वो समलैंगिक थीं और शादी करना चाहती थीं, फिर क्या हुआ..

इमेज स्रोत, YOUTUBE / FOXSTARHINDI
स्वीटी की तलाश में साहिल (राजकुमार राव) पंजाब के एक कस्बे तक पहुंचता है. पंजाब तक पहुंचते हुए स्वीटी के शब्दों को दोहराता रहता है - "ट्रू लव के रास्ते में कोई ना कोई स्यापा होता ही है. नहीं तो लव स्टोरी में फील कैसे आएगी."
साहिल कई फ़िल्मी करतब करके स्वीटी तक पहुंचता है. लेकिन जब स्वीटी उसे अपने मन की बात बताती है तो फ़िल्म की दिशा एक नया मोड़ ले लेती है.
हाल ही में रिलीज़ हुई हिंदी फ़िल्म 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' समलैंगिक रिश्ते पर आधारित है.
हाल के वर्षों में भारतीय समलैंगिक पुरुष, ट्रांसजेंडर व्यक्ति आगे आकर अपनी आवाज़ें बुलंद करके अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं.
लेकिन तुलनात्मक रूप से समलैंगिक महिलाएं आज़ादी से अपने आपको ज़ाहिर करते हुए नहीं दिख रही हैं.

इमेज स्रोत, FOXSTARHINDI
इस फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद हमने एक ऐसी लड़की से बात की जिसे एक दूसरी लड़की से मोहब्बत हुई थी.
प्रिया और रश्मि की कहानी फ़िल्मी कहानियों के मुक़ाबले कम नाटकीय नहीं है. (लड़कियों की पहचान गुप्त रखने के लिए इस लेख में उनके नाम बदल दिए गए हैं.)

प्रिया और रश्मि की कहानी पढ़िए रश्मि की ज़ुबानी
अब इस बात को तीन साल बीत चुके हैं. आम तौर पर दो लोग किसी शादी या कहीं घूमते हुए मिलते हैं और उन्हें एक दूसरे से प्यार हो जाता है.
लेकिन मुझे उससे अपने ही गांव में प्यार हुआ. जब मेरी दादी की मौत हुई तो सभी लोग घर में जमा थे. मैं उसे काफ़ी पहले से जानती थी. उसे पसंद भी करती थी. उसका नाम प्रिया है. वह मेरी कज़िन सिस्टर यानी मेरी बुआ की बेटी है.
जब कोई पूछता है कि तुम्हें उसके लिए क्या महसूस होता था, तो मुझे हंसी आ जाती है. मुझे उसके लिए वही सब महसूस होता था जो किसी भी प्यार में पड़ने वाले को होता है.
अपने आस-पास और फिल्मों में मैंने हमेशा एक लड़के और लड़की को प्यार करते हुए देखा. मुझे पता था कि मैं कुछ अलग हूं. जब मैंने इंटरनेट पर सर्च किया तो मुझे पता चला कि मैं एकदम नॉर्मल हूं.
15 साल की उम्र में मर्ज़ी के ख़िलाफ़ मेरी शादी कर दी गई. वो शादी टूट गई और जब तक मैं वयस्क हुई मेरा तलाक़ हो चुका था.

