ये पांच चीजें आपको मोटा बना सकती हैं

- Author, क्रिस्टी ब्रीवर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
लोग कहते हैं कि मोटापा से छुटकारा पाने के लिए आपको मानसिक शक्ति की जरूरत होती है लेकिन शोधकर्ताओं के मुताबिक़ ऐसा नहीं हैं.
जानिए, वो पांच कारण जो आपके मोटापे को प्रभावित करते हैं.
1. कहीं माइक्रोब्स कम तो नहीं...
जिलियन और जेकी जुड़वा बहनें हैं लेकिन एक बहन का वज़न दूसरी से 41 किलोग्राम ज़्यादा है.
ट्विन रिसर्च यूके स्टडी से जुड़े प्रोफेसर टिम स्पेक्टर दोनों बहनों पर बीते 25 साल से नज़र रख रहे हैं.
वे मानते हैं कि दोनों के वज़न में अंतर की बड़ी वजह सूक्ष्म ऑर्गेनिज़्म माइक्रोब्स हैं जो आपकी आंतों में रहते हैं.
स्पेक्टर कहते हैं, "हर बार जब भी आप कुछ खाते हैं तो आप हंड्रेड ट्रिलियन माइक्रोब्स को भी भोजन दे रहे होते हैं, ऐसे में आप कभी भी अकेले खाना नहीं खाते हैं."

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दोनों बहनों के मल की जांच करने के बाद ये पाया गया कि पतली वाली बहन जिलियन के शरीर में अलग-अलग तरह के माइक्रोब्स थे.
वहीं, ज़्यादा वजन वाली बहन जैकी के शरीर में उतने तरह के माइक्रोब्स नहीं हैं.
लगभग 5000 लोगों में यही पैटर्न देखने वाले प्रोफेसर स्पेक्टर बताते हैं, "जिस व्यक्ति में जितने ज़्यादा तरह के माइक्रोब्स होंगे, वो उतना ही पतला होगा, वहीं अगर आपका वज़न ज़्यादा होगा तो इसका मतलब ये है कि आपके शरीर में उतनी तरह के माइक्रोब्स नहीं होंगे जितने होने चाहिए."
ऐसे में अगर आप हेल्दी डाइट (फाइबर से भरपूर खाना) लें तो अपने शरीर में माइक्रोब्स की किस्में बढ़ सकती हैं.
वो चीजें जिनमें है भरपूर फाइबर...
- अनाज के बीजों वाला नाश्ता
- फल, रसीले फल जैसे अंगूर और नाशपाती
- ब्रोकली और गाजर जैसी सब्जियां
- सहजन
- दालें
- मूंगफली, बादाम आदि

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2. जीन अपने आप में है एक लॉटरी
क्या कभी आपने सोचा है कि कुछ लोग खाने-पीने का ध्यान रखने के बाद भी अपना वज़न काबू में नहीं रख पाते हैं.
वहीं, कुछ लोग कुछ भी नहीं करते हैं लेकिन फिर भी मोटापे का शिकार नहीं होते हैं.
प्रोफेसर सदफ फारूक़ी कहते हैं, "ये एक लॉटरी जैसा है, अब ये सामने आ चुका है कि हमारे वज़न के नियंत्रण में जीन्स की भूमिका होती है. और अगर आपके जीन में कोई गड़बड़ी है तो ये मोटापा बढ़ाने के लिए काफ़ी होता है."

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जीन्स किसी व्यक्ति की भूख, उसे कितना खाना है और क्या खाना है, जैसे फ़ैसलों पर प्रभाव डाल सकते हैं.
आप कितनी जल्दी कैलोरी ख़र्च करते हैं. ये भी जीन्स ही तय करते हैं. इसके साथ ही जीन ये भी तय करते हैं कि हमारा शरीर वज़न को कैसे झेलता है.
इस तरह के जीन्स की संख्या कम से कम 100 है जिनमें से MCR4 जीन भी शामिल है.
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारे वज़न पर उन जीन्स का 40-70% असर पड़ता है जो हम अपने घरवालों से हासिल करते हैं.

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ऐसा माना जाता है कि एक हज़ार में से 1 व्यक्ति में MCR4 जीन का बिगड़ा हुआ स्वरूप होता है.
ये वो जीन है जो आपके दिमाग़ में भूख को नियंत्रित करने और भूख बढ़ाने का काम करता है.
इस जीन में गड़बड़ी वाले लोगों को ज़्यादा भूख लगती है. इसके साथ ही वसा युक्त भोजन खाने की इच्छा होती है.
प्रॉफेसर फारुक़ी कहते हैं, "दरअसल आप अपने जीन्स के बारे में कुछ भी नहीं कर सकते हैं. लेकिन कुछ लोगों के लिए जीन्स को समझना उन्हें डाइट मेन्टेन करने और व्यायाम करके वज़न नियंत्रण में रखने में मदद कर सकता है."
3 - कौन से टाइम पर क्या खा रहे हैं आप?
आपको वो पुरानी कहावत याद होगी जिसमें कहा गया है कि सुबह का नाश्ता एक राजा की तरह, दिन का खाना सामंत की तरह और रात का खाना एक ग़रीब व्यक्ति की तरह खाना चाहिए.
ओबेसिटी विशेषज्ञ डॉ. जेम्स ब्राउन कहते हैं कि हम जितना लेट खाना खाएंगे, हमारा वज़न बढ़ने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाएगी.

