वो लड़की जो किचन के रास्ते दुनिया पर छा गई

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- Author, गुरप्रीत सैनी, निकिता मंधानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कहते हैं कि भारत की अधिकतर महिलाएं अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा किचन में ही गुज़ार देती हैं.
लेकिन उसी किचन में खड़े होकर वो पूरी दुनिया पर भी छा सकती हैं. और ये साबित किया है गरिमा अरोड़ा ने.
मुंबई में पली-बढ़ी गरिमा पेशे से एक शेफ हैं, जो थाईलैंड के बैंकॉक में 'गा' नाम का एक रेस्टोरेंट चलाती हैं.
32 साल की गरिमा अपने रेस्टोरेंट के लिए मिशेलिन स्टार हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं.
फूड इंडस्ट्री में किसी रेस्टोरेंट को मिशेलिन स्टार मिलना बेहद सम्मान की बात माना जाता है. जिस रेस्टोरेंट के पास मिशेलिन स्टार होते हैं उसे उत्कृष्ट श्रेणी का रेस्टोरेंट माना जाता है.

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लेकिन यहां तक पहुंचने की गरिमा की कहानी बेहद दिलचस्प है.
बटर चिकन और पराठों के शौकीन पंजाबियों के परिवार से आने वाली गरीमा अरोड़ा को बचपन से ही खाने से प्यार था.
घर में वो अपने पिता को तरह-तरह के व्यंजन बनाते देखती. वहीं से उनकी दिलचस्पी इस क्षेत्र में जागी. गरिमा कहती हैं कि मेरे पिता 90 के उस दशक में इटली और मिडिल इस्ट की ऐसी-ऐसी ख़ास डिश बनाया करते थे, जिनके बारे में भारत में शायद ही किसी ने सुना होगा.
गरिमा ने मुंबई के जय हिंद कॉलेज से अपनी पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कुछ वक्त मुंबई में पत्रकार के तौर पर काम किया लेकिन कुछ ही वक्त में उन्हें एहसास हो गया कि वो अपने जूनून को ही फॉलो करना चाहती हैं.

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सपने का पीछा करते हुए पेरिस पहुंची
21 साल की गरिमा अपने सपने का पीछा करते हुए पेरिस के लिए रवाना हो गईं और वहां जाने-माने कॉर्डन-ब्लू कलिनरी स्कूल में शेफ की पढ़ाई की.
इसके बाद उन्होंने दुबई, डेनमार्क और कोपेनहेगन के बड़े रेस्टोरेंट में काम किया. गरिमा मशहूर शेफ गगन आनंद के साथ भी काम कर चुकी हैं.
एक अप्रैल 2017 को गरिमा अरोड़ा ने अपना रोस्टोरेंट 'गा' खोला.
वो कहती हैं, "मेरे रोस्टोरेंट में खाना खाकर आपको ऐसा लगेगा, मानो आप किसी के घर पर ही खाना खा रहे हैं. हमारा मकसद अपने मेहमानों को बेहतरीन अनुभव और खुशी देना है."
गरिमा कहती हैं कि खाना बनाने की क्रिएटिविटी उन्हें गज़ब की संतुष्टी देती है.

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गरिमा अपने रेस्टोरेंट में आने वाले लोगों को कई तरह के लज़ीज़ डिश परोसती हैं. उनकी डिशेज़ में भारत समेत कई देशों का स्वाद शामिल होता है.
गरिमा बताती हैं कि वो हमेशा भारत और अंतरराष्ट्रीय स्वाद को मिलाकर कुछ अनोखा बनाने की कोशिश करती हैं.
'गा' रेस्टोरेंट में जैकफ्रूट, कद्दू, क्रे-फिश और अमरूद जैसी चीज़ों से डिशेज़ तैयार की जाती हैं.

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मिशेलिन गाइड और उसका महत्व
किसी रेस्टोरेंट को मिशेलिन स्टार मिलना बड़ी बात है. ये स्टार किसी रेस्टोरेंट की उत्कृष्टता की पहचान है और इसके मिलते ही रेस्टोरेंट की कमाई भी रातों-रात बढ़ जाती है.
मिशेलिन हर साल अपनी एक गाइड जारी करता है. 2019 की गाइड में गरिमा के रेस्टोरेंट को स्टार मिले हैं.
मिशेलिन गाइड के नाम से जानी जाने वाली लाल रंग की छोटी-सी इस किताब की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है.
ये कहानी 1889 में फ्रांस के क्लेरमोंट-फेरंड में शुरू हुई. दो भाईयों आंद्रे और इदुआर मिशेलिन ने अपनी टायर की कंपनी शुरू की थी. उस वक्त फ्रांस में सिर्फ 3000 कारें हुआ करती थी.

