‘बच्चे को बेहतर दुनिया नहीं दे सकती इसलिए मैं मां नहीं बनना चाहती’

मां, बच्चा

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    • Author, प्रशांत नरावणे
    • पदनाम, मुंबई से, बीबीसी मराठी के लिए

मुंबई के रहने वाले 27 साल के राफ़ेल सैमुअल ने हाल में ऐलान किया है कि वे अपने माता-पिता के खिलाफ़ ये याचिका दायर करने वाले हैं कि उन्होंने उनकी अनुमति के बिना उन्हें जन्म क्यों दिया?

राफ़ेल का ये तर्क 'एंटी-नटालिज़्म' की फ़िलॉसफ़ी पर आधारित है जिसके अनुसार जन्म को नकारात्मक माना जाता है. इस विचारधारा वो मानने वालों के अनुसार व्यक्ति का अपनी पीढ़ी को आगे बढ़ाना नैतिक आधार पर ग़लत है.

राफ़ेल के इस ऐलान में इन दिनों ये बहस छेड़ दी है कि क्या अपने जन्म को लेकर माता-पिता पर सवाल उठाए जा सकते हैं? और क्या हो अगर कोई शादीशुदा जोड़ा ये फ़ैसला ले कि वो कभी बच्चे पैदा ही नहीं करेगा.

'नई पीढ़ी को हम कैसी दुनिया देंगे'

परिवार ना बढ़ाने का फ़ैसला लेने वाले दंपतियों के अपनी वजहें और अपने तर्क हैं.

पुणे की रहने वाली डॉक्टर ऋचा और उनके पति संग्राम खोपड़े का सोचना है कि उन्हें बच्चे नहीं चाहिए. संग्राम और ऋचा एक दूसरे को लगभग छह साल से जानते हैं, दो साल पहले ही उनकी शादी हुई है.

संग्राम ने बीबीसी से कहा, "सभी लोग जनसंख्या वृद्धि की बात करते हैं लेकिन हम इसे रोकने के लिए क्या करते हैं? आखिर हम आने वाली पीढ़ी के लिए क्या छोड़ कर जाएंगे. इन सभी सवालों को तसल्ली से सोचने के बाद मैंने ये तय किया कि हमें बच्चा नहीं चाहिए."

पुणे के रहने वाले डॉक्टर ऋचा और संग्राम खोपड़े
इमेज कैप्शन, पुणे के रहने वाले डॉक्टर ऋचा और संग्राम खोपड़े

डॉक्टर ऋचा कहती है, "98 फ़ीसदी लोगों के तो जेनेटिक्स ही बेहतर नहीं होते. तो आख़िर फिर हम नई पीढ़ी को जन्म देने पर क्यों तुले रहते हैं."

"मेडिकल साइंड तेज़ी से आगे बढ़ी है, ऐसे में इंसानों का जीवन-चक्र भी लंबा हो रहा है. मुझे लगता है कि हमें अपनी ज़िम्मेदारियां समझनी चाहिए."

वो कहती हैं, "हमारे परिवार ने कभी हमारे फ़ैसले का विरोध नहीं किया बल्कि हमारे कई नौजवान दोस्त ऐसे हैं जो हमारे जैसी ही सोच रखते हैं. मेरी दोस्त की छह साल की बेटी है और मैं उसे बहुत प्यार करती हूं. लेकिन मुझे बच्चा नहीं चाहिए."

'हम अपने बच्चे को ऐसी ज़िंदगी नहीं देना चाहते'

सुप्रिया और कौशिक वर्तक की शादी को लगभग दस साल हो गए हैं. मुंबई में रहने वाले इस दंपति का मानना है कि वो एक व्यस्त ज़िंदगी जीते हैं.

दोनों ही कुछ साल बाद मुंबई छोड़कर कहीं और बसने की योजना बना रहे हैं.

सुप्रिया का कहना है, "हम नहीं चाहते कि हम किसी को ऐसी व्यस्त ज़िंदगी दें. अगर मेरा जन्म नहीं हुआ होता तो इससे कोई फ़र्क तो नहीं पड़ता. लेकिन अगर मैं पैदा हुई हूं तो मुझे इस भाग-दौड़ वाली ज़िंदगी का हिस्सा बनना ही पड़ेगा."

वहीं सुप्रिया के पति कौशिक कहते हैं, "हमने काफ़ी सोचने और समझने के बाद ये फ़ैसला लिया है. हमारे परिवार ने भी हम पर कभी दबाव नहीं बनाया.ये फ़ैसला

'हमें बच्चे की ज़रूरत नहीं'

मुंबई के रहने वाले नीरव शाह और मीरा शाह भी अपने परिवार में बच्चा नहीं चाहते. नीरव कहते हैं, "जिस तरह कुछ लोगों को बच्चा चाहिए ठीक वैसे ही हमें बच्चा नहीं चाहिए. हम उनसे तो सवाल नहीं पूछते जिन्हें बच्चा चाहिए. ऐसे ही उनकी भी इच्छा का सम्मान होना चाहिए जो बच्चे नहीं चाहते."

