बुलंदशहर: अगर मेरे बेटे ने पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह को मारा है तो मैं उसकी जान ले लूंगी- सेना के जवान की मां

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सेना के जवान जीतेंद्र की मां ने कहा है कि अगर उनके बेटे ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को गोली मारी होगी तो वो अपने बेटे को मार देंगी.
कुछ वीडियो के हवाले से दावा किया जा रहा है कि सेना के जवान जीतेंद्र ने सुबोध सिंह को गोली मारी थी. समाचार एजेंसी पीटीआई ने जीतेंद्र की मां रतन कौर से बात की है.
जीतेंद्र को गांव के लोग फ़ौजी नाम से भी जानते हैं.
रतन कौर ने कहा है, ''अगर कोई ऐसी तस्वीर और वी़डियो मेरे सामने आते हैं, जिनमें मेरा बेटा सुबोध सिंह पर हमला करते दिख रहा है तो मैं उसकी जान ख़ुद ले लूंगी. मेरा बड़ा बेटा धर्मेंद्र भी सेना में ही है और पुणे में तैनात है. मेरे दोनों बेटे सेना में हैं और दोनों अभी ड्यूटी पर हैं.''
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'मेरी बहू को पीटा गया'
रतन कौर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महाव गांव के उनके घर पर छापेमारी की थी और इसी दौरान फ़ौजी की पत्नी प्रियंका को पीटा गया.
रतन ने कहा कि सोमवार की रात पुलिस ने उनके घर में तोड़फोड़ की और कार को नुक़सान पहुंचाया है.
उन्होंने कहा, ''मैं निर्दयी नहीं हूं. पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और चिंगरावथी गांव के लड़के सुमित के मारे जाने का ग़म मुझे भी है.''

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'राजपाल को पुलिस उठा ले गई'
रतन कौर ने कहा कि उनके पति राजपाल सिंह और प्रियंका उस दौरान घर में थे और वो अपने बड़े बेटे धर्मेंद्र की पत्नी के घर पर गई थीं. रतन ने कहा कि वो चार दिसंबर की सुबह लौटी हैं.
उन्होंने कहा कि राजपाल सिंह को पुलिस उठाकर ले गई थी और उन्हें पता नहीं है कि वो अभी कहां हैं.
रतन का दावा है कि प्रियंका को मेरठ के एक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है. जीतेंद्र की पत्नी प्रियंका ने भी अपनी सास के आरोपों पर सहमति जताई है.
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गांव के प्रधान क्या कहते हैं?
प्रियंका ने कहा, ''मैं अपने ससुर के साथ घर पर थी. हमलोग के साथ तीने महीने का मेरा बच्चा भी था. पुलिस ने मेरे ऊपर हमला बोला, जिसमें मेरा हाथ टूट गया है. मेरे कान में भी चोट लगी है.''
गांव के प्रधान पीतम सिंह के बेटे कृष्णपाल सिंह ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि जीतेंद्र गांव आया था.
कृष्णपाल ने कहा, ''मुझे मीडिया से जानकारी मिली कि वो भी भीड़ का हिस्सा था. हालांकि मैं पुख्ता तौर पर नहीं कह सकता हूं कि वो भी हिंसक भीड़ में शामिल था.''
बुलंदशहर के एसपी प्रवीण रंजन सिंह ने कहा है कि सभी सबूतों की जांच की जा रही है.

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पुलिसिया कार्रवाई
इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की एक टीम को सेना के जवान जीतेंद्र को गिरफ़्तार करने के लिए जम्मू भेजा गया है. इस मामले में पांच और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. शुक्रवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक नौ गिरफ़्तारियां हो चुकी हैं.
एफ़आईआर में 17 अन्य आरोपों के अलावा राजद्रोह का भी मामला दर्ज किया गया है. इनमें 27 नामज़द अभियुक्त हैं और 50 अज्ञात. इस भीड़ पर पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और सुमित नाम के एक व्यक्ति की हत्या के आरोप हैं.
पास के खेतों में पशुओं के कंकाल मिलने के बाद हिंसा भड़की थी.
महाव गांव के जीतेंद्र उर्फ फ़ौजी का नाम भी अभियुक्तों में है. आईजी (क्राइम) एसके भगत ने शुक्रवार को लखनऊ में इसकी जानकारी दी है. जीतेंद्र का पूरा नाम जीतेंद्र मलिक है.
चार दिसंबर को स्याना पुलिस स्टेशन पर दर्ज हुई एफ़आईआर में जीतेंद्र 11वें अभियुक्त हैं. भगत ने कहा कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार जीतेंद्र जम्मू में तैनात हैं और पुलिस की टीम वहां पहुंच गई है.

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पुलिस का क्या है कहना?
आईजी ने कहा, ''हमलोग उम्मीद कर रहे हैं कि जीतेंद्र को जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा.''
पीटीआई के अनुसार दिल्ली में सेना के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि पुलिस ने इस मामले में सहयोग के लिए संपर्क किया है. इस मामले में गिरफ़्तार पांच लोगों की पहचान हो चुकी है. ये पांच हैं- चंद्रा, रोहित, नितिन और जीतेंद्र. हालांकि इनके नाम एफ़आईआर में नहीं हैं.
आईजी एसके भगत ने कहा कि इन्हें वीडियो फुटेज और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर गिरफ़्तार किया गया है. आईजी ने कहा कि पुलिस टीम इसे लेकर लगातार छापेमारी कर रही है.

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क्या कहते हैं गांववाले?
पशुओं के कंकाल महाव गांव के बाहर खेतों में मिले थे. ये खेत गांव के पूर्व प्रधान राजपाल चौधरी के हैं. राजपाल चौधरी का भी नाम एफ़आईआर में है. इस गांव के पांच और लोगों को नामज़द अभियुक्त बनाया गया है. ये सारे गांव से फरार हैं.
पीटीआई से सूत्रों ने बताया है कि फ़ौजी छुट्टी पर गांव आया था और वो हिंसक भीड़ में भी शामिल था. गांव वालों ने बताया है कि वो घटना के बाद सोमवार दोपहर में गांव से चला गया था.
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