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ऐसा माना जाता है कि रात के दौरान हम कम सक्रिय रहते हैं, इस वजह से रात में खाना ठीक से पचता नहीं है. लेकिन असल बात ये है कि इसका संबंध हमारे शरीर की आंतरिक बॉडी क्लॉक से है.
वह बताते हैं, "हमारा शरीर रात की अपेक्षा दिन में कैलोरी पाचन बेहतर ढंग से करता है"
इसी वजह से जो लोग शिफ़्ट में या अजीबो-गरीब समय पर काम करते हैं, वे वज़न बढ़ने की समस्या का सामना कर सकते हैं.
रात के समय हमारा शरीर वसा और शुगर को पचाने के लिए संघर्ष करता है.
इसलिए वज़न घटाने या बढ़ने से बचाने के लिए शाम सात बजे से पहले ही अपने एक दिन के आहार की ज़्यादातर कैलोरीज़ खा लेनी चाहिए.

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डॉ. ब्राउन के मुताबिक़, बीते एक दशक में ब्रिटेन में रात के खाने का औसत समय शाम 5 बजे से खिसककर 10 बजे हो गया है और इससे ओबेसिटी के स्तरों में बढ़ोतरी देखी है.
लेकिन आज के दौर के काम के अलग-अलग घंटों और तनावपूर्ण जीवनशैली के बावजूद भी आप कुछ ऐसे काम कर सकते हैं जिससे आपका वज़न कम हो सकता है.
डॉ. ब्राउन के मुताबिक़, ब्रेकफास्ट न करना या टोस्ट खाकर काम चलाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है.

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इसकी जगह प्रोटीन और वसा युक्त भोजन जैसे अंडे और अनाज वाला टोस्ट खाने से आपको पेट भरा हुआ लगेगा.
4. दिमाग को डाले चक्कर में
बिहेवियरल इनसाइट टीम सुझाती है ब्रिटेन के लोग अपने खाने का हिसाब रखने में काफ़ी ख़राब हैं.
बिहेवियरल साइंटिस्ट ह्यूगो हार्पर सुझाते हैं कि आप कैलोरी गिनने की जगह अपने खाने-पीने की आदतों को बदल सकते हैं.
उदाहरण के लिए ऐसे भोज्य पदार्थों को न देखना मानसिक शक्ति के बल पर उन्हें न खाने की कोशिश से ज़्यादा प्रभावी साबित हो सकता है.
ऐसे में आप अपने किचन में सेहत के लिए नुकसानदायक स्नैक्स को हटाकर फलों की टोकरी रख सकते हैं.

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इसके अलावा टीवी के सामने बिस्किट का एक पूरा पैकेट रखकर न बैठें.
इसकी जगह आप उतने बिस्किट एक प्लेट में रख सकते हैं जितने आप खाना चाहते हैं.
इसके अलावा सॉफ़्ट ड्रिंक्स के डाइट वर्जन को अपना सकते हैं. और चॉकलेट बिस्किट के साथ शाम की चाय पीना बंद करने की जगह आप उसकी मात्रा कम कर सकते हैं.
डॉ. हार्पर कहते हैं कि अगर चीजों की मात्रा में 5-10 फीसदी की कमी हो जाए तो लोगों को पता नहीं चलता है.
5. हारमोन्स का क्या है रोल
बेरियाट्रिक सर्जरी की सफलता बस छोटा पेट बनाने में नहीं है बल्कि ये उन हारमोन्स में भी परिवर्तन करती है जो पेट में पैदा होते हैं.
हमारी भूख हमारे हारमोन्स से प्रभावित होती है. और ये खोज की गई है कि ओबेसिटी के इलाज में सबसे प्रभावी इलाज बेरियाट्रिक ट्रीटमेंट वो हारमोन्स बनाती है जो हमें ये अहसास कराती है कि हमें भूख नहीं लगी है.

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लेकिन ये एक बड़ा ऑपरेशन है, जिसमें पेट का साइज़ 90 फीसदी कम हो जाता है और ये उन पर ही की जा सकती है जिनकी बीएमआई कम से कम 35 हो.
इंपीरियल कॉलेज लंदन में शोधार्थियों ने आंत के उन हारमोन्स की रचना की है जो इस सर्जरी के बाद भूख में परिवर्तन करते हैं.
इस ऑपरेशन से गुजरने वाले मरीजों को हर रोज इन हारमोन्स का इंजेक्शन दिया जा रहा है.
डॉ. ट्रिसिया टेन कहती हैं, "मरीज कम भूख महसूस कर रहे हैं और वे कम खा रहे हैं. ऐसे में उन्होंने सिर्फ 28 दिनों में 2-8 किलोग्राम वजन गिराया है.
अगर ये दवा सुरक्षित पाई जाती है तो इसे मरीजों पर तब तक इस्तेमाल करने की योजना है जब तक उनका वजन स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक न हो जाए.












