कौन हैं सीबीआई चीफ़ वर्मा मामले की जांच करने वाले जस्टिस एके पटनायक?

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- Author, संदीप साहू
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
सीबीआई चीफ़ आलोक वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सीवीसी को दो हफ़्ते के भीतर रिटायर्ड जस्टिस एके पटनायक के नेतृत्व में जांच करने का आदेश दिया है.
पटनायक अब सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने वाली कमेटी के मुखिया होंगे.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में स्नातक और कटक से क़ानून की पढ़ाई करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक का जन्म 3 जून 1949 को हुआ.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक 1974 में ओडिशा बार एसोसिशन के सदस्य बने. वकालत शुरू करने के करीब 20 साल बाद 1994 में वो ओडिशा हाई कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज बने.
लेकिन जल्द ही उन्हें गुवाहाटी हाई कोर्ट भेज दिया गया जहां अगले ही वर्ष वो हाई कोर्ट के स्थायी जज बन गए और 2002 में अपने गृह राज्य में भेजे जाने से पहले सात साल तक कार्यरत रहे.
इसके बाद मार्च 2005 में जस्टिस पटनायक छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए. इसी वर्ष अक्तूबर में वो मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए.

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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर उनके काम की सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश चंद्र लाहोटी ने तारीफ़ की थी.
नवंबर 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. पांच साल बाद जून 2014 में जस्टिस पटनायक रिटायर हो गए.
जस्टिस पटनायक अपने कार्यकाल के दौरान जिस सबसे चर्चित केस से जुड़े वो भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को बीसीसीआई से हटाना और जस्टिस सौमित्र सेन से जुड़ा मामला रहा है.
बीसीसीआई की छवि का हवाला देते हुए जस्टिस पटनायक ने ही अदालत में पूछा था कि जब बीसीसीआई को अपनी छवि की इतनी चिंता है तो श्रीनिवासन अपना पद क्यों नहीं छोड़ देते.
पटनायक उस वक्त श्रीनिवासन के दामाद और गुरुनाथ मय्यपन के आईपीएल सट्टेबाज़ी में शामिल होने वाले मामले की जांच कर रहे थे.

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जस्टिस सौमित्र सेन के ख़िलाफ़ पैसे की हेराफेरी और तथ्यों को ग़लत तरीक़े से पेश करने का आरोप लगाया गया था. इसकी जांच के लिए बिठाई गई जजों की तीन सदस्यीय कमेटी में जस्टिस पटनायक एक सदस्य थे.
इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस सेन को 'ग़लत व्यवहार' का दोषी ठहराया था.
सौमित्र सेन पर स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया और शिपिंग अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के बीच अदालती विवाद में कोर्ट का रिसीवर रहते हुए क़रीब 33 लाख रुपये के ग़लत इस्तेमाल के आरोप थे.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश और राज्यसभा के सभापति ने आरोपों की जांच के लिए जो समितियां बनाई थीं उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सौमित्र सेन ने पहले वकील के रूप में रिसीवर रहते और बाद में जज के रूप में उस बैंक खाते से कई बार चेक से और नक़द पैसे निकाले जिसके वो रिसीवर थे.
इसके बाद राज्यसभा में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने सौमित्र सेन को हटाने का प्रस्ताव पेश किया जिसे उच्च सदन ने बहुमत से पारित कर दिया.
पहली बार भारत के इतिहास में हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश के ख़िलाफ़ ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया. राज्यसभा के फ़ैसले के बाद लोकसभा में यह प्रस्ताव रखा जाना था लेकिन उससे पहले ही सौमित्र सेन ने इस्तीफ़ा दे दिया था.

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2जी, स्पॉट फ़िक्सिंग की सुनवाई करने वाले जज
जस्टिस पटनायक 2जी स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई के लिए मार्च 2016 में बनाई गई दो जजों की बेंच में शामिल थे. इसके अलावा मतदान के दौरान नोटा का वैकल्पिक प्रावधान देने के मामले, आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई में भी जस्टिस पटनायक सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल रहे.
रिटायरमेंट के बाद जस्टिस पटनायक को ओडिशा राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
जस्टिस पटनायक उस बेंच में भी शामिल थे, जिसने ये फ़ैसला दिया था कि कोई विधायक या सांसद अगर आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है तो वह छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकेगा.
जस्टिस पटनायक के निकट सहयोगी और ओडिशा हाईकोर्ट में वरिष्ठ वकील एल पंगारी का कहना है कि जस्टिस पटनायक व्यक्तित्व 'समग्र' है. पंगारी ने फ़ोन पर बीबीसी को बताया, "वो बेहद अनुशासित थे और सुप्रीम कोर्ट के बेहतरीन जज थे. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे फ़ैसले दिए जो मील का पत्थर साबित हुए. क़ानूनी पेशे में उन्हें हर कोई बेहद सम्मान की नज़र से देखता है."
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