अमृतसर रेल हादसाः क्या ड्राइवर के पास हादसा टालने का कोई विकल्प था?

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अब तक जो पता है:
- पंजाब के अमृतसर शहर के पास बड़ा हादसा
- रावण दहन के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 59 लोगों की मौत
- पुलिस के अनुसार 150 से ज़्यादा लोग जख़्मी
- घटनास्थल पर प्रशासन के ख़िलाफ़ लोगों का प्रदर्शन
- सूबे के मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख देने का ऐलान किया

पंजाब के अमृतसर में हुए रेल हादसे से जुड़ी एक के बाद एक नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं.
दशहरे के मौक़े पर रावण दहन देखने पहुंचे लोगों को तेज़ रफ़्तार ट्रेन ने अपनी चपेट में ले लिया. इस हादसे में अभी तक 59 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.
हादसे के बाद से ही एक सवाल लगातार बना हुआ है कि आख़िर ज़िम्मेदार कौन है?
सवाल करती उंगलियां रेलवे प्रशासन से लेकर दशहरा मेला आयोजन करवाने वाली कमिटी और स्थानीय प्रशासन पर उठ रही हैं.
इस बीच कुछ सवाल उस ट्रेन को चलाने वाले ड्राइवर पर उठाए जा रहे हैं, कहा जा रहा है कि क्या वह ड्राइवर इतनी भीड़ को देखते हुए ट्रेन की गति को कुछ कम नहीं कर सकता था? या फिर ड्राइवर ने हॉर्न क्यों नहीं बजाया?
ख़बर के मुताबिक पंजाब और रेलवे पुलिस ने ट्रेन के ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की है. ड्राइवर ने बताया है कि उन्हें ग्रीन सिग्नल मिला था इसीलिए उन्होंने ट्रेन नहीं रोकी. साथ ही उन्हें कोई अंदेशा नहीं था कि ट्रैक पर सैकडों लोग मौजूद हैं.
ट्रेन के ड्राइवर से लुधियाना रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की गई. इसके अलावा जोड़ा रेलवे फाटक के लाइनमैन से भी पूछताछ की गई है, जिस पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने ड्राइवर को ट्रैक पर लोगों की मौजूदगी के बारे में अवगत क्यों नहीं करवाया.

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रेलवे प्रशासन ने अपने ऊपर से ज़िम्मेदारी हटाते हुए समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि उन्होंने इस आयोजन की मंजूरी नहीं दी थी.
रेलवे प्रशासन ने पूरा जिम्मा अमृतसर प्रशासन पर डाल दिया है और कहा है कि स्थानीय अधिकारियों को दशहरा कार्यक्रम के बारे में पता था साथ ही इस कार्यक्रम में एक वरिष्ठ नेता की पत्नी भी हिस्सा लेने वाली थीं.
वो वरिष्ठ नेता पंजाब के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू हैं, जिनकी पत्नी नवजोत कौर इस कार्यक्रम में मौजूद थीं.
पीटीआई के अनुसार, रेलवे अधिकारी ने कहा है, ''हमें इस कार्यक्रम के आयोजन के बारे में किसी ने नहीं बताया और ना ही हमने इसकी मंजूरी दी. यह मामला अतिक्रमण से जुड़ा है और स्थानीय प्रशासन को इसकी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.''

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ट्रेन रोकी क्यों नहीं?
भले ही रेलवे को इस कार्यक्रम की जानकारी ना रही हो, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ को देखने के बावजूद ट्रेन को रोका क्यों नहीं गया?
इस सवाल के जवाब में रेलवे अधिकारी ने कहा है, ''जिस जगह हादसा हुआ वहां बहुत ज़्यादा धुंआ था, जिस वजह से ड्राइवर को भीड़ नज़र नहीं आई, साथ ही वहां एक मोड़ भी था.''
रेलवे अधिकारी ने यह सुनिश्चित किया है कि वे अपनी पूरी क्षमता के साथ स्थानीय प्रशासन और बचाव टीम का साथ दे रहे हैं.
मंत्रियों का दौरा
हादसे के बाद से ही तमाम मंत्री और अधिकारी मौक़े पर पहुंच रहे हैं. रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा, रेलवे बोर्ड के चेरयमैन अश्विनी लोहानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी रात में ही घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे.
वहीं रेल मंत्री पीयूष गोयल अपनी अमरीका यात्रा छोड़कर वापस लौट रहे हैं.
इस बीच यह भी ख़बर है कि रेलवे ने मृतकों के परिजनों को अपनी ओर से मुआवजा देने से इनकार किया है.
रेलवे का कहना है कि मरने वाले लोग ट्रेन के यात्री नहीं थे. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतको के परिजनों को दो-दो लाख रुपए और घायलों के लिए 50 हज़ार रुपए मुआवजे की घोषणा कर दी है.

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घटनास्थल पर मौजूद बीबीसी के सहयोगी रविंद्र सिंह रॉबिन ने घायलों से बात की है.
घटना को याद करते हुए एक घायल व्यक्ति ने बताया, "जहां रावण दहन हो रहा था, हम वहां से दूर थे. रेलवे ट्रैक के पास एक एलईडी लगी थी. हम उस पर रावण दहन देख रहे थे. रेलवे ट्रैक से तीन ट्रेन गुजर चुकी थीं. लेकिन जब ये ट्रेन आई तो पता ही नहीं चला."
गुरुनानक अस्पताल में करीब 70 को लोगों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. हादसे के बाद अस्पताल में अफ़रा-तफ़री का माहौल बना हुआ था. लोग अपने रिश्तेदारों को खोजने के लिए अस्पताल का रुख कर रहे थे. अस्पताल के मुर्दाघर के पास भारी भीड़ बनी हुई थी.
हादसे में क़रीबियों को गंवाने वाले लोगों की वहां कतारें देर रात तक लगी रहीं. अपनों को खोजने आए लोग रो रहे थे. अब भी मुर्दाघर में क़रीब 25 शव हैं.
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