आधी रात के वक़्त सीबीआई में आख़िर कैसे हुआ तख़्तापलट?

सीबीआई मुख्यालय

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    • Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

जब शहर सो रहा था तो दिल्ली के पावर कॉरिडर्स में ज़बरदस्त गहमा-गहमी मची थी.

उच्च स्तर पर हुई बैठकों के बाद भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव लोक रंजन ने एक ऑर्डर जारी किया जिसमें सीबीआई में ज्वाइंट डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे एम. नागेश्वर राव को तुरंत प्रभाव से एजेंसी के डायरेक्टर का कार्यभार संभालने का आदेश दिया गया.

यानी सीबीआई के मंगलवार शाम तक डायरेक्टर रहे आलोक वर्मा की छुट्टी. वही आलोक वर्मा जिनके कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ब्लू-आइड बॉय' बताए जाने वाले राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ साज़िश और भ्रष्टाचार के मामले में केस दर्ज हुआ था और मामले की जांच हो रही थी.

राकेश अस्थाना हाल तक सीबीआई में नंबर टू पर थे.

ख़बरों के मुताबिक़ कुछ ही देर में पुलिस ने सीबीआई मुख्यालय को चारों तरफ़ से घेर लिया और देर रात क़रीब पौन दो बजे के आसपास नागेश्वर राव ने सीबीई के सीजीओ कम्पलेक्स स्थित एजेंसी के मुख्यालय पहुंचकर चार्ज ले लिया.

इतना ही नहीं, नागेश्वर राव ने आलोक वर्मा के कार्यालय को सील भी करवा दिया. बाद में वर्मा और अस्थाना को सूचना दी गई कि उन्हें एक 'लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है.' इस छुट्टी के लिए दोनों ने कोई अर्जी नहीं लगाई थी.

बुधवार दोपहर में एक प्रेस-कांफ्रेस के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जब सीबीआई के दो शीर्ष अधिकारी एक दूसरे पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे थे तो इसकी जांच के लिए किसी तीसरे आदमी की ज़रूरत थी.

अरुण जेटली ने ये बात उनसे सीबीआई में अचानक से किए गए बदलावों पर किए गए सवालों के जवाब में कही थी. मगर ये तो एक सरकारी जवाब सा है.

अरुण जेटली

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रफ़ाल सौदा फिर मोदी के पीछे

सत्ता के गलियारे और सोशल मीडिया तरह-तरह की चर्चाओं से गर्म है जिसमें सीबीआई प्रकरण से नरेंद्र मोदी की सशक्त-नेतृत्व छवि के धूमिल होने से लेकर मंगलवार देर रात हुए फ़ैसले की क़ानूनी वैधता तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर सवाल उठाया, "सीबीआई चीफ आलोक वर्मा राफेल घोटाले के कागजात इकट्ठा कर रहे थे. उन्हें जबर्दस्ती छुट्टी पर भेज दिया गया. प्रधानमंत्री का मैसेज एकदम साफ़ है जो भी राफेल के इर्द गिर्द आएगा - हटा दिया जाएगा, मिटा दिया जाएगा ..."

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल भी, जिनसे राहुल गांधी का बहुत 'दोस्ताना' नहीं, रफ़ाल का सवाल उठाते दिखे, "क्या रफ़ाल सौदे और आलोक वर्मा को हटाये जाने में कोई संबंध है?"

हालांकि फ्रांस के दासो से ख़रीदे जा रहे लड़ाकू विमान रफ़ाल और सीबीआई में हुए बदलाव पर कांग्रेस अध्यक्ष और 'आप' संयोजक ने सीधे-सीधे आज सवाल उठाया है लेकिन रफ़ाल मामले पर वर्मा से मोदी-अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय की नाराज़गी की बात कई दिनों से कही-सुनी जा रही थी.

प्रशांत भूषण, अरुण जेटली, यशवंत सिन्हा

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सिन्हा-शौरी से वर्मा की मुलाकात

अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके अरुण शौरी और एडवोकेट प्रशांत भूषण रफ़ाल सौदे में हुए कथित घोटाले की बात लेकर सीबीआई गए थे, और उनकी मुलाक़ात आलोक वर्मा से हुई.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सरकार आलोक वर्मा और अरुण शौरी-प्रशांत भूषण के बीच हुई मुलाक़ात को लेकर ख़ुश नहीं थी और हुकूमत के एक सीनियर अधिकारी का कहना था कि एजेंसी के चीफ़ का राजनीतिज्ञों से मिलना आम बात नहीं है.

लेकिन सीबीआई के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेयन कहते हैं कि कोई भी अधिकारी किसी से मिलने से कैसे मना कर सकता है?

