलता है, लेकिन ये वे लोग होते हैं जो किसी ना किसी ऐसे संक्रमित शख़्स के संपर्क में आए जो विदेश यात्रा करके लौटे थे.

तीसरा और थोड़ा ख़तरनाक स्तर है 'कम्युनिटी ट्रांसमिशन' का, जिसे लेकर भारत सरकार चिंतित है.

कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब होता है जब कोई व्यक्ति किसी ज्ञात संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना या वायरस से संक्रमित देश की यात्रा किए बिना ही इसका शिकार हो जाता है.

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