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नागरिकता संशोधन विधेयक: असम में कर्फ्यू में कुछ घंटों की ढील
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी के लिए
नागरिकता संशोधन विधेयक (कैब) के ख़िलाफ़ असम में चल रहे आंदोलन और हिंसक घटनाओं के बाद गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में लगे कर्फ्यू में शनिवार को दूसरे दिन भी ढील दी गई.
दोनों ही जगहों पर सात-सात घंटे की ढील के दौरान सड़कों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी.
बाजार में कई दिनों से बंद पड़ी दुकानें खुलीं, तो लोगों ने ज़रूरत के सामानों की खरीदारी की.
बैंकों के एटीएम और पेट्रोल पंपों पर भी काफी भीड़ रही. लेकिन, चार बजते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया. इस दौरान हिंसा की कोई नई वारदात होने की ख़बर नहीं है.
गुवाहाटी (कामरूप मेट्रो) के डीसी विश्वजीत पेगू ने बीबीसी को बताया कि रात का कर्फ्यू अभी जारी रहेगा.
उन्होंने कहा कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध फ़िलहाल जारी है. इसकी मियाद 16 दिसंबर की सुबह 9 बजे तक के लिए बढ़ा दी गई है.
12 दिसंबर को हुई हिंसा के बाद राज्य सरकार ने इंटरनेट सेवाओं को प्रतिबंधित कर दिया था.
आवश्यक वस्तुओं की कमी
पिछले कुछ दिनों से जारी आंदोलन और कर्फ्यू के कारण लोगों के घरों में ज़रूरी सामानों की किल्लत हो गई है. सबसे बड़ी दिक्कत रसोई गैस और दूध को लेकर है.
पलटन बाजार में मिलीं रेशम बरुआ ने बीबीसी से कहा कि बगैर किसी सूचना के अचानक कर्फ्यू लगा दिया गया. इस कारण यह नौबत आई.
इस बीच आयल इंडिया लिमिटेड ने आज के अखबारों में विज्ञापन देकर अपनी गाड़ियों को आने-जाने की इजाजत देने की अपील की है.
ताकि लोगों को खाने-पीने की दिक्कतें नहीं हों.
पर्यटकों का रेस्क्यू
इस बीच असम सरकार के पर्यटन विभाग ने भी कुछ फोन नंबर सार्वजनिक किए हैं ताकि गुवाहाटी में फंसे पर्यटकों को रेस्क्यू कराकर रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट कर पहुंचाया जा सके.
दर्जनों ऐसे लोग पिछले तीन दिनों से विभिन्न होटलों में फंसे हुए थे. कुछ पर्यटक अभी भी होटलों में फंसे हैं.
पुलिस फायरिंग में 26 लोग घायल हुए थे.
इस बीच गुवाहाटी मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच) के अधीक्षक डॉक्टर रमेन तालुकदार ने बीबीसी को बताया कि 12 दिसंबर को हुई पुलिस फायरिंग के बाद उनके यहां गोली से घायल 26 लोगों को लाया गया था.
इनमें से दो युवकों की मौत हो चुकी है. दो और लोग गंभीर रूप से घायल हैं. इनके सिर में गोलियां लगी हैं.
इसलिए उन्हें आईसीयू में रखा गया है. करीब एक दर्जन लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. बाकी लोग अभी भी विभिन्न वार्डों में अपना इलाज करा रहे हैं.
उल्फा की अपील
इस बीच, उल्फा प्रमुख परेश बरुआ ने आंदोलनकारियों से शांति की अपील की है.
उन्होंने कहा है कि कैब को असम के लोग किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर सकते लेकिन आंदोलनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखनी पड़ेगी.
इधर, आल असम स्टूडेंट यूनियन (आसू) के मुख्य सलाहाकार समुज्जल भट्टाचार्य ने कहा है कि उनके लोग शाम पांच बजे के बाद कोई आंदोलन नहीं करेंगे.
उन्होंने बीबीसी से कहा कि हमें अपना आंदोलन शांतिपूर्ण और प्रजातांत्रिक तरीके से चलाना है. हम नागरिकता कानून में संशोधन को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकते. इसकी लड़ाई कैब के हटने तक जारी रहेगी.
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