बुलंदशहर में क्यों इकट्ठा हुए थे लाखों मुसलमान

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राजस्थान में इस शुक्रवार, सात दिसंबर को विधानसभा के लिए मतदान होगा.
प्रदेश में चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में है. ऐसे में उन तस्वीरों, वीडियो और दावों की संख्या भी बढ़ी है जिन्हें राजनीतिक दल या उनके समर्थक अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे हैं.
'एकता न्यूज़ रूम' ने इनमें से कुछ की पड़ताल की और उनकी सच्चाई आप तक लाने की कोशिश की है.
बाबरी मस्जिद के लिए जमा हुए मुसलमान - फ़ेक
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर का बताकर शेयर किया जा रहा है.
कई फ़ेसबुक यूज़र्स ने अपने क्लोज़ ग्रुप में लिखा है कि 'बुलंदशहर में बाबरी मस्जिद के लिए इकट्ठा हुए लाखों मुसलमान'.

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बुलंदशहर में सोमवार को एक पुलिस अफ़सर की मौत के बाद हुए हंगामे से जोड़कर भी कुछ लोगों ने ये तस्वीर शेयर की है.
कई फ़ेसबुक पोस्ट्स का लब्बोलुआब ये था कि भारत में मुसलमानों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है जिससे हिंदुओं को ख़तरा है.
लेकिन हमने अपनी पड़ताल में पाया कि ये फ़ोटो बुलंदशहर (यूपी) का नहीं है.
दरअसल, लाखों मुसलमान 1-3 दिसंबर तक उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर (दरियापुर इलाक़े) में आयोजित 'इज्तेमा' में पहुँचे थे, मगर बाबरी मस्जिद विवाद का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है.

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आसान भाषा में इज्तेमा को 'मुसलमानों का सत्संग' कहा जा सकता है. इन आयोजनों में मुस्लिम धर्म गुरू मुसलमानों से अपनी बेसिक शिक्षाओं की ओर लौटने का आह्वान करते हैं. भारत में सबसे बड़ा इज्तेमा भोपाल में आयोजित होता है. तीन दिन के इस कार्यक्रम में ज़्यादातर सुन्नी मुसलमान शिरकत करते हैं.
मुस्लिम धर्म गुरुओं के अनुसार, इज्तेमा को राजनीतिक मुद्दों से हमेशा दूर रखा जाता है.
अब बात बुलंदशहर के नाम से वायरल हो रही तस्वीर की, तो इस तस्वीर को 'इस्लाम फ़ॉर एवरीवन' नाम के फ़ेसबुक पेज ने 29 मई 2016 को पोस्ट किया था.
वहीं क़ुवैत के न्यूज़ नेटवर्क 'देरवाज़ा न्यूज़' ने अपनी साइट पर इसी तस्वीर को साल 2017 में पूर्व-अफ़्रीकी देश तंज़ानिया का बताकर शेयर किया था.
तस्वीर धुंधली होने के कारण और इसमें भीड़ के अलावा कम ही जगहें दिखाई देने के कारण इसकी फ़ॉरेंसिक जांच करना थोड़ा मुश्किल है. हालांकि इस तस्वीर में लोगों की वेशभूषा, टोपियाँ और रंग देखकर ऐसा लगता है कि ये तस्वीर किसी मुस्लिम बहुल अफ़्रीकी देश की ही है, यूपी के बुलंदशहर की नहीं.
कांग्रेस की रैली में हंगामा - फ़ेक

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दक्षिणपंथी रुझान वाले कुछ फ़ेसबुक पन्नों द्वारा चुनावी रैली की एक फ़ोटो शेयर की जा रही है जिसे राजस्थान के जोधपुर का बताया गया है.
फ़ोटो शेयर करने वालों का दावा है कि ये फ़ोटो जोधपुर में हुई कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जनसभा का है जिसके बाद कांग्रेस समर्थकों ने शहर में तोड़फोड़ की.
जबकि ट्विटर पर कुछ यूज़र्स ने उसी तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है कि भाजपा की रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है जो कि कांग्रेस नेता अशोक गहलोत के लिए चिंता की बात है.
कोलकाता से @rishibagree नाम के एक ट्विटर यूज़र ने मंगलवार को ट्वीट किया, "राजस्थान में टक्कर अब 50-50 की हो गई है. कांग्रेस का दमख़म घटता दिख रहा है और भाजपा की रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है."
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लेकिन ये सभी दावे ग़लत हैं. ये फ़ोटो 29 नवंबर 2013 की है.

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यानी पिछले राजस्थान चुनाव में ये तस्वीर खींची गई थी.
उस वक़्त नरेंद्र मोदी 2014 के आम चुनाव के लिए भाजपा के पीएम केंडिडेट के तौर पर राजस्थान में प्रचार करने पहुँचे थे.
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