अमृतसर हादसा: क्या आयोजकों की लापरवाही से गई 58 लोगों की जान?

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- Author, रविंदर सिंह रॉबिन
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए, अमृतसर (पंजाब) से
देखते ही देखते...महज़ कुछ सेकंड्स में दर्जनों लोगों को काटते-कुचलते हुए ट्रेन गुज़र गई. कुछ देर पहले तक जो लोग हंसते-मुस्कुराते, तालियां बजाते रावण दहन देख रहे थे, उनमें से कई ट्रेन गुज़रने के बाद निर्जीव हालत में पटरियों पर बिखरे पड़े थे.
पंजाब के अमृतसर में शुक्रवार को रावण दहन के दौरान हुए हादसे ने सैकड़ों परिवारों की खुशी छीन ली. त्योहार की खुशी मातम में बदल गई. हादसा कैसे हुआ अब ये बात पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है, लेकिन हादसा किसकी वजह से हुआ ये अभी भी एक अनसुलझा सवाल है. कुछ लोग रेलवे प्रशासन को दोषी बता रहे हैं, कुछ पुलिस प्रशासन को, कुछ का कहना है कि लोगों की ही ग़लती थी क्योंकि वो रेलवे ट्रैक पर खड़े थे, वहीं कुछ का मानना है कि ये हादसा सिर्फ़ और सिर्फ़ आयोजकों की लापरवाही की वजह से हुआ.
फ़िलहाल जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि क्या आयोजकों ने धोबी घाट इलाके में रावण दहन के लिए पुलिस और अमृतसर नगर निगम से आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं.
हादसे के तुरंत बाद, अमृतसर पुलिस ने एक बयान जारी करके कहा कि उन्होंने आयोजकों को धोबी घाट में दशहरा के आयोजन को लेकर किसी भी तरह की अनुमति नहीं दी थी.
हालांकि शनिवार को डिप्टी कमिश्नर अमरीक सिंह पवार ने सूचना दी कि उनके कार्यालय ने इस आयोजन के लिए सुरक्षा की अनुमति दी थी, लेकिन इसके साथ ही वो ये भी कहते हैं कि अगर अमृतसर नगर निगम ने उस जगह पर कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ही नहीं दी थी तो पुलिस द्वारा दी गई सुरक्षा की अनुमति भी ख़ुद ब ख़ुद ख़ारिज हो जाती है.

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कहां-कहां हुई ग़लती?
इन सवालों का जवाब देते हुए अमृतसर नगर निगम की कमिश्नर सोनाली गिरी ने मीडिया को स्पष्ट किया, "हमने किसी तरह की अनुमति नहीं दी थी."
वहीं अमृतसर के मेयर करमजीत सिंह रिंटू ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि ''जहां तक मेरी जानकारी है, आयोजकों ने अनुमति लेने के लिए आवेदन तक नहीं किया था. इस तरह के आयोजनों के लिए फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट से भी अनुमति लेना आवश्यक होता है. इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग से भी अनुमति लेनी होती है, लेकिन आयोजकों ने इनमें से किसी से भी अनुमति नहीं ली थी.'
हालांकि इन सारे विवादों और सवाल-जवाब के बीच एक चिट्ठी सामने आई है. ये पत्र 15 अक्टूबर का है. दशहरा कमिटी के अध्यक्ष सौरभ मदन मीठू ने 15 अक्टूबर को डीसीपी को एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने लिखा था कि वे लोग दशहरे का आयोजन करने वाले हैं जिसमें कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू मुख्य अतिथि होंगे और इसलिए उन्होंने पुलिस सुरक्षा की ज़रूरत होगी. उन्होंने लिखा था कि लोगों की सुरक्षा के लिए उन्हें पुलिस सुरक्षा चाहिए होगी.

हालांकि मीठू से इस संबंध में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. उनका मोबाइल नंबर लगातार बंद जा रहा है.
मोहकमपुरा पुलिस स्टेशन के एसएचओ द्वारा 17 अक्टूबर को जारी किए गए एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें एक मेल मिला था जिसमें दशहरा कार्यक्रम के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति मांगी गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समारोह में क़रीब 20 हज़ार लोग शामिल हो सकते हैं और एक तय सीमा के भीतर ही लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति दी जाती है.
धोबी घाट इलाक़े में एक एकड़ से भी कम में फैले इस मैदान में किसी भी सूरत में 20 हज़ार लोग नहीं समा सकते. इस मैदान में आने और जाने के लिए सिर्फ़ एक ही गेट है और वो भी सिर्फ़ दस फ़ीट चौड़ा है. मैदान के दूसरी ओर एक स्टेज तैयार किया गया था और वीआईपी मेहमानों के आने-जाने का प्रबंध स्टेज के पीछे ही था.

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आयोजकों ने रेलवे ट्रैक की ओर मुंह करके एक बड़ा एलईडी टीवी लगाया था जिस पर लोग रावण दहन देख रहे थे.
जांच
वहां मौजूद लोगों का कहना है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ख़ुद ही पूरे कार्यक्रम की देखरेख कर रहे थे. बीबीसी से बात करते हुए पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने बताया कि रेलेवे के एडिशनल डीजीपी ने इस पूरे मामले की पड़ताल के लिए जांच कमेटी गठित की है और मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के आदेश का पालन करते हुए पंजाब के गृह-मंत्रालय ने एक सूचना जारी करते हुए जालंधर के आयुक्त बलदेव पुरुषार्थ को अमृतसर हादसे की मजिस्ट्रेट स्तर की जांच करने के आदेश दिए हैं.
पंजाब के अमृतसर में दशहरा मेले के दौरान हुए हादसे में कम से कम 58 लोगों की मौत हो गई है.
शहर के क़रीब जोड़ा रेलवे फाटक के पास रावण के पुतले के दहन के वक़्त ट्रेन की चपेट में आकर कम से कम 150 लोग घायल भी हुए हैं जिनका इलाज चल रहा है.

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