मोदी क्यों हारे? ये बताने वाले कथित न्यूयॉर्क टाइम्स के आर्टिकल का सच

मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, फ़ैक्ट चेक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

सोमवार को जब कांग्रेस के तीन मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सूबे की शपथ ली, तब कुछ दक्षिणपंथी रुझान वाले फ़ेसबुक पेज और ग्रुप एक लेख शेयर कर रहे थे.

उनका दावा था कि अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव की विवेचना कर मुख्य कारणों की एक फ़ेहरिस्त तैयार की है कि आख़िर भारतीय जनता पार्टी और मोदी खेमे को इन चुनावों में हार का सामना क्यों करना पड़ा.

शेयर किए जा रहे आर्टिकल के अनुसार न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारतीय वोटर्स के पैटर्न को समझाने की कोशिश की है और बताया है कि मौजूदा मोदी सरकार को इन नतीजों से क्या सबक लेने चाहिए.

ये 'आर्टिकल' तस्वीर और टेक्स्ट के तौर पर अंग्रेज़ी समेत हिन्दी में भी पोस्ट किया गया है. साथ ही इसे व्हॉट्सऐप पर भी शेयर किया जा रहा है.

कुछ लोगों ने इस आर्टिकल का लब्बोलुआब लिखा है कि 'भारतीय वोटर बेहद संकीर्ण मानसिकता के हैं जो हमेशा शिक़ायत करते रहते हैं. साथ ही उन्हें अपनी समस्याओं के हल तुरंत चाहिए, वो लंबी योजनाओं में विश्वास नहीं करते.'

लाइन
मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

इस कथित आर्टिकल में और क्या-क्या लिखा है?

  • भारतीयों की नज़र में हर काम सरकार का काम है और उन्हें अपनी समस्याओं के 'लॉन्ग टर्म हल' नहीं चाहिए.
  • भारतीयों की याद्दाश्त कमज़ोर है और उनका दृष्टिकोण बहुत ही संकीर्ण.
  • वो पुरानी बातें भूल जाते हैं और नेताओं के पिछली ग़लतियों को माफ़ कर देते हैं.
  • भारतीय ढीठ होकर जातिवाद पर वोट करते हैं. जातिवाद एक मुख्य शत्रु है जो युवाओं का उत्थान नहीं होने देता और उन्हें बाँटता है.
  • चीन और पाकिस्तान में जातिवाद फ़ैलाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि दोनों ही GDP के लिये भारतीय बाज़ार पर निर्भर हैं.
  • लोगों को सस्ता डीजल चाहिए, कर्ज़ माफ़ी चाहिए, लेकिन 'सबका साथ, सबका विकास' वो नहीं जानते.
  • वो सिर्फ़ अपनी पॉकेट में आये धन को जानते हैं.
  • भारत में जीतने के लिए मोदी को स्टेट्समैनशिप छोड़कर, पॉलिटिशियन बनना होगा.

इस लेख के अंत में लिखा है कि नरेंद्र मोदी ने बतौर पीएम बहुत काम किया है, लेकिन भारत के लोग उनके काम की प्रशंसा नहीं कर रहे.

लाइन
मोदी

इमेज स्रोत, Getty Images

इस लेख की सच्चाई

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि लेख बताकर शेयर की जा रही ये पोस्ट फ़र्ज़ी है.

फ़ेसबुक सर्च से पता चलता है कि 11 दिसंबर के बाद से इस पोस्ट को न्यूयॉर्क टाइम्स का आर्टिकल बताकर शेयर किया जा रहा है.

लेकिन 'नरेंद्र मोदी' और 'विधानसभा चुनाव 2018' जैसे की-वर्ड्स से सर्च करने पर ये साफ़ हो जाता है कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने ऐसा कोई आर्टिकल नहीं लिखा है जिसमें विधानसभा चुनावों की विवेचना कर भाजपा की हार के कारण बताए गए हों और भारतीय लोगों के लिए ऐसी भाषा में तो कोई लेख अमरीकी साइट पर क़तई नहीं लिखा गया है.

भाषाई बारीकी पर उतरें तो इस पोस्ट में लिखी गई अंग्रेज़ी बहुत ग़लत है. अंग्रेज़ी के "caste" और "promote" जैसे सरल शब्द भी ग़लत लिखे हुए हैं.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसका मज़ाक भी बनाया है. लेकिन भाषाई स्टाइल अमरीकी अख़बार की स्टाइल शीट से बिल्कुल मेल नहीं खाता.

दिलचस्प है कि ये कथित लेख भाजपा की हार के लिए जनता को ही दोषी ठहराता है. जबकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने भी पाँचों राज्यों में चुनावी जनादेश का आगे बढ़कर स्वीकार किया है.

लाइन

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)