इमेज स्रोत, Getty Images
सवाल
पुरुषों की ओर मैं कभी आकर्षित हुई ही नहीं. लेकिन प्रिया के लिए मेरे मन में वैसी भावनाएं थीं. जब मैंने उसे प्रपोज़ किया तो उसने कहा कि वो भी मेरे बारे में ऐसा ही सोचती है.
उसका पहला सवाल था, "अगर हमारे परिवार वालों और रिश्तेदारों को हमारे रिश्ते के बारे में बता चलेगा, तो क्या वो इसे स्वीकार करेंगे?"
मैंने उससे कहा, "रिश्तेदारों के बारे में मुझे नहीं पता, लेकिन अगर तुम मुझसे सच में प्यार करती हो, तो चलो शादी कर लेते हैं और एक साथ रहना शुरू करते हैं."
प्रिया तेलंगाना में रहती थीं और मैं मुंबई में थी. अगले छह महीने तक हम लगातार एक दूसरे से बात करते रहे.
वो कॉलेज में पढ़ रही थी और मेरी पढ़ाई शादी से पहले ही रोक दी गई थी. तलाक़ के बाद मैं छोटी-मोटी नौकरी कर रही थी.
मुझे जब भी वक्त मिलता, मैं छुट्टी लेकर उसके घर उससे मिलने जाया करती थी. मेरे घरवाले पूछते थे, "तुम बुआ के घर इतना क्यों जाती हो?"
मैं प्यार में पागल थी. मैंने घरवालों की बातों को कभी गंभीरता से नहीं लिया और किसी ना किसी बहाने से बुआ के घर जाती रही.
लेकिन बुआ के परिवार वालों को शक होने लगा था और वो मुझे मुंबई वापस लौट जाने के लिए कहते. लेकिन प्रिया मुझे वहीं रुकने के लिए कह देती. उसके कहने पर फिर मैं वहीं रुक जाती थी.
एक बार ऐसे ही मैं उससे मिलने गई हुई थी और हमने गांव के महालक्ष्मी मंदिर में चोरी-छुपे शादी कर ली. मैंने उसे मंगलसूत्र बांधा और भगवान की मौजूदगी में इस रिश्ते की शुरुआत की.
हम शादी के बाद साथ रहने का फ़ैसला कर चुके थे. दरअसल मैं धूम-धाम से शादी करना चाहती थी, लेकिन ये आसान नहीं था या कहें कि नामुमकिन था.
शादी के बाद मैं उसी के घर में रहने लगी. किसी को हमारी शादी के बारे में पता नहीं था.

इमेज स्रोत, Getty Images
परेशानी
हम एक परिवार की तरह साथ रहना चाहते थे, इसके लिए हमें घर छोड़ना पड़ा. मैंने बुआ से कहा, "मैं प्रिया को मुंबई ले जाऊंगी. उसे वहां अच्छी नौकरी मिल जाएगी."
उसके परिवार वालों ने मना कर दिया. लेकिन मैंने सोच लिया था कुछ भी हो जाए हम साथ ही रहेंगे. लेकिन सवाल ये था कि हम इस जगह को छोड़कर जाएंगे कैसे?
एक दिन हम घर से भाग निकले. इसकी हमने पहले से योजना बना रखी थी. हमने दिन, जगह और समय तय कर रखा था.
हम ट्रेन से मुंबई आ गए. लेकिन हम अपने घर भी नहीं जा सकते थे. नहीं तो हमें अलग कर अपने-अपने घर भेज दिया जाता.
प्रिया साईंबाबा की भक्त है. मुझे शिर्डी का रास्ता पता था. हमने फ़ैसला किया कि हम दो दिन शिर्डी में रहेंगे और फिर आगे की सोचेंगे.
ऐसे 15 दिन गुज़र गए. हमारे पास एक सोने की चैन थी, हमने उसे भी बेच दिया. कुछ दिन के लिए हम एक लॉज में रहे और कुछ दिन कारवां सराय में. हम दोनों के पास मोबाइल फोन थे. हम पूरा-पूरा दिन फोन बंद रखा करते थे.
इस बीच हमारे परिवार हमें ढूंढने लगे. शायद पुलिस भी हमें ढूंढ रही थी.
एक महीने बाद तेलंगाना पुलिस ने हमें शिर्डी से हिरासत में ले लिया और तेलंगाना ले गई. हम दोनों पुलिस को कह रहे थे कि हम दोनों वयस्क हैं, हमारी उम्र 18 साल से ज़्यादा है. लेकिन उन्होंने हमें अपने-अपने घर भेज दिया.
हमारे रिश्तेदार हमें परेशान करने लगे. प्रिया के परिवार वाले उस पर शादी का दबाव बना रहे थे. उसे घर से निकलने नहीं दिया जा रहा था. फिर प्रिया को गुस्सा आ गया और उसने अपने घर वालों से कह दिया कि अगर उन्होंने हमें मिलने नहीं दिया तो वो खुदकुशी कर लेगी.
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे पूरी दुनिया हमारे खिलाफ हो गई है. हम दोनों से जबरन एक कागज़ पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसपर लिखा था कि अब हम दोनों रिश्ते में नहीं है. दबाव बढ़ता जा रहा था. प्रिया के भाई और कुछ दोस्तों ने मेरी गर्दन पर चाकू रखकर मुझे धमकाया.