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अपना कारोबार को बढ़ाने के लिए ही उन्होंने एक गाइड बनाई, जिसमें ट्रेवलर्स के लिए जानकारी थी.
इस गाइड में मैप थे, टायर कैसे बदलें, पेट्रोल कहां भरवाएं जैसी जानकारी थी, इसके अलावा खाने-पीने और रुकने के ठिकानों भी बताए गए थे.
दरअसल मिशेलिन भाई चाहते थे कि लोग इस गाइड को पढ़कर घुमने-फिरने निकले. जिससे कारें ज़्यादा चलें, ज्यादा घिसें और उनके टायर अधिक बिकें.
हर साल छपने वाली ये गाइड पहले बीस साल तो फ्री में लोगों को दी गई. लेकिन एक बार जब आंद्रे मिशेलिन किसी टायर की दुकान पर गए थे उन्होंने देखा कि दुकान में एक मेज़ पर उनकी गाइड यूं ही पड़ी है.
तब उनके दिमाग में एक बात आई कि जो चीज़ लोगों को मुफ्त में मिलती है, लोग उसकी कद्र नहीं करते.

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इसके बाद उन्होंने 1920 में नई मिशेलिन गाइड लॉन्च की और उसे प्रति किताब सात फ्रेंक में बेचा.
इस दफा पहली बार गाइड में पेरिस के होटल और रेस्टोरेंट की लिस्ट डाली गई थी. साथ ही इसमें विज्ञापन के लिए भी जगह छोड़ी गई.
'रेस्टोरेंट इंस्पेक्टर'
गाइड के रेस्टोरेंट सेक्शन को लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली. इसके बाद मिशेलिन भाईयों ने कुछ लोगों की टीम बनाई. ये लोग अपनी पहचान छुपाकर रेस्टोरेंट में जाते और खाना खाकर रेस्टोरेंट की रेटिंग तय करते. इन ख़ुफ़िया ग्राहकों को उस वक्त 'रेस्टोरेंट इंस्पेक्टर' कहा जाता है.
1926 में ये गाइड बेहतरीन खाना देने वाले रेस्टोरेंट्स को स्टार रेटिंग देने लगी. शुरु में वो सिर्फ एक स्टार देते थे. पांच साल बाद ज़ीरो, एक, दो, तीन स्टार दिए जाने लगे.
1936 में स्टार देने के लिए नए मानदंड तय कर दिए गए.

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बाकी बची 20वीं सदी में तो मिशेलिन गाइड बेस्ट सेलर रही. आज की तारीख में गाइड तीन महाद्वीपों में 30 से ज़्यादा प्रदेशों के 3000 रेस्टोरेंट और होटलों को रेटिंग देती है.
इनमें बैंकॉक, वाशिंगटन डीसी, हंगरी, पोलैंड, स्वीडन, सिंगापुर, नोर्वे शामिल हैं. हालांकि मिशेलिन भारत के रेस्टोरेंट को रेटिंग नहीं देता.
दुनियाभर में अब तक 30 मीलियन से ज़्यादा मिशेलिन गाइड बिक चुकी हैं.

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गरिमा अरोड़ा कहती हैं कि उन्हें अपनी टीम और अपने रेस्टोरेंट पर गर्व है. वो 'गा' को यहां से और आगे ले जाना चाहती हैं.
एक शेफ के तौर पर उनकी हमेशा एक ही ख्वाहिश रहती है कि जो भी उनके हाथ का खाना खाए वो यही कहता हुआ जाए कि "ऐसा खाना तो मैंने पहले कभी खाया ही नहीं."
दुनिया के टॉप शेफ की लिस्ट पर नज़र डालें तो आपकों वहां अधिकतर पुरुषों के नाम दिखेंगे. घर-घर में अपने हाथों का जादू चलाने वाली महिलाएं उस स्तर पर कम ही नज़र आती हैं. लेकिन गरिमा अरोड़ा ने साबित कर दिया है कि महिलाएं चाहें तो कुछ भी कर सकती हैं.
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