डीआर कार्तिकेयन के मुताबिक़, "वो किसी से भी मिलने को ग़लत नहीं समझते बशर्ते कि ये बार-बार न हो और सबसे बेहतर तो ये होगा कि एजेंसी प्रमुख ऐसी मुलाक़ातों में अपने साथ किसी सीनियर अधिकारी को भी बैठक में रहने को कहें."

प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और वाजपेयी सरकार के एक अन्य पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल विमान सौदे में कथित घोटाले और प्राइवेट कंपनी रिलायंस को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने का इलज़ाम लगाते रहे हैं और बार-बार इसमें जांच की मांग उठाते रहे हैं.

कांग्रेस भी रफ़ाल सौदे पर भारतीय जनता पार्टी पर लगातार दबाव बनाए हुए है और कई बार तो बात यहां तक हो रही है कि रफ़ाल सौदा मोदी सरकार के लिए राजीव गांधी के बोफोर्स जैसा बनता जा रहा है.

साल 1984 में भारी मतों से सत्ता में आए 'मिस्टर क्लीन' यानी राजीव गांधी को अगले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था जिसकी एक बड़ी वजह बोफोर्स तोप सौदे में हुआ कथित घोटाला बताया गया था.

अरुण शौरी ने बीबीसी से कहा कि ये एक ऐसी आंधी है जिसमें बीजेपी दब जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि इस पूरे मामले ने मोदी के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

हाल में कई विश्लेषकों ने कहा है कि मोदी जो सत्ता में कंट्रोल और दृढ़ नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, वो सीबीआई के मामले में कमज़ोर दिखाई देते हैं और ये पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

आनेवाले दिनों में चार राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और बीजेपी जिन कुछ मुद्दों पर जनता से वोट मांगती रही है उसमें मोदी का दृढ़-नेतृत्व भी शामिल रहा है.

आलोक वर्मा, राकेश अस्थाना

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सरकार के फैसले पर क़ानूनी सवाल

वर्मा-शौरी भेंट पर ये बातें चल ही रही थीं कि इसी बीच सीबीआई में नंबर-वन और नंबर-टू के बीच घमासान शुरू हो गया.

स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हुई, प्रधानमंत्री ने वर्मा को सोमवार को मुलाक़ात के लिए बुलाया, मंगलवार को अस्थाना दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गए जिसने उनकी गिरफ्तारी पर चंद दिनों के लिए रोक तो लगा दी लेकिन उनके ख़िलाफ़ जांच को ये कहते हुए रोकने से मना कर दिया कि उन पर लगे आरोप गंभीर हैं.

अस्थाना ने भी कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए एक ख़त में वर्मा पर रिश्वतख़ोरी और दूसरे कई तरह के आरोप लगाए थे.

सीबीआई के कई जानकार इशारों में कहते हैं कि राकेश अस्थाना ने ये ख़त किसी की शह पर लिखे थे क्योंकि हुकूमत को ये डर सताने लगा था कि आलोक वर्मा राफेल सौदे पर सीबीआई जांच न शुरू करवा दें. मोदी-शाह के क़रीबी मानेजाने वाले अस्थाना को इस काम में लगाया गया लेकिन जब वर्मा के ख़िलाफ़ जाल बुना जा रहा था तो सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर ख़ुद उस जाल में उलझते चले गए.

मगर वर्मा और अस्थाना के बीच की रस्साकशी कोई नई थी और वो तबसे जारी थी जब अस्थाना को हुकूमत ने स्पेशल डायरेक्टर के पद पर नियुक्त करने की शुरुआत की थी जिसका विरोध आलोक वर्मा की तरफ से ये कहते हुए हुआ था कि अस्थाना के खिलाफ कई मामलों में जांच जारी है तो उन्हें जांच एजेंसी में नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए.

अदालत का आदेश

दोनों के बीच का ये तनाव आगे के दिनों में और आगे भी बढ़ा जो आख़िरकार अदालत तक जा पहुंचा. मंगलार को अस्थाना मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भी आदेश दिया था कि इस मामले में यथास्थिति बरक़रार रखी जाए.

अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या सीबीआई हेडक्वॉर्टर में मंगलवार आधी रात के वक़्त जो कुछ हुआ वो हाईकोर्ट के उस हुक्म का उल्लंघन तो नहीं जिसमें अदालत ने यथास्थिति क़ायम रखने को कहा था.

नए डायरेक्टर ने चार्ज लेने के बाद कई अधिकारियों का तबादला कर दिया है. इनमें वो भी शामिल हैं जो राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ हो रही जांच में शामिल थे. आलोक वर्मा ने अपने खिलाफ़ की गई कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है जिसकी सुनवाई अदालत शुक्रवार को करेगी.

वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि सीबीआई में किया गया बदलाव सुप्रीम कोर्ट के उस हुक्म के खिलाफ़ है जिसमें निदेशक की बहाली में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया का होना ज़रूरी है.

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