क्या राहुल गांधी ने पटना रैली में ‘बिहार का अपमान’ किया?

राहुल गांधी

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    • Author, फ़ैक्ट चेक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

सोशल मीडिया पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाषण का 21 सेकेंड लंबा एक वीडियो तेज़ी से शेयर किया जा रहा है.

इस वीडियो के साथ दावा किया गया है कि पटना (बिहार) के गांधी मैदान में रविवार को हुई 'जन आकांक्षा रैली' में बोलते हुए राहुल गांधी ने 'पूरे बिहार का अपमान' किया.

भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल और फ़ेसबुक पेज से भी ये वीडियो पोस्ट किया गया है.

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24 घंटे से भी कम समय में बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया पन्नों से हज़ारों लोग इस वीडियो को शेयर कर चुके हैं और दो लाख से ज़्यादा बार इस वीडियो को देखा गया है.

बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय, केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद, बीजेपी सांसद विनोद सोनकर और गिरिराज सिंह शांडिल्य समेत बीजेपी की बिहार ईकाई ने भी सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर किया है.

वायरल वीडियो में राहुल गांधी को कहते सुना जा सकता है कि 'बिहार के युवा से पूछोगे कि करते क्या हो? तो वो कहेगा कुछ नहीं करते.'

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि बीजेपी ने राहुल गांधी के भाषण के साथ छेड़छाड़ की है और उनके भाषण के कुछ अंश हटाकर, उसे ग़लत संदर्भ देकर पेश किया गया है.

राहुल गांधी

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राहुल ने कहा क्या था?

कांग्रेस पार्टी के यू-ट्यूब चैनल के अनुसार पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने 3 फ़रवरी 2019 को हुई जन आकांक्षा रैली में क़रीब 30 मिनट लंबा भाषण दिया था.

इस रैली में उन्होंने नोटबंदी, किसानों की क़र्ज़माफ़ी और कथित तौर पर बीजेपी द्वारा कुछ कॉरपोरेट घरानों को मुनाफ़ा पहुँचाए जाने की बात की. साथ ही अपने भाषण में उन्होंने कुछ वक़्त बिहार में बेरोज़गारी के मुद्दे को भी दिया था.

बीजेपी ने राहुल गांधी के भाषण के सिर्फ़ उसी हिस्से का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है जहाँ वो बिहार में बेरोज़गारी की बात करते हैं.

राहुल गांधी ने कहा था:

"आप पहले शिक्षा का सेंटर हुआ करते थे. नालंदा यूनिवर्सिटी, पूरी दुनिया में मशहूर. पटना यूनिवर्सिटी, हिंदुस्तान में मशहूर. सब लोग यहाँ आना चाहते थे. मगर आप आज शिक्षा का सेंटर नहीं हो. आप जानते हो कि आज आप किस चीज़ का सेंटर हो. बेरोज़गारी के. बिहार बेरोज़गारी का सेंटर बन गया है."

"बिहार का युवा पूरे देश में चक्कर काटता है. आप बिहार के किसी भी गाँव में चले जाओ और बिहार के युवा से पूछो कि भैया करते क्या हो? जवाब मिलेगा, कुछ नहीं करते. क्या मोदी जी ने रोज़गार दिया? नहीं. क्या नीतीश जी ने रोज़गार दिया? नहीं."

"रोज़गार के लिए बिहार का युवा मोदी के गुजरात गया तो उसे मारकर भगाया गया. महाराष्ट्र में भी शिवसेना और बीजेपी ने कहा कि तुम्हारी यहाँ कोई जगह नहीं है. लेकिन आप में कोई कमी नहीं है. आप एक बार फिर शिक्षा का सेंटर बन सकते हो."

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RAHUL GANDHI

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बेरोज़गारी एक बड़ा मुद्दा

रविवार को हुई इस रैली में राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि अगर उनकी सरकार बनती है तो पटना यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया जाएगा.

लेकिन राहुल गांधी के भाषण के जिस हिस्से को सुनकर लोग उनपर आरोप लगा रहे हैं कि राहुल ने देश को प्रतिभावान अधिकारी, खिलाड़ी व महान हस्तियाँ देने वाले बिहार राज्य का अपमान किया है, उस वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है.

वीडियो में 10वें सेकेंड के बाद एक वाक्य हटा दिया गया है कि 'बिहार के लोगों को रोज़गार के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं'.

असली वीडियो सुनने के बाद ये स्पष्ट होता है कि राहुल गांधी बेरोज़गारी के मुद्दे पर नीतीश कुमार और पीएम मोदी को निशाना बना रहे थे.

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2011 के जनसंख्या के आंकड़ों पर नज़र डालें तो बिहार में कुल आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा 15 से 30 साल उम्र के बीच है. संख्या में बात करें तो ये आंकड़ा क़रीब दो करोड़ बैठता है.

जानकारों की मानें तो औद्योगिकरण नहीं होने के कारण युवा वर्ग के लिए सूबे में सबसे कम रोज़गार के अवसर हैं.

ऐसी तमाम रिपोर्टें मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि उत्तर बिहार के सहरसा, मधेपुरा और सुपौल ज़िले से मज़दूरों की एक बड़ी आबादी दिल्ली-पंजाब समेत देश के कई राज्यों में हर साल 'पलायन' कर जाती है. श्रम विभाग के पास पलायन करने वालों का कोई आधिकारिक डेटा मौजूद नहीं है.

यही वजह है कि 'रोज़गार' बिहार विधानसभा चुनाव-2015 में एक बड़ा मुद्दा रहा था और आगामी लोकसभा चुनाव में भी ये एक बड़ा मुद्दा रहेगा.

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लेबर

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बेरोज़गारों की संख्या

सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार उन राज्यों की श्रेणी में आता है जहाँ रोज़गार की स्थिति देश में काफ़ी ख़राब है.

भारतीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के चंडीगढ स्थित लेबर ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में नियमित वेतन पाने वाले श्रमिकों का प्रतिशत सबसे कम (9.7 प्रतिशत) दर्ज किया गया था.

इस रिपोर्ट में ऐसे घरों की संख्या का अनुपात भी बिहार में सबसे ख़राब था जहाँ किसी सदस्य के पास नियमित रोज़गार हो.

बिहार के श्रम संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि बिहार में 'रजिस्टर्ड बेरोज़गार' लोगों की संख्या 9 लाख 80 हज़ार से ज़्यादा है. ये वो लोग हैं जिन्होंने सरकारी पोर्टल पर ख़ुद को रजिस्टर कराया है.

अधिकारी ने बताया कि बीते तीन सालों में औसतन डेढ लाख प्रति वर्ष की दर से क़रीब साढे चार लाख नए लोग बेरोज़गारी के इस आंकड़े में जुड़े हैं.

हालांकि वो मानते हैं कि ये आंकड़ा बीते कुछ सालों में इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि अब ज़्यादा लोग ख़ुद को लेबर की साइट पर रजिस्टर करवाने लगे हैं.

बीबीसी हिन्दी

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