इमेज स्रोत, Getty Images
पुलिस से मदद
मेरी बहन ने भी ये रिश्ता तोड़ने के लिए मुझे मनाने की कोशिश की. इधर मैं प्रिया से मिलने के लिए बेचैन थी. मेरे दिमाग में एक ही बात आ रही थी कि अगर उसने खुद के साथ कुछ कर लिया तो? मुझे लग रहा था कि मैं मर जाऊंगी.
फिर मैंने अपनी बहन की मदद से स्थानीय पुलिस से संपर्क किया. मैंने उन्हें सब कुछ बताया. प्रिया को अपने ही परिवार से सुरक्षा की ज़रूरत थी.
मैंने मदद हासिल करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की. मुझे लगा कि मीडिया से हमें कुछ मदद मिल सकती है. मैं मीडिया से बात करने की कोशिश करने लगी. मैं उन्हें अपनी कहानी बताना चाहती थी. एक परिचित ने मुझे एक महिला पत्रकार का नंबर दिया. मैं उसे दिन रात फोन करके मदद मांगने लगी.
अब मैं सोचती हूं कि अगर मैं उस पत्रकार से ना मिली होती तो हमारे साथ क्या होता? हमारी खबर मुंबई मिरर अख़बार में छपी. खबर को पढ़ने के बाद 'Labia' समूह (लेस्बियन एंड बाइसेक्शुअल इन एक्शन) ने हमसे संपर्क किया.
हमारी खबर अब हर तरफ फैल चुकी थी. हमारा चरित्र हनन किया जा रहा था. जब मैं 'Labia' समूह से मिलने जा रही थी, तब भी बहुत डरी हुई थी.
मैंने वहां जाकर मेरी और प्रिया की पूरी कहानी एक महिला को बताई. उसने मुझसे पूछा कि क्या ये रिश्ता गलत है और उन्होंने बताया कि ये बहुत ही सामान्य है.

इमेज स्रोत, YOUTUBE / FOXSTAR HINDI
मिल गई आज़ादी
इसके बाद मुझे पता चला कि 'Labia' एक समूह है जो मेरी जैसी लड़कियों की मदद करता है. उन्होंने प्रिया के परिवार से बात की और उसे आज़ाद कराया. ऐसे हम दोनों फिर से मिल सके. अब हम अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीने के लिए आज़ाद हैं.
हम लोगों को साथ रहते हुए अब डेढ साल हो चुके हैं. अब हम महाराष्ट्र के एक छोटे शहर में रहते हैं. हम दोनों नौकरी करते हैं.
हम ज़्यादा तो नहीं कमा पाते, लेकिन जो कुछ भी कमाते हैं उससे गुज़ारा कर लेते हैं.
हमारे सारे रिश्तेदारों को हमारे बारे में पता है. लेकिन वो हैरान हैं कि दो लड़कियां एक-दूसरे के साथ इतनी खुश कैसे रह सकती हैं, जबकि हम दोनों ने लड़कों से शादी नहीं की है.
जब भी कोई हमारे बारे में पूछता है तो हम कहते हैं कि हम दोनों शादीशुदा हैं और किसी आम पति-पत्नी की तरह रहते हैं. कुछ लोग ये सुनकर हैरान हो जाते हैं, और कुछ कहते हैं, "हम ऐसा पहली बार सुन रहे हैं, लेकिन तुम कह रहे हो तो ये सच ही होगा."
कुछ लोग हमारे रिश्ते को अजीब तरह देखते हैं. मुझे लगता है कि वो लोग कुछ वक्त में ऐसे रिश्तों को स्वीकार करना शुरू कर देंगे और सामान्य तरीके से व्यवहार करेंगे.
हमारे परिवारों ने कुछ हद तक हमें स्वीकार कर लिया है. हालांकि अब वो हमारे साथ पहले की तरह नहीं हैं. लेकिन अब वो शख्स मेरे साथ है, जिससे मैं प्यार करती हूं और ये मेरे लिए सबसे बड़ी कामयाबी है.
(बीबीसी संवाददाता प्राजक्ता धुलप से बातचीत पर आधारित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