सात साल पहले मीरा और नीरव की अरेंज मैरिज़ हुई थी. मीरा कहती हैं, "शादी से पहले ही नीरव ने मुझे इस बारे में बताया था और ये भी कहा था कि हम बच्चा गोद ले सकते हैं. लेकिन शादी के बाद हमारा बच्चा गोद लेने का ख़याल भी खत्म हो गया."

"हमारे सास-ससुर ने इस बारे में हमसे बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कभी इसे लेकर हम पर दबाव नहीं बनाया."

मां, बच्चा
इमेज कैप्शन, मीरा और नीरव

नीरव कहते है, "ऐसा नहीं है कि हम बच्चे की ज़िम्मेदारी के लिए तैयार नहीं हैं. वास्तव में ज़िम्मेदारी यहां पर उपयुक्त शब्द ही नहीं है. बेहद आसान शब्दों में कहें तो हमें बच्चा चाहिए ही नहीं. हम अपनी ज़िंदगी जीना चाहते हैं और मुझे नहीं लगता इसमें कुछ गलत है."

'एक ही ज़िंदगी है जिसे जी भर जीना है'

अस्का रावल और सुमित हसवल जन्म से भारतीय हैं लेकिन वे अब अमरीका के सैन फ़्रांसिस्को में बस चुके हैं. वो भी मां-पिता नहीं बनना चाहते.

सुमित कहते हैं, "बच्चे ना पैदा करने का फ़ैसला हमने एक दिन में ही नहीं ले लिया. हमने लंबे वक्त तक इस बारे में सोचा है. हमारी शादी को आठ साल हो चुके हैं."

आस्का ने बीबीसी से कहा, "मैं मां नहीं बनना चाहती और सुमित को मेरे इस फ़ैसले से कोई ऐतराज़ नहीं है. हमें अपने फ़ैसले पर ना कोई पछतावा है और ना ही आगे कभी होगा."

वो कहती हैं, "हमें केवल एक ज़िंदगी मिली है और इस दुनिया में कई चीजें हैं. हम अपना जीवन पूरी तरह से जीना चाहते हैं. अगर हम बच्चे को जन्म देते हैं, तो यह एक जिम्मेदारी होगी. और ये कुछ हद तक जीवन को भी रोक देता है. इसलिए, मैं माँ नहीं बनना चाहती थी."

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इमेज कैप्शन, उत्तरा नारायणन और अरुण कुमार ने दो बच्चों को गोद लिया है.

अभिनेत्री सुष्मिता सेन से मिली प्रेरणा

बेंगलुरू के रहने वाले उत्तरा नारायणन और अरुण कुमार ने दो साल की शादी के बाद बच्चा गोद लिया. उत्तरा बताती हैं कि वो अभिनेत्री सुष्मिता सेन से काफ़ी प्रेरित थीं.

आम तौर पर गोद लेने की प्रक्रिया में दो साल का वक्त लगता है, लेकिन उत्तरा और अरुण को सिर्फ डेढ़ महीने में अपनी इच्छा के अनुसार बच्ची मिल गई.

जब उन्होंने बच्ची को गोद लिया तो उस वक्त वो मात्र नौ महीने की थी. इसके तीन साल बाद साल 2017 में उन्होंने साढ़े छह साल के एक दिव्यांग बच्चे को गोद लिया.

उत्तरा कहती हैं, "हमने सोचा कि परिवार के 'वंश' को आगे बढ़ाने के बजाय, मानवता के 'वंश' को आगे बढ़ाना बेहतर है. इसके लिए आपको अपना बच्चा पैदा करने की जरूरत नहीं है."

"अगर दुनिया में समस्याएं हैं, तो ऐसे लोग होने चाहिए जो उन समस्याओं को हल करना चाहते हैं. हम दोनों ही सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं. हम खुद को ज़िम्मेदार नागरिक मानते हैं इसलिए, हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे भी ज़िम्मेदार बच्चे हों. हम यह भी चाहते हैं कि वे वैश्विक यानी ग्लोबल नागरिक हों."

अरुण कहते हैं, "हम अपने बुढ़ापे के लिए बच्चे नहीं चाहते हैं. हम दोनों के परिवारों में बच्चों को गोद लिया गया है. इसलिए, यह फ़ैसला हमारे लिए उतना मुश्किल नहीं है."

उत्तरा कहती हैं, "कोई भी नहीं कह सकता कि जीवन के अंत में क्या होगा. इसलिए, हम जीवन की यात्रा में अधिक दिलचस्पी रखते हैं."

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