अमृतसर हादसा: रेलवे ट्रैक पर खोये एक मां-बच्चे के मिलने की कहानी

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin/BBC
- Author, रविंदर सिंह रॉबिन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
राधिका की आंखें तब आंसुओं से भर आईं जब उन्होंने अपने 10 महीने के बेटे को दोबारा अपनी गोद में पाया. उस वक़्त राधिका अपनी सारी तकलीफ़ और बुरी यादें एक झटके में भूल गई होंगी.
19 अक्टूबर को दशहरे के मौके पर राधिका ने अमृतसर रेल हादसे में वह ख़ुद बुरी तरह घायल हो गई थीं और बेटा भी कहीं बिछड़ गया था.
राधिक को न अपना होश था और न ये पता था कि उनका बच्चा इस दुनिया में है भी या नहीं. उन्हें अमनदीप हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था.
राधिका ख़ुद तो होश में आ गई थीं लेकिन अब वह अपने बच्चे को ढूंढ रही थीं लेकिन उसका कहीं पता नहीं था. वह अपनी जान बचाकर भी अपनी 'जान' खो चुकी थीं.
लेकिन, ड्रिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (डीएलएसए) ने आख़िरकार राधिका को उनके बेटे विशाल से मिला ही दिया. अपने बेटे को गोद में लेते ही जैसे उनकी सारी तकलीफ़ें दूर हो गईं.
राधिका ही नहीं डीएलएसए ने तीन और परिवार को उनके खोए हुए बच्चों से मिलाया है.
राधिका अपने परिवार और अपनी बहन प्रीती के परिवार के साथ दशहरा देखने आई थीं. तब अचानक आई ट्रेन से टक्कर लगने से वो और उनका परिवार घायल हो गया.
ऑपरेशन के बाद अब वह बोल पा रही हैं और बेटे को अपनी छह साल की बेटी के साथ खेलते देख बेहद ख़ुश हैं.

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin/BBC
इस तरह मिलाया मां और बच्चे को
रेल हादसे के साथ पुलिस और प्रशासन घायलों को बचाने और इलाज उपलब्ध कराने में जुटे थे. कहीं मुआवज़े की फाइल बन रही थी तो कहीं क़ानून व्यवस्था देखी जा रही थी.
लेकिन, इस बीच डीएलएसए बिछड़े हुए परिवारों को मिलाने के काम में जुटा हुआ था.
चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सह डीएलएसए सचिव सुमित मक्कर ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने पंजाब स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की सदस्य सचिव हरप्रीत कौर जीवन के साथ मिलकर दो सहायता केंद्र बनाए थे, एक गुरु नानक देव अस्पताल में और दूसरा सिविल हॉस्पिटल में.
उन्होंने बताया, ''गुरु नानक देव अस्पताल में दौरे के दौरान उनकी मुलाक़ात हादसे की एक पीड़ित प्रीती से हुई थी जिनके सिर पर चोटें आई थीं. फिर जब अमनदीप अस्पताल गए तो हम साढ़े तीन साल के आरुष से मिले.''
''हमें पता चला कि इस बच्चे के माता-पिता की मौत हो गई है और कुछ लोग इस बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज करा रहे हैं. वो इसे उत्तर प्रदेश ले जा रहे हैं. हमने मामले का पता लगाया तो मालूम हुआ कि उस बच्चे की मां का नाम प्रीती है.''
सुमित मक्कर ने बताया कि फिर उन्होंने उस बच्चे के साथ-साथ छह और बच्चों की फ़ोटोग्राफ़ प्रीती को दिखाईं ताकि पुष्टि हो सके कि उन्होंने सही बच्चा पहचाना है तब प्रीती ने अपने बच्चे को पहचान लिया और उन्हें उनका बच्चा दे दिया गया.

इमेज स्रोत, Ravinder Singh Robin/BBC
रेलवे ट्रैक पर मिला विशाल
इसी तरह सिविल हॉस्पिटल में एक नियमित दौरे पर उन्हें एक 10 साल के बच्चे विशाल के बारे में पता चला. उन्हें बताया गया कि बच्चे के माता-पिता की मौत हो गई है.
एक महिला मीना देवी को विशाल रेलवे ट्रैक पर मिला था. वो ही उसे इलाज के लिए लेकर अस्पताल आई थीं.
सुमित मक्कर बताते हैं, ''हमें उस महिला पर शक हुआ और हमने उसके बारे में पता किया. उसने बताया कि उसे ये बच्चा रेलवे ट्रैक पर मिला है. इसके बाद बच्चे को कस्टडी में ले लिया गया.''
''इससे पहले प्रीती ने हमें बताया था कि यूपी से उनकी बहन राधिका अपने बच्चे के साथ यहां आई थीं लेकिन अब उनका कुछ पता नहीं है. तब हम अमनदीप अस्पताल में राधिका के पास पहुंचे और उन्हें भी कुछ बच्चों की तस्वीरें दिखाईं. इस तरह राधिका ने भी अपने बच्चे को पहचान लिया.''
डीएलएसए ने बच्चे की देखभाल के लिए राधिका के साथ कुछ महिला अधिकारी भी भेजी थीं.

इमेज स्रोत, Getty Images
कब क्या हुआ ?
अमृतसर रेलवे स्टेशन से क़रीब चार किलोमीटर दूर जोड़ा फाटक के पास दशहरा मेले का आयोजन किया गया था.
क़रीब सात हज़ार लोग रावण दहन के लिए मैदान में जमा हुए थे
इस मैदान की क्षमता दो से ढाई हज़ार लोगों की बताई जा रही है.
आम लोगों के लिए मैदान में जाने और आने का एक ही रास्ता था
मैदान के एक हिस्से में वीआईपी मेहमानों के लिए मंच बनाया गया था, जिसके पीछे से उनके आने-जाने की व्यवस्था थी
जिस समय हादसा हुआ उस समय पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर भी मौजूद थीं
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हादसे के बाद वो वहां से तुरंत निकल गईं
मैदान में ही एक दीवार है जो रेलवे लाइन और मैदान को अलग करती है. लोग दीवार और रेलवे ट्रैक पर मौजूद थे
हादसा शाम करीब साढ़े छह बजे हुआ लेकिन पुलिस और एंबुलेंस क़रीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची.
अमृतसर के गुरुनानक अस्पताल, गुरु रामदास अस्पताल, फोर्टिस अस्पताल और पार्वती देवी अस्पताल में घायलों का इलाज चल रहा है.
इस हादसे में अब तक कम से कम 59 लोगों की मौत हो चुकी है.
ये भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












